भाभी के साथ खेला चुदाई का खेल-3

Bhabhi ke sath chudai ka khel-3

फिर में बिल्कुल दंग हो गया और उनसे पूछ बैठा कि यह सब क्या है भाभी और ऐसा क्यो? तो भाभी ने कहा कि अच्छा बच्चू पहले तो सपने में बहुत ज़ोर ज़ोर से मेरी चुदाई की और मज़ा भी बहुत लिया और वो सब कुछ किया और कुछ बाकी ना छोड़ा और अब नींद खुल गई है तो पूछते हो कि यह सब क्या है? तो जो हो रहा था, वो सब क्या था? मैंने कहा कि में बिल्कुल भी समझा नहीं कि आप यह सब क्या कर रही है?

भाभी ने कहा कि इतने भोले मत बनो और में सब जानती हूँ कि तुम्हारे मन में मुझे पाने के लिए कितनी बैताबी थी और अभी भी है और कई बार तो मैंने तुम्हे सपने में मेरे नाम से मुठ मारते हुए भी देखा है और कुछ दिन तो तुम दोपहर को जब सोते हो तो अपने लंड को लोवर से बाहर निकालकर मेरा नाम लेते हुए मुठ मारते हो और जब से मैंने तुम्हारा इतना मोटा और बड़ा लंड देखा है तो मेरा भी मन था कि में तुम्हारे लंड को अपनी चूत का मज़ा दूँ और तुम्हारे लंड का में मज़ा लूँ, लेकिन कुछ हो नहीं रहा था, लेकिन तुमने रात को मेरे पैर पर अपनी जांघे अड़ा दी और थोड़ी थोड़ी देर में मेरे पैरों को सहला रहे थे. फिर तुम अचानक अपने हाथ को अपनी पजामे में ले जाकर अपने लंड को पकड़कर ज़ोर से ऊपर नीचे करके हिलाने लगे और तभी तुमने उस अपने नाग को बाहर निकालकर हिलाना शुरू कर दिया, जिसे में अपनी आखों के सामने देखकर बिल्कुल दंग हो गयी और बस फिर तो उसे पाने के लिए बैताब हो गयी और में तो कब से चाहती भी थी.

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फिर तुम मेरा नाम लेकर मुठ मारने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तभी मैंने सोचा कि तुम्हारे इस लंड की प्यास में जरुर बुझाऊँगी और फिर मैंने भी हिम्मत करके तुम्हारे लंड को अपने हाथ में लेकर उसे हिलाना शुरू किया तो तुमने अपना हाथ छोड़ दिया. फिर मैंने उसे अपने मुहं में लेकर बहुत देर तक चूसा, जैसे कि वो एक लोलीपोप हो और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, क्योंकि मैंने कभी इतना मोटा और लंबा लंड नहीं देखा और तुम्हारे भैया का भी इतना बड़ा नहीं है और मेरी चूत के आखरी तक नहीं पहुंच पाता.

फिर मैंने धीरे धीरे से अपने सभी कपड़े उतार दिए और तुम्हारा पजामा भी उतार दिया और तुम्हारी शर्ट को भी ऊपर से खोल दिया और खुद भी बिल्कुल नंगी होकर मुझे चाटने लगी और ऊपर से लेकर नीचे तक प्यार करने लगी और फिर कुछ देर बाद तुम्हारे ऊपर चड़कर तुम्हारे लंड को अपनी चूत के छेद के दर्शन करवाए और जैसे ही तुम्हारे लंड को अपनी चूत में डालना शुरू किया तो मुझे शुरू में थोड़ा बहुत दर्द जरुर हुआ, क्योंकि तुम्हारा लंड बहुत मोटा और लंबा है, लेकिन में फिर भी धीरे धीरे से इसे अपनी चूत के भीतर गहराईयों में ले जाना चाहती थी, लेकिन मुझे बहुत दर्द हो रहा था और पूरा मज़ा भी आ रहा था.

फिर जैसे ही मैंने तुम्हारे लंड के ऊपर नीचे होना शुरू किया तो में बिल्कुल पागल ही हो गई, क्योंकि मुझे इतना मज़ा तो आज तक अपनी चुदाई में पहले कभी नहीं आया था और मेरी चूत ने कभी किसी के लंड से इतनी गहराई से चूत नहीं मरवाई थी, जो कि अब धीरे धीरे फट रही थी और में ज़ोर ज़ोर से कह रही थी कि हाँ और ताकत से और ज़ोर से धक्का मारकर मेरी चूत को फाड़ डालो. फिर तुम हवा में शायद मेरे बूब्स ढूढ़ रहे थे और तभी तुम्हारा हाथ मेरे बूब्स पर आ गया और मैंने भी अपने बूब्स को तुम्हारे हाथों के हवाले कर दिया, जिसे तुमने तो बस नींबू की तरह ही निचोड़कर खाली कर दिया और बीच में तो तुम मेरे एक बूब्स को इतनी शिद्दत से पी रहे थे, जैसे मुझे लगा कि आज तो इनमें से किसी एक का वज़न कम होकर ही रह गया और तुम तो बस पागल की तरह मेरे एक एक बूब्स को दबाते ही जा रहे थे और मुझे दर्द के साथ साथ अच्छा ख़ासा मज़ा भी आ रहा था.

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फिर एक बार चुदाई करते करते तुम मेरी चूत में ही झड़ गये और में तुम्हारी एक साईड में लेटकर तुम्हारे ऊपर अपने पैर और हाथ रखकर थोड़ी देर के लिए रुक गयी और फिर से मेरा मन हुआ कि क्यों ना एक बार और किया जाए? तब मैंने तुम्हारे लंड को खड़ा करने के लिए तुम्हारे लंड को अपने मुहं में फिर से लेकर चूसना, चाटना शुरू कर दिया और तुम्हारा लंड खड़ा होते ही फिर से एक बार यह सब शुरू हो गया और तभी तुम्हारी नींद खुल गयी और तुम कह रहे हो कि यह सब क्या है?

दोस्तों अब मैंने भी मन ही मन इस मौके का फ़ायदा उठाना ठीक समझा, क्योंकि जब हम दोनों ही एक दूसरे को पाने की उम्मीद से है तो क्यों ना अब सारी दूरियों को मिटा दें? अब वो मुझसे बोली कि वैसे भी तो तुम्हारे भैया भी 6 दिन के लिए बाहर है तो क्यों ना हम एक दूसरे की प्यास को मिटा दें?

दोस्तों उन्होंने अपने मुहं से यह बात कहकर मेरे मन की बात को अपने मुहं से कह दिया, क्योंकि अब में भी उनसे वहीं चाहता था, जिसकी उन्हे मुझसे उम्मीद थी. फिर हम दोनों ने पूरे 6 दिनों और रातों को लगातार बहुत जमकर सेक्स किया. पहले दिन तो मैंने भाभी की बहुत जमकर गांड मारी और दूसरे दिन भाभी के साथ बाथरूम में शावर के नीचे और बाथटब में चुदाई का खेल खेला.

फिर तीसरे दिन भाभी के साथ किचन में उन्हे किचन की शेल्फ के ऊपर बैठाकर बहुत जमकर चोदा और चौथे दिन भाभी को डॉगी स्टाइल में खड़ा करके कुतिया की तरह चोदा और पाँचवे और छठे दिन तो भाभी भी बिल्कुल पागल सी हो गई थी, क्योंकि बेड पर आते ही भाभी सिर्फ़ और सिर्फ़ सेक्स ही करना चाहती थी और जब में उसकी चूत को मारता तो भाभी अपनी चूत को उठा उठाकर मेरे लंड को अपनी चूत में अंदर तक घुसाती और मुझे और खुद को बहुत मज़ा देती थी. अब जब भी हमे मौका मिलता है तो में भाभी पर चड़ जाता हूँ और भाभी भी मेरा पूरा पूरा साथ देती है, लेकिन मेरी यह चुदाई ज्यादा समय नहीं चली क्योंकि करीब तीन महीने की चुदाई के बाद भैया का तबादला हो गया और अब भैया भाभी के साथ मुंबई चले गये और में फिर से एक बार बिल्कुल अकेला हो गया हूँ, लेकिन में आज भी उनकी चूत को सोच सोचकर मुठ मारता हूँ. दोस्तों यह थी मेरी चुदाई की कहानी जिसमे मैंने बहुत मज़े किए.

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