बुआ की लड़की की चुदाई-2

Bua ki ladki ki chudai-2

एक दिन मेरे मन में आया क्यो ना लवी को अपने लवी के दर्शन कराऊँ। तो मेरे दिमाग मे आईडिया आया और एक दिन मै नहाने के बाद टॉवल लपेटकर बहार आया तो देखा के लवी नल पर बैठकर मुह धुल रही है और मेरा कमरा बथरूम और नल के बिल्कुल सामने था तो मै तौलिये मे ही बाथरूम से बाहर निकल कर कमरे मे आ गया और कमरे मे आकर उसकी देखने लगा और मैने अपने कमरे का दरवाजा बंद नहीं किया और अपनी चारपाई पर इस तरह बैठ गया जिससे मेरा लंड तौलिया के अंदर से लवी को पूरा दिख जाये इसलिए आज मै बिना निकर ही तौलिया पहने उसको बैठकर देखने लगा और उसको देखते देखते मेरा लंड तौलिया के अंदर ही पूरा खड़ा हो चुका था।

फिर मै सोच रहा था कि लवी का ध्यान मेरी तरफ करने के लिए लवी को आवाज दी। और नार्मल बात करने लगा वो नल के पास बैठी थी और मै उसके सामने बैठा बात करने लगा तभी मैने देखा कि लवी की नजर मेरे लंड पर पड़ी और बो बात करते हुए मेरे लण्ड को देख रही थी। और मै उसको लण्ड के दर्शन कराता रहा। करीब 10 मिनट तक उसको लण्ड के दर्शन कराये फिर मैने देखा कि अब बो शर्माते हुए नजर छिपाते हुए बात करने लगी और फिर मुझे अजीब लगा तो मैं चारपाई से उठकर अंदर आ गया और कमरा बंद करके मुठ मारने लगा। मुठ मारने के बाद मै सो गया और जब जागा तो पढाई करने लगा।

फिर शाम को जब मै छत पर टहल रहा था तो लवी भी छत पर टहल रही थी और तो मैने ऐसे ही चलते हुए लवी से पूँछ लिया कि कैसा लगा? तो मेरी तरफ देखने लगी लेकिन कुछ जवाब नही दिया। और मेरी तरफ देखते हुए तहलते हुए आगे निकल गयी लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। तो मैंने भी बात को बढाना सही नही समझा और अपने मोबाइल फोन में ध्यान लगाते हुए तहलता रहा और नीचे आ गया फिर पढाई करने के बाद सो गया। ऐसे ही धीरे धीरे समय निकलने लगा और करीब 10-12 दिन बाद बुआ जी घर जाने लगी तो तो उस दिन शनिवार था तो संतोष भी घर चला गया था और बुआ ने मुझे बताया कि वो अमन को लेकर गाँव जा रही है और लवी यही रहेगी तो उसको अपने साथ ही पढ़ा लेना तो मुझे ये सुनकर बहुत ही खुश हो गया और हा करते हुए सिर हिलाते हुए उनको जाने को बोल दिया और करीब एक घंटे बाद बुआ जी अमन के साथ गाँव निकल गयी। और फिर मै स्कूल से लवी के आने का इंतज़ार करने लगा।

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मुझे ये नहीं पता कि लवी गाँव जाना क्यो नहीं चाहती थी जब भी बुआ जी उसको साथ चलने को कहती तो मना कर देती थी और इसलिए बुआ जी उसको मेरे साथ छोड़कर चली गई। बुआ जी के जाते ही बारिश शुरू हो गयी उस समय बारिश का मौसम था। इसलिए बारिश होना आम बात थी। करीब एक बजे के आसपास लवी स्कूल से आयी तो उसने खाना खाया और सो गयी लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी मेरे मन मे पूरी तरह वासना पनप चुकी थी मुझे उसको चोदने का ही ख्याल आ रहा था कि कैसे लवी की चुदाई करू? ऐसे ही सोचते हुए करीब 3 बज गए लवी जाग चुकी थी फिर वो कमरे से बाहर आई और बोली
लवी- भैया संतोष भैया भी घर चले गए है क्या?

मैं- हा संतोष तो 10 बजे ही चला गया था।
(संतोष को बुआ जी के घर जाने वाली बात का पता नही था क्योंकि बुआ जी ने बाद मे प्लान बनाया था और उन्हे पता था के मैं तो यही रहूँगा इसलिए वो मुझे बोलकर चली गई)
मैं – क्या हुआ अच्छा नही लग रहा है?
लवी- नहीं भैया
मै- तो फिर परेशान क्यो दिख रही हो?

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लवी- कुछ नहीं भैया
मैं- ठीक हैं फिर खाना खा लिया
लवी- हा भैया
मैं- अगर मन नही लग रहा है तो राधा ( उसके पास की सहेली थी जो कि उमर में उससे बडी थी) के पास होकर आ जाओ।
(लवी आमतौर पर राधा के घर हो आती थी क्योंकि उसका घर आमने सामने था।)

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लवी- नहीं भैया बारिश हो रही है
मैं- ठीक है फिर अगर स्कूल का काम पूरा कर लो
उस टाइम टीचर लिखने को बहुत काम दे देते थे क्योंकि बो नोट्स बनाने के लिए किताबों में ही टिक कर देते थे जिनको नोट्स के तौर पर लिखना होता था अगर नही नोट्स पूरे करते थे तो सजा मिलती थी)
मैं- एक काम करो मेरे पास आकर ही बैठ जाओ और अपना काम पूरा कर लो
मै उस समय पुरे दिन और रात पढाई करता था तो मै तो बैठा ही था तो उसको भी बोल दिया।
लवी- ठीक है भैया
मैं – तुम्हारे स्कूल बालों ने उत्तर ज्यादा लंबे टिक किये होंगे लाओ मैं उनको शॉर्ट कर देता हूँ।
लवी- ठीक है भैया।

उसके बाद बो अपनी किताबे ले आई और मैंने उनको टिक कर दिया। और वो मेरे पास ही बैठकर काम करने लगी और लिखते लिखते शाम हो गयी तभी मैंने उसको लिखने के लिए मना किया और दोनो छत पे टहलने चले गए क्योंकि शाम को बारिश रुक चुकी थी छत पे जाते ही वो सामने टहल रही राधा के साथ बात करने लगी और मैं टहलने लगा। करीब आधा घंटा के ही फिर बारिश शुरू हो गई तो हम नीचे आ गये और नॉर्मल बात करने लगे।

फिर डिनर करने के बाद लवी ने बोला – भैया मेरी तरफ इंवेर्टर् लगा हुआ और आपकी तरफ नही है तो आप भी आज इधर ही पढ़ लो और बाद में आप सो जाना तो मैं अपनी किताबे लेकर उसके साथ उसके बेड पर बैठकर पढाई करने लगा क्योंकि मेरे रूम में इंवेर्टर् की सुविधा नहीं थी और लाइट एक सप्ताह दिन और एक सप्ताह रात को आती थी और उस समय दिन का सप्ताह था और ऊपर से बारिश भी हो रही थी और मेरे पास रात को कमरे मे रोशनी करने के लिए एक सोलर लाइट थी जो काफी देर तक चल जाती थी लेकिन उसकी रोशनी में केवल एक ही बन्दा पढ़ सकता था तो मै लवी के पास ही बैठकर पढाई करने लगा और बातें भी कर रहा था और उसकी चूची भी देख रहा था क्योंकि बो अपने नोट्स लिख रही थी और बात भी कर रही थी और बीच बीच मे उसकी नजर मेरे से टकरा जा रही थी वो भी समझ रही थी कि मै उसकी चूची देख रहा हूँ। करीब आधा घंटे के बाद मैंने अपनी किताब साइड में रख दी और लवी से बात कर ने लगा। और मेरा मूड अब उसको चोदना को पूरी तरह हो चुका था।

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