बहन के साथ चोर पुलिस का खेल-2

Behan Ke Sath Chor Police Ka Khel-2

मैं- मैं पुलिस वाला हूँ, तुम चोरों को मैं अच्छी तरह जानता हूँ, हम पुलिस वालों को चोरों की जुबान खुलवाना आता है.
और मैं अंजलि की तलाशी लेने का नाटक करने लगा और उसके पूरे बदन के कपड़ों के ऊपर से दबा दबा कर देखने लगा.
वो मना करती रही- मैंने कुछ नहीं चुराया है.
मैंने उस की कोई बात नहीं सुनी और मैं उसकी स्कर्ट उतारने की कोशिश करने लगा. पर अंजलि सोच रही थी कि यह सब खेल का ही एक हिस्सा है.

मैंने अंजलि के दोनों हाथ कस कर पकड़ लिए और उसकी स्कर्ट नीचे खिसका कर निकालने लगा.
अंजलि कहती रही- मैंने कुछ नहीं चुराया है.
पर मैंने उसकी स्कर्ट नीचे खींच कर उतार ही दी. अब वह मेरे सामने सिर्फ शर्ट और पैंटी में थी और उसकी नंगी जांघें मुझे पूरी नजर आ रही थी. मेरी नजर उसकी जांघों के जोड़ पर यानि जहां बुर होती है, वहां थी, लेकिन अंजलि की बुर पैंटी से ढकी हुई थी

अब मेरी नजर अपनी बुर पर टिकी देख कर अंजलि समझ गई कि कुछ तो गड़बड़ है. भाई ने खेल खेल में मेरी स्कर्ट उतार कर मुझे नंगी कर दिया?
वो बोलने लगी- भाई, तुम यह क्या कर रहे हो? खेल में इतना सब कुछ नहीं करते हैं.
तो मैंने अंजलि को कहा- यार ऐसे ही खेलेंगे, ऐसे ही मजा आयेगा. जब तू पुलिस वाली बनेगी तो तू भी मेरे साथ जो चाहे कर लेना.
मेरे ऊपर तो वैसे ही कामुकता चढ़ी हुई थी, मैं तो अपनी बहन को पूरी नंगी करना चाह रहा था.

फिर मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और कहा- मैं तुम्हें चोरी के इल्जाम में गिरफ्तार करता हूँ.
और यह कहते हुए मैंने उसके दोनों हाथ कस कए एक कपड़े से बांध दिये.
अंजलि अब इसे भी खेल ही समझ रही थी.

फिर मैंने उसके बाल पकड़े और उसके पैरों को फैला कर पूछा- बता… कहां छुपा के रखा है चोरी का माल?
ऐसा कहते ही मैंने उसकी चड्डी उतार दी और अब मेरी बहन मेरे सामने नीचे से नंगी हो गयी. मेरी नजर अपनी बहना की बुर पर थी, उसकी बुर पर छोटे छोटे बाल थे, लग रहा था कि वो अपनी झांटों की सफाई करती थी.

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तभी अंजलि मुझे कहने लगी- प्लीज भाई, अब मुझे यह खेल नहीं खेलना है.
पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने कहा- चुप कर चोरनी… एक तो चोरी करती है और ऊपर से पुलिस से जुबान लड़ाती है?
और मैं उसकी दोनों टाँगों को फैला कर के अपना चेहरा उसकी जांघों के बीच ले जा कर उसकी बुर को गौर से देखने लगा.
वाहह.. क्या बुर थी उसकी गुलाबी गुलाबी… बुर के दोनों होंठ आपस में चिपके हुए थे जैसे अभी सील बंद हो!
और मैंने अपनी एक उंगली उसमें डाल दी और बोला- चोरी का माल इसके अन्दर छुपाया है क्या?
और उसकी बुर को मैं अपनी एक उंगली से सहलाने लगा.

और अब मेरी बहन भी मजा लेने लगी पर मुझे दिखाने के लिए शरीफ बन रही थी, मुझे रोक भी रही थी. पर मैंने तो उसे अब बाँधा हुआ था और मैं ऐसा दिखावा कर रहा था कि मैं अब भी खेल ही खेल रहा हूँ.
पर अब तक मैं यह भी समझ चुका था कि वो नाटक कर रही है और उसे इस खेल का पूरा मजा आ रहा है.

तो मैंने उसकी बुर में अपनी एक उंगली डाल दी और जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा. उसकी बुर में से थोड़ा थोड़ा पानी निकलने लगा तो मैं समझ गया कि मेरी बहन की बुर पानी चुद रही है, इसकी वासना जाग रही है, यह गर्म होने लगी है.

फिर मैं खड़ा हो गया और अंजलि से पूछा- बोल चोरनी, आराम से सच सच बता दे कि चोरी का माल कहाँ छुपाया है तूने? देख ले, मैं बहुत गुस्से वाला हूँ.
अंजलि अब मुझे कामुक नजरों से देखने लगी और बोली- मैंने कुछ नहीं चुराया सर!
मैंने कहा- सारे चोर ऐसे ही बोलते हैं.

अब मैं उसकी शर्ट उतारने की कोशिश करने लगा. पर उसके दोनों हाथ बंधे हुए थे इसलिये शर्ट पूरी नहीं उतार पाया लेकिन उसकी शर्ट उसके बदन से निकाल के उसकी बांहों में कर दी मैंने.
अब मेरी आँखों के सामने मेरी बहन की नंगी चुची थी छोटी छोटी सी… उनके गुलाबी रंग के निप्पल भी अभी छोटे थे.

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मैंने अपने दोनों हाथों से एक एक चुची को पकड़ कर दबाया और मुझे बहुत मजा आया. जब मुझ से रुका ना गया तो मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुंह में ले लिया और मेरी बहन अंजलि सिसकारियाँ भरने लगी, उसके निप्पल को चूसना उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था.

अब मैं अपने एक हाथ से उसके एक निप्पल को पकड़ कर खींच रहा था और दूसरे को जोर जोर से चूस रहा था. वाह… क्या मजा आ रहा था… एक अजीब सा स्वाद था. वो स्वाद मुझे आज भी याद है.
अब वो आआः आआआ आह्ह्ह करने लगी, अपनी छाती मेरे चेहरे पर दबाने लगी.
अब मैं इस खेल को चुदाई में बदलने के लिए तैयार था क्योंकि अब मेरी प्यारी बहन की बुर मेरा लंड मांग रही थी और मुझे उसकी वासना की संतुष्टि करनी थी.
मैंने तभी उसे पूछा- अंजलि, मजा आ रहा है ना?
वो मेरी बात सुन कर शरमा गयी और कुछ नहीं बोली, उसके चेहरे की मुस्कान सब कुछ बयाँ कर रही थी.

अब तो मुझे हरी झंडी मिल गयी, मैंने तुरंत उसके आठ खोले, उसकी शर्ट उतारी और उसे गले से लगाया. अब मैंने उसके होंठों का चुम्बन लिया, उसे होंठों पर जीभ फेरी और उसके एक होंठ को चूसने लगा.
मेरी बहन अंजलि ने अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर रख लिए और चुम्बन में मेरा सहयोग करने लगी.

कुछ देर बाद मैंने अपनी शोर्ट को नीचे खिसका कर अपना लंड बाहर निकाला और अपनी फुफेरी बहन के हाथ में थमा दिया. वह बड़े ध्यान से मेरे लंड को देख रही थी. शायद उसें पहली बार लंड देखा था…
मैंने उसे लंड पर हाथ आगे पीछे करने को कहा तो वो वैसे ही करने लगी.
तभी मैंने उससे पूछा- यार अंजलि. कैसा लग रहा है.
उसने फिर से मुस्कुरा कर अपना चेहरा नीचे झुका लिया और मेरी छाती पर सर टिका लिया.

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मैंने उससे पूछा- क्या तूने कभी सेक्स किया है?
और वह फिर मेरी तरफ देख कर हंसने लगी.
मुझे कुछ समझ नहीं आया कि अंजलि पहले चुद चुकी है या नहीं!

अब मैंने देर करना उचित नहीं समझा और मैंने बिना देर किये उसे कमरे में लाकर बेड के किनारे बिठा कर लिटा दिया, इससे उसका सिर, पीठ और चूतड़ बेड पे थे लेकिन टांगें नीचे लटक रही थी, मैंने उसकी टाँगें उठाई और अपना लंड अंजलि की चूत पर रख कर अंदर को धकेला तो मेरा लंड मेरी बहन की चूत में रगड़ता हुआ घुस गया और उसके मुख से निकला- उम्म्ह… अहह… हय… याह…
वो सीत्कारें भरने लगी, मुझे भी बहुत मजा आ रहा था, मैं उसे धीरे धीरे चोदने लगा, वो भी अपने चूतड़ थोड़े थोड़े हिला कर मेरा साथ देने लगी. तब मैं अपनी बहन की चुत चुदाई तेज तेज करने लगा. और वो आनन्द से चिल्लाने लगी- असाह्ह आआह आह्ह ह्ह स्सशआ आह्ह्ह… भाई… आह!
दस मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ने ही वाला था तो मैंने उसे बताये बिना अपना लंड अपनी बहन की बुर से बाहर निकाल कर उसके पेट पर अपना माल छोड़ दिया. मेरे लंड से निकली गर्म पिचकारी ने उसके सारे पेट और नाभि को माल से भर दिया.

मैं हैरान था कि मेरी बहना मुझसे चुदाने के बाद भी हंस रही थी. मैंने उससे पूछा- मेरी बहन, भाई से चुदाई करवा के तुझे मजा आया?
और उसने अब सर हाँ में हिला कर जवाब दिया.
मैं खुश हो गया कि मेरी बहन को मेरे लंड से मजा मिला है.

अपनी बुआ की बेटी यानी फुफेरी बहन की वो चुदाई मुझे आज तक भली भान्ति याद है.
मैं अपनी इमेल नहीं दे रहा हूँ.

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