चाचा ने चूत में लंड का भोग लगाया-2

Chacha ne choot me land ka bhog lagaya-2

दोस्तों मुझे उस वक्त अपने चाचा के करीब जाने का कोई भी रास्ता मंजूर था, जिस पर चलकर में अब उनके बहुत पास जाना चाहती थी और चाहे वो मेरी पढ़ाई का बहाना ही क्यों ना हो? फिर मैंने उनसे मुस्कुराते हुए पूछा क्या आप सच कह रहे हो और क्या आप सिख़ाओगे मुझे? में हमेशा ऐसे ही किसी व्यक्ति की तलाश में रहती हूँ जो मुझे उस विषय में कुछ बता सके समझा सके, क्योंकि में उसमे अपने आपको बहुत कमजोर महसूस करती हूँ और आप मेरे साथ रहोगे तो मुझे फिर इस कमजोरी से डरने की कोई आवश्कता नहीं है.

फिर उन्होंने कहा कि हाँ तुम अपनी किताब को लेकर पढ़ाई करने वाले कमरे में आ जाओ और वो मुझसे यह बात कहकर मेरे आगे चले गये और में अपने बेग से किताब को बाहर निकालने लगी और में उस समय बहुत खुश थी और मेरे दिल में एक उम्मीद की किरण जागी और उस कमरे में जाने से पहले मैंने जल्दी से अपनी पेंटी को उतारकर उस बेडरूम में ही एक कोने में डाल दिया था. अब में बड़ी सहमी हुई उस कमरे में चली गई और मैंने देखा कि चाचा के उस कमरे में बहुत सारी अलमारियां थी और उनमे बहुत सारी किताबें भी थी एक बड़ी सी टेबल और दो कुर्सी भी थी हमने कुर्सियों को टेबल के पास किया और फिर उस किताब को खोलकर हम पड़ने लगे, लेकिन दोस्तों मेरा ध्यान क्या खाक पढ़ाई पर जाना था? पढ़ाई तो मेरे लिए बस उनके पास बैठने का एक बहाना थी.

फिर उन्होंने मुझे हल करने के लिए एक सवाल दिया जो मुझे तो बिल्कुल भी नहीं समझ आ रहा था, इसलिए मैंने उनसे कहा अफ चाचू यह क्या, यह कितना मुश्किल है? तभी हंसते हुए उन्होंने मेरी तरफ देखकर एक ही सेकेंड में उसको हल करके मुझे दिखा दिया, मैंने खुश होने का नाटक करते हुए उनके दोनों हाथों को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और फिर मैंने उन्हे अपने नरम होंठो से उनके हाथों पर एक किस किया और बोली कि वाह चाचू आप तो बहुत माहिर हो वो एकदम दंग रह गये और उनकी दोनों आँखें बड़ी हो गई.

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अब मैंने उनको कहा कि आप एक बार फिर से धीरे धीरे इसको करते हुए मुझे दिखाओ और यह बात बोलकर में उसी समय उठकर जानबूझ कर उनकी गोदी में जाकर बैठ गयी और मैंने ऐसा व्यक्त किया जैसे में यह सब अपनी नादानी से कर रही हूँ और अब मेरी कोरी गांड जो उस समय बिना पेंटी के थी उनके लंड के सीधे ऊपर बिल्कुल ठीक निशाने पर थी और अब उन्हे मेरे गोदी में बैठे होने की वजह से एक साइड से किताब को देखना पढ़ रहा था.

फिर मैंने महसूस किया कि उन्होंने अब थोड़ा सा धैर्य दिखाया और मुझसे यह बात बोलते हुए कि तुम इसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो लगातार धीरे धीरे करने से तुम्हे भी सब कुछ आ जाएगा और उन्होंने यह बात कहते हुए हंसकर मेरी जांघ पर अपना एक हाथ रख दिया, लेकिन मैंने कुछ ना कहा जिसकी वजह से वो मेरी मर्जी समझ गए और उसके बाद वो धीरे से मेरी स्कर्ट के अंदर से हाथ आगे लेने लगे, मैंने उस समय पेंटी नहीं पहनी थी इसलिए उनके हाथ सीधे मेरे नीचे के बाल मतलब कि मेरी चूत के ऊपर मेरी झांट जो अभी तक पूरी तरह से आए भी नहीं थे उनके पास तक चले गये और वो मेरे चेहरे की तरफ देखकर नोट कर रहे थे, लेकिन मैंने कोई भी विरोध नहीं किया और में किताब पर लिखती रही और अपना काम करती रही.

अब वो और भी ज्यादा गरम हुए और अपनी उंगलियों को मेरी चूत के आस पास चलाने लगे और अब मुझे मेरी पीठ पर उनके पेट के साथ साथ मेरी गांड के नीचे दोनों कूल्हों के बीच में उनका अब तनकर खड़ा लंड भी महसूस होने लगा था और में पलटकर टेबल पर जाकर बैठ गई. मैंने अपने दोनों पैरों को चाचा की कुर्सी के हत्थे पर रखी और अपने पैरों को थोड़ा सा फैला लिया.

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दोस्तों मेरी तरफ से इस खुले आमंत्रण के बाद तो चाचा से बिल्कुल भी रहा ना गया और उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे उसी समय मेरी स्कर्ट को शर्ट की तरफ ऊपर उठा दिया जिसकी वजह से उनको अब मेरी बिना पेंटी की कामुक चूत साफ साफ दिख रही थी उस पर अपनी नज़र को गड़ाए उन्होंने प्यार से मेरी चूत को अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर सहलाया और वो उस पर लगातार अपना हाथ फेरकर उसको महसूस कर रहे थे.

शायद वो मेरी चूत को ऐसा करके गरम करने का प्रयत्न कर रहे थे, लेकिन उनको क्या पता था कि में तो पहले से ही बहुत प्यासी गरम हो चुकी थी, जिसकी वजह से मेरी चूत ने अब अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और वो गरम चिकना पानी उनकी उंगलियों में लग रहा था, वो मेरी चूत में अपनी ऊँगली को डालने भी लगे थे और वो सब मेरे लिए अपना पहला अनुभव था इसलिए में बहुत खुश थी और दूसरी दुनिया में पहुंच गई थी और में तुरंत उसी समय उनको इतना गरम करके उसी टेबल पर ही तुरंत लेट गई.

मैंने देखा कि मेरे लेटने की वजह से मेरी खुली चूत को अपने सामने देखकर खुश होकर मुस्कुराने की वजह से चाचा के मोटे मोटे गालों में डिंपल पड़े हुए थे और वो जैसे किसी छोटे बच्चे को चोकलेट मिली हो ऐसे मुस्कुरा रहे थे और उनकी वो ख़ुशी उनके चेहरे पर मुझे साफ दिख रही थी, जो कुछ में उनके साथ अब करना चाहती थी.

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सब सच में होने जा रहा था इतने में दरवाजे के खुलने और किसी के अंदर आने की आवाज़ मुझे आई हम दोनों उसी समय हड़बड़ाकर अपनी अपनी कुर्सी पर वापस बैठ गये. दोस्तों वो मेरी मम्मी, पापा थे जो अब वापस आ गये थे. शायद आज अपने चाचा के साथ मेरी किस्मत में इतना प्यार ही लिखा था जो मुझे मिल चुका था.

दोस्तों फिर दूसरे दिन मम्मी पापा के जाते ही उफ़फ्फ़ एईईईईईई सस्सस्स की आवाजें पूरे कमरे में फैल गयी और में चाचू के मुहं पर अपनी चूत को लगाए हुए उस समय अपने दोनों घुटनों के बल बैठी हुई थी और वो मेरी चूत को किसी रसीले आम की तरह बहुत मज़ा लेकर चूसे जा रहे थे, उनकी गरम, गीली जीभ मेरी चूत के अंदर बहुत आगे जा रही थी और वो अपने दोनों हाथों को मेरी स्कर्ट के नीचे घुसाकर मेरी मखमली गोलमटोल गांड को भी धीरे धीरे सहला रहे थे और में पूरी तरह से जोश में आकर अपनी चूत को उनके मुहं पर रगड़ने लगी थी, क्योंकि में उनकी जीभ को अपनी चूत में पूरा अंदर तक लेना चाहती थी, लेकिन जीभ कहाँ लंड का मज़ा दे सकती है और यह बात आप सभी बहुत अच्छी तरह से जानते समझते है.

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