चाची ने चाचा से चुदवाई मेरी चूत 2

Chachi ne chacha se chudwai meri chut-2

कमरा पूरी तरह सजाया हुआ था और उसमें इत्र छिड़का हुआ था। इत्र की भीनी-भीनी खुश्बू से पूरा कमरा महक रहा था।

शादी के भारी जोड़े में मुझे बडी गर्मी लग रही थी लेकिन मैं चुप थी क्यूंकि मुझे कुछ नया सिखना था।

अब पेश है अगला भाग…

कुछ ही देर में वहाँ चाचा भी आ गए। उन्होंने भी उनके शादी के कपड़े पहने हुए थे, आज वो बहुत ही अलग लग रहे थे।

फिर थोड़ी ही देर में वहाँ एक सुंदर सी नाइटी में चाची भी पहुँची और मुझसे बोली – ये तुम्हारी पहली सुहागरात है अपने पती (चाचा) और गुरु (चाची) के पैर छुओ।

मैं कपड़े सम्भालकर पलंग से नीचे उतरी और चाचा के पैर छुए, उन्होंने मुझे मुँह दिखाई के तौर पर पाँच सो रुपये दिए।

मैं बहुत खुश हो गई।

बाद में मैंने चाची के पैर छुए।

उन्होंने आशीर्वाद दिया – ऐसी रात तुम्हारी जिंदगी में हर रोज आये और धीरे से मेरे गाल पर चुम्मी ले ली।

अब उन्होंने मेरे हाथ में तीन गोलियाँ दी और कहा – ये छोटी गोली तुम्हें बडी सहायता करेगी इसे दूध के साथ ले लो और दूसरी गोली तुम्हें उत्तेजना प्रदान करेगी तथा तीसरी गोली तुम्हें दर्द नहीं होने देगी।

चाची की दी हुई गोलियाँ मैंने बिना कूछ कहे दूध के साथ ले ली और पलंग पर घूँघट ले कर बैठ गई।

चाचाजी ने फिर मुझे प्यार से सहलाया मेरे अंग-अंग में मानो बिजली दौड गई।

फिर चाचीजी ने सामने कैमरा लगा दिया। घूँघट के कारण मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

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चाचा-चाची बात कर रहे थे और हंस रहे थे – फूल सी बच्ची है धीरे करना, वैसे मैंने गर्भ निरोधक गोली और पेन किलर भी दे दी है।

चाचा ने अब अपने कपड़े उतार दिये और वो अंडरवियर में आ गये। फिर धीरे से उन्होंने मेरा घूँघट खोला और उनके मुँह से शब्द निकल पडे – बहुत सुंदर।

पता नही क्यूँ मैं सहम गई और अपनी आँखें बंद कर ली।

उन्होंने मुझे बडे प्यार से चूमा। पहले मेरे गालों को, बाद में माथे को।

फिर उन्होंने मेरी बिंदी हटा दी कान के बुंदे और गले का मंगल सूत्र भी निकाल कर रख दिया।

उसके बाद में उन्होंने चाची को मेरी नथ निकालने को कहा, वो हँसी और बडे प्यार से नथ निकाल दी। धीरे-धीरे वो मेरे पूरे बदन को चूम रहे थे।

मुझे गुदगुदी हो रही थी। बाद में उन्होंने मुझे खडा किया और मेरा घागरा खोल दिया। घागरा भारी होने से नीचे चला गया।

मैंने पकड़ने की कोशिश की पर चाची ने मेरे हाथ पकड लिए।

बाद में उन्होंने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और मैं ज़ोर से चील्लाई पर चाची ने कहा – चुप रहो, वीडियो चल रहा है।

अब मैं केवल चाचा-चाची के सामने ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। चाचा ने मेरा मुँह हाथ से ढक लिया।

मुझे बहुत लज्जा आ रही थी पर जो गोली चाची ने दी थी उसकी वजह से उत्तेजना भी आ रही थी।

चाचा ने मुझे बाहों में भर लिया और जोर से दबाया। उससे मेरे चुचक उनके सीने से रगड गए।

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बाद में चाची किचन में से ढेर सारे गुलाब-जामून लाई और एक–दो गुलाब-जामून मेरे मुँह में ठूँस दिए।

चाचा ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और एक झटके में मेरी पैंटी निकाल फेकी।

अब मैं बुरी तरह डर गई पर तभी चाची ने और दो गुलाब-जामून मेरे मुँह में ठूँस दिए और मेरी ब्रा निकाल फेंकी।

फिर चाचा मेरी चूत को चाटने लगे और चाची मेरे चुचक चूस रहीं थीं। मुझे बड़ा गंदा सा लग रहा था।

लेकिन चाची ने कहा – ऐसा ही होता है सुहागरात में, चूप रहो और मज़े लो।

पर जैसे ही चाचा की जीभ मेरी योनी में जाती तो मैं तड़प उठती। अब चाचा ने मेरे दोनों पैर उपर उठाये और चाची ने गुलाब-जामून का रस मेरी योनी में डाल दिया।

फिर चाचा ने अपनी जीभ से वो रस चाट-चाट कर चूस लिया। बाद में चाची ने दो गुलाम-जामून मेरी कड़क चुचियों में फसा दिए और चाचा ने वो पूरी उत्तेजना से चूस कर खाये।

इसमें मेरे चूचक पर उनके दाँत के निशान भी आ गए। चाची ने कहा – गोली खायी है तो दर्द कम होगा।

अब चाचीने मुझे खडा कर नीचे उतारा और नीचे बैठने को कहा और चाचा पलंग पर बैठ गए।

फिर उन्होंने कहा – आज मैं तुम्हें लिंग चूसना सिखाती हूँ, और उन्होंने चाचाजी का लिंग अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी।

थोड़ी देर चूसने के बाद उन्होंने मुझे वैसा ही करने को कहा पर मैंने मना कर दिया।

मेरे ना मानने पर उन्होंने चाचा के लिंग पर ढेर सारा चोकलेट लगा दिया और कहा कि अब इसे लोलीपोप समझकर चुसो, बडा मजा आयेगा।

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मैं मान गई क्यूंकि मुझे चोकलेट पसंद थी। चूसते-चूसते चोकलेट का टेस्ट बदल रह था, अब वो छोटा लिंग बहुत बडा हो गया था और चाचा मेरे बाल पकडकर उसे अंदर तक मेरे गले तक डाल रहे थे।

मुझे साँस लेना मुश्कील हो रहा था।

इधर चाची मेरे चूचक चूस रहीं थीं।

तभी चाचा ने कहा – मैं झरने वाला हूँ।

चाची ने कहा – अंदर ही डाल दो और तभी एक सफेद सा पदार्थ मेरे मुँह में भर गया।

जब वो मेरे गले तक पहुँचा तो मुझे ऐसा लगा कि मैं उलटी कर दूँ पर चाचीजी ने मुझे वो उगलने नहीं दिया और कहा – यह अमृत है पगली, गिरा मत पी ले, और मेरा मुँह उपर करके ढेर सारा गुलाब-जामून का रस मुँह में डाल दिया।

मैंने वो रस पूरा निगल लिया।

अब चाची ने मुझे कहा – अब तुम्हारी अंतिम परीक्षा है, इसमें तुम्हें पास होना ही है, नहीं तो समझो, तुम्हारी जिंदगी बरबाद है।

आप ही की तरह मैं भी उत्सुक थी यह जानने के लिए की आखिर क्या थी वो परीक्षा…

बस थोड़ा सा इंतज़ार कीजिये, मैं जल्द ही हाज़िर हूँगी इस कहानी का अगला भाग लेकर…

मुझे मेल करना न भूलें…

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