बाबा जी ने चूत पेल दी-2

(Baba ji ne chut pel di-2)

फिर शानू ने टेबल पर रखा लोटा उठाया और बाबा जी के काले बदबूदार लंड को अपने हाथों से धोया, बहुत मसला. तो बाबा जी का लंड अब साफ होकर चमक उठा था.. लेकिन अब शानू को सब्र नहीं था और ना ही बाबा जी को. उन्होंने अपना लंड शानू के मुहं में घुसा दिया और अंदर बाहर करने लगे और सिसकारी भरने लगे और कहने लगे कि चूस मेरी बेटी चूसे जा इस लंड को.. आज यह लंड धन्य हो गया तेरे जैसी चुड़क्कड़ के मुहं में जा कर.. आहह तुझे बहुत पुण्य मिलेगा बाबा का लंड चूसकर.. तुझे में अभी प्रसाद देता हूँ. तो बाबा ने अपना माल शानू के मुहं में दे मारा.. शानू भी उसे प्रसाद समझ कर सब चाट गई. अब बाबा से और नहीं रुका जा रहा था.

फिर बाबा ने शानू की पेंटी निकाली और उस पेंटी को सूंघने लगे.. फिर उनसे रुका ना गया और शानू की काली मस्त और गुलाबी चूत में जा घुसे. उसे उन्होंने बहुत जमकर चूसना शुरू किया और अपनी प्यासी जीभ को चूत की गहराई में घुसाने लगे और अपने हाथ की उगलियाँ शानू की चूत में घुसा कर मसलने लगे और पूरी तरह पागल हो गये.. सारे कमरे में शानू की सिसकियाँ सुनाई देने लगी. फिर वो भी बाबा के बाल पकड़ कर खींचने लगी और पूरी मस्त होकर उछल उछल कर चूत चूसवाने लग गई और कहा कि इस चूत की इच्छा पूरी करो ना बाबा जी.. आपने कहा था कि सेवा करूंगी तो में जो मांगूगी मुझे वो मिलेगा.. अब मेरी इच्छा पूरी कर दो.. आआआआः गई में तो घुस जा साले आअहह!

बाबा : लगता है कि तू मेरा लंड लेकर ही मानेगी.. तू बहुत ही बड़ी चुड़क्कड़ है चल मेरे आश्रम पर बहुत लंड घूमते हैं वहाँ पर काले-काले लम्बे-लम्बे और तो और हमारे भक्त भी प्रसन्न होकर तेरी चूत में बहुत लंड और बहुत पैसा दान करेंगे और तेरे मोटे बूब्स चूसने का प्रोग्राम भी रख दूँ तो तू रंडी देवी बन जाएगी सब पूजेगें तुझे आआअहह..

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शानू : बहेनचोद तू मेरी अपनी माँ को भी वहाँ पर ले चलना और मेरी अपनी बहन को भी और जो आप कहोगे में वैसा ही करूंगी.. लेकिन अभी इस जलती हुई चूत को ठंडा कर दे. तो बाबा जी ने आव देखा ना ताव अपना मोटा लम्बा लंड शानू की चूत में धकेल दिया शानू की तो मानो जान निकल आई और वो मस्ती में पागल होने लगी. बाबा जी उसके ऊपर उछलने लगे तो शानू के मोटे बूब्स भी उछलने लगे और बाबा जी उन पर भी टूट पड़े और उनको चूसने और दबाने लगे. शानू की चूत को अब चैन आने लगा और वो पानी छोड़ने लगी. बाबा जी के लिए तो यह अमृत समान था.. उन्होंने झट से अपना मुहं चूत को लगाते हुए चूत के मुख्यद्वार पर जहाँ से रस निकल रहा था उसका स्वाद लेने में डूब गये. फिर बाबा जी भी पूजा पाठ किए बिना इस रोचक रसीली चुदाई को कहाँ खत्म करने वाले थे. उन्होंने शानू से कहा कि बेटी हम तेरी लंड भक्ति देख बहुत प्रसन्न हुए.. अब में तेरी गांड पूजा करना चाहता हूँ मोटे मोटे चूतडो को पूजना चाहता हूँ. तेरी गांड का भोग लगाना चाहता हूँ. अह्ह्ह और उन्होंने अपना अंगूठा शानू की काली मतवाली गांड के छेद में घुसाया तो शानू मानो हवा में उछल गई और उसने कहा कि बाबाजी आज मुझे अपनी परम भक्त बना लीजिए.. बाबाजी ने शानू को कुतिया बनने का आदेश दिया और शानू भी गली की पालतू चुदक्कड़ कुतिया जैसे तैयार हो गई.

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बाबाजी : बेटी पहले हमे इसको साफ करना होगा.. लेकिन इस सुंदर काली गांड को पानी से नहीं अपनी जीभ से चाटकर चूसकर साफ करूंगा और फिर उन्होंने अपनी मोटी पानी से भरी जीभ शानू के चूतड़ के बीच में घुसा दी और उसको चाटने लगे.. अयाया उम्म्म माआहह हाआहह आआहह.

शानू : बाबा जी क्या ऐसी गांड कभी तुमने पहले चूसी है.. अहह बताओ ना?

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बाबा : नहीं बेटी इतनी रसीली और सुंदर गांड कभी नहीं.

फिर बाबा जी ने अपनी एक उंगली गांड में घुसा दी और एक चूत में.. शानू भी अब नशे में आँखे बंद किए इस रासलीला का आनन्द लेती रही और मुहं खोलकर सिसकियाँ लेती रही. तभी एकदम से उसके मुहं में एक लंड ने प्रवेश किया.. शानू चौंक गई और उसे इस लंड का स्वाद जाना पहचाना लगा. अरे यह तो उसके प्यारे पति का मोटा लंड था.. लेकिन उसे यकीन ना हुआ उसने आंखे खोली और सामने पति को देखकर खुशी के मारे उछल पड़ी. अब तो शानू मानो जन्नत में हो.. एक लंड गांड में और एक अपने मुहं में दोनों तरफ से खुद को चुदता देख वो और धक्के मार मार कर चुदवाने लगी. बाबाजी अब शानू की गांड में अपना रस छोड़ने वाले थे और शानू भी अपनी टपकती चूत को रोक ना पा रही थी और हम तीनों एक दूसरे पर निढाल होकर गिर गये.

फिर शानू बीच में पड़ी थी और एक तरफ बाबाजी बूब्स चूस चूस कर मीठा मीठा दर्द कर रहे थे और एक में नोच रहा था. शानू के मुहं से सिसकियाँ निकल रही थी और वो अपने कोमल हाथों में हम दोनों के लंड मसल रही थी और शानू अब हमारे लंड की मालिश कर रही थी.. बाबाजी अपना प्रसाद देने वाले थे और उन्होंने एक ज़ोर की सिसकी ली और अपना माल निकाल दिया.. बाबाजी बहुत संतुष्ट थे और उन्होंने जोर से शानू का बूब्स मसला और उसकी चूत की चुम्मि ली और में पड़ा पड़ा बूब्स चूसने में लगा हुआ था. फिर बाबा जी ने लंड को अपने लंगोठ में डाला और अपने कपड़े पहन कर बोले कि बेटी तुमने हमे बहुत खुश किया है कभी हमारे आश्रम ज़रूर आना और उन्होंने शानू को आशीर्वाद देते हुए कहा कि हमेशा लंडवती रहो.. तुझे कभी प्यार भरे लंड की कमी ना रहे और उन्होंने मेरा लंड पकड़ कर शानू की चूत में दे दिया और में शानू की चूत को मजे से चोदने लगा. तो मैंने देखा कि बाबा का लंड दोबारा खड़ा हो गया है और यह सब देखकर उन्होंने झट से शानू की पेंटी अपनी पोटली में रखी और वहाँ से निकल गए.

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फिर में और शानू कमरे में नंगे पड़े एक दूसरे में घुसे हुए थे.. में शानू की चूत चाट रहा था और शानू मेरे लंड से खेलते खेलते ना जाने कब सो गई. उस रात मैंने तीन बार शानू की चूत मारी अगली सुबह तक भी हमें कुछ होश नही था.

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