बहन के बदले की भावना-1

Behan ke badle ki bhawna-1

हैल्लो दोस्तों, आज में जो कहानी आप सभी पढ़ने वालों के लिए लेकर आया हूँ यह मेरी अपनी एक सच्ची घटना है जो कुछ समय पहले मेरे साथ घटी और इस घटना के बाद मेरे साथ साथ मेरी बहन का जीवन और उसके जीने का तरीका बिल्कुल ही बदल गया. हम दोनों के अंदर बहुत ज्यादा बदलाव आ गया और हमारा व्यहवार एकदम बदल गया था. उस घटना को में आज तक नहीं भुला सका, इसलिए आज आप सभी को लिखकर सुना रहा हूँ यह मेरे बदले की भवना के ऊपर आधारित है मुझे पता नहीं यह सब आपको कैसा लगे प्लीज मुझे जरुर बताए.

दोस्तों में अपने घर में सबसे छोटा हूँ और मेरी उम्र 17 है और मेरे परिवार में मेरी मम्मी पापा के अलावा मेरी बड़ी बहन जिसका नाम दिव्या है उसकी उम्र 20 साल वो बहुत सुंदर गोरी होने के साथ साथ मस्त सेक्सी भी लगती है उसकी लम्बाई 5.5 है और उसके बूब्स का आकार 32-30-34 है और मेरा एक भाई है जो उसकी शादी होने के बाद अब हम सभी से अलग रहता है. दोस्तों में शुरू से ही बिल्कुल सीधा था और किसी से कुछ भी नहीं कहता था और इस बात की वजह से बचपन से ही मुझे बहुत परेशान किया जाता था. मेरे दोनों भाई बहन मुझे हमेशा किसी भी बात के लिए डांट खिलाते और वो मेरा मज़ाक भी हमेशा बहुत उड़ाते थे और में मन ही मन में ना जाने क्या क्या बातें सोचता रहता था. मेरे मन में बहुत गलत गलत बातें वो विचार आते थे.

अब कॉलेज में आने के बाद भी मुझे भोंदू कहा जाता और मेरी बहन मुझे घर में बहुत परेशान किया करती थी, माँ को शिकायत करने पर वो मुझसे कहती थी कि तुम्हारा तो यह हमेशा का काम है और मेरी बहन के 20 जन्मदिन की पार्टी पर उसके दोस्तों के सामने उसने मेरा बहुत मज़ाक उड़ाया जिसकी वजह से में बहुत दुखी हुआ, लेकिन उस बात से किसी को कुछ भी फर्क नहीं पड़ा बस मेरे आलावा.

अब में अपने खोए हुए धेर्य को पाने की बहुत कोशिश किया करता था, लेकिन उन सभी का व्यहवार मेरे प्रति ऐसा ही हो गया था और अब किसी तरह में अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य पर ध्यान रखता और धीरे धीरे बातों से मैंने अपनी बहन की वॉट लगाना सीख लिया था और इस पर वो भड़ककर मेरे खिलाफ लोगों से कुछ भी बातें बनाकर बकचोदी करने लगी थी. कभी मेरी कही बात पर कोई तीसरा मज़ाक बनाता जो वहाँ पहले कभी नहीं होता था और कभी उसके दोस्त और भाई मिलकर मेरी बजाते.

अब मेरे मन में बदले की भावनाए आनी ही थी, क्योंकि उनमे मेरे लिए कोई दया के भाव नहीं दिखते थे और उन्होंने परिवार में होते हुए भी मुझे दूसरो जैसे रिश्ते रखे. एक दिन दिव्या के कॉलेज में प्रोग्राम था और में और भाई भी वहां पर गये थे वहाँ जाकर मैंने विचार किया कि दिव्या का यह स्वभाव और भी कई लोगों के प्रति वैसा ही खराब हर किसी का मज़ाक उड़ाने वाला था और उन लोगों में दोस्ती की बजाए सिर्फ़ राजनीती चलती थी और वहाँ सब बिखर गए, भाई अपने दोस्तों के साथ, में अपने और दिव्या अपने दोस्तों के साथ थी. फिर में कुछ देर चले उस डांस प्रोग्राम के बाद अब चल रहे गाने से बोर हो गया था और अब में बाहर आकर पीछे के जाकर अपने मोबाइल पर इंटरनेट चलाने लगा था. तभी मैंने देखा कि दिव्या वहाँ से लॅडीस टॉयलेट के लिए निकली और मुझे वहां पर देखकर भी उसने बिल्कुल अनदेखा कर दिया था, लेकिन मैंने कुछ देर बाद देखा कि दो लड़के पीछे के रास्ते से छुपते हुए आ गए और फिर उन्हे मैंने दिव्या के पीछे उसी टॉयलेट में घुसते हुए देखा.

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दिल के एक कोने में आवाज़ उठी कि में उन्हे अभी जाकर पीट दूँ और अपने दोस्तों को भी फोन कर दूँ, लेकिन जिंदगी का एक सबक मैंने ऐसी दुनिया से दूर रहकर भी सीखा था कि जो तुम्हारे साथ ढंग से व्यहार ना करे उसके साथ अच्छाई करके तुम खुद से ही बुरा करोगे और वो भी बुरा ही करेगा, क्योंकि अब वो जमाना गया जब तुम्हे काँटा देने वाले को फूल देने की बात हुआ करती थी, लेकिन वो मेरी बहन थी इसलिए में पास की खिड़की से अंदर की तरफ झांकने लगा कि तब तक में कुछ सोच ना लूँ. अब अंदर झाकते ही मुझे दिखा कि एक लड़के ने उसका मुँह बंद करके उसको पीछे से पकड़ रखा था और दूसरे ने टॉयलेट का दरवाजा बंद करके उससे कहा कि तू हमेशा बहुत उछलती है साली तू अपने छोटे से फ्रेंड सर्कल के साथ मुझे हिजड़ा कहकर बदनाम करने चली थी और तू अपने आप को सबसे स्मार्ट समझती है, तुम लोग बहुत समझदार बनते हो, आज में तुझे असली दुनिया दिखाता हूँ.

दोस्तों उसके मुहं से यह शब्द सुनकर मेरे अंदर भी मन में बदले की भावना आ गई और मुझे कुछ ही पल में वो सारा सब कुछ याद आ गया जो भी दिव्या ने मेरे साथ हमेशा किया था और में नहीं जानता था कि मुझे उस घटना को कैसे लेना चाहिए? लेकिन में आज उसकी उस चुदाई को यादगार बनाना चाहता था इसलिए मैंने अपना मोबाइल निकाला और यह बात सोचते हुए कि उसकी पहले भी मदद करके मुझे उसकी तरफ से खिल्ली ही उड़ी और आज उसको इन सबका सबक मिलना ही चाहिए और यह बात सोचकर में उसका वीडियो बनाने लगा.

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फिर उनके आपस के संबोधन से मुझे पता चला कि जो लड़का मुँह पकड़े पीछे खड़ा था वो अमन था और आगे वाला अमित. अब अमित ने अपनी बात पूरी करते हुए दिव्या के पैर पकड़े और उसको ज़मीन पर खींचते हुए उसकी जींस का बटन खोलकर चेन को भी खोलने लगा और दिव्या उऊन उऊन करके छटपटा रही थी और फिर उसने अपने एक पैर को छुड़ाते हुए अमित को एक जोरदार लात दे मारी और अब वो अमन का हाथ काटने की कोशिश करती रही. फिर मैंने देखा कि उसका चेहरा अब डर की वजह से एकदम लाल पड़ गया था और वो बहुत घबराई हुई अपनी जिंदगी की पहली असली लड़ाई लड़ रही थी.

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अब अमन ने अपनी पकड़ को पहले से ज्यादा मजबूत कर दी और अमित ने खुद को सम्भालकर उसकी जींस को निकालकर खीचते हुए पूरी उतार दी और वो उसकी गोरी तड़पती हुई जांघों पर हाथ फेरते हुए हंसने लगे और बोले अब तू बदनाम होगी और अगर तूने खुद किसी को बाहर जाकर बताया तो भी मेरे पापा के नेताओं और जज से बहुत अच्छी जान पहचान है इसलिए वो मुझे बचा लेंगे, तेरा बाप क्या है बस एक कंपनी का मैनेजर और अगर तूने किसी को नहीं बताया तो में कॉलेज में फैला दूँगा कि तुझे चोदा है और अब अमन ने उसकी और अमित के हाथ उसकी जाँघो पर रखकर एक फोटो अपने मोबाइल में क़ैद कर ली और वो दोनों ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे और वो दिव्या से कहने लगे कि आराम से दे दे और वैसे भी इस वाले टॉयलेट में कोई भी नहीं आता जो तुझे बचाएगा.

अब दिव्या ज़ोर ज़ोर से रोने लगी और अमित ने उसकी पेंटी को उतारकर उसकी घने बालों वाली चूत को एक पप्पी दी और अपनी जीभ से उसकी चूत को थोड़ा सा टटोला और उसके बाद उसके टॉप को ऊपर उसके कंधे तक उठाकर उसकी ब्रा को खींचकर तोड़ दिया और अब वो उसके बूब्स को चाटने लगा.

अमन ने अब तक अपना रुमाल उसके मुहं पर कसकर बाँध दिया और उसके बाद उसको नीचे लेटाकर उसके दोनों हाथों को दोनों तरफ करके अपने जूतों से दबा दिए, जिसकी वजह से वो दर्द से करहा उठी. अब अमित ने उसके बूब्स को चूसते हुए अपना लंड उसकी चूत के दरवाजे पर रख दिया और उसके दोनों पैरों को फैलाते हुए अब वो अपने लंड को अंदर धकेलने लगा था, जिसकी वजह से दिव्या उस दर्द से तिलमिला उठी और अब अमित बिना रुके अपने लंड को दिव्या की चूत में डालने लगा और अब उस जबरदस्ती की वजह से उसकी चूत से थोड़ा सा खून भी निकल गया.

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इस पर अमन बोला लो इसने तो आज तक सेक्स भी नहीं किया और यह बड़ी होशियार मॉडर्न बनती थी, लेकिन अमित अब बिना रुके लगातार धक्के देकर उसको चोदने लगा था और वो उसके दर्द से खुश होते हुए बड़े तेज तेज झटके देने लगा था. वो इससे पहले कि कुछ हो उसको जल्दी से चोद देना चाहता था और उसने रोती हुई दिव्या के बूब्स पर काटना शुरू कर दिया और गर्दन को दबाते हुए अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.

अब दिव्या कुछ देर बाद एकदम निढाल हो गयी और वो उसको तब भी अपनी तरफ से धक्के देता रहा, लेकिन अमन के कहने पर उसने दिव्या का गला अब छोड़ दिया था और कुछ देर में उसके लंड ने वीर्य की धारा को दिव्या की चूत में छोड़ और उसके बाद वो कुछ दो चार धक्के देने के बाद अपना लंड दिव्या की चूत से बाहर बाहर निकालकर उसको साफ करके वो अब पीछे की साइड में आकर बैठ गया और वो थकी हुई दिव्या के हाथ अपने हाथों से ही दबाए बैठा रहा और अमन ने बिना देर किए अपना लंड पेंट से बाहर निकालकर सीधा उसकी चूत में धकेल दिया और अब वो जोश में आकर दिव्या को बहुत बेरहमी से झटके देने लगा था.

उसके झटके बहुत तेज थे क्योंकि इससे पहले चली चुदाई को देखकर बहुत गरम हो चुका था और इसलिए वो जल्द ही झड़ गया. उसने भी अपना वीर्य दिव्या की चूत में ही निकाल दिया था जो अब उसकी पहले से भरी हुई चूत से बहकर बाहर आने लगा था और फिर उसने लंड को दिव्या की चूत से बाहर निकालकर अपने रुमाल को भी उसके मुहं से हटा लिया था. फिर उसके बाद दिव्या की पेंटी को उठाकर उसके मुँह पर फेंका और वो दोनों झट से दरवाजा खोलकर बाहर भाग गए. अब दिव्या वहाँ ज़मीन पर अपनी नंगी चूत से निकली खून की बूंदे और उन दोनों के लंड से निकले वीर्य के साथ उस दर्द से एकदम निढाल होकर पड़ी हुई थी. उस चुदाई ने उसके पूरे बदन को ठंडा बेजान कर दिया था. तभी मैंने अपने मोबाईल का कैमरा बंद किया और अंदर जाकर उसको देखा कि वो अब बेहोश हो चुकी थी.

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