भाई की रखैल बन सहेली संग लेस्बियन-1

Bhai ki rakhel ban saheli sang lesbian-1

नमस्कार दोस्तों मैं आर्यन हरियाणा का रहने वाला। आशा करता हूं आप सभी तंदरुस्त है। यह कहानी आप hotsexstory.xyz पर पड़ रहे हैं। आपने मेरी पहली रचना पड़ी जो आप सभी को बेहद पसंद आईं उसके लिए आप सभी का तहे दिल धन्यवाद्। पहली रचनाओं के भाग – Aryan Ek Sex Katha-1 Aryan Ek Sex Katha-2 Aryan Ek Sex Katha-3 Aryan Ek Sex Katha-4 Aryan Ek Sex Katha-5 आर्यन एक सेक्स कथा-6

सबसे पहले मैं आप सभी पाठकों और रचनाकारों को संदेश देना चाहता हूं, अगर आप एक गरम कहानी लिखना चाहते हैं, और मदद की जरूरत हो तो बेशक आप मुझे मेल करें।

मैं हमेशा देखता हूं कि बहुत सारी महिला रचनाकार अपना मेल एड्रेस कहानी में नहीं देती हैं कही उनकी बदनामी ना हो जाए, तो उन सब रचनाकारों से मैं कहना चाहूंगा की आप मुझे [email protected] पर मेल करके संपर्क करें।

आप अपनी कहानी में मेरा ईमेल डाल सकती हैं। कहानी के प्रकाशित करने से पहले एक बार जरूर बात कीजिए। आपके जो भी मेल मेरे ईमेल अकाउंट पर आएंगे, उनका जवाब आपको तुरंत बिना किसी लाभ के दिया जाएगा।

अब मैं कहानी पर आता हूं।
मैं 24 साल का जवान लड़का हूँ। देखने में बहुत ही हैंडसम हूँ। मेरे मोहल्ले की सारी लडकियां मरती हैं मुझ पर।

लेकिन मैं भी किसी को घास नहीं डालता। मेरी पर्सनैलिटी को देख कर अच्छे अच्छे घर की लडकियां भी फ़िदा हो जाती हैं। लेकिन सच तो यह था कि किसी भी लड़की से बोलने से मुझे डर लगता था।

इसीलिए मैं कभी किसी को गर्लफ्रेंड नहीं बना पाया। एक लड़की से कॉलेज में पहुचते पहुचते आँख मटक्का भी किया। तो उसका बाप उसे लेकर कही और ही चला गया। उसकी चूंचियो को मैं आज तक नही भूल पाया।

मेरे नसीब में लग रहा था चूत की एक भी झलक नहीं लिखी है। लेकिन क्या पता था, कि मुझे मेरे घर में ही चूत मिल सकती है। वो भी सिखा जैसी खूबसूरत लड़की की।

फ्रेंड्स बात कुछ ही दिन पहले की की है। जब मैंने अपनी दीदी से चुदाई करना सीखा। उनका नाम सिखा है। वो बहुत ही सुंदर और कामुक लगती है। उनके कसमसाती बदन को देखने में बहुत ही आनंद मिलता है।

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मै भी उनको खूब ताड़ता था। लेकिन मैंने अभी तक उनको चोदने की नजर से नहीं देखा था।

मै और दीदी सभी लोग साथ में हाल में आ गए। कुछ मेहमान भी आये थे। दीदी ने बहुत ही जबरदस्त कपड़े पहने थे। आज उनका जन्मदिन था।

उनकी ब्रा की पट्टियां अच्छे से साफ़ साफ़ गुलाबी रंग की दिख रही थी। लेकिन मुझे क्या पता था की आज इन्हें छूने का अवसर भी मिलेगा। मैने भले ही किसी को अभी तक चोदा न था, लेकिन चोदने की तड़प मुझमे कूट कूट कर भरी हुई थी।

मेरा ठंडा लंड गरम होकर बड़ा होने लगा। मुझसे अब रुका नहीं जा रहा था। मेरा लंड पैंट को फाड़कर बाहर आने को मचलने लगा। मेरी दीदी ये सब शायद देख रही थी। मैं वहाँ से किसी तरह से भाग कर बाथरूम में आया।

बीस मिनट तक हाथ से काम चलाने के बाद मेरा माल निकल आया। सब माल निकाल कर थोड़ा अच्छा फील क़िया। उसके बाद मैंने पैंट पहना और फिर से सबके साथ चला आया। अब मेरा लंड शांत हो चुका था।

दीदी ने केक काटा। सभी लोग तालियां बजा कर हैप्पी बर्थडे टू यू……. कहने लगे। उसके बाद सब लोग खाना खाकर मजे से बात कर रहे थे। रात काफी हो चुकी थी।

पडोसी और सारे मेहमान अपने अपने घर चले गए। घर पर मम्मी पापा ही थे। वो लोग भी थक कर कुछ ही देर में सो गये।

मुझे और दीदी को नींद ही नहीं आ रही थीं। हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे। सिखा बहुत गोरी और चिकनी लड़की थी। उसका बदन भरा हुआ और गदरया गरम बदन था।

कोई भी मेरी दीदी सीखा को देखकर फ़िदा हो जाता, वह इतनी सुंदर हैं।

सीखा- “आर्यन तुम्हे नींद आ रही है?”
मै- “नहीं दीदी मुझे नहीं आ रही। आपको?”
सिखा – “मुझे भी नहीं आ रही है यार”
मैं- “दीदी चलो हम सब बात करते हैं”

दीदी का बिस्तर मेरे बिस्तर से दूर था।

दीदी- “तेज बोलोगे तो आवाज होगी। तुम मेरे बेड पर ही आ जाओ”
मै- “ओके दीदी”
दीदी- “और बताओ आज पार्टी में मजा आया??”
मै- “बहुत मजा आया। वो आपकी दोस्त लोग बहुत अच्छी थी”

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दीदी- “क्यों मै अच्छी नही लगती क्या”
मैं- “तुम तो बात ही न किया करो। आपसे भी कोई अच्छा हो सकता है क्या।

आप तो लाखो में एक हो” ऐसा मैंने उनकी गुलाबी रंग की ब्रा की तरफ देखते हुए कहा।

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सिखा- “तुम्हारी नजर कहाँ है?”
मै- “कही नहीं। मैं तो दीवार को देख रहा था” मुझे डर लगने लगा।
सिखा- “आर्यन मेरी पीठ में खुजली हो रही है”
मै- “दीदी मै खुजला देता हूँ”

सिखा मेरी तरफ अपनी पीठ करके लेट गई। मै खुजलाने लगा। उनकी ब्रा की पट्टियां मेरे हाथों में लग रही थी। मेरा लंड तो रॉकेट की तरह खड़ा होने लगा। मै बहुत ही बेचैन होने लगा।

हुक सहित मै पूरे ब्रा की पट्टियों पर हाथ फिराने लगा। वो मुझे देख कर हँसने लगी। मै “क्या बात है दीदी”

दीदी- “देख लो मेरी पीठ पर लाल लाल तो नही हुआ है कुछ। मुझे अब भी खुजली हो रही है”
मै- “नहीं दीदी आप जाकर शीशे में देख लो”
दीदी- “देख लो यार आज मुझे मना न करो मेरा जन्मदिन है।

इतना कहकर उन्होंने अपनी नेट वाली टी शर्ट को उठाकर गले पर कर लिया। मुझे सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा था। उनका मुह टी शर्ट से ढका हुआ था। मैंने उनके गोरी गोरी चूंचियों को देखने लगा। आगे की चूंचियो को देखकर मैं पीछे की खुजली की बात करने लगा। उनकी गोरी चूंचियो को देखकर मैंने कहा- “दीदी सब नार्मल है। कही एक भी दाग नहीं नजर आ रहा” दिल तो कर रहा था अभी इन खरबूजों को काटकर खा जाऊं।

मेरी नजर ही वहाँ से नहीं हट रही थी। दीदी ने अपनी टी शर्ट को मुह से हटाया तो मुझे चूचियों को ताड़ते हुए देख लिया। मैंने कहा- “दीदी मै अभी इधर एक कीड़े को जाते देखा था। पता नही कहाँ गायब हो गया”

दीदी ने कहा- “मुझे इस टी शर्ट में खुजली हो रही है। मैं इसे निकाल देती हूँ।

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इतना कहकर उन्होंने टी शर्ट निकाल कर चादर ओढ़ ली। मुझे भी ठण्ड लगने लगी। मैंने कहा- “दीदी मै जा रहा हूँ अपने बिस्तर पर मुझे ठण्ड लग रही है”

उन्होंने चादर उठाते हुए मुझे ढका और चिपकाने लगी। मेरे सीने में उनकी 34″ की चूंचिया लग रही थी। मैं कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था। उनकी चूंचियो को दबाने का जी करने लगा।

सिखा- “आपने अपनी किसी गर्लफ्रेंड को नहीं बुलाया था मेरे जन्मदिन की पार्टी मे।

मै- “कोई होगा तभी तो बुलाऊंगा। जब कोई है ही नहीं तो किसको बुला लूं”
सिखा- मुझसे झूठ बोल रहे हो तुम?

मै- “नहीं दीदी मै झूठ नहीं बोल रहा। आपकी कसम!

सिखा- “तुम इतने बड़े हो गए। और तुम्हे ये सब प्यार मुहब्बत वाली ए बी सी डी नहीं पता”
मै- “नही मुझे नहीं पता”

दीदी ने मेरी तफरी लेनी शुरु कर दी। मुझसे पता नहीं क्या क्या कहकर मजाक करने लगी। मै भी चुपचाप सब सुनता रहा।

उन्होंने कुछ देर बाद हँसना बंद किया तो मैंने कहा- “इतना भी नहीं है कि मैं कुछ नही जानता।

मैंने अभी तक कुछ किया नहीं है, लेकिन मुझे सबकुछ पता है।

सिखा- “तू भी ब्लू फिल्म देखता है”
मै- “हाँ देखता हूँ तुम्हारे ही फ़ोन से”

दीदी चौंक गई।

सच दोस्तों मुझे इसका कुछ भी पता नहीं था, कि सिखा भी देखती हैं। मैंने भी जैसे तैसे अपनी सारी बात कह डाली।

दीदी कहने लगी। आज जन्मदिन के मौके पर एक शो – टोरी ब्लैक का देख ही लेते है। मैंने भी हाँ में हाँ मिला दी।

दीदी ने अपना लैपटॉप उठाया और एक इयरफोन लगाकर देखने लगी। मैं भी एक इयरफोन लगाकर आवाज सुन रहा था।

दीदी देख देख कर गरम होने लगी। कंधे पर रखे अपने हाथों से मुझे दबाने लगी। मै भी मौक़ा नहीं गवाना चाहता था। आज मैं अपने अंदर के भड़ास को निकालना चाहता था।

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