अनीता चाची की चुदाई-2

Anita chachi ki chudai-2

उन्होंने गुलाबी रंग की पैन्टी पहन रखी थी, वो पसीने से भीग चुकी थी। मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि आज इतनी गर्मी हो कि चाची पूरी नंगी हो जाए और मेरा सपना पूरा हो जाए। पर भगवान ने मेरी सुनी नहीं। चाची साया ऊपर करके ही सो गई।

काफी देर इन्तज़ार करने के बाद मैं उनकी जांघों को ही देख के मुठ मारने लगा और रस को अपने हाथ में गिरा लिया ताकि किसी को पता न चले और खिड़की से ही कूद के अपने कमरे में चला गया।

दूसरे दिन भी मैं आशा लगा के वहीं छुप गया। आपको यकीन नहीं होगा कि अगले दिन भगवान ने मेरी सुन ली थी। चाची ने आते ही साड़ी ब्लाउज और साया तीनों उतार कर फ़ेंक दिए। पैंटी और ब्रा में चाची किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। चाची बिस्तर पे लेट गई और अपने हाथ से पैंटी को सहलाने लगी। मुझे लगा कि चाची ऐसे ही सहला रही है, पर चाची ने जब अपनी चूत में अपनी उंगलियाँ डालनी शुरू की तो मुझे लगा कि आज चाची गरम हैं, आज वो भी मुठ मारने वाली हैं। मुझे तो स्वर्ग मिल गया था।

चाची ने फिर फिर अपनी पैंटी उतार दी और मैं उनकी चूत को देखता रह गया। और चाची ने फिर अपनी ब्रा भी उतार कर फ़ेंक दी। उनकी चुचियों को पहली बार मैं ऐसे नग्न देख रहा था। ३८ इंच की उनकी चूचियाँ बस मेरी हालत ख़राब कर रही थी। इतनी बड़ी चूचियाँ मैंने तो सपने में ही देखी थी। उधर मेरा हाथ मेरे लंड की माँ बहन एक कर रहा था। मुझे पता भी नहीं चला कब चाची उठ कर खिड़की की तरफ़ आने लगी। मैंने जैसे ही देखा तो मैं जल्दी से खिड़की से कूद के भाग गया।

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मैं इतना गरम हो चुका था कि खुले दरवाज़े ही मैं अपने बिस्तर पर लेट के ज़ोर ज़ोर से लंड हिलाने लगा। हिलाते हिलाते जब मेरी नज़र दरवाज़े पर गई तो मैं तो बस पत्थर हो गया। देखा कि चाची मुझे देख रही हैं। चाची को देखते ही मेरा लंड एकदम सिकुड़ गया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ !

तब चाची ही बोली- क्या कर रहा है रे राज?

मैं: कुछ नहीं चाची!

चाची: कुछ नहीं का मतलब? तू ये सब कब से कर रहा है और किसने सिखाया तुझे ये सब ! हाँ ?

मैं: चाची, मैं कभी कभी करता हूँ, वो मेरे एक दोस्त ने बताया था इसके बारें में !

चाची: तूने ऐसे ऐसे दोस्त बना के रखे हैं जो तुझे ये सब सिखाते हैं?

मैं: चाची मुझे माफ़ कर दीजिये, मैं आगे से कभी नहीं करूँगा ! और प्लीज़ किसी को नहीं बताइयेगा !

चाची: ठीक है वो सब, मैं किसी को नहीं बोलूंगी पर तू मेरे जवाबों का सही सही जवाब देगा तब !

मैं: हाँ चाची, मैं आपको सब सच सच बोलूँगा।

चाची: किसके बारे में सोच के अभी तू हिला रहा था?

मैं: सच बोलूं चाची? आपको सोच के हिला रहा था !

चाची: मुझे सोच के हिला रहा था या देख के हिला रहा था? तू मेरे कमरे में था ना खिड़की के पास?

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मैं: नहीं चाची, मैं नहीं था !

चाची ने मेरे गाल पे एक ज़ोर से तमाचा मारा।

चाची: तूने बोला कि सब सच बोलूँगा और तू झूठ बोले रहा हैं। मैंने तो कल ही समझ लिया था जब मैंने खिड़की के परदे के नीचे तेरे रस की कुछ बूंद देखी। क्यूँ तेरे ही काम थे थे ना वो ?

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मैं: चाची, पता नहीं कैसे गिर गया वो, मैंने तो हाथ में ही निकाला था। सॉरी चाची…!

चाची: और तू ही मेरे ब्रा और पैंटी ले के उसमें मुठ मारता है ना? वो सब दाग तुमने ही लगाये थे न मेरे कपडों में?

मैं: चाची आपको वो भी मालूम चल गया? पर मैं तो उसे धो देता था !

चाची: अरे इसके दाग ऐसे ही थोड़े चले जाते हैं, और फिर मैं तेरी चाची हूँ रे ! कोई दूध पीती बच्ची नहीं ..तुझे ये क्या सूझी रे कि तूने अपने चाची को अपनी मुठ मारने का जरिया बना लिया?

मैं: चाची मुझे माफ़ कर दीजिये, पर क्या करूँ आप हो ही इतनी सेक्सी कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया !

चाची: तुझे ये ३६ साल की औरत सेक्सी लगती है रे… तू भी ना ! … अच्छा सुन ये अच्छी बात नहीं है.. ज्यादा मुठ मत मारना.. और अगली बार जब मुठ मारने का मन करे मुझसे कपड़े मांग लेना, मैं दे दूंगी, ऐसे चोरी मत कर ! एक दिन पकड़ा जाएगा.. पर ज्यादा नहीं, हफ़्ते में २ बार से ज्यादा नहीं मारना, ठीक है…?

मैं: हाँ चाची.. आप बहुत अच्छी हो… !

फिर मैं चाची से उनकी पैंटी और ब्रा मांग के हिलाने लगा. मुझे ऐसा लगने लगा था की चाची मेरे इस आदत का मज़ा ले रही है. मुझे ऐसा भी लग रहा थी चाची शायद मुझे अपनी चूत भी मारने दे ! मुझे लग रहा थी कैसे चाची से बात करूँ इस बारें में। दूसरे दिन जब मैं चाची से उनकी पैंटी मांगने गया तो चाची की बातें बहुत मजेदार थी.

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चाची: कल ही तो ली थी तुमने, आज फिर से चाहिए, कितना मनचला हो गया है मेरा भतीजा ! आज कोई पैंटी नहीं मिलेगी ! वो छत पर ही है और मैं नहीं लाने वाली….

मैं: चाची मैं तो मर जाऊंगा अगर नहीं मुठ मारूँगा तो, चाची दो ना ऐसा मत बोलो..!

चाची: अरे तुझे क्या लग रहा है कि मैं झूठ बोल रही हूँ ? तू खोज ले पूरे कमरे में, यदि मिल जाए तो ले ले…

मैंने सब जगह देखा, पर शायद चाची सच बोल रही थी, मुझे कहीं भी ब्रा या पैंटी नहीं मिली। तब मुझे एक आईडिया आया !

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