बस में अंजान लड़की के साथ-1

(Bus me anjan ladki ki chudai-1)

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम अतुल मेहरा है और मेरी उम्र 20 है और में यमुनानगर का रहने वाला हूँ.. दोस्तों यह बात उन दिनों की है.. जब में 20 साल का था और में किसी काम से कुछ दिनों के लिए दिल्ली गया हुआ था.. तो मेरा पूरा दिन दिल्ली में अपना काम खत्म करने में ही लग गया और इस वजह से में अपने एक बहुत अच्छे दोस्त से भी नहीं मिल पाया.. जो कि दिल्ली में रहता है और मुझे उसी शाम को वापस निकलना पड़ा. लगभग 7 बजे में दिल्ली बस स्टैंड पर यमुनानगर की बस पकड़ने गया और जब में वहाँ पर पहुँचा.. तो एक बस निकलने को थी और में जल्दी से उस बस में चढ़ गया.. लेकिन उस बस में एक भी सीट खाली नहीं थी.

फिर मैंने दूसरी बस का इंतजार करना ठीक नहीं समझा और चुपचाप बस में पीछे जाकर खड़ा हो गया और मैंने देखा कि मेरे पीछे एक लड़की भी बस में चड़ी. उसके पास एक बहुत भारी बेग था.. जिस वजह से उसे चलती बस में चढ़ने में प्रोब्लम हो रही थी और में पिछले दरवाजे के पास ही खड़ा हुआ था. फिर मैंने उस लड़की का बेग पकड़ लिया.. ताकि वो बस में आसानी से चढ़ सके और बस में चड़ने के बाद उसने मुझे धन्यवाद बोला. फिर मैंने भी हल्की सी स्माईल के साथ उसे वेलकम कहा. दोस्तों वो लड़की बहुत सुंदर थी और क्या फिगर था उसका.. मेरे हिसाब से उसके फिगर का साईज 34-26-36 रहा होगा.

फिर मैंने उसके बेग को ठीक जगह पर सेट किया.. लेकिन उसे भी मेरी तरह बस में खड़ा होना पड़ा.. क्योंकि बस में एक भी सीट खाली नहीं थी और वो मुझसे थोड़ी आगे खड़ी हुई थी. फिर मैंने कुछ ज्यादा ध्यान नहीं दिया.. क्योंकि मेरी किसी भी लड़की को घूरने की आदत नहीं है और फिर बस स्टैंड से कुछ दूरी पर ही बाहर निकली थी और लगभग 20 या 25 मिनट बाद वो बाईपास पर पहुँचकर रुक गई.. तो वहाँ से बहुत सारे लोग बस में चड़े.. जिस वजह से बस में काफ़ी भीड़ हो गई.. क्योंकि कुछ इक्के दुक्के लोग बीच में भी बस में चड़े थे.

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अब वो लड़की बिल्कुल मेरे पास मुझसे सटकर खड़ी हुई थी और वो क्या मस्त लग रही थी. उसने पटियाला सूट पहना हुआ था.. शायद वो एक पंजाबी लड़की थी और वैसे में भी पंजाबी लड़को की तरह दिखने में अच्छा हूँ.. मेरी हाईट 5.10 इंच है और फिर वो लड़की मेरे इतने करीब थी कि में उसके शरीर की गर्मी को महसूस कर रहा था. तभी बस थोड़ी दूरी पर एक जगह रुकी और दो लोग पिछले गेट से और चढ़ गये.. इस वजह से में और वो लड़की एक दूसरे से बिल्कुल चिपक गये और अब हमारे जिस्म के बीच से हवा तक भी बाहर नहीं निकल सकती थी.. लेकिन उसने बस में ज्यादा भीड़ होने की वजह से मुझसे कुछ भी नहीं कहा. उसने गहरे गले वाला कुर्ता पहना था.. जो कि आगे और पीछे दोनों साईड से गहरे गले का था.. लेकिन पीछे का गला कुछ ज़्यादा ही बड़ा था और उसकी गर्दन के पीछे वाली साईड से उसका गोरा रंग देखकर मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा था और में उस लड़की से फिर भी जगह बनाकर खड़ा होने की कोशिश कर रहा था.. लेकिन बस में इतनी भीड़ हो गई थी कि मुझे उससे चिपककर ही खड़ा होना पड़ रहा था और ऊपर से मेरा लंड खड़ा होने लगा था. फिर मैंने अपना ध्यान और कहीं पर लगाने की बहुत कोशिश की.. लेकिन हूँ तो में भी एक मर्द ना.. कितनी भी कोशिश कर लूँ.. लेकिन अपने लंड पर कंट्रोल नहीं कर सकता और इसी वजह से मेरा लंड उसकी गांड को छूने लगा. तभी उसने पीछे मुड़कर मुझे देखा.. लेकिन में क्या कर सकता था.. भीड़ ही इतनी थी कि थोड़ी देर तक तो उसने सहन किया.. लेकिन जब उसे महसूस हुआ कि मेरा मोटा लंड उसकी गांड में घुसा ही जा रहा है.. तो वो सीट का सहारा लेकर थोड़ा तिरछा होकर खड़ी हो गई.. इस वजह से जगह थोड़ी टाईट हो गई और मेरा लंड उसकी जांघ पर छूने लगा.

वाह क्या कोमल जिस्म था उसका और ऐसे खड़े होने की वजह से उसके बूब्स की लाईन भी मुझे दिख रही थी.. क्योंकि उसके सूट का गला बहुत बड़ा था.. जिसकी वजह से उसके बूब्स मुझे साफ दिख रहे थे. उसके बहुत मस्त बूब्स थे.. एकदम टाईट बड़े बड़े और गोल थे. इस तरह खड़े होने की वजह से तो और प्रोब्लम हो रही थी. उससे वो बार बार मेरी तरफ देख रही थी और पता नहीं उसके मन में क्या आया और वो फिर से वैसे ही खड़ी हो गई.. जैसे पहले खड़ी थी.

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फिर से मेरा लंड उसकी गांड पर रगड़ खा रहा था और उसने फिर से मुड़कर पीछे देखा. फिर मैंने धीरे से उसके कान में बोला कि बस में भीड़ बहुत है और में तो ऐसा कुछ करना नहीं चाहता.. लेकिन पता नहीं यह खुद ही हो रहा है.. क्योंकि तुम बहुत सुंदर हो. फिर वो मेरी यह बात सुनकर धीरे से हंस पड़ी और मैंने भी उसको हल्की सी स्माईल दी और अभी भी मेरा लंड उसकी गांड पर ही था.. लेकिन अब उसकी तरफ से कोई भी विरोध नहीं था और कहीं ना कहीं वो भी मेरे शरीर से आकर्षित हो गई थी और में धीरे धीरे उसकी गांड पर लंड को रगड़ने लगा.. तो वो भी मज़े कर रही थी और फिर मैंने उससे उसका नाम पूछा.. तो उसने अपना नाम कनिका बताया ( नाम बदला हुआ है क्योंकि में किसी भी लड़की को बदनाम नहीं कर सकता ) और उसने मुझे बताया कि वो चंडीगढ़ से ही है और दिल्ली से अपनी पढ़ाई कर रही है और फिर धीरे धीरे हमारी बातों का दोर आगे बड़ने लगा और वो अब मुझसे बहुत खुल गई थी और हमारे बीच गर्लफ्रेंड/बॉयफ्रेंड की बातें चल पड़ी और उसका बॉयफ्रेंड दिल्ली में ही था.

फिर उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम्हरी कोई गर्लफ्रेंड है. फिर मैंने हाँ बोल दिया.. उसने मुझसे कहा कि क्यों तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो तुमसे बहुत खुश रहती होगी. मैंने बहुत हैरानी से पूछा कि तुम्हे ऐसा क्यों लगा. फिर उसने नीचे की तरफ देखते हुए कहा कि क्योंकि तुम मेरा इतना इम्तिहान ले रहे हो.. तो पता नहीं उसका क्या हाल करते होंगे. फिर मैंने हँसी हँसी में उससे बोला कि नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है.. वो तो बस ऐसे ही. फिर वो बोली कि अगर ऐसे ही है.. तो अभी तक उसे शांति क्यों नहीं मिली. दोस्तों उसका मतलब मेरा लंड था. मैंने कहा कि यार पता नहीं यह तुम्हे देखकर बहुत उछल रहा है.. तो उसने बोला कि थोड़ा सम्भालो इसे.. कहीं किसी ग़लत जगह ना उछलकर चला जाए.

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फिर ऐसी बातें करने से मेरा लंड पहले से भी ज़्यादा टाईट हो गया और अब थोड़ी हिम्मत करके मैंने अपना एक हाथ उसकी गांड पर रख दिया और उसे सहलाने लगा और वो भी अब थोड़ा थोड़ा गरम होने लगी थी और उसकी गांड को सहलाने के बाद मैंने सही मौका देखकर अपनी उंगलियों को उसकी चूत तक पहुँचाया और मेरे ऐसा करने से उसके मुहं से सिसकियाँ निकल गयी.. जब कि मैंने अभी उसकी सलवार के ऊपर से ही सहलाया था.. लेकिन दोस्तों उसकी चूत बहुत हॉट थी और मैंने महसूस किया कि उसमे से पानी भी निकल चुका था.. जो कि मुझे मेरी उंगलियों पर महसूस हुआ. इसका मतलब उसे भी मेरे साथ इन सभी कामो में बहुत मज़ा आ रहा था और इतने में किस्मत से बस की लाईट भी बंद हो गई और अब तो मेरा मन उसके बूब्स पकड़ने का करने लगा और मैंने उससे धीरे से पूछा कि में क्या तुम्हारे बूब्स को छू लूँ?

तो उसने अपने सर को हिलाकर हाँ बोला और बस उसके हाँ कहने की देर थी और मैंने उसके बूब्स को पकड़ लिया.. वो बहुत ही टाईट थे और दोस्तों वो बिल्कुल अनछुए लग रहे थे और उसके निप्पल भी बहुत टाईट हो गये थे.. तो वो भी खुद को रोक नहीं पाई और उसने अपना एक हाथ पीछे लाकर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसने मेरे लंड की तारीफ करते हुए कहा कि यह तो बहुत बड़ा है.

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