चाची ने मेरे टावल में हाथ डाला-2

Chachi ne towel me hath dala-2

फिर मैंने बहुत बार दरवाज़ा पीटा, लेकिन वो तो अपना काम खत्म करके दूसरे रूम में चली गई और मम्मी के पास जा चुकी थी और उधर मेरे पीछे मीना आंटी भी भीग गई थी, हम दोनों अब अंदर ही थे. दोस्तों उस समय मीना आंटी साड़ी पहने हुई थी और पानी की वजह से उनका ब्लाउज उनके बूब्स से पूरा चिपक गया था और में उनकी निप्पल को बाहर से देख रहा था, उनके दोनों निप्पल बड़े आकार के उभरे हुए थे.

दोस्तों उस घटना से पहले तक कभी भी मेरे मन में उनके लिए कोई भी गंदा ख्याल नहीं आया था, लेकिन उस समय मेरे लंड पर खून भी सवार था और सर में भांग का नशा भी था और अब बस मेरा मन डोलने ही वाला था. तभी मीना चाची रंग का एक और पैकेट अपने एक हाथ में लेकर मेरी तरफ बढ़ने लगी और में उनसे बोला कि चाची प्लीज मुझे अब आप रंग मत लगाओ, में भी अभी अभी नहाया हूँ, लेकिन वो मुझसे बोली कि कोई बात नहीं बस एक ही तो पैकेट है और फिर हंसते हुए उन्होंने अपने ब्लाउज में से रंग का एक और पैकेट बाहर निकाल लिया, जिसकी वजह से मुझे उनके बूब्स के दर्शन हुए, लेकिन यह भी दिख गया था कि उनके ब्लाउज के अंदर और भी पैकेट्स रखे हुए है. फिर में समझ गया था कि आज यह नहीं मानेंगे और मुझे दोबारा नहाना ही पड़ेगा, इसलिए मैंने अपना चेहरा मेरे दोनों हाथों से ढक लिया, उन्होंने मुझे चेहरे पर रंग लगाने की बहुत कोशिश की, लेकिन लगा नहीं सकी, वो लगातार कोशिश करती रही और में उनसे बचता रहा.

फिर आखरी में चाची ने मुझसे बोला कि रोहन अब तू चुपचाप मान जा नहीं तो मेरे पास इसके अलावा और भी तरीके है और में उनकी बात को सुनकर हंसने लगा. तब भी मैंने अपने चेहरे को अपने हाथ से छुपा रखा था तो इसलिए मुझे ज्यादा साफ साफ दिखाई नहीं दे रहा था.

दोस्तों तभी अचानक से कुछ ऐसा हुआ कि मेरे दोनों हाथ तुरंत अपने आप चहरे से हट गए, क्योंकि मेरी मीना चाची ने अपना हाथ मेरे टावल में डाल दिया और अब मेरे टाईट तनकर खड़े भीगे हुए लंड पर उनका गरम कोमल हाथ रगड़ खा रहा था और वो मेरे लंड को रंग लगाने के लिए मसल रही थी. फिर कुछ देर बाद मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने अपने लंड को पूरा खड़ा होने दिया और वो भी इस बात को समझ गई, लेकिन हम दोनों ने अनदेखा किया और कुछ सेकेंड्स मसलने के बाद चाची ने हाथ को बाहर निकाल लिया.

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अब तक मेरा लंड टावल में एकदम टेंट बन चुका था. तभी मैंने चाची से बोला कि आप रुकिये में अभी आपको बताता हूँ. फिर जैसे में उनकी तरफ बढ़ा वो भागने की कोशिश करने लगी, लेकिन जमीन के गीला होने की वजह से वो फिसलकर गिर गई. अब मैंने उन पर थोड़ा सा भी रहम नहीं दिखाया और में तुरंत उनके ऊपर जाकर बैठ गया, उनका पल्लू हटाया और उनके दोनों हाथों को अपने घुटनों के नीचे दबा लिया.

मैंने उनके ब्लाउज में अपना एक हाथ डाल दिया और रंग के उस पैकेट्स को बाहर निकाल लिया और में जोश मस्ती में बिल्कुल ही भूल गया था कि वो मेरी क्या लगती है? और में ऐसे उन पर हाथ मार रहा था जैसे रोज रात को में उसके साथ ही बिताता हूँ. मैंने रंग का पैकेट फाड़ दिया और एक पैकेट को उनके चेहरे पर छिड़क दिया, जिसकी वजह से उनकी आखें एकदम बंद हो चुकी थी. उनका पूरा चेहरा उसमें रंग चुका था और एक पैकेट को मैंने उनकी छाती पर डाल दिया था और फिर में अपने हाथ से उनके चेहरे पर रंग लगाने लगा था और फिर मैंने उनकी छाती पर अपने हाथ से बहुत हल्के हल्के से मालिश की और वो बस सिर्फ़ अपना मुहं इधर उधर कर रही थी और पैर पटक रही थी और लगातार ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी.

फिर कुछ देर बाद मीना चाची ने फिर से पता नहीं कैसे अपना हाथ मुझसे छुड़वा लिया और उन्होंने मेरे पैरों के नीचे से टावल के अंदर अपना एक हाथ डालकर उन्होंने झट से मेरा लंड पकड़ लिया. मेरा लंड एकदम लोहे सा मोटा हो गया था और में भी थोड़ा सा उठा और अपने हाथ से मैंने उनकी साड़ी को ऊपर किया, जिसकी वजह से मुझे उनकी पेंटी नजर आने लगी थी और अब मैंने पेंटी के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया और चूत को छूकर मेरे मन के विचार बिल्कुल बदल गए.

दोस्तों में आप सभी को क्या बताऊँ? एक जवान चूत और एक माँ बनी हुए चूत में बहुत अंतर होता है और मुझे चूत को छुते ही महसूस हो गया कि उनकी चूत के अंदर कितनी गर्मी जोश कामुकता छुपी हुई है? शादीशुदा औरतों की चूत हमेशा आग की तरह धधकती रहती है और मुझे छूकर ऐसा लगा जैसे अंदर कोई भट्टी जल रही हो. मैंने ऋतु चाची की चूत की गरमी को भी छूकर महसूस किया है, अभी कुछ महीने से उनका भी वही हाल था जो वो उस समय मेरा था और सोनल की चूत टाईट और बहुत मज़ा देने वाली थी, लेकिन वो ऐसी गरम नहीं थी. दोस्तों में यह दोनों अनुभव आप सभी को अपनी अगली कहानी में पूरे विस्तार से बाद में जरुर बताऊंगा.

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अब में मीना आंटी की चूत को अपनी मुट्ठी में लेकर मसल, सहला रहा था और वो मेरे लंड को ज़ोर से जकड़े हुए थी. फिर वो मेरा लंड को पास लेकर अपनी नाभि पर सटाने लगी थी और में उनकी उस हरकत से तुरंत समझ गया कि आज तो मेरी किस्मत में मेरे लिए चुदाई का वो सुख लिखा हुआ है. अब मैंने ज्यादा समय खराब नहीं किया और दो तीन बार उनकी नाभि पर अपना लंड सटाया और झट से सही मौका देखकर उनकी पेंटी के एक साईड से मैंने अपने लंड को उनकी चूत में डाल दिया.

मुझे बहुत अच्छी तरह से पता था कि उनकी हर रोज रात को चुदाई होती रहती है और सोनल तो मेरे लंड डालते ही एकदम से उछल गई थी. फिर जब मैंने पहली बार अपना लंड उसकी चूत में उतारा था, लेकिन मीना आंटी ने तो बहुत आराम से मेरा लंड अपनी चूत में लेकर एक हल्की सी सिसकी जरुर अपने मुहं से बाहर निकाली, लेकिन उसकी आवाज बहुत धीमी थी.

अब मैंने जल्दी ही अपने धक्को की स्पीड को बढ़ा दिया था. मीना चाची ने अपनी दोनों आखें बंद कर रखी थी और वो अपने ब्लाउज के ऊपर से बूब्स को भी सहला रही थी, वो उस समय पूरे जोश में थी और शायद पूरी तरह से गरम हो चुकी थी. फिर दो तीन मिनट के बाद उन्होंने अपने बूब्स को बिल्कुल आज़ाद कर दिया. में क्या बताऊँ दोस्तों वाह क्या मस्त आकार के एकदम गोल गोल गोरे बूब्स थे उनके, साला मेरा तो उनको देखकर दिमाग़ ही खराब हो गया और अब मेरे धक्को की स्पीड अपने आप ही दुगनी हो गई. मैंने तुरंत ही अपने रंग लगे दोनों हाथों से उनके दोनों आकर्षक बूब्स को पकड़ लिया, जिसकी वजह से उनके बूब्स पर मेरी उँगलियों के निशान छप गये थे. अब मैंने उनके ऊपर बूब्स पर और नीचे चूत पर पूरा ज़ोर लगाया था.

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मेरा लंड लगातार चूत के अंदर बाहर होता रहा और वैसे यह काम कुछ देर तक लगातार चलता रहा. तभी कुछ देर में मेरा वीर्य निकल गया और मैंने जल्दी से लंड को चूत से खींचकर बाहर निकाल लिया और सारा माल उसकी नाभि पर गिरा दिया. चाची अब एकदम से ढीली पड़ गई थी और मेरा भी लंड अब शांत हो गया था, जिसकी वजह से मेरी चाची के शरीर पर से पड़क कमजोर होने लगी थी और फिर मुझे हल्का सा थप्पड़ मारा और उठ गई.

में भी खड़ा हो गया और चाची ने सबसे पहले तो अपनी साड़ी को ठीक किया और उसके बाद वो अपने ब्लाउज को ठीक करने लगी. फिर मैंने उनसे बोला कि चाची आप क्या अपने बूब्स पर लगा सबूत नहीं मिटाओगी? चाचा को पता चल गया कि उनकी शेरनी का आज किसी ने शिकार किया है तो वो बुरा मान जाएँगे. फिर चाची ने शरारती हंसी हंसते हुए बोला कि बेटा आज शेरनी ने ही आज भी अपना शिकार किया है और जहाँ तक रही सबूत मिटाने की बात तो तेरे चाचा अब देर रात तक ही आएँगे, तू शाम को आ जाना सारे सबूत मिटाने. अब मेरे मुहं से स्माईल निकल गई और चाची हंसती हुई जाकर दरवाजे पर खड़ी हो गई और दरवाजा पीटने लगी.

ऋतु चाची ने दरवाजा खोला और हम दोनों को हंसते हुए देखा और पूछने लगी कि क्या हुआ है तुम लोगों को? ज्यादा मस्ती हो गई क्या? तो मीना चाची ने जवाब दिया कि हाँ और आपको रोहन को रंग नहीं लगाना क्या? आप भी जाओ ना अंदर और इतना कहकर मीना चाची ने ऋतु चाची को भी अंदर धक्का दे दिया और वो मेरी छाती पर आकर पड़ी, वो अब मेरी बाहों में थी. मैंने उनको कसकर पकड़ लिया और उन्होंने मुझसे अपने आपको छुड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन नाकाम रही.

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