बस में गर्लफ्रेंड सेक्स की कहानी-1

Bus me girlfriend sex  ki kahani-1

कॉलेज की एक लड़की से मेरी दोस्ती हुई, फिर प्यार. अब मैं और मेरी गर्लफ्रेंड सेक्स चाहते थे. हम में जिस्म के मिलन की प्यास थी. हमको वो मौका कैसे मिला?

फ्री सेक्स कहानी के सभी पाठकों को रोहित का नमस्कार. दोस्तो, फ्री सेक्स कहानी पर मैंने अपनी पहली गर्लफ्रेंड सेक्स की कहानी प्रस्तुत करने की कोशिश की है. समय के अभाव के चलते मैं अपना गर्लफ्रेंड सेक्स एक्सपीरियंस आप लोगों के साथ में नहीं बांट पा रहा था.

चलिये, अब ज्यादा समय न लेते हुए मैं अपनी कहानी शुरू करता हूं.
जैसा कि मैंने बताया कि मेरा नाम रोहित है और मैं गुजरात के प्रसिद्ध शहर सूरत का रहने वाला हूं. मेरी आयु 28 साल है और दिखने में पतले शरीर का हूं. शरीर भले ही पतला हो लेकिन जो चीज मोटी होनी चाहिए उसका साइज बहुत अच्छा है.

जी हां दोस्तो, मेरे लंड का साइज 6.5 इंच है और उसकी चौड़ाई 2.5 इंच है. जिस लड़की के बारे में यह कहानी है उसका नाम रश्मि (बदला हुआ) है. वो देखने में बहुत सुंदर है और अच्छी अच्छी हुस्न की मल्लिकाओं को पछाड़ देती है. उसका फीगर 32-28-34 का है. रंग की भले ही थोड़ी सांवली है, लेकिन कोई भी उसको देख कर उस पर फिदा हो सकता है. आप उसको बिपाशा बासु के साथ कम्पेयर कर सकते हो.

कहानी साल 2012 की है. उस वक्त मैं कॉलेज में नया नया गया था. मेरा कॉलेज अहमदाबाद में था. वहां पर शुरू के दिनों में मैं काफी समय फेसबुक पर बिताता था. मुझे कॉलेज में एक लड़की में मिली. उसको मैंने फेसबुक पर रिक्वेस्ट भेजी.

चूंकि हम दोनों एक ही कॉलेज में थे तो उसने मेरी रिक्वेस्ट स्वीकार भी कर ली. धीरे-धीरे मैंने उससे बातें करना शुरू किया. वो भी मेरे मैसेज का रिप्लाई दे दिया करती थी. धीरे-धीरे उससे बात करते हुए हमारे फोन नम्बर भी एक्सचेंज हो गये.
अब मैं दिन भर उससे ही बात किया करता था. ऐसे ही बातें करते हुए हम दोनों के बीच में प्यार पनपने लगा.

फिर 6 महीने के बाद मैंने एक दिन हिम्मत करके उसको अपने दिल की बात बोल दी. मैंने रश्मि से अपने प्यार का इज़हार कर दिया. उसने मेरा प्रपोज़ल स्वीकार कर लिया.

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हम लोग अब हर जगह साथ में ही घूमने लगे. चाहे वो कॉलेज हो या सिनेमा हॉल या फिर कोई रेस्टोरेंट. वो भी सूरत की रहने वाली थी. जब कॉलेज की छुट्टियां होती थीं तो मैं अपने घर चला जाता था. मगर अब रश्मि भी मेरे साथ ही चलने की बात करने लगी. नॉर्मली मैं ट्रेन से ही जाया करता था. मगर उस बार किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

एक बार रक्षा बंधन के त्यौहार पर घर जाना था तो हमें ट्रेन में बुकिंग नहीं मिल रही थी. त्यौहारी सीजन में ट्रेन में रिजर्वेशन मिल पाना बहुत मुश्किल हो जाता था.

हम लोगों ने बस से जाने का फैसला किया. बस की टाइमिंग रात को 11.30 बजे की थी. हम लोग हॉस्टल से 9.30 बजे ही निकल गये. हमने साथ में खाना खाया. हम दोनों की नजरें बार-बार आपस में टकरा रही थीं. मुझे तो अंदेशा हो गया था कि आज रात को बस में हम दोनों के बीच में जरूर कुछ होने वाला है.

समय के अनुसार हम लोग बस स्टैंड पर पहुंच गये. बस अपने निर्धारित समय 11.30 बजे ही निकल पड़ी. टिकट दिखाने के बाद हमने पर्दा लगा लिया. मगर अभी भी कुछ लोग जाग रहे थे तो मैं ज्यादा जल्दी नहीं करना चाह रहा था. उसकी तरफ से भी यही संकेत मिल रहे थे.

आधे घंटे के बाद बस की अंदर वाली लाइटें बुझा दी गईं. अंदर बस में अंधेरा हो गया. मैं खिसक कर रश्मि के पास चला गया. उसको धीरे से किस किया. उसके माथे पर किस किया. उसके गाल पर किस किया. उसके बाद मैं धीमे से उसके होंठों की तरफ बढ़ा. वो भी जैसे इसी पल के इंतजार में बैठी हुई थी.

उसने मेरी किसी भी हरकत का विरोध नहीं किया और मेरा साथ देने लगी. दो मिनट में ही हमारी किसिंग चालू हो गयी. दोनों ही एक दूसरे के अंदर जैसे समा जाना चाह रहे थे. हम दोनों की ये पहली किस थी जो लगभग 15 मिनट तक चली.

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अब मेरे हाथ रश्मि के बूब्स की तरफ बढ़ने लगे थे. मैं धीरे से उसके बूब्स को टच कर रहा था. दरअसल मैं उसको उकसा रहा था. फिर उसने खुद ही मेरे हाथ को पकड़ कर अपने बूब्स पर रखवा लिया. मैंने धीरे से उसकी शर्ट को निकाल दिया. उसने अपने हाथ से खुद ही अपनी ब्रा भी अपने सीने से अलग कर ली. मतलब मेरी गर्लफ्रेंड सेक्स के लिए आतुर थी.

मेरी गर्लफ्रेंड की चूचियां चांदनी रात में मोती के जैसी चमक रही थीं. उनको देखते ही मैं तो जैसे ललचा गया. दोनों हाथों से उनको दबाने और पीने लगा. बूब्स की चुसाई में इतना रस आता है मुझे पहली बार इसका अनुभव हुआ. एक के बाद एक दोनों ही चूचियों को मैं बारी बारी से दबाते हुए पी रहा था. बीच-बीच में उसके निप्पल को भी काट रहा था. वो भी चिहुंक उठती थी.

अब उसने मेरी शर्ट को निकलवा दिया. मेरे गालों को चूमने लगी. मेरी छाती पर किस करने लगी. फिर उसने खुद ही मेरी पैंट की जिप खोल दी और मेरी पैंट को निकाल दिया. वो मेरे तने हुए लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही दबाने लगी. पकड़-पकड़ कर उसके साथ खेलने लगी.

मैंने दोबारा से उसको किस करना शुरू कर दिया. इस बीच में उसने मेरे लंड को अंडरवियर के अंदर से निकाल लिया. अब वो नीचे होकर मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. वो फीलिंग अभी तक दुनिया की सबसे अच्छी फीलिंग थी. उसने करीब 10 मिनट तक मेरे लंड को चूसा और फिर उसका पानी निकल गया.

हम लोग पहली बार ये सब कर रहे थे तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाया. मेरा वीर्य उसके मुंह में ही निकल गया. उसने मेरा वीर्य पी लिया. हालांकि बाद में उसने बताया कि उसको वीर्यपान करना पसंद नहीं था मगर अन्जाने में उसको पीना पड़ा. वो बोली उसने पोर्न फिल्म में ये सब देखा हुआ था. इसलिए वो सब कुछ पहले से सीख कर आई थी.

अब उसको खुश करने की बारी मेरी थी. मैं उसके बूब्स को दबा-दबा कर चूसने लगा. उसकी जीन्स को निकलवा दिया मैंने. फिर उसकी पैंटी को भी निकाल दिया. अब वो बिल्कुल नंगी थी. मैंने देखा कि मेरी गर्लफ्रेंड की चूत पर एक भी बाल नहीं था. उसने अपनी चूत को एकदम से साफ किया हुआ था.

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मैंने अपनी जीभ को सीधा उसकी चूत पर लगा दिया. तेजी से मैं अपनी जीभ को उसकी चूत पर लगा कर चलाने लगा. वह अंदर ही अंदर बड़बड़ाने लगी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

पांच-सात मिनट के बाद उसने मेरे मुंह को अपनी चूत पर कस कर दबाना शुरू कर दिया. शायद वो झड़ने के करीब आ गयी थी. उसके दो मिनट के बाद वो एकदम से मेरे मुंह में ही झड़ने लगी. मैं उसकी चूत के सारे पानी को चाट गया.

फिर उसने दो मिनट का विराम दिया और फिर से मेरे लंड को चूसने लगी. उसने पांच मिनट के अंदर ही मेरे लंड को चूस चूस कर फिर से खड़ा कर दिया. ऐसा लग रहा था कि हम दोनों ही रात भर चुदाई के मूड में थे. मैंने अपने खड़े लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और धकेलने की कोशिश की. मेरा लंड फिसल गया.

उसके बाद मैंने दोबारा से कोशिश की. मेरी गर्लफ्रेंड की चूत बहुत टाइट थी. टाइट चूत होने की वजह से मेरा लंड उसकी चूत पर बार-बार फिसल जा रहा था. फिर उसने अपने बैग में हाथ डाला. उसने अंदर से वैसलीन निकाली.
मैं तो हैरान था कि मेरी गर्लफ्रेंड सेक्स की पूरी तैयारी के साथ आई थी.

मेरे लंड पर उसने वैसलीन लगाई और फिर अपनी चूत पर भी वैसलीन लगा ली. मैंने तीसरी बार उसकी चूत पर लंड को रखा और धकेल दिया. अबकी बार उसकी चूत में मेरा लंड एक इंच तक घुस गया था.

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