बहन की सलवार का नाड़ा

Behan ki salwar ka nada

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम मनीष है और मेरी यह पहली कहानी है. में बैंगलोर में रहता हूँ और मेरे घर में मेरी एक छोटी बहन और मेरे मम्मी पापा रहते है. मेरे पापा सरकारी कर्मचारी है. यह एक सच्ची घटना है, जिसने मेरी लाईफ को ही चेंज कर दिया था. अब में आपका समय ख़राब ना करते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ. जब गर्मी के दिन थे, में और मेरी छोटी बहन रीमा गर्मी के कारण नीचे लेटे हुए थे. उस टाईम मेरी उम्र 20 साल की थी और मेरी बहन 18 साल की थी.

उसके बूब्स बहुत ही अच्छे थे और एकदम शानदार गोल बूब्स. दोस्तों उसके बूब्स अभी ज़्यादा बड़े नहीं थे, शायद 32 साईज के होंगे, लेकिन उसकी गांड और बूब्स देखकर किसी भी लड़के का लंड एकदम तैयार हो सकता था. हम दोनों उस टाईम पर बातें कर रहे थे कि अचानक से मेरा हाथ अपने आप उसकी बॉडी से टच हुआ. फिर वो एकदम से बोल पड़ी कि भैया क्या कर रहे हो? तो में चौंक गया, क्योंकि मेरा हाथ टच करने की कोई गलत भावना नहीं थी तो मैंने कुछ नहीं कहा और अपना हाथ हटाने के साथ ही बोल पड़ा कि क्यों? क्या हुआ? मैंने क्या किया है? तो वो बोली कि कुछ नहीं.

अब में समझ गया था कि वो क्या सोच रही थी? फिर में जानबूझ कर उसके हाथ को पकड़कर बोलने लगा कि क्यों? क्या हुआ? तो उसने कुछ नहीं कहा और हम फिर से बातें करने लगे. फिर में अपने एक हाथ से उसके बालों को सहलाने लगा. में ऐसा करता था, तो उसे अच्छा लगता था और मुझे भी उसके कंधो से उसके लंबे बालों में अपना हाथ फैरना बहुत अच्छा लगता था. में कभी-कभी ऐसा करते हुए उसके गले में भी अपना हाथ फैरता था, लेकिन आज ऐसा करते-करते वो शायद सो गयी थी, लेकिन मैंने ऐसा करना जारी रखा, क्योंकि मुझे तो मजा आ रहा था. फिर मैंने उस दिन उसके गले में, कान में, गाल में सभी जगह अपने हाथ को लगाया, तो मेरा लंड ऐसा करते हुए एकदम खड़ा हो गया था. अब मेरी साँसे तेज चल रही थी.

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फिर मैंने देखा कि रीमा की भी नींद टूट रही थी, तो मैंने अब अपना हाथ फैरना बंद कर दिया, लेकिन वो एकदम से बोल पड़ी कि क्या हुआ भैया? प्लीज करो ना, बहुत अच्छा लग रहा है, तो में उसे टच करता रहा. फिर मैंने धीरे से अपना एक पैर उसकी जांघो पर रख दिया और उसकी बॉडी पर अपना एक हाथ फैरता रहा. फिर तभी मेरी माँ की आवाज़ आई खाना रख दिया है सब आ जाओ, तो हम दोनों चले गये. फिर उसी रात को मेरी कुछ हिम्मत बड़ी, हम दोनों भाई बहन एक ही रूम में सोते थे. अब जब वो सोने के लिए लेटी ही थी, तो तभी में उसकी बाजू में अपना एक हाथ फैरने लगा. फिर उसने कुछ नहीं कहा और वो सलवार कमीज पहनकर सोती थी.

फिर मैंने उसके गाल पर अपना एक हाथ फैरा. अब उसकी आँखें खुली थी और वो मुझको देख रही थी, लेकिन वो कुछ नहीं बोली और करवट बदलकर उल्टी होकर लेट गयी. अब उसका चेहरा अभी भी मेरी तरफ था और उसकी आँखें खुली थी. अब उसकी कमीज उसके कूल्हों तक उठी हुई थी और उसकी सलवार कुछ पारदर्शी होने के कारण उसकी पेंटी साफ़-साफ़ नजर आ रही थी. फिर मैंने उसके कूल्हों पर अपना एक हाथ रखा तो ऐसा लगा कि वो बेहोश ही होने वाली है. फिर तभी वो बोल पड़ी कि भैया क्या कर रहे हो? प्लीज सोने दो ना, कल स्कूल भी जाना है.

फिर मैंने कहा कि तू सो जाना, में तो तुझको सुला ही रहा हूँ. फिर रीमा बोली कि ऐसे नींद कहाँ आएगी? आप क्या कर रहे हो? तो में बोला कि कुछ नहीं, तू सोने की कोशिश कर अभी नींद आ जाएगी. फिर रीमा ने कहा कि ठीक है और उसने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली, लेकिन वो सो नहीं रही थी.

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फिर मैंने उसकी पूरी पीठ पर अपना एक हाथ फैरा तो उसने ब्रा पहनी थी. फिर तभी उसकी ब्रा का हुक मेरे हाथों से टकराया, तो उसकी आँख खुली और बोली कि आप सोने नहीं दे रहे हो. फिर मैंने कहा कि अच्छा सो जा, अब नहीं करूँगा और फिर उसने अपनी आँखें बंद कर ली. फिर मैंने उसके कूल्हों पर अपना एक हाथ फैरा और उसकी कमीज को और ऊपर कर दिया.

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अब उसकी सलवार के ठीक ऊपर उसकी लाईट ब्लू पेंटी का ऊपर का हिस्सा साफ-साफ़ नजर आ रहा था और वो सीन बहुत ही उत्तेजित था, मैंने पहली बार अपनी बहन की पेंटी को देखा था, आआअहह.

फिर मैंने उसकी पेंटी की इलास्टिक को अपने हाथ में लिया, वो बहुत टाईट थी. अब मेरे ऐसा करते ही उसने अपनी आखें फिर से खोल ली थी और हल्के से मुस्कुरा दी और बोली कि भैया आप नहीं मनोंगे.

फिर मैंने कहा कि में कुछ नहीं कर रहा हूँ, वो तेरी पेंटी सलवार से बाहर आ रही है उसे में वो. फिर रीमा बोली कि वो क्या? बोलो ना, अब वो मुस्कुरा रही थी और उसके चेहरे पर एक चालक हंसी थी और फिर बोली कि अच्छा उसे अंदर कर दो और प्लीज अब सोने दो.

फिर मैंने एकदम से उसकी पेंटी को अपने हाथ से पकड़कर अंदर किया, लेकिन वो अंदर नहीं हो रही थी, क्योंकि उसकी सलवार का नाड़ा बहुत टाईट बंधा था. अब वो समझ गयी थी और सीधी लेट गयी और बोली कि 1 मिनट रुको और लेटे-लेटे ही अपनी कमीज ऊपर की और अपनी सलवार का नाड़ा खोलकर ढीला कर दिया और फिर से उल्टी हो गयी और बोली कि अब कर दो.

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अब मेरा तो लंड इस टाईम एकदम सीधा खड़ा हुआ था और मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आज क्या हो रहा है? फिर मैंने झटके से उसकी पेंटी को नीचे सरका दिया और पीछे से उसकी चूत में अपना खड़ा लंड डाल दिया. फिर वो जोर से चिल्लाई आहहहहह में मर गयी. अब में धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था और वो आहें भर रही थी. अब हम दोनों का पहली बार था तो अब हम दोनों 5 मिनट में ही अपनी चरम सीमा पर पहुँच गये थे. अब उसकी चूत से खून निकलने लगा था और उसकी आँखों में आँसू थे.

फिर थोड़ी देर के बाद उसने अपना पानी छोड़ दिया और मैंने भी अपना लंड बाहर निकालकर मेरा पूरा पानी उसके पेट पर गिरा दिया. फिर हम पूरी रात ऐसे ही एक दूसरे से चिपककर सो गये. फिर मैंने आगे भी मेरी बहन की खूब चुदाई की और हमने खूब मजा किया.

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