बार से मिली बेहतरीन बुर

Bus me mili behtreen bur

दोस्तो मैं आपके सामने हाज़िर हूँ, ऋषि नाम के टुच्चे लड़के की कहनी ले कर।

तब हमारी उम्र करीब 22 की थी और जोश था अपने चरम सीमा पर। हम जज्बात को हर बार, बार में बुझाते थे और उस रात भी कुछ ऐसा ही हो रहा था।

कहानी २ साल पुरानी है, पर है आज भी जवान।

दिल्ली की ठण्ड में बार में बैठे हम २ दोस्त शराब के नशे में धुत पिंक फ्लाय्ड को सुन रहे थे। तभी मेरे दोस्त ने मुझे झकझोर कर कहा – वो देख साले, माल रो रही है।

मेरी नज़र उसकी आँखों से पहले उसके टैंगो पर गई, जो नंगी, नाजुक खुबसूरत जांघों तक खुले थे।

डोरे वाली छोटी स्कर्ट, उस ठण्ड में आग बरसा रही थी। जालीदार स्कर्ट के पीछे उसके बूबे काले ब्रा में बंधे ऐसे उभरे थे जैसे कोसो दूर से मुझे चूसने के लिए बुला रहे थे।

लड़की में इतनी गर्मी थी कि उसको छूते ही खड़े लण्ड का पानी निकल जाये। फिगर तो जानू का 34-24-36 रहा होगा।

कसम से कहर ढा रही थी साली। बदन से जो खूबसूरती टपक रही थी कि लण्ड खड़े हो-हो कर सलामी करते-करते ना थके।

मगर साले मेरे दोस्त को उसका रोना दिख रहा था।

उसने कहा – हमें कुछ करना चाहिए।

ये सोच कर मेरे दिमाग में भी सुझा कि कुछ करना होगा।

मैंने कहा – तू रुक, देखता हूँ मैं।

मैं जाकर लड़की के टेबल पर रुका और कहा – आप कुछ परेशान सी दिख रही हैं, क्या कोई मदद की जा सकती है?

लड़की ने मेरी तरफ देख कर कहा – चल बे, जा नाटक मत कर, भाग यहाँ से, मुझे पता है तू क्या चाहता है। मेरा बदन बाजारू नहीं है, जो आया और खा कर चला गया।

लड़की चालू थी और उसका नाम श्रुति था।

यह मौका कोई बेवकूफ ही छोड़ता। ये सोचते ही मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा जो बेहद मुलायम था।

मैंने कहा – सुनो, तुम गलत समझ रही हो। मैं बिलकुल वैसा नहीं हूँ, तुम्हे परेशानी है तो में चला जाता हूँ, मगर तुम कब तक ऐसे रोती रहोगी और तुम्हें रोते देख यहाँ रहा नहीं जा सकता।

बस थोडा और मक्खन लगाया और पता चला कि उसका आज ही ब्रेक-अप हुआ था। लड़के ने किसी और माल के चक्कर में इस माल को छोड़ दिया।

बस फिर क्या था, उसके बगल में कुर्सी लगायी और उसे अपना कंधा दिया, उस पर सिर रख कर उसे थोडा सुकून मिला और मुझे बहुत ज़्यादा।

उसकी कमर पर हाथ रख मैंने उससे कुछ एक घंटे और बात की और फिर मैंने उसे कहा – चलो, घर छोड़ दूँ।

उसने कहा – आज हॉस्टल नहीं जाना, आज क्या तुम मुझे ले चलोगे?

मुझे समझते देर ना लगी की मैडम क्या चाहती है, मैंने बिना कुछ कहे उसका हाथ ले कर लण्ड पर रख दिया और रखते ही उसने एक गहरा चुम्बन दिया और रात की दास्तान पहले ही नज़र आने लगी।

दूर बठे मेरे मित्र ने हालत समझ कर अपनी कार की चाभी दी। मैंने कहा – मैडम, आ जाओ।

दोस्त को बार में छोड़ कर हम घर पहुँचे, जहाँ हम दोनों अकले थे।

दरवाजे खुलने की देर थी और उसकी अधूरी चुदाई के उफ्फान ने मुझे सोफे पर पटक दिया।

अभी मैं उसकी चूची चूसना चाहता ही था कि उसने मेरे हथोड़े जैसे लण्ड को निकाला और चूसने लगी।

इस बार उफ़… आह… मैं खुद कर रहा था। मैंने जोश में आते ही उसको पटक दिया और नीचे से उठा कर पहले उसको ब्रा पनटी में किया।

मदहोशी उसमें पूरे उफ्फान पर नज़र आई, वो खुद ही अपनी चुचियाँ दबाने लगी।

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अब तू और ना नाटक कर, घुसा दे, घुसा दे ना, ये कहते हुए मेरे लोडे को पकड़ना चाहा रही थी।

पर मैंने उसे तड़पने की ठान जो रखी थी। मैंने उसे लण्ड न पकड़ने दिया और अपने हाथों से उसके बुर को रगड़ना शुरू किया।

अब उसने तकिये को पकड़ कर आह… ऊह… आह… ऊह… शुरू किया और उसकी बुर ने पानी छोड़ दिया।

मैंने निकलते पानी को जीभ से चूसा और उसने कहा – अब घुस दे ना… घुस दे प्लीज़, फाड़ दे…

सो अब मैंने भी घुसा दिया, आधा जाने के बाद एक जबरदस्त झटके ने उसे स्वर्ग दिखा दिया।

फिर घंटे भर आराम करने के बाद श्रुति ने हाथ फिर लण्ड की तरफ बड़ा कर उसे सहलाना शुरू किया।

मैंने कहा – क्या? फिर से।

उसने कहा – जालिम, एक मैच और खेल ले, क्यों खेलेगा न?

चुदाई अब मेरे और उसके सिर चढ़ कर बोलने लगी, पूरी रात पानी बहा।

सुबह उसने कहा – क्या ये सब यहीं ख़त्म हो जायेगा।

मैंने बोला – तेरी जैसी मर्जी?

उसने बिना कुछ कहे मेरे लण्ड को फिर चूस लिया।

मैंने भी बिना कुछ कहे उसको पटक कर जो चोदा है, उसको याद करके आज भी लण्ड ८ इंच का हो जाता है।

एक घंटे तक उसे चोद्ने के बाद उसने अगले फ्राइडे का प्लान बनाया और जानते है कि वो सोमवार को फिर आ गई।

आज तक महीने में हमारे दो दिन फिक्स है।

किस्मत में मेरे सिर्फ श्रुति ही नहीं थी और भी कई आई जिनकी दास्तान आप जरुर सुनेंगें और इन सब में श्रुति ने भी खूब साथ दिया।

अपनी दोस्तों को मेरे पास भेज उन्हें भी खूब चुद्वाती थी।

उफ़ इतनी नशीली नमकीन लड़की आज तक फिर नहीं मिली।

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