चाची ने चाचा से चुदवाई मेरी चूत 3

Chachi ne chacha se chudwai meri chut-3

अब चाची ने मुझे कहा – अब तुम्हारी अंतिम परीक्षा है, इसमें तुम्हें पास होना ही है, नहीं तो समझो, तुम्हारी जिंदगी बरबाद है।

अब आगे…

तब चाचा फिर से खडे हुए और अब वो हंस रहे थे, चाची ने मुझे बिस्तर पर सुलाया और मेरे दोनों पैर एक-दूसरे से दूर कर दिए।

अब चाची ने भी अपने कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी हो गईं। उनके वक्ष बहुत बड़े और सुडौल थे।

मेरे पैर कांप रहे थे इसलिए उन्होंने उनको पलंग के दोनों तरफ से पेटीकोट के नाडे से बंध दिए।

अब दोनों पैरों में बीच में काफी अंतर था, फिर वो मेरे सिर की तरफ आ गईं और कहा – यह अंतिम परीक्षा जरूर पास करना है, श्रद्धा।

उन्होंने उनके और मेरे वक्षों पर ढेर सारी आईसक्रीम लगा दी और कहा – बेटी, तुम मेरे चुचक चूसना और मैं तुम्हारे।

ये सिलसिला शुरू होते ही चाचाजी ने अपना लिंग मेरी योनी में धकेला। मुझे थोड़ा दर्द हुआ और मैंने चाची के चुचक को काट लिया।

चाची ने चाचा से कहा – धीरे और चाची ने भी प्यार से मेरे चुचक को काट लिया और हँसी।

अब चाची ने चाचा को इशारा किया और उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठो से चिपका दिया।

अब चाचा ने एक जोर का धक्का दिया तो उनका बडा लिंग मेरी योनी को चिरता हुआ अंदर चला गया।

मैं जोर से चिल्लाई पर चाची ने अपने मुँह में मेरी आवाज दबा दी और मैं दर्द से तड़प उठी।

तभी चाची ने थोड़ा सा बर्फ मेरे शरीर पर लगाया और मेरे वक्षों को सहलाने लगीं और कहा – बेटी, तुम्हें माहवारी में हर महीने जिस काँटे से तकलीफ होती थी वो काँटा चाचा ने निकाल दिया है, अब तुम्हें कभी तकलीफ नहीं होगी।

फिर उन्होंने मुझे चादर पार गिरा खून भी दिखाया और थोड़ा सा सहला कर बोलीं – सब ठीक हो जायेगा।

इसके बाद उन्होंने चाचा के लिंग पर ढेर सारा क्रीम लागाया और कहा – ये तुम्हारा इलाज कर देंगे, चिंता मत करो।

अब उन्होंने मुझे घोड़ी जैसे बैठने को कहा ताकी दवाई ठीक से लगे।

अब चाचा ने धीरे-धीरे अपना लिंग अंदर डालना शुरू किया और मेरे नीचे लटकते वक्षो को चाची ने सहलाना चालू रखा।

मुझे अब दर्द कम लग रहा था और बहुत मजा आ रहा था।

अब चाचा नीचे लेट गए और चाची ने मुझे उनके लिंग पर बैठकर ऊपर नीचे होने को कहा।

चाची ने कहा – आज तुम जी भर कर झुला झूल लो, कल का क्या पता?

फिर चाचा ने मुझे एक बार लिंग चूसने को कहा, इस बार मैं खुद मान गई और लोलीपोप जैसे उनका लिंग चूस रही थी और चाची प्यार से मेरे बाल सहला रहीं थीं।

अब चाची ने कहा – यह तुम्हारी परीक्षा का अंतिम चरण है।

इस बार चाचा ने जोर-जोर से मुझे चोदना शुरू किया, अब मैं भी पूरे मज़े से उनका साथ दे रही थी।

अंत में मैं थक गई और मुझे चक्कर आने लगे।

तभी चाची ने मेरे मुँह पर थपड मारकर कहा – अंतिम परीक्षा में अगर फेल हुईं, तो सब ख्तम।

मैं तुरंत ही जग गई और जोर-जोर से चिल्ला-चिल्ला कर उनका लिंग अंदर लेने लगी।

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उत्तेजना में मेरे वक्ष फुल गए थे, और फिर मैं एकदम से झड़ गई पर चाचा रुकने वाले नहीं थे।

उन्होंने अपनी स्पीड और बड़ा दी और चाची से कहा – मेरा निकलने वाला है, क्या करूँ?

चाची ने कहा – अंदर ही छोड दो, मैंने गोली दे दी है।

चाचा ने अपना गरम-गरम वीर्य जोर से मेरे अंदर छोड दिया। मैं एकदम से अकड़ गई।

मुझे परम संतोष का आभास हुआ।

इसके बाद में हम सो गए। मैं रात भर सोयी और सुबह ११ बजे मेरी नींद खुली तो देखा चाची मेरे बगल में दूध का ग्लास लेकर बैठी हैं।

उन्होंने मुझे उठते ही दूध पिलाया।

फिर मुझे चलने में जरा सी दिक्कत लगी तो उन्होंने मुझे थाम लिया और कहा पहले ऐसा ही होता है, आज शाम को हम अंबाझरी गार्डन जाएँगे।

आज से मेरे लिये वो गुरु थीं।

आख़िर उन्होंने मुझे बडा आनंद दिया था, मुझे परम सुख की अनुभूति कराई थी।

फिर उन्होंने मुझसे कहा – तुम्हारे लिए एक सर्प्राइज़ है और उन्होंने मेरे कंप्यूटर पर मेरी सुहागरात का वीडियो लगा दिया।

पहले तो मैं शरमा गई, लेकीन फिर हम दोनों ने वो बहुत एन्जोय किया।

बाद में उन्होंने मुझे बहुत काम की बातें बताई जैसे सच्चा सुख कैसे प्राप्त करें, कॉन्डोम कैसे लगाएँ और सारे सेक्स के प्रकार और आसन।

दस दिनों तक चाचा-चाची मुझे ये आनंद देते रहे पर फिर पापा-मम्मी आ गए।

दो साल बाद चाचा की बदली हो गई पूना में, आज भी मैं वो वीडियो देख कर उनको याद करती हूँ।

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