भाभी और मेरे आंसू

Bhabhi aur mere aasun

हैल्लो दोस्तों,  में अभी इंजीनियरिंग कर रहा हूँ और 1 साल पहले मेरे पड़ोस के भाई की शादी हुई थी, जिसमें में नहीं आ सका था, क्योंकि मेरे एग्जॉम चल रहे थे. फिर जब में होली पर घर आया था, तो भाभी अपने घर चली गई थी और बाद में भैया और भाभी विदेश चले गये थे. अब में भाभी से पूरे 1 साल के बाद मिलने वाला था, मैंने उनको अभी तक ना देखा था ना में उनका नाम जानता था, वो मेरे पड़ोस में रहती थी इसलिए मुझे कोई जरूरत नहीं थी. फिर में छुट्टी लेकर घर आया तो मैंने सबके पैर छुए माँ, चाची, ताई, पड़ोस की सभी औरतों के और वहीं नई भाभी भी खड़ी थी, तो माँ ने कहा कि इसके भी छू. फिर मैंने जैसे ही भाभी की तरफ देखा तो मेरी आँखों में पानी आ गया और भाभी भी मुझे देखती ही रही.

फिर माँ ने पूछा कि क्या हुआ? तो मैंने कहा कि नींद आ रही है में जा रहा हूँ, लेकिन मेरी आँख में पानी का कारण नींद नहीं मेरी भाभी दीप्ति थी. वो मेरे स्कूल की हेडगर्ल थी, में 5वीं से 9वीं तक अपनी बुआ के पास पढ़ा हूँ, तो उसी स्कूल में दीप्ति हेडगर्ल थी, वो बहुत ही सुंदर थी, में हमेशा दीप्ति को देखता रहता था. फिर एक दिन में पूरे जोश के साथ दीप्ति के पास गया और बोला कि आई लाइक यू, तो दीप्ति बोली कि तुम कौन सी क्लास में हो?

मैंने कहा कि 9वीं में और उससे पूछा कि तुम कौनसी क्लास में हो? तो उसने कहा कि 12वीं में. फिर दीप्ति बोली कि अभी तुम बच्चे हो अगर तुम मेरे साथ के होते तो में तुम्हारी गर्लफ्रेंड जरुर बनती और फिर वो हँसने लगी, उसकी हंसी बहुत प्यारी थी.

फिर उसने मेरे सिर पर अपना हाथ फैरा और अपना हाथ बढ़ाकर कहा कि वी आर फ्रेंड्स, तो मैंने भी हाथ मिला लिया. अब मेरे लिए तो यही काफ़ी था और में इसे ही प्यार समझता था. अब रोजाना दीप्ति मुझसे हाथ मिलाती और मेरी पढ़ाई के बारे में पूछती, तो में खुश हो जाता.

एक दिन दीप्ति ने मुझसे हाथ मिलाया तो वो मेरा हाथ देखकर बोली कि तुम्हें तो बुखार है, तुम स्कूल क्यों आए? तो मैंने कहा कि तुम्हें देखने, तो वो हल्की सी हंसी और मेरे गाल पर किस की और बोली कि मेरा प्यारा दोस्त. फिर उसने मुझे छुट्टी दिलवाकर घर भेज दिया, मेरे लिए यह जन्नत का दिन था.

ऐसे ही टाईम गुज़रता रहा और अब मैंने 9वीं क्लास पास करके घर के पास के स्कूल में ही एड्मिशन ले लिया था और दीप्ति ने भी 12 वीं क्लास पास कर ली थी और हमारा रिश्ता यही ख़त्म हो गया था, लेकिन में दीप्ति को भुला नहीं पाया था, वो मेरा प्यार थी, लेकिन अब वही दीप्ति अब मेरी भाभी बन चुकी थी. अब मेरा दिल रो रहा था और अब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या करूँ?

फिर माँ ने मुझे उठाया और कहा कि जा दीप्ति को डॉक्टर के पास ले जा, तो में मना करने लगा, लेकिन माँ मान ही नहीं रही थी और कहा कि तेरी भाभी बाहर खड़ी है, तो मैंने देखा कि दीप्ति नीले कलर की साड़ी में बहुत सुंदर लग रही है और वो अपनी निगाहें नीचे झुकाकर खड़ी है. फिर मैंने अपना गुस्सा छोड़कर अपनी बाइक निकाली और दीप्ति को डॉक्टर के पास ले गया. अब में बाहर खड़ा हो गया था. फिर जब दीप्ति पहली बार बोली कि राहुल प्लीज मेरे साथ अंदर चलिए. अब दीप्ति की आवाज़ में एक रेस्पेक्ट सी थी.

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वो डॉक्टर से टेस्ट करवाने चली गई और जब वो आई, तो में पैसे देने लगा, तो दीप्ति बीच में ही पैसे देने लगी. फिर मैंने दीप्ति की तरह देखा, तो फिर उसने अपना हाथ पीछे सरका लिया और मैंने डॉक्टर को पैसे दे दिए और फिर हम घर आ गये. फिर मैंने अपनी बाइक खड़ी की और अब दीप्ति मुझे पैसे देने के लिए खड़ी थी, लेकिन में दीप्ति की बिना देखे ही अपने घर में चला गया.

अब रात को में अपनी छत पर घूम रहा था. अब दीप्ति की घर की छत हमारे घर से लगी हुई थी, तो जैसे ही मैंने दीप्ति को छत पर देखा तो में अपने कमरे में चला गया. फिर अगले दिन में अपने कमरे में टी.वी देख रहा था, तो मेरी माँ दीप्ति को कमरे ले आई और उससे बातें करने लगी. अब दीप्ति बीच- बीच में मुझे देख रही थी.

ऐसे ही बातों-बातों में माँ ने उससे पूछा कि तुम कौन से स्कूल में पढ़ी हो? तो उसने स्कूल का नाम बताया, तो स्कूल का नाम सुनते ही माँ बोली कि इस स्कूल में तो राहुल भी पढ़ा है, तुम दोनों एक दूसरे को जानते होंगे. तो मैंने झट से जवाब दिया कि नहीं हम नहीं जानते और फिर में कमरे से बाहर चला गया. अब दीप्ति मुझे देख रही थी, तो तभी माँ बोली कि पता नहीं इसे क्या हो गया है? अज़ीब-अज़ीब सी बातें करता है और फिर माँ और दीप्ति एक दूसरे से बातें करने लगी.

अब शाम को दीप्ति के घर से चिल्लाने की आवाजे आ रही थी, तो मैंने देखा कि दीप्ति रो रही थी और ताई और भैया उस पर चिल्ला रहे थे. अब मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था. फिर दीप्ति ने मुझे देखा और अपना मुँह थोड़ा फैर लिया.

मैंने घर आकर माँ से कहा तो माँ ने कहा कि तुझे क्या? उनकी बहू है वो चाहे कुछ भी करे. फिर मुझे माँ के मुँह से ऐसी बातें सुनकर बड़ा अजीब सा लगा. फिर अगले दिन दीप्ति को फिर से डॉक्टर के पास ले जाना था. अब मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये चक्कर क्या है? आज रिपोर्ट का दिन था. अब दीप्ति की आँखे सूज़ी हुई थी जैसे वो सारी रात रोई हो और वो अभी भी रो रही थी. अब मुझे अपनी ताई और भैया पर बहुत गुस्सा आ रहा था.

में दीप्ति को अपनी बाइक पर बैठाकर ले जाने लगा. अब दीप्ति अभी भी रो रही थी. फिर हमने रिपोर्ट ली और वापस घर आने लगे, लेकिन अब वो चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी. फिर मैंने अपनी बाइक रोकी और उसके गाल से आँसू पूछे, तो इतना करते ही वो राहुल बोलकर मुझसे लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी, तो में ऐसे ही खड़ा रहा.

फिर थोड़ी देर के बाद वो हटी और मुझसे सॉरी बोली, तो मैंने उसे रुमाल दिया, तो उसने अपना चेहरा साफ़ किया. फिर मैंने पूछा कि दीप्ति बात क्या है? तो दीप्ति बोली कि तुम्हारे मतलब की बात नहीं है, तो मुझे गुस्सा आया और हम घर जाने लगे.

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मैंने अपनी बाइक खड़ी की और अपने घर में जाने लगा, तो दीप्ति बोली कि प्लीज राहुल हमारे घर चलो मुझे बहुत अकेला महसूस हो रहा है, प्लीज तुम्हें हमारी पिछली दोस्ती की कसम और फिर में दीप्ति के साथ उनके घर में चला गया. अब में और दीप्ति बैठकर बातें कर रहे थे, तो मैंने कहा कि दीप्ति में तुम्हें अभी भी उतना ही प्यार करता हूँ जितना पहले करता था.

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दीप्ति मुस्कुराकर उठकर चलने लगी तो उसकी साड़ी का पल्लू सोफे के बीच में फंस गया और फिर जैसे ही वो मुडी तो उसके सीने पर से पल्लू गिर गया. अब मुझे दीप्ति के दोनों कच्चे आम जैसे बूब्स दिखने लगे थे, लेकिन मेरे दिल में कोई गलत वासना नहीं थी. फिर दीप्ति चिल्लाई राहुल, तो में उठकर मैन गेट पर आ गया.

फिर दीप्ति ने पीछे मुड़कर देखा तो उसका पल्लू सोफे में फंसा था तो उसने मुझसे सॉरी कहा. तो मैंने गुस्से में कहा कि तुम हमेशा मुझे गलत ही समझती हो, बचपन में तुमने मेरे प्यार को गलत समझा और आज भी और ये कहकर में अपने घर आ गया.

थोड़ी देर में दीप्ति मेरे घर पर आई, अब हमारे घर में मेरे अलावा कोई नहीं था. फिर वो मुझे गुस्से में देखकर मेरे पास आई और मेरे बालों में अपना हाथ फैरा और फिर मेरे गाल पर किस ली और बोली कि मेरे प्यारे दोस्त मुझे मांफ कर दो.

में दीप्ति की तरफ घुमा और उसके गाल पर किस की और कहा कि मांफ कर दिया, उसके गाल बहुत नर्म थे और फिर हम दोनों हँसने लगे. फिर मैंने दीप्ति से पूछा कि में तुम्हें कैसा लगता हूँ? तो उसने कहा कि अच्छा, तो मैनें पूछा कि कितना? तो दीप्ति ने कहा कि अगर मेरी शादी नहीं हुई होती में तुमसे कर लेती, इतना अच्छा, तो में बहुत खुश हुआ.

फिर मैंने दीप्ति के हाथ पकड़कर चूमे. फिर मैंने दीप्ति से कहा कि सच-सच बताना ये डॉक्टर और तुम्हारा रोने का क्या कारण है? तो ये सुनते ही दीप्ति मेरे गले लग गई और रोने लग गई, तो मैंने फिर से पूछा, तो दीप्ति ने बताया कि ताई और भैया उसे मारते है क्योंकि वो बच्चा नहीं दे सकती, लेकिन दीप्ति बोली कि मुझमें कोई कमी नहीं है तुम मेरी रिपोर्ट देख लो, तुम्हारे भैया में कमी है, लेकिन वो मानते ही नहीं है और मुझे मारते है और यह कहकर फिर से रोते हुए मेरे गले लग गई.

अब इस बार दीप्ति ने मुझे इतनी ज़ोर से गले लगाया था कि उसके बूब्स मेरी छाती में दब गये थे. फिर अचानक से मेरे हाथ दीप्ति की कमर पर चलने लगे और दीप्ति के भी हाथ मेरी कमर पर चलने लगे थे. फिर मैंने उससे कहा कि तुम भैया को छोड़ दो, तो वो बोली कि बदनामी होगी और फिर कौन मुझसे शादी करेगा? अब मेरे हाथ दीप्ति की गांड पर पहुँच गये थे और फिर मैंने उन्हें अपनी तरफ दबाया तो दीप्ति ने मुझे कसकर जकड़ लिया.

अब मेरा लंड तन चुका था, जो दीप्ति की जांघो में चुभ रहा था. अब में और दीप्ति एक दूसरे को बुरी तरह से भींच रहे थे. अब उसके निप्पल खड़े हो चुके थे, जो मुझे महसूस हो रहे थे. अब दीप्ति हल्के- हल्के मौन कर रही थी और फिर में दीप्ति के फूल की पंखुड़ियों जैसे होंठो को चूसने लग गया.

अब दीप्ति ने भी अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी थी, क्या स्वादिष्ट जीभ थी उसकी? अब मेरे हाथ दीप्ति के बूब्स पर आ गये थे, जिन्हें में अच्छी तरह से दबा रहा था और बीच-बीच में उसके निप्पल भी भींच रहा था. अब दीप्ति गर्म हो रही थी और बोली कि मुझे अपनी बना लो राहुल, मुझे बच्चा दे दो, मुझे चोदो, मेरी फाड़ दो.

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ये सुनकर मैंने दीप्ति का ब्लाउज फाड़ दिया और उसकी ब्रा उतारकर ज़ोर-ज़ोर से उसके निप्पल को चूसने लगा गया. अब दीप्ति पूरी गर्म हो गई थी, अब वो चिल्ला रही थी आआआअ राहुल फुक मी, आआअहह, आआहह. अब मेरा एक हाथ दीप्ति की चूत पर पहुँच गया था, अब में वहाँ मसाज करने लगा था. अब दीप्ति मरने जैसी हो रही थी.

फिर मैंने दीप्ति को अपनी बाँहों में उठाया और बेडरूम में लेकर गया और अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो गये थे. फिर में वापस से दीप्ति के निप्पल चूसने लग गया और अपने एक हाथ से दीप्ति की चूत में उंगली डाल दी, जो बहुत ही मुश्किल से जा रही थी. तब दीप्ति ने बताया कि वो अब तक सिर्फ़ 5 बार ही चुदी है, तो में ख़ुशी से झूम गया, उसकी अभी तक सील भी नहीं टूटी है, भैया बाहर ही झड़ जाते थे. अब दीप्ति पूरी गर्म हो चुकी थी और अब वो मेरे लंड को अपने हाथ से दबा रही थी. अब हम 69 की पोज़िशन में आ गये थे. फिर जैसे ही मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रखा, तो उसने पिचकारी छोड़ दी, तो में उसका सारा जूस पी गया. अब मेरा लंड भी पूरा तन गया था.

फिर मैंने दीप्ति की गांड के नीचे 2 तकिये लगाए और अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का दिया, उसकी चूत बहुत टाईट थी. अब मेरा लंड 2 इंच ही उसकी चूत में गया था. तो तभी वो ज़ोर से चिल्लाई उूउउईईईईई माँ, मेरे राजा आराम से करो.

ये सुनते ही मैंने एक और ज़ोरदार झटका मारा तो मेरा लंड उसकी सील तोड़ता हुआ पूरा उसकी चूत की गहराई में उतर गया. अब मैंने उसका मुँह अपने मुँह में ले लिया था, जिससे उसकी आवाज़ नहीं निकली थी, लेकिन दर्द से उसके आँसू निकल गये थे. अब वो अपने हाथ पैर मार रही थी, लेकिन में भी उसे छोड़ने वाला नहीं था, अब में उसके निप्पल चूसने लगा था. फिर थोड़ी देर के बाद में उसको भी मज़ा आने लगा और अब वो भी अपनी गांड उछाल- उछालकर मेरे हर धक्के का साथ दे रही थी और जोर- ज़ोर से चिल्ला रही थी कि फाड़ दो मेरी हाईई, में आपकी हूँ, आप ही मेरे पति हो, मुझे बच्चा दे दो, एससस्स फुकककक मी और फिर ऐसे ही करते-करते हम झड़ गये और फिर इस तरह से मैंने दीप्ति को 35 बार चोदा. फिर आज दीप्ति का मुझे फोन आया कि वो प्रेंग्नेट है, तो में उससे मिलने के लिए उसके घर भाग गया और फिर मैंने आपके लिये ये कहानी लिखी.

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