चाची ने चाचा से चुदवाई मेरी चूत 1

Chachi ne chacha se chudwai meri chut-1

प्रिय पाठकों, यह मेरी सच्ची कहानी है।

२००३ की बात है, मैं अमरावती में रहती थी।

हमारा घर काफ़ी बडा था। मेरे पापा और मम्मी दोनों सर्विस करते थे और मैं उनकी अकेली लड़ली बेटी थी।

वे दफ़्तर चले जाते और मैं स्कूल। शाम को हम सब घर आते।

हमारा घर बडा था इसलिए पापा ने सोचा कोई किरायेदार रख लें। दो-तीन दिन में ही एक किरयेदार घर देखने के लिए भी आ गए।

रेखा चाची और दिनेश चाचा…

दोनों बहुत अच्छे थे। चाची की उम्र लगभग २५ थी और चाचा की लगभग २७।

वे दोनों मुझे बहुत अच्छे लगते। चाची तो जैसे मुझे दूसरी माँ लगती क्यूंकि जब भी मम्मी मुझे डाटतीं तो वो मुझे लेकर अपने घर जातीं और मेरी पसंद की चोकलेट और गुलाब-जामून देतीं।

चाचा भी मुझे बहुत प्यार करते और कभी नहीं डांटते।

मार्च २००३ की बात है, उन दिनों मेरी परीक्षा चल रही थी। पढ़ाई में मैं ठीक-ठाक थी और पेपर भी अच्छे जा रहे थे।

चाची मुझे घर आने के बाद खाना देतीं और पढाई में भी मदद करतीं।

उन्हीं दिनों अचानक एक दिन शाम को फोन आया कि मेरे सगे चाचा अनिल का भोपाल में एक्सीडेंट हो गया है और योगिता चाची वहाँ अकेली है।

पापा और मम्मी को जाना पड़ेगा पर मेरा आखरी पेपर दो दिन बाद था।

मम्मी और पापा परेशान थे और जाना ज़रूरी था पर उनकी दिक़्कत ये थी कि मुझे अकेला कैसे छोड़ें? तभी रेखा चाची और दिनेश चाचा आ गये और बोले – चिंता की कोई बात नहीं, हम श्रद्धा को संभाल लेंगे।

उनकी कोई संतान नहीं थी और वो मुझे बेटी जैसा ही समझते थे। यह सुनकर मम्मी-पापा का टेन्शन कम हो गया।

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मैं बहुत खुश थी क्यूंकि मुझे चाचा-चाची, पापा–मम्मी से भी ज्यादा पसंद थे। और फिर पापा-मम्मी आठ-दस दिन के लिए चले गये।

अगले दिन मेरा आखरी पेपर था। चाची ने कहा – आज ठीक से लिखना आखरी पेपर है, घर आने के बाद हम आईसक्रीम खाने जाएँगे और मैं तुम्हारे लिए गुलाब-जामून बनाऊँगी।

चाचा मुझे छोड़ने और लेने के लिये आए। इधर घर में चाची ने गुलाब-जामून बनाये थे, हम सबने वो खाये।

दोपहर में मैं चाची के पास ही सो गई।

इसी दौरान चाची ने मुझसे पूछा – पेपर कैसा रहा?

मैंने कहा – बहुत बढ़िया।

चाची ने उसके बाद कहा – ये तो सिर्फ कागजी परीक्षा थी, तुम्हें जीवन की परीक्षा के बारे में भी कुछ पता है?

मैंने कहा – नहीं।

चाची ने कहा – मम्मी ने तुम्हें कुछ नहीं बताया?

मैंने कहा – नहीं।

फिर चाची ने कहा – माहवारी के बारे में कुछ बताया?

मैंने कहा – हर महीने में मुझे बहुत तकलीफ होती है, लेकिन मम्मी ने इसके लिए कुछ भी नहीं बताया।

चाची ने कहा – मम्मी बहुत व्यस्त रहती है उन्हें पता ही नहीं कि बेटी कब जवान हो गई?

फिर वो कहने लगीं – लड़की को जीवन में बहुत सारी कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है जो अगर पता न हो तो पूरे जीवन में बहुत तकलीफ उठानी पडती है। गर तुम चाहो तो मैं तुम्हें इसके बारे में आने वाले कुछ दिनो में सब कुछ सीखा दूँगी और कोई फिस भी नहीं लूँगी।

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कुछ नया सीखने को मिलेगा सोच कर मैं झट से मान गई।

फिर हम सो गए।

शाम को जब चाचा घर आये तो चाची ने मुझे सब कुछ सीखने की बात उन्हें बताई।

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मैंने भी चाचा से कहा कि वो हाँ कर दे।

उन्होंने कहा – तुम पापा और मम्मी को इस के बारे में कुछ नहीं बताओगी?

मैने कहा – नहीं, और मैं तुरंत मान गई।

फिर कुछ देर बाद चाची मुझे बाज़ार ले गई। वहाँ जा कर उन्होंने मेरे लिये शोपिंग की पर ऐसी शोपिंग मम्मी ने मेरे लिए कभी नहीं की थी।

चाची ने मेरे लिए काले रंग की सुंदर ब्रा और पैंटी खरीदी, वीट क्रीम और कुछ सौंदर्य प्रसाधन भी मुझे खरीद कर दिए। उन्होंने मुझे मेरी पसंद की ढ़ेर सारी चोकलेट भी खरीद कर दी।

मैं बहुत खुश थी। करीब सात बजे हम घर पहुँचे।

घर आकर चाची ने मुझे नहलाया और शरीर की सफाई के बारे में बहुत कुछ सिखाया।

शाम सात बजे उन्होंने मुझे कहा कि आगे जाकर मुझे लड़की के सारे काम सिखाने पड़ेंगें।

नई ब्रा और पैंटी पहन कर मुझे थोड़ा अटपटा लग रहा था क्यूंकि मैंने पहले कभी ब्रा पहनी नहीं थी और योनी के बाल साफ करने से थोड़ी खुजली भी हो रही थी, पर चाची ने मेरी योनी में क्रीम लगाई।

लगभग ७ बजे चाची ने कहा – आज मैं तुम्हें जीवन का सबसे बड़ा पाठ सिखाऊँगी।

फिर उन्होंने मुझे अपनी शादी के खूबसूरत फोटो दिखाये और कहा – आज मैं तुम्हें भी ऐसी ही सुंदर दुल्हन बनाऊँगी।

मैं भी तुरंत मान गई।

फिर उन्होंने कहा कि हम तुम्हारा वीडियो निकलेंगें और मम्मी को सरप्राइज देंगे।

अब उन्होंने मुझे उनका शादी का जोड़ा पहनाया और मेरी ढ़ेर सारी फोटो भी खींची।

मुझे नजर ना लगे इसलिए काला तिल गाल पर लगाया। मुझे मजा आ रहा था।

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इस सब के बाद में चाची ने मुझसे कहा – शादी की पहली रात यांनी सुहागरात लड़की के जीवन में सबसे प्यारी होती है। हर लड़की इस रात का बेसब्री से इंतेज़ार करती है और इसके लिए तड़पती है। जिंदगी का सबसे बड़ा सुख इसी दिन प्राप्त होता है।

फिर उन्होंने मुझे कहा – क्या तुम वो आनंद लेना चाहोगी? इसमें थोडा दर्द है पर मजा भी बहुत है।

मैंने तो ये मजा तुम्हारी उम्र में ही पता नहीं कितनी बार चखा था और आज भी हर रात चख रहीं हूँ।

मैने तुरंत ही हाँ कर दी।

फिर उन्होंने मुझे सब कुछ विस्तार से बताया जैसे सुहागरात में दुल्हन किस तरह बैठती है, कैसे अपने पती को बदाम का दूध पिलती है, फिर कैसे शरमाती है। चाची ने मुझसे यह भी कहा कि आज इसका प्रॅक्टिकल भी वो मुझसे करवायेगी।

सही बताऊँ तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

बाद में उन्होंने मुझे बेडरूम में पलंग पर घूँघट लेकर बिठाया।

कमरा पूरी तरह सजाया हुआ था और उसमें इत्र छिड़का हुआ था। इत्र की भीनी-भीनी खुश्बू से पूरा कमरा महक रहा था।

शादी के भारी जोड़े में मुझे बडी गर्मी लग रही थी लेकिन मैं चुप थी क्यूंकि मुझे कुछ नया सिखना था।

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अगर आप जानना चाहें कि आगे क्या हुआ तो कहानी के अगले भाग का इंतज़ार करें…

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