भाबी जी लंड पर हैं-2

(Bhabi Ji Lund per hain-2)

तभी भाबी ने मुझे इतनी गंभीरता से खिड़की से नीचे झांकते हुए देखा, तो कहने लगीं- क्या हुआ देवर जी … तुम नीचे क्या देख रहे हो?
मैं उनसे कुछ कहता, इससे पहले भाबी मेरे सिकुड़े हुए लंड की तरफ इशारा करते हुए कहने लगीं- और अपने इस औजार को तो देखो, कैसा चूहे सा सिकुड़ गया है.
मैंने भाबी की बात सुनी, तो मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया.

मैंने कहा- भाबी, मैं सोच रहा हूँ क्यों ना आज हम आंगन में चुदाई करें?
ये कहते हुए मैं हंसने लगा.
भाबी- नहीं नहीं देवर जी, आंगन में नहीं … अगर कोई आ गया तो मुश्किल हो जाएगी.

मैंने अब तक अपने खड़े हो चुके लंड को हिलाया, तो भाबी अपनी दोनों टांगें मेरे सामने खोलती हुई बोलीं- और अब आओ ना देव … देखो ना इसमें क्या चुभ रहा है.

भाबी की क्लीन और गोरी चिट्टी चुत देख कर मेरा लंड फिर से लोहे का सरिया सा कड़क हो कर खड़ा हो गया.
मैं- भाबी, आपकी ये नटखट सी चुत कुछ मूसल जैसा बड़ा सा खाना चाह रही है.
भाबी- हां बिल्कुल … और अब तुम्हारे जैसा लंड इसे जल्दी नहीं मिला, तो पता नहीं इसका क्या हाल हो जाएगा.

मैं बेड पर आ कर लेटा ही था कि भाबी मुझ पर कूदते हुए झपट पड़ीं. भाबी के इस तरह झपटने से मेरा लंड अचानक ही भाबी की चुत को चीरता हुआ थोड़ा अन्दर घुस गया. जिससे भाबी की चीख निकल गई.

मैंने भाबी की दोनों टांगें चौड़ी करते हुए उनकी चुत के होंठों को खोला और अपना लोहे जैसे तना हुआ लंड भाबी की चुत पर रख भाबी के चूतड़ों को पकड़ अपना लंड भाबी की चुत की गहराइयों में घुसाने लगा.

मैंने महसूस किया कि भाबी की चुत अब भी उतनी ही टाइट है, जैसे पहले थी. मेरा लंड भाबी की टाइट चुत को फाड़ता हुआ असीम आनन्द को प्राप्त करने लगा. भाबी की टाइट चुत भी आज मेरे लंड को ऐसे चबाए जा रही थी कि जैसे मेरे लंड को पूरा निगल ही जाएगी. सच में उनको चूत मेरे लंड को निगल भी रही थी.

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भाबी भी मस्त हो कर अपनी टांगें चौड़ी करके अपना टाइट भोसड़ा मुझसे चुदवा रही थीं. मेरे लंड महाराज भी भाबी की चुत की गहराइयों को नापे जा रहे थे.

इसी बीच मैंने भाबी को लंड पर कूदने का इशारा किया.
जैसा कि भाबी लंड पर काफ़ी अच्छे से कूदती हैं. तो अब भाबी अपनी टांगें फैलाए हुए अपना खुला भोसड़ा मेरे लंड पर रखते हुए पूरा वजन मेरे लौड़े पर रख दिया. भाबी मेरे लंड पर पूरा बैठ गई थीं. मेरा लंड भी भाबी की चुत को चीरता हुआ पूरा अन्दर तक घुस गया था.

इसके बाद तो आह क्या मदमस्त मजा आना शुरू हुआ … उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरी तो आहें निकल गईं. भाबी जी क्या जम कर मेरे लंड पर कूदीं जिस मैं शब्दों में तो बयान ही नहीं कर सकता.
भाबी ने मेरे लंड पर कूदते कूदते मेरे लंड को अपने रस से बिल्कुल गीला कर दिया था. भाबी जी की गांड इतनी मस्त मचल रही थी कि क्या कहूँ. उनकी गांड लंड पर कूदते हुए किसी को भी अपना शैदाई बना दे. भाबी के इस तरह गांड को उठा उठा कर लंड पर बैठने की अदा मुझे बड़ी भा रही थी.

तभी मुझे एक शरारत सूझी. भाबी के इस तरह लंड पर कूदते हुए खेल के दौरान ही मैंने भाबी के दोनों कूल्हों के बीच के छेद में उंगली घुसा दी, जिससे भाबी भी चिहुंक उठीं- देव, अब इसमें भी अपना ये मूसल डालोगे क्या?
मैं- हां भाबी … पता नहीं कब से मुझे आपकी गांड मारने का मन कर रहा है.

भाबी- नहीं देव … उधर नहीं … उधर बहुत दर्द होगा … और तुम्हारा इस मूसल लंड से तो मेरे छोटे से छेद की माँ चुद जाएगी. तुम्हारा लंड तो मेरी गांड को फाड़ देगा. फिर मैंने कभी पीछे से नहीं किया है देव … प्लीज़ पीछे की जिद मत करो.
मैं- भाबी प्लीज़ आज मत रोको … आज अपनी गांड मरवा ही लो … मैं फिर कभी ये ज़िद नहीं करूँगा.
भाबी- प्लीज़ देव अपने लंड का साइज़ तो देखो … तुम्हें लगता है मैं इसे पीछे बर्दाश्त कर भी पाऊंगी?
मैं- भाबी, प्लीज़ दर्द तो फर्स्ट टाइम सबको होता है … लेकिन इतना दर्द भी नहीं होता. वैसे भी अब तो मैं आपका पति हूँ ना … तो प्लीज़ मुझे पीछे करने दीजिए. भाबी में तेल लगा कर करूँगा, जिससे कि आपको पेन बहुत कम फील होगा.

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मेरी जिद के चलते आख़िरकार भाबी ना ना करके पीछे से करवाने के लिए राज़ी हो ही गईं. मैंने पास में रखी तेल से भरी बोतल उठाई और अपने लंड को पूरा तेल में तर कर लिया. इसी के साथ ही भाबी को मैंने घोड़ी की पोज़िशन में बिठा दिया. भाबी के चूतड़ इतने भारी थे कि उनके दोनों चूतड़ आपस में सटे हुए थे, जिस वजह से भाबी की गांड का छोटा सा छेद वैसे ही दिखाई नहीं दे रहा था.

मैंने भाबी के भारी चूतड़ों को थोड़ा सा खोला, जिससे कि उनका वो छोटा सा गुलाबी छेद मुझे दिखाई दे गया. उस मस्त गुलाबी फूल जैसे गांड के छेद में मुझे अपना मोटा लंड घुसाने की तमन्ना जाग उठी. मैंने भाबी के चूतड़ों को थोड़ा खोल कर छेद पर तेल लगा दिया. फिर भाबी के चूतड़ों को फैला कर अपना लंड भाबी के छेद से सटा दिया. मेरे लंड का सुपारा उनकी गांड के फूल में लग चुका था. मैंने भाबी के भारी कूल्हे पकड़े और एक करारा स्ट्रोक जड़ दिया.

मेरे लंड का सुपारा भाबी की गांड में घुस गया और भाबी तेज दर्द से चीख उठी थीं. इसी तरह केवल सुपारे को भाबी की गांड में आगे पीछे करते हुए मैंने फिर से एक ज़ोरदार स्ट्रोक दे मारा. इस बार मेरा आधे से ज्यादा लंड भाबी की टाइट गांड में घुस गया. भाबी दर्द से चीख उठीं- हाय मैं मर गई माँ …

मैंने फ़ौरन से भाबी का मुँह दबा दिया और ताबड़तोड़ ऐसे कई झटके उनकी गांड पर लगाता चला गया, जिससे कि भाबी की गांड को गड्डा बन गया. भाबी जी मेरा पूरा लंड अपनी गांड में दर्द सहित लेती रहीं.

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अब जैसे ही भाबी की गांड में मेरा पूरा लंड अन्दर घुसता, उनके भारी कूल्हे मेरी जांघों पर लगते, जिस वजह से मेरा लंड और बुरी तरह की गांड को चोदता. भाबी भी अपनी दोनों टांगें खोल कर अपनी भारी गांड मेरे लंड पर लगा देतीं, जिससे मेरा मूसल भाबी की गांड फाड़ता हुआ अन्दर बाहर होकर उनको चोदता जा रहा था.

दसेक मिनट की गांड चुदाई के बाद अब मेरा लंड भी माल निकालने वाला हो गया था. मैंने फ़ौरन भाबी की गांड से लंड निकालते हुए उनके भारी कूल्हों पर अपना सारा माल निकाल दिया.

भाबी मेरे लंड से निकले हुए माल को खुद की गांड पर ही मलने का इशारा देते हुए उल्टी लेट गईं. मैं भाबी के कूल्हों पर गिरे हुए माल को अपने लंड से मलने लगा.

आखिर भाबी ने गांड मरवा ही ली. इस तरह भाबी के ना ना करते हुए भी मैंने उनकी गांड का स्वाद चख लिया था. थोड़ी देर बाद हम दोनों नहाने चले गए. फिर भाबी अपने काम में लग गईं.

एक घंटे बाद राम भैया और माँ भी आ गईं. माँ और भैया के आते ही मैं अपने फ्रेंड्स से मिलने बाहर जा ही रहा था कि तभी सामने से ऊपर किरायेदार भाबी आती दिखाई दीं. भाबी की ब्लू साड़ी देखते ही मेरा दिमाग़ ठनक गया. क्योंकि ये तो वही साड़ी थी, जिसे मैंने चुदाई करते वक़्त खिड़की से देखा था.

भाबी के सामने से आते हुए और लगातार मुझे देख कर नॉटी स्माइल करते हुए देख कर मेरा शक अब भाबी पर होने लगा था.

इसके बाद कैसे भाबी की शरारती मुस्कान का सिलसिला बढ़ने लगा, ये मैं आपको अपनी नेक्स्ट स्टोरी में बताऊंगा. मेरी लाइफ की इस देवर भाभी सेक्स की सत्य घटना को पढ़ने के आपका धन्यवाद.

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