मैंने अपने अब्बू से अपनी चुत कैसे चुदवाई-2

(Maine Apne Abbu Se Apni Chut Kaise Chudwayi-2)

मगर फिर भी मैंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा और अब्बू के बिल्कुल साथ सट कर लेट गई। कुछ देर मैं लेटी लेटी जैसे किसी बात का इंतज़ार करती रही। फिर अब्बा ने करवट बदली और सोते सोते बोले- ऊँह, थोड़ा सा उधर को होना!
और अपनी बाजू से उन्होंने मुझे करवट के बल कर दिया और पीछे से मेरे साथ अपना जिस्म चिपका दिया। उनका पेट मेरी पीठ से लगा और और उनका लंड मैं अपने चूतड़ों से लगा महसूस कर रही थी।

बेशक अब्बू का लंड सोया हुआ था, मगर फिर मुझे वो गर्म और ज़बरदस्त लग रहा था। मैंने खुद अपनी कमर हिला कर अब्बू के लंड को अपने चूतड़ों में सेट कर लिया। मगर मुझे इससे भी चैन नहीं आया, तो मैंने अपना हाथ पीछे को घुमाया और लुंगी में ही अब्बू का लंड पकड़ लिया।
मोटा और मजबूत लौड़ा।
मगर जब हाथ में पकड़ लिया तो मुझे और चुदास होने लगी, सिर्फ पकड़ कर क्या करती, मैंने बड़े हल्के से अब्बू के लंड को हिलाया, और हिलाया… और हिलाया… कभी दबाया तो कभी आगे पीछे किया।

बेशक अब्बू सो रहे थे, मगर उनका लंड जाग रहा था और मेरे हिलाने से वो ताव खाता जा रहा था और अपना आकार ले रहा था।
फिर अब्बा की आवाज़ मेरे कानों में पड़ी- क्यों पंगे ले रही है, सो जा कुतिया।
मगर मैं कैसे सो सकती थी, अब्बू के लंड को हाथ में पकड़ने के बाद मैं तो उसे अपनी चूत में लेने को तड़प रही थी।

मैंने धीरे धीरे अपनी नाईटी सरका कर ऊपर को खींच ली और अपनी कमर तक खुद को नंगी कर लिया, अब मैंने नीचे से कोई ब्रा या पेंटी तो पहनी नहीं थी, तो कमर तक नाईटी उठाते ही मैं नंगी हो गई। अब मेरा दिल चाह रहा था कि अब्बा की लुंगी भी ऊपर सरका कर उनका लंड बाहर निकाल कर देखूँ।आप इस कहानी को HotSexStory.Xyz में पढ़ रहे हैं।
इसीलिए मैंने अपने अब्बू की लुंगी का एक किनारा पकड़ा और उसे ऊपर की ओर सरकाने लगी। मैंने कोई जल्दी नहीं की, बड़े आराम से सरकाते हुये मैं अब्बा की लुंगी उनकी जांघों तक उठा लाई।

अब तो बड़ा आसान था, मैंने आगे से लुंगी को ऊपर को उठाया और अब्बा का लंबा मोटा लंड, जिसे मैंने अम्मी के हाथों में, मुँह में और चूत में घुसते देखा था, मेरी मुट्ठी में था।
मैंने पकड़ कर अब्बा के लंड को अपने चूतड़ों के साथ लगाया।
अब्बा की नींद शायद टूट गई, मगर वो जगे नहीं, नींद में ही बोले- क्या हुआ अमीना, बहुत तड़प रही है, सो जा और मुझे भी सोने दे।

हिंदी सेक्स स्टोरी :  मेरे बाप का पाप-2

मतलब अब्बा को यही अहसास था कि उनके साथ मैं नहीं उनकी बीवी ही लेटी है।
तो मैंने सोचा के क्यों न फिर खुल कर खेलूँ।

मैं उठ बैठी और मैंने अब्बा की सारी लुंगी ऊपर को खींच दी और उनका लंड अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया। अब तो वो 8 इंच का मोटा मूसल मेरे हाथों में था, पूरा तना हुआ। रोशनी बहुत कम थी, मगर फिर भी मैं देख सकती थी।
मैंने पहले तो लंड को थोड़ा सा सहलाया, मगर लंड को हाथ में पकड़ने से मेरे जिस्म की आग भड़क गई थी, तो मैंने आव देखा न ताव, अब्बा के लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया।

लंड की मदमस्त गंध मेरी साँसों में और लंड का नमकीन कसैला सा स्वाद मेरे मुँह में घुल गया। मगर मुझे तो ये स्वाद पसंद है, बहुत पसंद है। मैंने लंड अभी थोड़ा सा ही चूसा था कि अब्बा की नींद फिर से टूटी, वो फिर से बिदके- क्या कर रही है, छिनाल, बहुत आग लगी है क्या?
मगर जब मैं फिर भी चूसती रही तो, अब्बा उठ बैठे- रुक अभी तेरी माँ चोदता हूँ कुतिया!
कह कर अब्बा ने अपनी लुंगी उतार फेंकी और मुझे धक्का दिया तो मैं खुद ही घोड़ी के पोज़ में आ गई।

अब्बा ने दारू के नशे कुछ आगा पीछा न सोचा और अपना लंड पकड़ कर मेरी चूत पर रखा और बड़ी बेदर्दी से अंदर घुसेड़ दिया।
“हाय अम्मी…” बस यही निकला मेरे मुँह से।

मगर अब अब्बा को जुनून चढ़ चुका था, उन्होंने बड़ी मजबूती से मेरी कमर को दोनों तरफ से पकड़ लिया और लगे लंड पेलने। पहले तो मुझे बहुत रोमांचक सा लगा कि आज मेरे मन की इच्छा पूरी ही गई। मगर अब्बा हर तरह से फरीद से कहीं बेहतर थे। उनके मजबूत हाथों की सख्त उंगलियाँ जैसे मेरे कूल्हों में गड़ी पड़ी थी कि मैं हिल न सकूँ, और उनके जोरदार घस्से, मेरे सारे वजूद को हिला रहे थे।
मेरे बाल बिखर गए, मैं तो जैसे पागल सी हो रही थी। फरीद ने आजतक मुझे ऐसा मजा नहीं दिया। इतनी ताकत, इतना ज़ोर, जैसे शेर ने अपने शिकार को पकड़ रखा हो और शिकार तो खुद शिकार बन कर बहुत खुश था।

हिंदी सेक्स स्टोरी :  Meri Chudakkad Beti Ko Chudte Hue Dekha Maine

अब्बा का नशा तो जैसे मुझे होने लगा था। उनकी चुदाई में मैं बस ‘आई अम्मी जी, ऊई अम्मी जी, हाय अम्मी जी। बस अम्मीजी अम्मीजी’ ही करे जा रही थी।
अब्बा ने मुझे करीब 20 मिनट चोदा।

यह कहानी आप HotSexStory.xyz में पढ़ रहें हैं।

बेशक ए सी चल रहा था मगर अब्बा तो पसीने में भीगे ही, मैं भी पसीना पसीना हो रही थी। एक बार मैं झड़ चुकी थी, मगर मैं चाहती थी कि न मैं दोबारा झड़ूँ, और अब्बा तो बिल्कुल भी न झड़ें। क्या अम्मी रोज़ इस शानदार मर्द से चुदवा कर अपनी ज़िंदगी के मजा ले रही थी, मेरी चूत तो जैसे पानी का दरिया हो रही थी, छप छप हुई पड़ी थी, मेरी चूत के पानी से।

पता नहीं दारू का नशा था या नींद… अब्बा ने मुझे चोदा तो खूब मगर मुझे और कहीं भी नहीं छुआ, न मेरे मम्में दबाये, न मुझे चूमा। मुझे भी इस लाजवाब चुदाई में ये ख्याल नहीं आया कि अब्बा मेरा मखमली बदन सहला कर तो देखो।

फिर अचानक अब्बा की जवानी में सैलाब आ गया और मेरी चूत अंदर तक अब्बा के गर्म, गाढ़े, रसीले माल से भर गई। अब्बा ने बहुत ज़ोर वो आखरी झटके मेरी चूत में मारे, और जब झड़ गए तो फिर से बिस्तर पर गिर कर सो गए।
मैं वैसे ही लेटी रही।
कितनी देर मैंने अपने सोये हुये अब्बू के सीने पर सर रख कर उनके ढीले लंड को अपने हाथ में लेकर लेटी रही। कितना सारा माल तो उनकी अपनी जांघों और कमर पर भी गिरा। मैंने एक उंगली उनके लंड के टोपे पर लगाई और फिर उस उंगली पर लगा हुआ अब्बा का माल मैंने अपने जीभ से चाटा।
बढ़िया गाढ़ा माल, नमकीन।

मैंने पहले फरीद का माल भी एक दो बार चखा था, मगर उसका माल पतला सा होता था। मगर अब्बा का माल तो गोंद की तरह गाढ़ा था।

उसके बाद मैंने अपनी नाईटी उतार दी और बिल्कुल नंगी हो कर अब्बा के साथ ही सो गई।

सुबह करीब 6 बजे मेरी आँख खुली, तब तक अब्बा सो रहे थे। मैं जाग तो गई, पर बिस्तर से नहीं उठी। मैंने देखा अब्बा बेशक सो रहे थे, मगर उनका काला लंड पूरी शान से सर उठाए खड़ा था। मगर अब मैंने अब्बा के लंड को नहीं छेड़ा। मैं चाहती थी कि अब्बा जाग जाएँ और उठ कर मुझे देखें।

हिंदी सेक्स स्टोरी :  बेटी की बुर ने सेक्स का दुःख दूर किया-1

थोड़ी देर बाद अब्बा भी उठे। मैं सोने का नाटक करने लगी, मगर मैं अपनी टाँगें खोल कर लेटी थी। अब्बा उठे और पहले आँखें मलते हुये उन्होंने अपनी लुंगी उठाई और खड़े होकर बांधने लगे। लुंगी बांधते बांधते उनका ध्यान मेरी तरफ गया।
पहले तो उन्होंने बड़े ध्यान से मेरे बदन को और फिर जब मेरे चेहरे को देखा तो चौंक पड़े- या अल्लाह…!
बस इतना ही बोल पाये और झट से दूसरे कमरे में गए।
उधर उन्होंने अम्मी को सोये हुये देखा और फिर वापिस मेरे कमरे में आए.

मैं भी जान बूझ कर उठने का नाटक सा करने लगी, और जब आँखें खोल कर अब्बा को देखा तो अपना मुँह अपने हाथों से ढक लिया। अब्बा सिर्फ इतना ही बोले- कपड़े पहन लो!
और बाहर को चले गए।

मगर मैं खुश थी, चुदाई का एक नया एहसास हुआ था मुझे।
अम्मी तीन चार दिन बीमार रहीं, और मैं ही हर रोज़ अब्बा के साथ सोती, पहले दो दिन तो अब्बा दारू पी कर आए थे, मगर बाद में वो सोफी ही आते, खाना खाते और जब मैं गहरी नींद में सोने का नाटक कर रही होती, तो वो मुझे जम कर पेलते।
एक कुँवारी लड़की के जिस्म से उन्होंने जी भर के खेला, बाद में तो मेरे सारे जिस्म को वो जैसे चाट गए, खा गए।
रोज़ रात को अब्बू दो बार मुझे चोदते।

फिर जब अम्मी ठीक हो गई तो वो अब्बू के साथ सोने लगी और मेरी और अब्बू की चुदाई का खेल बंद हो गया इस लिए अब ज़रूरी हो गया था कि अम्मी के सामने भी मैं अब्बू से चुदवा लूँ।
उसके लिए मैंने क्या किया, वो बताऊँगी अपनी अगली कहानी में।

आपने HotSexStory.xyz में अभी-अभी हॉट कहानी आनंद लिया लिया आनंद जारी रखने के लिए अगली कहानी पढ़े..
HotSexStory.xyz में कहानी पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद, हमारी कोशिश है की हम आपको बेहतर कंटेंट देते रहे!