केमिस्ट्री टीचर के साथ चुदाई-1

(Chemistry teacher ke sath chudai-1)

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम सेम है और मेरी उम्र 21 साल है. में अमृतसर पंजाब का रहने वाला हूँ और मेरी लम्बाई 5.8 इंच है में दिखने में ठीक ठाक हूँ. दोस्तों मेरी यह पहली कहानी है और में उम्मीद करता हूँ कि यह आप सभी को बहुत पसंद आएगी. क्योंकि यह मेरी एक सच्ची कहानी है जिसे में आज आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ और अब में आप सभी का ज्यादा समय खराब ना करते हुए अपनी कहानी पर आता हूँ.

दोस्तों यह बात उस समय की है जब में कॉलेज में पहले साल का स्टूडेंट था और एम. ए. के एग्जाम की तैयारी के लिए में केमिस्ट्री की क्लास जा रहा था.. लेकिन केमिस्ट्री का कोई अच्छा टीचर नहीं मिल रहा था. तो मैंने अपने कज़िन से किसी अच्छे टीचर के बारे में पूछा. तो वो कहने लगा कि में जहाँ पर में पढ़ रहा हूँ तू भी वहीं पर आ जा. वो टीचर बहुत अच्छी है और पढ़ाती भी बहुत अच्छा है. तो उसी शाम को में उसके साथ कोर्स की बात करने चला गया. मुझे मेरे घर से वहाँ पर पहुंचने में 15 मिनट लगे और हम अपनी मंज़िल पर पहुँच गये. मेरे कज़िन ने मुझे बताया कि मेडम एक स्कूल टीचर है और एक बार सुबह 2 घंटे और शाम को फ्री हो कर घर में ही पढ़ाती है.

फिर हम दोनों अंदर जाकर सोफे पर बैठ गये और फिर पहले एक 45-50 की आंटी पानी लेकर आई. में तो डर गया और सोचने लगा कि हम यह तो ग़लत जगह आ गये इसे तो कुछ नहीं आता होगा और मेरा भविष्य तो गया.. लेकिन थोड़ी देर बाद ही एक सुंदर लड़की कमरे में आई. फिर क्या था? मेरा भविष्य गया भाड़ में और में हम दोनों.. मेरे और टीचर के भविष्य के बारे में सोचने लगा. उसके बाद जो 10-15 मिनट हमारी बात हुई मुझे नहीं पता कि में तो बस हाँ हाँ करता रहा और उसका चेहरा और फिगर देख रहा था. उसकी उम्र 20-21 साल की थी और उसकी भूरी आंखे, गोरा रंग, मीडियम बाल और उसका सबसे सुंदर हिस्सा था उसके बूब्स 34-38-40 के होगें.. क्या चीज़ थी यार.. वो अप्सरा थी.

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फिर में जब बाहर आया तो मुझे पता ही नहीं चला कि कब मैंने सुबह 6 बजे का कोचिंग शुरू कर लिया. फिर में सोने में तो बहुत बड़ा कुंभकरण था और सुबह उठाना तो मेरे लिए नामुमकिन था.. लेकिन क्या करता? इस अप्सरा ने मुझसे मेरे होश तो छीन लिए थे और अब नींद भी. फिर सोमवार को मेरा पहला दिन था और में लेट नहीं होना चाहता था.. लेकिन रविवार की रात को मेडम के नाम की मुठ मारकर में तो पता नहीं किस गहरी नींद में चला गया और मुझे सुबह के अलार्म का पता ही नहीं चला. सुबह 6:30 बजे मेरी नींद खुली और में फटाफट अपनी शर्ट और जिन्स पहन कर ही चला गया. फिर 6:45 पर मेरी स्पेशल एंट्री हुई और सारा ग्रूप मेरी और आँखें फाड़ फाड़कर देखने लगा.. लेकिन मुझे तो ऐसा लगा कि जैसे में एक सपने से जागकर दूसरे सपने में आ गया हूँ. मेरा पूरा ग्रूप लड़कियों का था और मुझे ऐसा लगा कि जैसे में इन गोपियों का किशन बनकर इनके साथ खेलने वाला हूँ.. लेकिन मेरी राधा तो दिख ही नहीं रही थी. तभी मेरे कंधे पर एक हाथ आया और मेडम बोली कि वेलकम नवाब साहिब इस कोर्स में आपका बहुत बहुत स्वागत है.

फिर वो मेरे पीछे से आकर मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयी और मुझे अपने पास वाली कुर्सी पर बैठने का इशारा किया और में चुपचाप आकर बैठ गया.. लेकिन मेरा पूरा ध्यान उनके बूब्स पर था. वो गहरे गले का कुर्ता पहने हुई थी और ऊपर से कोई चुनरी वग़ैरा भी नहीं पहनी थी. उनके बड़े बड़े बूब्स साफ साफ दिख रहे थे और मुझे ज़ोर ज़ोर से चीखकर पुकार रहे थे. मैंने इतनी बड़ी और सेक्सी कल्पना तो आज तक नहीं देखी थी. फिर उन्होंने पढ़ाना तो शुरू कर दिया.. लेकिन मेरा लंड मुझे पढ़ने नहीं दे रहा था और मेरा पूरा ध्यान उनके बूब्स पर था और एक साईड पर बैठने के कारण मुझे उनकी सफेद ब्रा की लेस साफ साफ नज़र आ रही थी.. जो कि बड़ी ही सेक्सी लग रही थी और ऐसा नज़ारा देखकर तो में बहुत ही गर्म महसूस कर रहा था.

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फिर मुझे परेशान देखकर मेडम ने पूछ कि क्या बात है सेम? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं मेडम सुबह ऐसे ही उठकर आ गया हूँ तो थोड़ा ठीक नहीं लग रहा है और शायद घर जाकर कुछ खा लूँ तो ठीक हो जाऊंगा. फिर उन्होंने कहा कि घर जाने की क्या जरूरत है तू बैठ में अभी कुछ तेरे लिए खाने को लेकर आती हूँ.. लेकिन मुझे कहाँ भूख थी.. भूख तो मेरे लंड को लग चुकी थी और फिलहाल उसको शांत रखने का एक ही तरीका था और वो था घर पर जाकर मेडम के नाम की मुठ मारना. फिर 5 मिनट बाद मेडम एक कटोरी में आमलेट बनाकर ले आई और मुझे आमलेट पकड़ते हुए मेडम जैसे ही झुकी तो उनके 34 के बूब्स ने मुझे फिर से दर्शन दे दिए. इतना साफ और पास का नज़ारा देखकर तो में होश ही खो बैठा और मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरे हाथों से कटोरी फिसल कर नीचे गिर गई.

फिर में बहुत बुरा महसूस करने लगा और मेडम से सॉरी सॉरी कहने लगा. तो मेडम ने प्यार से मुझे बैठने को कहाँ और बाहर से कपड़ा लेकर ज़मीन साफ करने लगी. अब तो नजारा और भी मस्त हो गया था और जैसे ही वो नीचे बैठती उनकी जांघो के दबाव से बूब्स और बाहर निकल आते थे. दोस्तों में तो और भी गरम हो गया था और ऐसा लग रहा था कि बस अब 2 मिनट भी अगर और रुका तो मेरा लंड दर्द के मारे झड़ जाएगा. में फटाफट वहाँ से भाग खड़ा हुआ और घर पर जाते ही मैंने बाथरूम में जाकर मेडम के नाम की मूठ मार दी.. लेकिन मुझ में इतना सेक्स भर चुका था कि लंड झड़ने के बाद भी पूरे जोश में था और उसे पूरी तरह शांत करने के लिए मुझे एक और बार मूठ मारनी पड़ी.

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फिर एक दो बार मूठ मारने के कारण में बहुत थक गया और जाकर सो गया. उस दिन में बहुत अच्छा महसूस कर रहा था और वो पूरा का पूरा नजारा मेरे सामने दोबारा दोबारा आ रहा था. तो मैंने तय किया कि में अब दोबारा वहाँ पर नहीं जाऊंगा और कोई और टीचर ढूँढ लूँगा. तो ऐसे ही एक सप्ताह निकल गया.. लेकिन मुझे कोई भी टीचर नहीं मिला. तभी मेरे कज़िन का मुझे फोन आया और उसने मुझे कहा कि मेडम मेरे बारे में पूंछ रही थी कि में पढ़ने क्यों नहीं आ रहा? और मेरे कज़िन ने मुझे कोर्स बीच में छोड़ने के लिए मना किया और उसके कई बार कहने पर में मान गया.. लेकिन में बड़ा घबरा रहा था.

फिर बड़ी मुश्किल से में अगले दिन ट्यूशन पर गया और फिर मेडम ने मुझसे बहुत प्यार से बात की और पढ़ाना शुरू कर दिया और ऐसे ही एक महीना बड़े आराम से निकल गया. में मेडम के साथ बहुत अच्छी तरह से घुल मिल गया था.. लेकिन में बहुत कम बोलता था और उनकी नज़रों में में बड़ा ही शरीफ़ लड़का था.. लेकिन इस शरीफ नक़ाब के पीछे में अपनी हवस पूरी करता रहता था. फिर उस महीने में मैंने मेडम के बारे में बहुत खोज की और उनकी बहुत सारी आदतों, पसंद और ना पसंद को में जान गया था.

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