आंटी और उसकी ग्राहक के साथ मजा-1

Aunty aur uski grahak ke sath maza-1

old aunty sex, हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम भरत है और में आज आप सभी को अपने पहले सेक्स अनुभव के बारे में बताने जा रहा हूँ. में एक इंजिनियरिंग कॉलेज में पढ़ता हूँ, जो कि फरीदाबाद में है और मेरी उम्र 20 साल है और यह कहानी मेरी और मेरे दोस्त की माँ और उनकी ग्राहक की है और उन आंटी का नाम मंजू है, जो कि बहुत मटक मटक कर चलती है.

आंटी का फिगर एकदम मस्त है, आंटी की उम्र करीब 42 साल है और वो दिखने में बिल्कुल हिरोईन लगती है. दोस्तों यह बात आज से एक महीने पहले की है जब में फरीदाबाद से अपने घर पर आ गया था.

उस समय मेरे पेपर शुरू होने वाले थे, इसलिए मुझे अपनी कुछ किताब भी लेनी थी और फिर मैंने सोचा कि पेपर से पहले एक बार घर पर भी हो आता हूँ. फिर शाम को जब मैंने आंटी को देखा तो में एकदम पागल ही हो गया, वाह क्या मस्त लग रही थी. वैसे तो वो हमेशा से ही सेक्सी लगती है, लेकिन उस दिन कुछ ज्यादा ही मस्त लग रही थी.

मैंने आंटी को नमस्ते किया तो आंटी ने मुझसे पूछा कि तुम कब आए? तो मैंने उनसे कहा कि में आज ही आया हूँ, मुझे मेरी कुछ किताबें लेनी थी और फिर में अपने घर पर आ गया.

दोस्तों अगले दिन छुट्टी का दिन था, इसलिए में 12 बजे सोकर उठा और फिर थोड़ा पढ़ने लगा, लेकिन मेरा बिल्कुल भी पढ़ने का मन ही नहीं कर रहा था और मुझे बार बार आंटी की याद आ रही थी तो मैंने अपनी किताब को एक तरफ रखा और अपनी दोनों आँखे बंद करके में आंटी के बारे में सोचने लगा.

तभी अचानक से उसी समय आंटी मेरे घर पर आ गई और जैसे ही वो मेरे रूम में आई तो उनकी नज़र सीधा मेरे खड़े लंड पर पड़ी और वो चुपचाप दो मिनट तक वहीं पर खड़ी रहकर देखती रही और यह बात आंटी ने मुझे बाद में बताई. फिर आंटी ने मुझे आवाज़ लगाई और मैंने फटाफट अपना लोवर ठीक किया और अपने एक हाथ से लंड को छुपाने लगा तो आंटी हंसने लगी और वो मुझसे बोली कि क्यों तू पढ़ रहा था या किसी के सपनो में खोया हुआ था?

मैंने बोला कि आंटी ऐसी कोई बात नहीं है, में पढ़ ही रहा था और में थोड़ा आराम करने के लिए पांच मिनट सो गया था. फिर आंटी तुरंत मुझसे बोली कि हाँ मुझे सब कुछ पता है कि तू कितना सो रहा था? फिर वो मुझसे बोली कि अच्छा चल अब तू यह बता कि तेरी मम्मी कहाँ है?

फिर मैंने बोला कि वो मेरी चाची के घर पर गई है, उनकी थोड़ी तबियत खराब है. फिर मैंने उनसे पूछा कि कुछ काम है तो आप मुझे बताओ? तो उन्होंने बोला कि कुछ नहीं में सूट की कहने आई थी, चल में बाद में फिर से आ जाउंगी और तू अपनी पढ़ाई कर जो कर रहा था और वो चली गई. उसके बाद तो मेरा और भी दिमाग़ खराब हो गया और में उसे चोदने के बारे में सोचने लगा और फिर मैंने उसके नाम की मुठ मारी और उसी शाम को में अपने एक दोस्त के साथ बाहर घूमने चला गया और वापस आया तो मैंने देखा कि आंटी बाहर ही अपनी किसी ग्राहक के साथ खड़ी हुई थी, जो सूट के लिए आई थी और वो उनसे कुछ बातें कर रही थी और उन्हें मेरी आज की बात बता रही थी.

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फिर आंटी ने मुझे वहां पर बुलाया और उनसे कहा कि यह मेरे बेटे का दोस्त है और इंजिनियरिंग कर रहा है और यह सारा दिन पढ़ता ही रहता है, यहाँ तक कि यह सोते सोते भी उसी के बारे में सोचता रहता है और वो दोनों हंसने लगी. फिर मैंने भी मौके पर चौका मार दिया, आंटी यही तो समय है यह सब सोचने का, अब नहीं सोचूँगा तो आगे कैसे बड़ पाऊँगा और फिर काम कैसे पूरा होगा? तो वो कहती है अच्छा यह बात है. फिर अगले दिन वो मेरे घर पर आई और आते ही वो मुझसे बोली कि आज तू चुपचाप कैसे बैठा है, अब तुझे आगे नहीं बढ़ना क्या हुआ?

मैंने बोला कि कुछ नहीं और फिर वो मम्मी को सूट देकर चली गई. अगले दिन मम्मी ने मुझसे बोला कि तू आंटी के घर पर चला जा और यह सूट आंटी को दे आ, मैंने आंटी को सब बोल दिया है. फिर में मम्मी के कहने पर आंटी के घर पर चला गया और मेरे जाते ही आंटी ने मुझसे कहा कि आ जा में आज तेरे ही लिए ही बैठी थी.

दोस्तों मुझे आज आंटी का मूड कुछ अलग ही लग रहा था और उसने उस समय मेक्सी पहन रही थी, जो बिल्कुल पतली सी थी. मैंने उन्हे वो सूट दे दिया और जाने लगा तो आंटी मुझसे बोली कि तू दस मिनट रुक जा, में अभी इसे ठीक करके दे देती हूँ और में वहीं पर बैठ गया. आंटी मेरे लिए कोलड्रिंक्स लेकर आई और मेरे सामने रखने के लिए झुकी तो मुझे उनकी छाती साफ दिख रही थी और में तो बिल्कुल पागल ही हो गया और शायद आंटी ने भी यह देख लिया.

फिर वो मुझसे बोली कि ऐसे क्या देख रहा है? फिर मैंने कहा कि कुछ नहीं तो आंटी बोली कि तू घर से बाहर जाकर बहुत बदल गया है, मुझे लगता है तेरी भी कोई गर्लफ्रेंड बनवानी पड़ेगी, आज कल तू ज्यादा ही इधर उधर देखने लगा है. फिर मैंने भी बोल दिया कि हाँ आप ही 1-2 बनवा दो, आपकी दुकान में तो बहुत आती रहती है. फिर आंटी बोली कि क्यों तू क्या एक साथ दो को सम्भाल लेगा?

मैंने बोला कि दो को तो क्या में उन दोनों के साथ आपको भी सम्भाल लूँ. फिर वो बोली कि अच्छा देख ले मुझे तो तेरे अंकल भी नहीं सम्भाल पाए. मैंने कहा कि आजमाकर देख लो पता लग जाएगा कि में कितनो को सम्भाल सकता हूँ और इतने में उनकी वो दोस्त जो उस दिन उनसे बात कर रही थी, वो आ गई. उनका नाम निशा था और वो आकर मुझसे बोली कि तू यहाँ पर क्या कर रहा है?

मैंने बोला कि में मम्मी का सूट देने आया हूँ और फिर वो आंटी से बातें करने लगी. अब मैंने मन ही मन सोचा कि यह बीच में कहाँ से आ गई, हमारी अच्छी भली बातें चल रही थी, बीच में आकर सब मज़ा बिगाड़ दिया. फिर मंजू आंटी उनसे बोली कि तुम यहाँ पर बैठो, में अभी आती हूँ.

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