बस से हुआ बुर का इंतजाम-1

Bus se hua bur ka intezam-1

दोस्तो, मेरा नाम राहुल है और मैं पच्चीस साल का मस्त लड़का हूँ।

या यूँ कहें कि मैं पच्चीस साल का गोरा, पांच फिट तीन इंच लम्बा, छह इंच लम्बे और तीन इंच मोटे लंड वाला लौंडा हूँ।

यह कहानी चार महीने पुरानी है। एक दिन मैं दिल्ली – रोहिणी में एक साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए बस में जा रहा था।

बस में रास्ते में कहीं से एक मस्त लड़की चढ़ी और मेरे बगल वाली सीट पर आ कर बैठ गई।

मैं खिड़की वाली सीट पर बैठा हुआ था। थोड़ी देर बाद उसने खिड़की की तरफ बैठने के लिए कहा तो मैंने कहा कि मुझे कोई दिक्कत नहीं है।

वो खड़ी होकर खिड़की की तरफ आने लगी तो मैं भी बाजू वाली सीट की तरफ जाने लगा, इस बीच में हम दोनों एक दूसरे से काफ़ी ज़ोर से टकरा गये। उसके पीछे वाला हिस्सा मेरे अगले वाले हिस्से से टकराया।

इसके बाद जब हम दोनों अपनी-अपनी सीट पर बैठ गये तो हम दोनों ने एक दूसरे से माफ़ी माँगी।

थोड़ी देर बाद मैंने उसकी तरफ देखा तो उसके हाथ में मुझे बायो-डेटा दिखाई दिया। मैंने उससे पूछा कि तुम कोई साक्षात्कार देने जा रही हो क्या?

उसने बताया कि रोहिणी की एक कंपनी से कॉल आया था साक्षात्कार के लिए, वहीं पर जा रही हूँ।

मैंने उससे उसकी योग्यता (क्वालिफिकेशन) पूछी। उसने बताया कि अभी उसने एम.बी.ए. किया है मगर कॉलेज से कोई प्लेसमेंट नहीं हुई इसलिए अपने एक दोस्त के पास दिल्ली चली आई, नौकरी की तलाश में।

वह बोली कि आज उसका पहला साक्षात्कार है तो मैंने उसे वेस्ट ऑफ लक कहा।

फिर थोड़ी देर के बाद उसने मुझे पता दिखाया और पूछा उसका ये पता रोहिणी में कहाँ पर पड़ता है?

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मैंने उसे बताया – तुम रोहिणी में सेक्टर – सैंतीस के चौक पर उतर जाना, वहाँ से बहुत सारे ऑटो मिल जाएँगे। मैंने कहा – वैसे मैं भी उसी तरफ जा रहा हूँ मगर तुम्हारा वाला स्टॉप पहले आ जाएगा और मुझे आगे जाना है।

उसने मुझसे आग्रह (रिक्वेस्ट) किया कि मैं उसकी मदद कर दूँ उसे अपने साथ ले जा कर। मैंने कहा – ठीक है। रोहिणी में मैंने उसे वहाँ छोड़ दिया और मैं आगे निकल गया।

शाम को जब मैं अपना साक्षात्कार देकर वापस रोहिणी के सेक्टर – सैंतीस पहुँचा तो मैंने वहाँ पहुंचने के बाद देखा कि वो लड़की भी वहाँ खड़ी है।

मैंने उसके पास जाकर उसे हाय कहा तो उसने भी हाय कहा और साक्षात्कार के बारे में बात चलने लगी। हम दोनों ने एक-दूसरे के मोबाइल नंबर लिए ताकि अगर कोई भी नौकरी कहीं भी निकले तो हम एक-दूसरे को बता सके।

उसके बाद हम दोनों बस में चढ़ गये मगर बस में भीड़ बहुत ज़्यादा थी। मैंने ही उसकी टिकिट भी ली। बस में हर स्टॉप से लोग चढ़ रहे थे, जिससे धक्का-मुक्की हो रही थी।

इस कारण मैं बार-बार उससे टकरा जाता और आधे रास्ते तक पहुँचते-पहुँचते भीड़ के कारण मैं उससे बिल्कुल चिपक गया। अब तो मेरा लंड उसकी गांड को छू रहा था पर वो कुछ नहीं बोली।

मगर थोड़ी देर के बाद मैंने महसूस किया कि वो भी मज़े ले रही है और मेरे लंड पर हल्का-हल्का दबाब बना रही है। थोड़ी देर के बाद उसका स्टॉप आ गया और वो उतर गई।

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इसके बाद कुछ दिन तक उससे कोई बात नहीं हुई। लगभग एक सप्ताह के बाद उसका मैसेज आया और पूछा कि मेरी कहीं कोई नौकरी लगी या नहीं?

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तो मैंने उसे कॉल कर लिया और बताया कि अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली, मैंने उससे भी पूछा – तुम्हें मिली क्या? उसने बताया कि उसको भी नहीं मिली और बस ऐसे ही कुछ इधर-उधर की बातें चल पड़ी।

फिर उसके बाद हम रोज़ फोन पर बात करने लगे। एक दिन उसको और मुझे एक ही कंपनी से साक्षात्कार के लिए कॉल आया तो हमने तय किया की हम दोनों इतने बजे, इस बस स्टॉप पर मिलेंगे और फिर साथ-साथ साक्षात्कार देने जाएँगे।

साक्षात्कार देने के बाद हम दोनों ने एक रेस्टौरेंट में लंच किया और वापस चले आए। साक्षात्कार का परिणाम बाद में आना था।

दो दिन के बाद उसका फोन आया कि उसकी सहेली अपने गाँव चली गई है चार दिन के लिए और वो बहुत अकेला महसूस कर रही है।

उसने कहा – यहाँ दिल्ली में तुम्हारे अलावा मैं किसी और को नहीं जानती तो सोचा कि अगर तुम फ्री हो तो तुम से मिल लूँ। मैंने उसे कहा कि आज मेरी कुछ तबीयत ठीक नहीं है इसलिए मैं तुमसे मिलने के लिए नहीं आ सकता।

वो बोली कि कोई बात नहीं मैं ही आ जाती हूँ। उसने मेरा पता लिया और पूछा कि वहाँ तक कैसे पहुंचना है? मैंने रास्ता बता दिया।

लगभग एक घंटे के बाद डोर वेल बजी तो मुझे लगा कि वो ही होगी।

मैंने जैसे ही दरवाज़ा खोला तो वो ही थी। क्या माल लग रही थी। नीले रंग की जीन्स पिंक रंग का टॉप पहने हुए थी और हल्का-हल्का मेकप भी किया हुआ था। होंठ एक दम पतले और गुलाबी।

खैर, मैंने उसे अंदर आने के लिए कहा और कोल्ड ड्रिंक और कुछ स्नॅक्स ऑफर किए। बात करते-करते रात हो गई क्यूंकि वो शाम को 6:30 बजे आई थी।

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मैंने उससे कहा कि आज रात यहीं रुक जाओ, रात में बाहर जाना ठीक नहीं है और वैसे भी तुम वहाँ अकेली बोर हो जाओगी।

वो मान गई। उसने मेरे और अपने लिए खाना बनाया।

खाना खाने के बाद हमने लैपटॉप पर एक फिल्म देखी। उसके बाद मैं सो गया। कुछ देर के बाद जब मेरी आँख खुली तो मैंने उसको लैपटॉप में ब्लू फिल्म देखते हुए देखा।

वो अपनी चुचियाँ मसल रही थी और अपनी चूत में उंगली कर रही थी। कुछ देर तक मैं उसे ऐसे ही देखता रहा, मगर अपने उपर संयम नहीं रख पाया और उसको पीछे से पकड़ लिया।

वो एकदम घबरा गई। उसने कहा – प्लीज़ मुझे छोड़ दो। मैंने कहा कि ऐसे कैसे छोड़ दूँ, आज तो पहली बार कोई लड़की हाथ आई है। अब तो चोद कर ही रहूँगा।

मैंने उसकी गर्दन पर चूमना और दूध दबाना शुरू कर दिया। वो लगातार मुझसे छूटने की कोशिश करती रही मगर खुद को मेरी मज़बूत पकड़ से छुड़ा नहीं सकी।

मैंने अपना काम चालू रखा। कुछ देर के बाद उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी।

मैंने अपने लैपटॉप को साइड में रखा और उसको अपनी गोद में बिठा कर उसके बूब्स को मसलना चालू कर दिया।

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