आंटी की अन्तर्वासना

Aunty ki antarvasna

indian anty sex, हाय दोस्तो, मेरा नाम राहुल है और मैं पुणे का रहने वाला हूँ|

यह मेरी अन्तर्वासना पर पहली और सच्ची कहानी है, आशा करता हूँ कि पाठकों को पसंद आएगी|

मैं बाईस साल का लड़का हूँ और अभी इंजीनियरिंग कर रहा हूँ| मैं आपका ज्यादा समय नहीं लेते हुए सीधे कहानी पर आता हूँ|

यह कहानी मेरी और पड़ोस वाली आंटी की है|

मेरे पड़ोस में एक परिवार रहता है जिसमें में चार लोग हैं अंकल, आंटी और उनके दो बच्चे|

आंटी पैंतीस साल की हैं उनका नाम काजल है और वो दिखने में फटाका है| पहले तो मैं उनके बारे में कभी गलत नहीं सोचता था लेकिन दो-तीन बार जबसे मैंने उनको बगीचे में बागवानी करते देखा है तब से मैं उनका दीवाना हो गया हूँ|

तो दोस्तो, बात एक दिन की है जब मैं कॉलेज से घर आया और घर के बाजू में दोस्तों के साथ बैठा हुआ था तब मेरी नजर पडोस वाली आंटी पर पड़ी|

वो गार्डन में काम कर रही थीं, उन्होंने सलवार-कुर्ता पहना हुआ था| झुककर काम करने कि वजह से उनके आधे गोरे स्तन साफ दिख रहे थे|

क्या बताऊँ, क्या चुचे थे उनके, मैं तो बस देखता ही रह गया| इस बीच शायद उन्होंने मुझे देख लिया था लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं|

आंटी को मेरे साथ बात करना अच्छा लगता था, वो कई बार अकेले में मेरे साथ बातें किया करती थीं|

लेकिन उस दिन के बाद मेरा तो उन्हें देखने का नज़रिया ही बदल गया| अब मैं बार-बार उनसे बातें करने लगा था| मुझे तो आंटी की लत लग गई थी, उनके वो आधे स्तन मेरे सपनों में भी आने लगे थे, मैं तो आंटी का दीवाना हो गया था|

ऐसे ही कई दिन बीत गए| एक दिन ऐसा आया कि कुछ अलग ही होने वाला था|

स्कूल में छुटियाँ होने के कारण आंटी के बच्चे उनके मामा के यहाँ गए हुए थे और अंकल भी कंपनी के काम से तीन-चार दिन बाहर गए हुए थे|

उस दिन आंटी मेरे घर आई और मेरी माँ से कहा कि मैं घर पर अकेली हूँ तो दो-तीन दिन राहुल को मेरे घर सोने भेज दीजिएगा, मुझे अकेले में डर लगता है|

हमारे परिवारों में बहुत अच्छे संबंध थे तो माँ ने हाँ कर दी| मैं जब शाम को कॉलेज से लोटा तो माँ ने कहा कि आज से दो-तीन दिन तक तू काजल आंटी के यहाँ सोने चले जाना|

मैंने पहले थोडा नाटक किया – क्या माँ, मैं ही क्यों? लेकिन ज्यादा नाटक नहीं किया क्यूँकी मैं यह मौका गवाना नहीं चाहता था| मेरे मन में तो लड्डू फुट रहे थे|

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मैं खुश हो गया और रात को खाना खा के आंटी के घर चला गया|

आंटी के घर जाकर दरवाजे की घंटी बजाई आंटी ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाया| आंटी टीवी देख रही थीं तो में भी टीवी देखने लगा|

थोड़ी देर टीवी देखने के बाद हमे नींद आने लगी तो आंटी ने कहा चलो सो जाते है तो मैंने कहा – ठीक है और हम उनके बेडरूम में चले गए|

आंटी बिस्तर पर लेट गई तो मैंने पूछा – मैं कहाँ पर सो जाऊँ| तो आंटी बोली – यहीं पर सो जाओ ना, यहाँ पर बहुत जगह है|

मैं उनके बगल में सो गया| थोड़ी देर बाद मैंने देखा की आंटी सो गई है, मुझे नींद नहीं आ रही थी और भला आएगी भी तो कैसे?

जिनके बारे में सोच-सोच कर मुठ मारा करता था वो आज मेरे सामने लेटी हुई थीं और मेरे मन में आंटी को चोदने के विचार चल रहे थे|

मैं आंटी की गांड को बस घूरे जा रहा था| उतने में आंटी ने करवट बदली और मेरी तरफ हो गई|

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था मेरी हालत बुरी हो गईं थी| मैंने हिम्मत कर के अपना एक हाथ उनके उपर रख दिया| जब आंटी ने कुछ नहीं किया तो मैंने अपना एक पैर उनके पैरों पर रख दिया|

धीरे-धीरे मैं उसे सहलाने लगा, फिर धीरे से मैं अपने होंठ आंटी के गर्म होंठों के पास ले गया और उनको चूम लिया|

आंटी तब भी नहीं जागीं और पता नहीं कैसे मुझे भी नींद आ गई|

सुबह मैं जब उठा तो आंटी उठ चुकी थीं, मैं भी उठ कर अपने घर जाने लगा तो सामने आंटी मिली और उन्होंने मुझे शरारत भरी नज़रों से देखा और मुस्कुराने लगीं, मैं कुछ समझ नहीं पाया और अपने घर चला गया|

दुसरे दिन शाम को जब में आंटी के घर सोने गया तो बस आंटी को देखता ही रह गया| आंटी ने आज सलवार-कुर्ता पहना था जिसमें से उनके स्तन की गोलाई साफ़ दिख रही थी|

मैं तो देखते ही पागल हो गया| उन्होंने मेरा हंस के स्वागत किया| बाद में हम जब टीवी देखनें लगे उतने में आंटी ने मुझसे पूछा कि – राहुल, तुम शादी कब कर रहे हो?

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मैंने कहा – आंटी अभी कहाँ, अभी तो में छोटा हूँ| आंटी ने कहा – मुझे पता है तुम कितने छोटे हो|

मैं उनकी बात कुछ समझा नहीं और मैंने उनसे पूछा कि क्या मतलब? वो बोली कि कल रात मुझे सब पता चल गया कि तुम्हारी शादी करवानी पड़ेगी|

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मैं समझ गया क़ि आंटी कल रात के बारे में सब जानती हैं| मैं थोडा सा डरा हुआ था लेकिन मुझे भी मालूम था कि आग दोनों तरफ लगी हुई है|

मैंने भी मौका देख कर चोका मारा और आंटी से कहा कि आप ही करवा दो ना मेरी शादी| आंटी ने कहा – मैं कहाँ से करवाऊँ तुम्हारी शादी?

मैंने कहा – अच्छा तो फिर जब तक मेरी शादी ना हो तब तक आप ही मेरी बीवी बन जाओ| आंटी ने थोड़ी देर सोच के कहा – ठीक है, चलो जब तक तुम्हारी शादी नहीं हो जाती, मैं तुम्हारी बीवी बनके रहूंगी लेकिन तुम्हे वो सब करना पड़ेगा जो एक पति और पत्नी करते है|

मैंने कहा – क्यों नहीं आंटी? मैं तो कब से यह सब करने के बारे में सोच रहा था और मैंने आंटी को अपनी बाँहों में ले लिया और उनके होंठों को चूमने लगा|

वो भी धीरे-धीरे गरम हो रही थीं और धीरे-धीरे मेरा साथ देने लगी थीं| कुछ देर तक चूमा-चाटी करने के बाद आंटी मुझे बेडरूम में ले गईं|

मैंने बिस्तर पर धक्का दे कर आंटी को नीचे गिरा दिया और आंटी के ऊपर चढ़ गया| अब मैंने आंटी को ऊपर से नीचे तक चूमना चालू किया और मैंने अपने सारे कपडे उतार दिए, अब मैं सिर्फ़ चड्डी में उनके सामने था|

फिर मैंने उनको उठाया और उनकी सलवार-कमीज उतार कर फेक दी| उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थीं| आंटी भी आज चुदवाने के मूड में थीं| मैं तो उनके चुचे देखते ही रह गया|

आंटी बोली – आज यह तुम्हारे है| फिर क्या था? मैं तो उन पर टूट पड़ा| मैं आंटी के मम्मो को जोर-जोर से दबाने और चूसने लगा|

वह भी सिसकारियाँ लेने लगी थीं और मैं पागलों की तरह उनके स्तन चुसे जा रहा था|

अब आंटी भी पूरी तरह से गरम हो चुकी थीं, वो भी मेरी पीठ पर अपने हाथों से सहलाने लगीं और सहलाते-सहलाते वो मेरे लौड़े तक पहुँच गईं और उन्होंने मेरे लौड़े को चड्डी से निकाला और चुसना चालू किया|

मेरा लौडा पूरा तन चूका था और आंटी की चूत मारने के लिए तड़प रहा था| क्या बताऊँ दोस्तो, वो क्या अनुभव था? मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया था|

फिर थोड़ी देर तक मेरा लौडा चूसने के बाद वो मेरे ऊपर बैठ गयीं और अपनी चूत मेरे मुँह के पास ला के रख दी और अपने हाथों से मुझे इशारे करने लगी कि मैं उनकी चूत चाटूँ|

पहले तो मैंने उनकी चूत को सूंघ कर मजे लिए, क्या खुशबू थी| फिर मैंने अपनी जीभ को धीरे से उनकी चूत पर लगाया, मेरी जीभ लगते ही आंटी उछल पड़ी तो मैंने भी उनके पैर पकड़ लिए और उनकी चूत चाटने लगा|

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वो तो जैसे पागल ही हो गयीं और जोर से सिसकारियाँ लेने लगी थीं| मेरा मुँह अपने चूत पर दबा रही थीं|

थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा उनकी चूत चाटने के बाद वो मेरे ऊपर से उठी और सीधी लेट गईं और मुझे कहा – मेरे राजा, अब मुझसे रहा नहीं जाता, मुझे बस अब चोद दे, आज के लिए मैं तेरी रंडी हूँ, जैसा चाहे वैसा चोद, बस मेरी प्यास बुझा डाल|

अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था| मैंने आंटी को सीधा लेटाया और उनकी टांगें चौड़ी कर दीं और उनकी चूत के मुँह पर अपना लौड़ा रख के सहलाने लगा|

आंटी बोली – राहुल, क्या कर रहा है और मत तडपा अपनी आंटी को मुझे जल्दी से चोद दे|

मैंने अपने लौड़े का सूपड़ा अन्दर डाला और धीरे से आधा लंड उनकी चूत में डाल दिया और फिर जोर का धक्का लगाया पूरा लंड आंटी के चूत में था|

आंटी की सांसे बहुत तेज़ हो गईं थीं, मैं धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था| जब मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ाई तो आंटी पागल ही हो गईं थीं|

वह अपने स्तन जोर-जोर से दबाने लगीं और कहने लगीं – अपनी आंटी की चूत फाड़ डाल| मैं भी आंटी की चूत जोर-जोर से मारता रहा|

मेरा जब निकलने वाला था तो मैंने आंटी को कहा तो उन्होंने मुझे कस के पकड़ लिया और नीचे से अपनी गांड उठा-उठा के मेरा साथ देने लगी और मैंने आंटी के चूत में ही निकल दिया| थोड़ी देर मैं ऐसे ही पड़ा रहा|

फिर आंटी का मेरे साथ ही निकल गया| उस रात आंटी को मैंने चार बार चोदा| हम लोग नंगे ही चिपक कर सो गए|

सुबह जब मैं उठा तो आंटी सो रही थीं तो मैंने उनके स्तन दबा कर उनके मुँह को चूमा और उन्हें जगाया तो उनकी हालत कुछ ठीक नहीं लग रही थी|

मैं भी थोडा सा थका हुआ था मैंने आंटी और मेरे लिए कॉफ़ी बनाई और फिर अपने घर चला गया|

आंटी अब भी मुझ पर फिदा है, जब भी मौका मिलता है मुझसे जरुर चुदवाती है|

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