अच्छा इंसान बना कर अपनी चूत चोदने दिया गर्लफ्रेंड ने

(Achha Insan Bana Kar Apni Chut Chodne Diya GF Ne)

Hindi Sex Story, Antarvasna, Mastram, Desi Sex Kahani, मेरा नाम लखन है मैं लखनऊ का रहने वाला हूं मैं एक बेरोजगार युवक हूं और मेरे पास कोई भी काम नहीं है इसलिए मैं अपने दोस्त संदीप की दुकान पर बैठने के लिए चला जाता हूं, मैं सुबह ही उसकी दुकान में बैठने जाता हूं और शाम को अपने घर लौटता हूं मेरे घरवाले मुझे कहते हैं कि क्या तुम संदीप की दुकान में नौकरी करते हो या फिर वह तुम्हें उसके बदले पैसा देता है। मेरे पिताजी मुझसे इतनी ज्यादा नफरत करते हैं कि वह मुझसे बात करना भी पसंद नहीं करते लेकिन मैंने एक दिन उन्हें गुस्से में कह दिया कि मैं आपका घर छोड़ कर चला जाऊंगा, उन्होंने मुझे कहा कि तुम हमारे घर से अभी निकल जाओ तुम्हें हमारे घर में रहने की जरूरत भी नहीं है, मुझे लगा कि मुझे वाकई में वहां से निकल जाना चाहिए इसलिए मैं अपने दोस्त संदीप के साथ ही रहने लगा। मेरी मम्मी जब भी मुझे देखती तो वह मुझे कहती तुम घर क्यों नहीं आ रहे हो? मैंने कहा मैं घर नहीं आने वाला। Achha Insan Bana Kar Apni Chut Chodne Diya GF Ne.

मेरे मम्मी एक दिन मुझे कहने लगी लगता है तुम्हारा दिमाग ठिकाने पर नहीं है तुम्हारा घर होते हुए तुम  संदीप के साथ रह रहे हो, क्या यह सब ठीक है? मैंने उन्हें कहा आप मुझसे अब इस बारे में बात मत कीजिए मैं संदीप के साथ ही रहूंगा, मैं संदीप की दुकान में बैठा रहता तो मैं देखता की उसकी दुकान में अक्सर एक लड़की सामान लेने के लिए आया करती थी, उसका नाम तृप्ति है, तृप्ति को जब मैंने पहली बार देखा तो मैं उससे प्यार कर बैठा लेकिन मुझे डर था कि कहीं मैंने उससे बात की तो वह मुझसे यह ना पूछ ले कि तुम क्या करते हो इसीलिए मैंने उससे बात नहीं की। वह जब भी दुकान में सामान लेने आती तो मेरे दिल की धड़कन बढ़ जाती लेकिन मैंने उससे कोई बात नहीं की परंतु मैं अपने आप को कितने दिन तक रोक सकता था, मैंने एक दिन तृप्ति से बात कर ही ली, उससे मैंने कह दिया कि तुम मुझे अच्छी लगती हो, तृप्ति मुझे कहने लगी की मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ पता है तुम एक नंबर के आवारा हो और तुम अपने घर में भी नहीं रहते, मैंने उससे पूछा तुम्हें यह सब बात कहां से पता चली? “Achha Insan Bana Kar”

वह मुझे कहने लगी क्या मैं इस कॉलोनी में नहीं रहती, मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ पता है और आज के बाद तुम मुझसे कभी बात भी मत करना और ना हीं मैं आज के बाद संदीप की दुकान में सामान लेने के लिए आऊंगी, मैं बहुत उदास हो गया और मैंने तृप्ति का ख्याल अपने दिल से निकाल दिया। मैं एक दिन संदीप की दुकान में ही बैठा हुआ था तो मैंने देखा तृप्ति किसी लड़की के साथ बाइक पर आ रही है, जब मैंने यह देखा तो मैं अंदर से जलने लगा और मैंने पूरी तरीके से ठान लिया था कि मैं तृप्ति को अपना बना कर ही रहूंगा। मैंने तृप्ति से बात की तो तृप्ति कहने लगी तुम्हें मेरे जीवन के बारे में जानने की क्या जरूरत है मैं किसी के साथ भी घूमू तुम्हे इससे क्या लेना देना है और मेरा तुमसे क्या मतलब है जो तुम मुझसे पूछो कि तुम्हारे जीवन में कौन है मैं तुमसे कुछ भी बात नहीं करना चाहती, वह जब जाने लगी तो मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया और उसने मुझे बड़ी जोरदार तमाचा मारा, जब उसने मुझे थप्पड़ मारा तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि उसने मेरी बेइज्जती कर दी हो मैं अपनी बेज्जती को बर्दाश्त नहीं कर पाया वह मुझे बहुत ही गलत समझने लगी थी.

लेकिन मैं इतना भी गलत नहीं था जितना कि वह मुझे समझती थी। मैंने तृप्ति से कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन वह मुझे देखते ही अपना मुंह मोड़ लेती, वह जिस लड़के के साथ प्यार करती थी उसे मैंने पहले भी लड़की के साथ देखा हुआ था और तृप्ति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। जब मैंने तृप्ति से इस बारे में बात की तो वह मुझसे कहने लगी तुम क्या मेरी नजरों में रोहित को गिराना चाहते हो? रोहित एक बहुत अच्छा लड़का है और वह मुझसे बहुत प्रेम भी करता है, मैंने तृप्ति से कहा तुम गलत समझ रही हो वह इतना भी अच्छा नहीं है जितना तुम समझ रही हो, लेकिन उसकी बातों ने तो जैसे तृप्ति पर पूरी तरीके से जादू कर दिया था और तृप्ति भी उससे प्यार कर बैठी थी लेकिन जब तृप्ति को भी उसकी असलियत पता चली तो वह उससे दूर होने लगी और जब वह उससे दूर होने लगी तो मैंने भी तृप्ति का साथ देना शुरू कर दिया और तृप्ति भी हम मुझसे पूरी तरीके से बात करने लगी थी, हम दोनों एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन गए थे। “Achha Insan Bana Kar”

तृप्ति को जब मेरे बारे में पता चला तो उसे लगा कि मैं इतना भी गलत नहीं हूं जितना कि वह मुझे समझती है, अब वह मुझे पूरी तरीके से समझने लगी थी और उसी की बदौलत मेरी नौकरी भी लग गई, मैं अब काम करने लगा था लेकिन मैं अभी भी संदीप के साथ ही रहता था वह मुझे कहने लगी तुम अपने घर चले जाओ और तुम्हें अपने माता पिता की नजरों में एक अच्छी छवि बनानी चाहिए, उसके कहने पर मैं अपने घर चला गया और मेरे माता-पिता भी मुझसे खुश हो गए थे। तृप्ति के मेरे जीवन में आने से बहुत ही बदलाव हो गए जिससे मैं भी बहुत खुश हूं, पहले मैं एक बेरोजगार युवक था लेकिन अब मैं नौकरी करने लगा था। तृप्ति बहुत खुश थी, तृप्ति मुझे कहने लगी तुम अब एक अच्छे इंसान बन चुके हो मैं तुमसे बहुत खुश हूं। तृप्ति और मेरे बीच नजदीकिया तो बढ ही चुकी थी, उसे यह तो पता ही था मै उससे प्रेम करता हूं। एक दिन उसने मुझे कहा मुझे आज तुमसे मिलना है मुझे नहीं पता था कि वह मुझे अपने घर क्यों बुला रही है जब मैं उसके घर पर गया तो वह मुझे कहने लगी लखन तुम मुझे अच्छे लगने लगे हो, मुझे नहीं पता था मैं तुमसे प्यार करने लगूंगी लेकिन मेरा दिल अब तुम्हारे लिए धड़कने लगा है। “Achha Insan Bana Kar”

मैंने उसे गले लगा लिया जब मैंने उसे गले लगाया तो वह मुझे कहने लगी आज तुमने मुझे अपना लिया है मैं बहुत खुश हूं। मैंने उसे कहा तृप्ति तुमने मुझे अपनाया है ना कि मैंने तुम्हें अपनाया है। मैंने जब उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी आज मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं तुम्हें जो करना है तुम कर लो। मैंने सबसे पहले उसके होठों को चूसा, जब हम दोनों पूरे तरीके से गर्म हो गए तो मैंने उसके कपड़े उतार दिए, जैसे ही मैंने उसके कपड़े उतारे तो उसके स्तनों का रसपान मैने जमकर किया। मैंने उसके स्तनों पर लव बाइट भी दे दी थी वह बहुत खुश हो रही थी, जब मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो वह मुझे कहने लगी तुम बड़े अच्छे से मेरी चूत को चाट रहे हो अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर डाल दो। मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर तक डाल दिया, मैने उसकी चूत से पानी पूरा बाहर निकाल दिया। “Achha Insan Bana Kar”

जब वह पूरी तरीके से गर्म हो गई तो उसने मेरे लंड को पकड़ते हुए अपनी चूत पर सटा दिया, जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड बड़ा ही मोटा और तगड़ा है तुम्हारे लंड ने अंदर घुसते ही तहलका मचा दिया। मैंने उसे कहा तुम थोड़ी देर सब्र रखो तुम्हें मजा आने लगेगा। मैंने उसे तेजी से चोदना शुरू कर दिया, उसका पानी लगातार तेजी से बाहर निकाल रहा था और उसे बहुत ही अच्छा महसूस होने लगता। वह जिस प्रकार से मेरा साथ दे रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा था उसकी योनि बहुत टाइट थी, मुझे उसे धक्के मारने में जो मजा आता मुझसे ज्यादा मजा वह ले रही थी। “Achha Insan Bana Kar”

मैंने उसके दोनों पैरों को आपस में मिलाते हुए उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया। मेरा लंड एकदम से चिकना हो चुका था वह बड़ी आसानी से उसकी योनि के अंदर बाहर हो रहा था उसकी योनि से गरम पानी बाहर की तरफ को छूट रहा था। जब उसक चूत की गर्मी ज्यादा होने लगी तो उसने मुझे कहा मैं तो अब झड चुकी हूं लेकिन मैं उसे तेजी से चोद रहा था उसे बहुत अच्छा लग रहा था। वह मुझे कहने लगी तुमने पहले ही सोच लिया था तुम मेरी चूत मारोगे। मैंने उसे कहा मुझे यह बात पहले से ही पता थी, एक दिन मैं तुम्हें जरूर चोदूंगा। वह कहने लगी कोई बात नहीं अब तुम मुझे हमेशा ही चोदते रहना। जैसे ही मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गिरा तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसे गले लगा लिया। “Achha Insan Bana Kar”