केमिस्ट्री टीचर के साथ चुदाई-2

(Chemistry teacher ke sath chudai-2)

उनके स्कूल का टाईम, पर्सनल सेल नंबर, मैल अकाउंट, वो चाय की बहुत शौकीन थी वग़ैरा वग़ैरा और इन सभी बातों में से दो चीज़ें ऐसे थी जो मेरे बाद में काम आई. पहली थी, उनकों पढ़ते सयय चुनरी वग़ैरा लेना बिल्कुल पसंद नहीं था और मुझे जब भी मौका मिलता में उनके सामने वाली कुर्सी पर बैठ जाता और उनके बूब्स के मस्त नज़ारे लेता रहता था और अपनी हवस पूरी करता रहता.

शायद उन्हें इस बात का पता चल चुका था और इसलिए वो हर बार मुझे अपने पास बैठने को कहती जिससे में उनके बूब्स की जगह अपनी किताब पर ध्यान दूँ और दूसरी ये कि वो हमारे ग्रुप के बाद सीधा स्कूल जाती थी और उनके पास कोई साधन नहीं था इसलिए वो ऑटो से जाती थी.. लेकिन मैंने उन्हें मना लिया था कि में उन्हें अपनी बाईक पर छोड़ आया करूँगा और वो मेरे बहुत ज़ोर देने पर मान गयी और मैंने फिर अपनी दूसरी चाल चली.. मैंने अपनी बाईक पर से सभी पकड़ने के हुक हटा दिए जिससे मेडम को कुछ पकड़ने करने को ना मिले और उन्हें मुझे ही पकड़ कर बैठना पढ़े.

फिर मेरा प्लान सफल रहा और मेडम मुझे पकड़कर बाईक पर बैठ जाती और में उनसे कहता कि मेडम रोड खराब है तो थोड़ा और पास हो कर बैठो और मुझे कसकर पकड़ लो.. उनका स्कूल उनके घर से 15 मिनट की दूरी पर था.. लेकिन में अपनी बाईक इतनी धीरे चलता कि 15 मिनट की जगह 25 मिनट लगा देता जिससे मुझे उनके जिस्म को महसूस करने का मौका मिल जाता. मेरे पास बस यह 25 मिनट ही होते थे जब मुझे उनके जिस्म का स्पर्श मिलता था और स्पर्श भी ऐसा था जो मेरे पूरे शरीर को चार्ज कर देता. फिर जब भी कोई झटका लगता तो उनके बूब्स मेरी कमर से टच होते थे और मुझे ऐसा लगता था कि मानो उनके बूब्स से करंट पास होकर सीधा मेरे लंड पर जा रहा हो.

ऐसे ही छोटे-छोटे पल का मजा उठाते हुए में एक महीने तक अपने मन को समझता रहा.. लेकिन उनके शरीर को पाने की कोशिश मुझमें इतनी बड़ चुकी थी कि मन में मैंने ठान लिया था कि अब जो भी हो मुझे उन्हें चोदना ही पढ़ेगा. तो एक दिन मुझे मौका हाथ लग ही गया उस दिन मेरे एग्जाम होने की वजह से में सभी के साथ नहीं पढ़ सका और मेरा वहाँ पर जाने का समय छूट गया और फिर मैंने मेडम से अलग से पढ़ाने की बात कही.. क्योंकि मेरे एग्जाम और मेडम का सभी को पढ़ाने का समय एक था. तो मेडम ने भी मेरे एग्जाम खराब ना हो इसलिए मुझे अकेले में क्लास देने का फेसला किया और में मन ही मन बहुत खुश हुआ. फिर दूसरे दिन जब में उनके पास पहुंचा तो वो घर पर अकेली मेरा इंतजार कर रही थी मेरे वहाँ पर पहुंचते ही उन्होंने मुझे पढ़ाना शुरु किया.

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फिर में अपनी किताब पर कम और मेडम की चूची पर ज्यादा ध्यान देने लगा. फिर ऐसे ही दो दिन बीत गए और मेडम को भी धीरे धीरे मुझमें रूचि होने लगी. फिर एक दिन जब में वहाँ पर पहुंचा तो मेडम नहाकर बाथरूम से बाहर निकली और मुझे एक स्माईल देकर दूसरे कमरे में चली गई. फिर में भी मौका देककर उनके पीछे पीछे कमरे में चला गया और मैंने जाकर उन्हें जोर से पकड़ लिया. तो वो छूटने की बहुत कोशिश करने लगी और कहने लगी कि तुम यह क्या कर रहे हो.. प्लीज मुझे छोड़ दो.

मैंने कहा कि नहीं प्लीज एक बार मुझे अपनी प्यास बुझाने दो. फिर उसने कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप खड़ी रही और मैंने उसे एक लिप किस किया और उसके बूब्स दबाए. फिर दस मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद मैंने उसे सहलाना शुरू किया और वो सिसकियाँ लेने लगी और कहने लगी कि प्लीज जो भी करना है जल्दी करो में अब और नहीं रुक सकती.

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फिर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और एक एक करके उसके कपड़े उतारने लगा और मैंने धीरे धीरे उसे पूरा नंगा कर दिया और मैंने जैसे ही उसकी ब्रा से उसके बूब्स को आजाद किया मेरा लंड और भी तन गया. फिर मैंने जल्दी से उसके बूब्स मुहं में लिए और छोटे बच्चे की तरह चूसने लगा.. वो मुझे अपने बूब्स पर जोर जोर से दबा रही थी और में एक हाथ से उसकी चूत को गरम कर रहा था. करीब दस मिनट बूब्स चूसने के बाद मैंने उसकी चूत का नम्बर लिया और अपना मुहं चूत के पास ले जाकर चूत चाटने लगा और जीभ से चूत चोदने लगा. वो मेरा सर पकड़ कर चूत पर दबा रही थी और फिर वो झड़ गई.

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मैंने उसका पूरा रस पी लिया और फिर मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधे पर रखे और उसकी चूत का निशाना साधा और एक जोश से भरपूर धक्का दिया और तभी उसकी एक जोर की चीख निकल गई मैंने जल्दी से उसके मुहं पर अपना एक हाथ रखा और उसके शांत होने का मौका देखने लगा. फिर जब वो मुझे थोड़ी शांत लगी तो मैंने धक्के देने शुरू किए और उसकी चूत में लंड धीरे धीरे समाने लगा.

थोड़ी देर बाद वो भी अपना सारा दर्द भुलाकर मेरा साथ देने लगी.. वो भी अपनी पहली चुदाई का मजा लेने लगी और अपनी गांड को उठाकर उछलने लगी और आज मैंने उसकी चूत की सील तोड़ ही दी थी जो मेरा एक सपना बन चुकी थी. फिर में भी उसकी दोनों जांघो को पकड़कर उसे धक्के पर धक्के देने लगा.. लेकिन उसकी पहली चुदाई के साथ साथ यह मेरी भी पहली चुदाई थी और अब मुझे भी थोड़ा थोड़ा दर्द होने लगा था.. लेकिन उस चूत में सामने ऐसे हजारों दर्द कुरबान और में बिना दर्द की परवाह किए उसे चोदता रहा और वो चुदवाती रही. फिर करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद अचानक से मेरी स्पीड बढ़ गई और मुझमें जोश आ गया.. शायद वो मेरे झड़ने का संकेत था और हुआ भी वही में करीब चार-पांच धक्को के बाद झड़ गया. तभी मुझे लगा कि मेरे शरीर से एकदम से मेरी जान निकल गई और में कुछ सैकिंड के लिए रुक गया. फिर जोर की एक धार उसकी चूत में छोड़ी और दोबारा चोदने लगा.. लेकिन मेरी शक्ति अब मुझसे से निकल चुकी थी और में बस ऐसे ही धक्के देता रहा.

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फिर वही हाल उसका भी था वो अपनी पहली चुदाई से जितना खुश थी उतना ही उसको दर्द भी था. उसकी चूत अब फट चुकी थी और उससे खून बहने लगा था और उसको यह सब कुछ पता था फिर भी वो चुदाई में व्यस्त थी. फिर कुछ देर बाद में थककर उसके ऊपर ही पड़ गया और सोचने लगा कि में एक हसीन सपने में हूँ और बूब्स चूसने लगा और वो मुझे कमर से सहला रही थी.. शायद वो अपनी इस चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट थी. फिर में अपनी नींद से जागा और मैंने उठकर लंड चूत से बाहर किया और फिर बाथरूम में जाकर साफ किया. फिर वो भी उठी.. लेकिन उसकी चाल में बहुत फर्क था वो थोड़ा लंगड़ाकर चल रही थी और मैंने उसे सहारा दिया और वो दोबारा नहाने लगी और में बेड पर लेटा रहा और उसके आने का इंतजार करने लगा.

फिर उसने अंदर आकर बेडशीट हटा कर दूसरी बिछा दी. तो दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी जिसमे मैंने अपनी मेडम को चोदा.. लेकिन उसके बाद वो मेरी आधी लाईफ पार्टनर बन चुकी थी और में भी उसका और हमे जब भी मौका मिलता पढ़ाई के साथ साथ चुदाई भी करते. वो अब मुझे हमेशा सभी बच्चो से अलग ही पढ़ाती है. बिल्कुल अकेले ताकि हम चुदाई का भी पाठ पढ़ सके.. दोस्तों किसी ने सही कहा है कि सारी खुशियाँ एक तरफ और चुदाई का सुख एक तरफ.

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