बचपन की सहेली-2

(Bachpan Ki Saheli-2)

सीमा ने बुधवार के दिन कहीं बाहर मिलने का प्लान बनाया क्योंकि संजय को उस दिन टूअर पर जाना था।

मैंने पूछा तो वो बोली- किसी होटल या किसी के घर पर मिलने का प्रोग्राम बनाओ।

मैं समझ गया था कि यह उस किस का ही परिणाम है। मैंने हाँ करने में बिल्कुल भी देर नहीं की और फोन काटने के तुरंत बाद एक होटल में रूम बुक करवा दिया।

अगले दो रातें मैं ठीक से सो नहीं पाया और ख्वाबों में सीमा को कई बार चोद दिया।

बुधवार दोपहर के 12 बजे मिलने का प्रोग्राम तय हुआ था। वो तय समय पर मुझे अपने घर से बाहर सड़क पर मिली। हम दोनों एक टैक्सी में बैठे और होटल में पहुँच गए।रूम की चाबी लेकर हम दोनों रूम में चले गए।

जैसे ही हम रूम में घुसे तो मैंने सीमा से पूछा- क्या इरादा है?

तो वो मेरे गले से लग गई और बोली- लव, मुझे प्यार करो।

मुझे तो पहले से पता था कि वो किस प्यार की बात कर रही है पर फिर भी मैंने पूछा- किस प्यार की बात कर रही हो?

तो वो बोली- संजय अपने काम में इतना व्यस्त रहता है कि मुझे बिल्कुल भी समय नहीं दे पाता है और फिर जब रात को थक हार कर घर आता है तो मुझे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं कर पाता।

“लव सब कुछ करने से पहले मेरी एक शर्त है कि संजय को या और किसी को अपने संबंधों के बारे में पता नहीं चलना चाहिए और ना ही यह पता लगे कि हम दोनों पहले से एक दूसरे को जानते हैं।”

मुझे तो बस चूत नजर आ रही थी तो मैंने एक दम से हाँ कर दी और सीमा को पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा। वो भी बिना देर किये मेरा साथ देने लगी।

कुछ देर होंठ चूसने के बाद सीमा ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा सिर अपनी चूचियों पर दबाना शुरू कर दिया तो मैं समझ गया कि वो अब क्या चाहती है। मैंने उसका कमीज उतार दिया और उसकी ब्रा में कसी मोटी मोटी चूचियों दबाने लगा।

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सीमा आह्ह्ह… उफ्फ्फ.. करने लगी। मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसको बेड पर लेटा कर उसकी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। सीमा की सिसकारियाँ गूंजने लगी थी। मैं कभी उसकी दायीं चूची को चूसता तो कभी बायीं चूची को।

सीमा मस्ती के मारे सिसिया रही थी- “चूस लव चूस जोर से चूस मेरी चुचियाँ….आह्ह्ह….ओह्ह्ह्ह…बहुत मज़ा आ रहा है….आह्हह्ह”

फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसकी पेंटी सहित नीचे सरका दिया। पेंटी नीचे होते ही सीमा की गुलाबी चूत नजर आने लगी। मैं तो अपने दिल की रानी की गुलाबी चूत देख कर पागल हो गया। चूत बहुत चिकनी लग रही थी। मैं समझ गया था कि सीमा ने सुबह ही चूत के बाल साफ़ किये हैं।

मैं सीधा उसकी टांगों के बीच में आ गया और उसकी गुलाबी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी चूत की महक और स्वाद बहुत मस्त था। सीमा आह्ह ह्ह्ह ओह्ह्ह कर रही थी। मैं उसकी आवाजों का मज़ा लेते हुए उसकी चूत चाट रहा था। मैं जीभ को अंदर बाहर कर रहा था जिसमें उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था।

“लव डाल दो अपनी पूरी जीभ मेरी चूत में… करते रहो लव…” सीमा मस्त हुई जा रही थी।

मैं कुछ देर ऐसे ही करता रहा कि तभी वो अकड़ी और फिर जोर से झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकल कर मेरे मुँह पर आ गिरा। मुझे पहले तो थोड़ा गन्दा लगा पर फिर उसकी मोहक खुश्बू ने मेरा मन मोह लिया और मैं उसका सारा पानी चाट गया।

अब उसकी बारी थी। मैंने उसको उठाया और अपना लण्ड निकाल कर उसके आगे कर दिया। उसने बिना देर किये मेरा लण्ड चूसना शुरू कर दिया। वो ऐसे चूस रही थी जैसे कोई आइसक्रीम चूस रही हो। मुझे बहुत आनन्द आ रहा था।

आज पहली बार कोई मेरा लण्ड चूस रही थी। मेरा बदन मस्ती में झूलने लगा था। मैं ज्यादा देर रोक नहीं पाया और एक आह के साथ मैंने मेरे लण्ड का माल सीमा के मुँह में छोड़ दिया।

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सीमा का मुँह मेरे माल से भर गया था पर सीमा ने सारा माल बाहर थूक दिया। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैंने उसका सारा पानी पी लिया था पर उसने मेरा नहीं पिया।

अब बारी कुछ आगे करने की थी। मैंने सीमा की चूत पर पहले तो थोड़ी जीभ फेरी और फिर एक उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा। वो मस्त होकर आहें भरने लगी थी। मेरा लण्ड उसकी सेक्सी आह्हें सुन कर फिर से खड़ा हो गया था।

“लव… अब और मत तड़पाओ… चोद दो मुझे… बुझा दो प्यास मेरी चूत की !” सीमा मस्ती के मारे गांड उछाल रही थी।

मैं भी अब रुकना नहीं चाहता था, मैं भी उसकी टांगों के बीच में आया और अपना लण्ड उसकी चूत के मुँह पर रख दिया और उसकी चूत के दाने पर रगड़ने लगा। मेरे गर्म सुपारे की रगड़ उसकी चूत में आग भर रही थी।

अब सीमा बार बार प्रार्थना कर रही थी कि लव जल्दी से लण्ड चूत में डाल दो… मत तड़पाओ।

उसके छेद पर लण्ड रख कर मैंने एक धक्का लगाकर लण्ड को चूत में सरकाया तो उसके मुँह से आह्ह्ह की आवाज निकल गई। मैंने थोड़ा ज्यादा जोर लगा कर एक और धक्का लगाया तो आधा लण्ड उसकी चूत में चला गया।

सीमा के मुँह से चीख निकल गई। सीमा की चूत बहुत कसी थी और मुझे संजय के व्यस्त होने का एहसास करवा रही थी। मुझे संजय पर तरस आया कि वो अब तक अपनी बीवी की चूत को अच्छे से खोल भी नहीं पाया था और अब यह काम मुझे करना था।

मैंने दो तीन जोरदार धक्के लगा कर पूरा लण्ड चूत में डाल दिया। वो चीखती रही पर मैं नहीं रुका। सीमा की आँखों से आँसू बहने लगे थे। मस्त टाईट चूत में घुसने के कारण मेरा लण्ड चिरमिराने लगा था। हम दोनों ही दर्द में थे पर फिर भी मैं काफी देर तक उसके होंठ चूसता रहा।

थोड़ी देर बाद जब दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने लण्ड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में सीमा भी मेरा साथ देने लगी।

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3-4 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद मैंने उसको बेड के किनारे पर लेटाया। मैं खुद नीचे खड़ा हो गया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख कर उसकी चूत में अपना लण्ड डाल दिया। मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा।

ऐसे चुदने में उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था। वो गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी।

“चोद मुझे… मार ले मेरी… चोद… आज तूने असली में मुझे जवान कर दिया लव… चोद अपनी बचपन की सहेली को…. ले ले मज़ा आह्हह ओह्ह… चोद…” सीमा मस्ती में बड़बड़ा रही थी।

अब उसकी चूत गीली हो रही थी, मैं तेज तेज धक्कों के साथ उसको चोद रहा था। तभी वो अकड़ गई और उसने मेरी बाजू मजबूती से पकड़ ली। उसके नाखून मेरे बाजू में धंस गए और फिर वो एकदम से झड़ गई।

मैंने उसे घोड़ी बना लिया और फिर पीछे से लण्ड उसकी चूत में डाल दिया। कुल 10-12 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी चूत में छोड़ दिया। मेरे गर्म माल की गर्मी से वो एक बार फिर से झड़ गई।

हम दोनों थोड़ी देर नंगे ही पड़े रहे। दस मिनट के बाद मैंने उसे उठाया और हम दोनों बाथरूम में गए, मैंने उसकी चूत साफ़ की।

मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया था, मैंने उसको एक बार फिर से बाथरूम में चोद दिया। वो बाथरूम में पानी के नीचे चुदते हुए 3 बार झड़ गई और फिर हम दोनों नहा कर वापिस आ गए।

उसके बाद से मैं उसको 8-9 बार चोद चुका हूँ। अपने बचपन की सहेली की चुदाई मेरे लिए यादगार बन गई थी।

बाद में उसने अपनी सहेलियों की चूत भी दिलवाई पर सीमा जैसा मज़ा किसी में नहीं था।

आप सबको कहानी कैसी लगी मुझे मेल करके जरूर बताना।

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