चाह थी ननद की, भाभी चुद गयी-1

(Chah Thi Nanad Ki, Bhabhi Chud Gayi-1)

दोस्तो, मेरा नाम अवि राज है, मैं पुणे से हूँ.

यह कहानी दो साल पुरानी उस वक्त की है, जब मैं पुणे में जॉब कर रहा था. यह कहानी एक रियल घटना से प्रेरित है, जिसमें मैं नाम बदल कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ.

हमारे फ्लैट के सामने वाले फ्लैट में एक लड़की रहती थी, उसका नाम अर्चना था. अर्चना बहुत ही खूबसूरत 34-26-36 की फिगर वाली लौंडिया थी. मेरा तो उस पर दिल आ गया था. मैं ऑफिस भी बस इसी ख्याल में मस्त रहता था कि कब घर जाऊं और उसको देखता रहूं. दिक्कत ये थी कि अर्चना पूरा दिन घर से गायब ही रहती थी. जब भी उसको देखने जाता, मुझे उसके भाभी के दर्शन हो जाते थे.

एक शनिवार को मुझे मौका मिला, उस दिन मेरी छुट्टी थी. मैं आज 10 बजे तक आराम से सोता रहा था. अचानक से मेरे घर के दरवाजे पर बेल बजी, तो मैं नींद से उठा. मैंने गेट खोला, तो अर्चना की भाभी नैना सामने खड़ी थी.

वो बोली- मेरा एक अर्जेंट काम है, तुम कर सकते हो क्या?
मैं- हां क्यों नहीं.
भाभी- मुझे मेडिकल से ये लाकर दे दोगे क्या?
इतना कहकर भाभी ने मुझे एक बैग और पैसे दे दिए.

मैं भी मेडिकल स्टोर ढूंढने चल दिया. मेडिकल स्टोर पहुंच कर मुझे पता चला कि भाभी ने मुझे स्टेफ्री नैपकिन लाने को बोला था. मैं समझ गया कि भाभी के पीरियड्स चल रहे होंगे.

मैं घर आया और भाभी को बैग दे दिया. इसके बाद मैं अपने रूम में जाकर सोने लगा. यूं ही दिन निकलने लगे, पर अब भाभी मुझसे खुलने लगी थीं.

इस घटना के 7 दिन तक भाभी मुझे कहीं पे भी दिखी ही नहीं. फिर एक दिन मैं फ्लैट में सो रहा था, तो मैंने सोचा चलो बाहर से कुछ खाकर आता हूँ. यह सोचकर मैं बाइक की चाबी लेकर चल दिया. मैंने गेट खोला, तो भाभी सामने खड़ी थीं. इतने दिन बाद भाभी को देख मैं मुस्कुरा दिया.

भाभी भी मुस्कुरा कर बोलीं- चाय या कॉफी पियोगे?
मैं- हां क्यों नहीं … चाय पी लूंगा.

मैं अन्दर चला गया और सोफे पर बैठ गया. मैंने भाभी से पूछा- भाभी अर्चना नहीं दिख रही. कहीं गई है क्या?
भाभी- अर्चना और उसके अंकल सुबह जाते हैं और शाम को आते हैं. मैं बोर हो जाती हूं, इसलिए सोचा आज तुम्हारी छुट्टी होगी, तो क्यों ना तुमको बुला लूँ.

ऐसे ही बात करके मैं भाभी से सिर्फ अर्चना के बारे में ही पूछ रहा था.

वो बोलीं- क्यों जब से आए हो, तब से अर्चना अर्चना ही कर रहे हो, तुम्हें वो पसंद है क्या?
मैं- ऐसा कुछ नहीं भाभी, बस मैंने तो यूं ही बोला.
भाभी- कितने साल के हो तुम?
मैं- भाभी मैं 23 साल का हो गया हूँ.
भाभी- तुम्हें मालूम भी कि अर्चना 25 साल की है.
मैं- तो क्या हुआ, उम्र तो केवल उम्र होती है … एक दो साल के फर्क से क्या दिक्कत है?
इस पर भाभी एकदम से बोलीं- अच्छा उम्र की कोई दिक्कत नहीं है तो ये बताओ कि मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ.

मुझे भाभी की बात सुनकर झटका सा लगा. भाभी की उम्र लगभग 31-32 साल की रही होगी. जबकि भाभी की 34-28-38 की फिगर से उनकी उम्र का अंदाज ही नहीं होता था.
मैंने अब ध्यान से देखना शुरू किया, तो भाभी ब्लैक कलर की साड़ी में सेक्स बॉम्ब लग रही थीं.

मैंने कहा- आप तो अर्चना से भी ज्यादा क्यूट हो, बस आपकी शादी हो गयी है, इसलिए आप पे कभी ट्राय नहीं किया.
इतना सुनते ही भाभी मेरे पास आकर बैठ गईं और बोलीं- तुम मुझे बहुत पसंद हो … क्या मैं तुम्हें हग कर सकती हूं?
मैंने उन्हें हग किया और कहा- अच्छा भाभी मुझे अभी तो कहीं जाना है, मैं आपको बाद में मिलूंगा.
इतना कहकर मैं वहां से निकलने लगा.

भाभी इठलाते हुए बोलीं- दोपहर के खाने को आ जाना, साथ में खाएंगे.
‘ठीक है …’ कहकर मैं वहां से निकल गया.

मुझे भाभी की जवानी भोगने का ऑफर मिल रहा था और मैं चला आया, क्योंकि मुझे अचानक से झटका सा लगा था. मैं सोचने लगा कि कहीं अर्चना और भाभी की कोई चाल तो नहीं है. फिर मैंने सर झटका और सोचा कि देखा जाएगा.

दोपहर दो बजे मैंने भाभी के घर की बेल बजायी. भाभी ने आवाज दी- कौन है?
मैंने बताया- भाभी मैं हूँ.
तो भाभी की खनकती सी आवाज आई- दरवाजा खुला है, अन्दर आ जाओ.

अन्दर का नजारा देख कर मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं. भाभी ने दूसरी नेट वाली ब्लैक कलर की साड़ी पहनी हुई थी, साथ ही लाल रंग का स्लीवलैस ब्लाउज पहना हुआ था जिसका गला बहुत ही ज्यादा खुला था.
भाभी को सजा-धजा देख कर मुझे ऐसा लगा कि आज मेरी सुहागरात है. मैंने भाभी की तारीफ़ की- वाह भाभी बड़ी सुन्दर लग रही हो.

भाभी ने झुक कर अपने मम्मों का दीदार कराया और मुझे थैंक्स कहा.

फिर हम दोनों खाना खाने बैठ गए. खाते टाइम मेरी नजर तो सिर्फ भाभी के ऊपर ही थी.

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भाभी मुस्कुरा कर बोलीं- ताकना बंद करके खाना भी खाओगे?
मैं हंस दिया.

ऐसे ही खाना खत्म करके मैं सोफे पे जाकर बैठ गया और भाभी को निहारने लगा.
भाभी के गोल बड़े बड़े चूचे, जो बोल रहे थे कि करीब आ जाओ और हमें दबा लो. भाभी की उठी हुई गांड ऐसी मस्त दिख रही थी, जो निमंत्रण दे रही थी. इसी तरह उनके गुलाबी होंठ भी बोल रहे थे कि चूस लो … मेरा पूरा रस निकाल दो.

थोड़ी देर ऐसा ही चला था कि भाभी मेरे सामने वाले सोफे पर आकर बैठ गईं.
मैंने कहा- भाभी आप तो अर्चना से भी खूबसूरत लग रही हो. क्या मैं आपको किस कर सकता हूँ.
भाभी ने बांहें फैलाते हुए कहा- आ जाओ, रोका किसने है.

बस फिर क्या था … मैं भाभी के पास जाकर बैठ गया और उनका ठंडा हाथ अपने हाथों में ले लिया और अपने होंठ भाभी के होंठों से चिपका दिए. भाभी ने मेरा स्वागत किया और अपने होंठ मुझे सौंप दिए.
मैं भाभी को बैठे बैठे ही किस करने लगा.

करीब 5 मिनट तक किस करने के बाद मैंने उठकर उन्हें अपनी ओर खींच लिया. वो लता सी मेरी गोद में खिंची चली आईं. मैंने भाभी के होंठों पर होंठ लगा कर चुम्बन जड़ दिए. मुझे ऐसा लग रहा था कि ये पल यहीं रुक जाए.

अब तक मेरे पेंट में तो तंबू बन गया था. मेरा लंड भाभी की नाभि के ऊपर टच हो रहा था. मैंने अपना हाथ भाभी की कमर के ऊपर रखा और वैसे ही ऊपर ले जाने लगा. भाभी तो खुद को मुझे सौंप ही चुकी थीं, वे मेरी किसी भी हरकत का विरोध नहीं कर रही थीं. मैंने उनके ब्लाउज के हुक को दोनों हाथों में पकड़ा और खोलने लगा.

तभी भाभी मुझसे अलग हो गईं और बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- भाभी मुझे कुछ हो रहा है … आपको नहीं हुआ क्या?

मैंने इतना कहकर भाभी को पीछे की और धकेला और सोफे पे गिरा दिया. मैं भाभी को किस करने लगा. अब भाभी का हाथ भी मेरी पीठ पर आ गया था और वो भी मजे लेने लगी थीं.

करीब 15 मिनट तक हम दोनों के बीच ऐसे ही चलता रहा. उनका शरीर मेरे नीचे दबने लगा था. उनका कण्ट्रोल ख़त्म हो रहा था.

तभी मैं भाभी से अलग हो गया. मैं अब तक उनकी पूरी लिपस्टिक खा चुका था. वो मेरी ओर वासना भरी निगाहों से देख रही थीं. भाभी नशीली आवाज में बोलीं- चलो, अन्दर कमरे में चलते हैं.

मैं भाभी को लेकर अर्चना के बेडरूम में जाने लगा. वो बोलीं- तुम कमरे में चलो, मैं पीछे से पानी लेकर आती हूँ.

अब तक का हमारा पूरा रोमांस ज्यादा कुछ बात किए बिना ही हो रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं उनको नहीं, वो मुझे चोदने वाली हैं, क्योंकि जब मैंने अपना हाथ उनकी साड़ी के अन्दर गांड पे ले जाना चाहा, तो उन्होंने मना नहीं किया था … बस ‘उन्ह …’ कह कर झटक दिया था.

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