मैंने अपने देवर से चुदवा लिया-2

(Bhabhi Ki Chudai Ki Desi Kahani : Maine Apne Devar Se Chudwa Liya- Part 2)

उसके बाद मैं बाथरूम से बाहर आ गई. जय अभी सो रहा था. मेरे मन में अभी भी उसके लंड का ख्याल बार बार आ रहा था. मैं उसके लंड को बार बार देखना चाहती थी. मैं उसके रूम में पहुँची तो जय सो रहा था. आज उसकी लुंगी खुल कर बेड के नीचे जमीन पर पड़ी थी. उसका लंड एकदम खड़ा था. मैंने उसकी लुंगी उठा कर ड्रेसिंग टेबल पर रख दी. उसके बाद मैं जय के बगल में बैठ गई और उसके लंड को देखने लगी. धीरे धीरे मुझे जोश आने लगा और मेरी आँखें गुलाबी सी होने लगीं.

मेरा मन कर रहा था कि मैं उसके लंड को पकड़ लूँ लेकिन मेरे मन में ख्याल आया कि जय क्या सोचेगा. कहीं वो बुरा ना मान जाये. मैं बहुत देर तक उसके लंड को देखती रही. जोश के मारे मेरी चुत गीली होने लगी. मुझसे और ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने उसके लंड को पकड़ लिया. जय फिर भी नहीं उठा तो मैं उसके लंड को सहलाने लगी.

लंड छूने के दो मिनट में ही जय उठ गया. उसने मुझे अपना लंड सहलाते हुए देखा तो बोला- लगता है कि आज चुदवाने का इरादा है.
मैंने कहा- कुछ ऐसा ही समझ लो.
वो बोला- फिर आ जाओ.
इतना कह कर कर जय ने मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया. मैं जोश में आ चुकी थी, इसलिए कुछ भी नहीं बोल पाई. उसके लंड को हाथ लगाने से मेरे सारे बदन में आग सी लगने लगी थी.

जय ने मेरे होंठों को चूमते हुए कहा- और तेजी से सहलाओ.
मैं चुपचाप उसके लंड को तेजी से सहलाने लगी. मैं उसका लंड सहलाती रही और वो मेरे होंठों को चूमता रहा. थोड़ी ही देर में उसका लंड एकदम टाईट हो गया. उसके लंड का सुपारा बहुत ही मोटा था और एकदम गुलाबी सा दिख रहा था.

मैंने अपनी उंगली उसके लंड के सुपाड़े पर फिरानी शुरू कर दी तो जय आहें भरते हुए बोला- ओह भाभी, बहुत मजा आ रहा है.
जय जोश के मारे पागल सा हुआ जा रहा था. उसने मेरे बदन पर से तौलिया को खींच कर फेंक दिया तो मैं एकदम नंगी हो गई. मैंने शर्म से अपनी आँखें बंद कर लीं. उसने मेरे निप्पलों को मसलना शुरू कर दिया. मैं जोश से पागल सी होने लगी. मेरी चुत और ज्यादा गीली हो गई.

जय ने मेरा चेहरा अपने लंड की तरफ़ करते हुए कहा- देखो भाभी, तुम्हारे सहलाने से ये पूरे जोश में आ गया है.
मैंने अपनी आँखें खोल दीं.
वो बोला- भाभी मेरे लंड को अपने मुँह में ले लो.

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उसने मेरा सिर पकड़ कर अपने लंड की तरफ़ खींच लिया तो उसके लंड का सुपारा मेरे मुँह से सट गया.
उसने कहा- लंड चूसो ना भाभी..

मैंने उसके लंड के सुपारे को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी.

मैं बहुत देर तक उसके लंड को चूसती रही. वो एक हाथ से मेरा सिर सहलाता रहा और दूसरे हाथ से मेरे मम्मों को मसलता रहा. थोड़ी देर बाद उसके लंड का जूस मेरे मुँह में निकलने लगा. मैंने अभी तक राज के लंड के जूस का स्वाद नहीं लिया था, इसलिए मुझे उसके लंड के जूस का स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था. मैं उसके लंड का सारा जूस निगल गई.

जय बहुत खुश हो गया और बोला- आज तो मजा आ गया. अब चुदवाओ..
मैंने कहा- नहीं.
वो बोला- क्यों.. अभी तो कह रही थीं कि चुदवाओगी… अब कह रही हो.. नहीं?
मैंने कहा- तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है.. मुझे दर्द बहुत होगा.
वो बोला- तो क्या हुआ, मजा भी तो आएगा.

इतना कह कर उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी चुत को सहलाने लगा. मेरे सारे बदन में बिजली सी दौड़ने लगी. उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. मैंने भी जोश के मारे उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद जय ने एक उंगली मेरी चुत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.

अब मुझे खूब मजा आने लगा. मैंने भी जोश के मारे अपने चूतड़ उठाना शुरू कर दिए. थोड़ी ही देर बाद मुझे लगा कि मेरी चुत से कुछ निकलने वाला है.
मैंने शर्माते हुए जय से कहा- अपनी उंगली बाहर निकाल लो.
वो बोला- क्यों, अच्छा नहीं लग रहा है?
मैंने कहा- बहुत अच्छा लग रहा है. लेकिन मुझे लग रहा है कि मेरी चुत से कुछ निकलने वाला है.
वो बोला- ये तो बहुत अच्छी बात है. जैसे मेरे लंड से जूस निकला था, उसी तरह तुम्हारी चुत से भी जूस निकलेगा.

मैं सच में नहीं जानती थी कि औरत की चुत से भी जूस निकलता है क्योंकि आज तक मेरी चुत का जूस कभी निकला ही नहीं था.

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इतना कह कर जय उठा और मेरे ऊपर 69 की पोजीशन में हो गया. उसने अपनी जीभ मेरी क्लिट पर फिराते हुए मेरी चुत को चाटना शुरू कर दिया. मेरे सारे बदन में सनसनी सी होने लगी.
मैंने जय का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी. मैं एक हाथ से जय का सिर अपनी चुत पर दबाने लगी तो वो मेरी चुत को और ज्यादा तेजी के साथ चाटने लगा. मैं और ज्यादा जोश में आ गई. मैंने जय का लंड तेजी के साथ चूसना शुरू कर दिया.
अब तक मैं एकदम बेकाबू हो चुकी थी और चाहती थी कि जय मुझे चोद दे.

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तभी मेरी चुत से कुछ गर्म गर्म सा निकलने लगा. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. जय ने मेरी चुत का सारा का सारा जूस चाट लिया.

जय का लंड भी फिर से खड़ा हो चुका था. मेरी चुत का सारा जूस चाट लेने के बाद जय मेरे पैरों के बीच आ गया. उसने मेरे दोनों पैरों को फैला कर अपने लंड का सुपारा मेरी चुत के बीच रख दिया. उसके बाद उसने मेरे दोनों मम्मों को मसलते हुए अपने लंड के सुपारे को मेरी चुत पर रगड़ना शुरू कर दिया.

मेरे सारे बदन में गुदगुदी सी होने लगी और जोश में आ कर मैं सिसकारियां भरने लगी.
थोड़ी ही देर में उसका लंड पूरी तरह से टाईट हो गया. तभी उसने एक धक्का लगा दिया. दर्द के मारे मेरे मुँह से चीख निकल गई. उसके लंड का सुपारा मेरी चुत में घुस गया था. मुझे लग रहा था कि किसी ने गरम लोहे को भाला मेरी चुत में घुसेड़ दिया हो. लेकिन मैंने जय को बिल्कुल भी मना नहीं किया क्योंकि मैं पूरे जोश में आ चुकी थी और जय का पूरा लंड अपनी चुत के अन्दर लेना चाहती थी.

तभी उसने एक जोर का धक्का और लगा दिया. दर्द के मारे मेरे मुँह जोर की चीख निकली और मेरी आँखों में आंसू आ गए. मुझे लग रहा था कि जैसे कोई गरम लोहा मेरी चुत को चीरते हुए अन्दर घुस गया हो.
मैंने दर्द से तड़फते हुए कहा- बाहर निकाल लो अपना लंड, बहुत दर्द हो रहा है.
उसने कहा- थोड़ा बर्दाश्त करो, फिर खूब मजा आएगा.

उसका लंड मेरी चुत में 3″ तक घुस चुका था. तभी उसने एक धक्का और लगाया. मैं दर्द से तड़फ उठी. ऐसा लग रहा था कि कोई मेरी चुत को बुरी तरह से फैला रहा हो. मेरी चुत उसकी सीमा से बहुत ज्यादा फैल चुकी थी. उसका लंड 4″ तक मेरी चुत में घुस चुका था.
मैंने कहा- जय, अब रहने दो, बहुत दर्द हो रहा है. तुम इतना लंड ही डाल कर मुझे चोद दो. बाक़ी का लंड बाद में घुसा देना.
वो बोला- बाद में क्यों, क्या तुम मेरा पूरा लंड अपनी चुत में नहीं लेना चाहती हो?
मैंने कहा- लेना चाहती हूँ.
वो बोला- तो फिर पूरा अन्दर लो.

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इतना कहने के बाद उसने पूरे ताकत से एक जोर का धक्का और दे मारा. दर्द के मारे मैं तड़फ उठी और मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा. उसका लंड मेरी चुत में 5″ तक घुस गया था. मैं सिसकारियां लेने लगी.
वो बोला- रो क्यों रही हो?
मैंने कहा- बहुत दर्द हो रहा है. मुझसे ये दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा है. मेरी चुत फट जाएगी.

तभी कॉलबेल बजी.. हम दोनों घबड़ा गए. जय बोला- इस समय पता नहीं कौन आ गया?
मैंने कहा- अब तो रहने दो और जा कर देखो कि कौन आया है.
वो बोला- जाता हूँ, पहले मैं पूरा लंड तो घुसा दूँ.
मैंने कहा- बाद में घुसा देना.
वो बोला- नहीं, मैं अभी ही घुसाऊंगा.. तुम अपने होंठों को जोर से जकड़ लो, जिससे तुम्हारे मुँह से चीख ना निकले.

मैंने अपने होंठों को जोर से जकड़ लिया. उसने मेरी कमर को पकड़ कर बहुत ही जोर का धक्का लगा दिया. मैं मछली की तरह तड़फने लगी. मुझे लग रहा था कि मेरी चुत फट जाएगी. मेरे मुँह से चीख निकलने ही वाली थी कि जय ने अपने हाथ से मेरा मुँह दबा दिया. उसके बाद उसने पूरी ताकत के साथ 2 धक्के और लगा दिए. मेरे मुँह से केवल गूं गूं की आवाज ही निकल पाई और उसका पूरा का पूरा लंड मेरी चुत में समा गया.

मैं दर्द के मारे तड़फ रही थी और मेरा सारा बदन पसीने से नहा गया था. मेरे पैर थर थर कांप रहे थे. मेरा दिल बहुत तेजी के साथ धड़कने लगा था और मेरी साँसें भी बहुत तेज चलने लगी थीं. मुझे लग रहा था कि मेरा दिल अभी मेरे मुँह के रास्ते बाहर आ जायेगा.

जरा सा रुकने के बाद जय ने एक झटके से अपना पूरा का पूरा लंड बाहर खींच लिया. मुझे लगा कि मेरी चुत भी उसके लंड के साथ ही बाहर आ जाएगी. पक्क की आवाज के साथ उसका लंड मेरी चुत से बाहर आ गया. उसने मुझे अपना लंड दिखाते हुए कहा- देखो भाभी, तुम्हारे कुंवारी चुत की निशानी मेरे लंड पर लगी हुई है.

इसके बाद आपको मैं कहानी का अगले भाग में बताऊंगी कि मैंने अपने देवर के मोटे लंड से चूत चुदाई की डिग्री हासिल कर लेने के बाद क्या क्या गुल खिलाए.
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