चुदाई का संदेशा

Chudai ka sandesha

हैल्लो दोस्तों, में आपका प्यारा आर्यन हूँ और में फिर से अपनी एक कहानी के साथ हाज़िर हूँ. मेरी उम्र 19 साल है, में दिखने में हैंडसम हूँ, मेरा कलर गोरा है और मेरे लंड का साईज 7 इंच है. अब में आपका ज्यादा समय ख़राब ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ.

अब दोस्तों मेरे प्यार के दिन ख़त्म हो चले थे, अब में बहुत ही तन्हा रहने लगा था, कहते है ना हर कुत्ते के दिन चेंज होते है तो मेरे भी हुए और में वही पहली वाली औकात पर आ गया था. अब में तो जैसे तैसे मुठ मारकर काम चला रहा था और अब में ज़्यादातर अपनी पिछली यादें याद करके मुठ मारा करता था तो तब मुझे भी एहसास हुआ कि में सेक्स के बगैर नहीं रह सकता हूँ. आप लोग मेरी फोटो देखोगे तो आप सब भी कहोगे कि साला देखने में ही ठरकी है और में हूँ भी.

अब में 2 हफ्ते से मुठ मारकर काम चला रहा था, क्या करता कोई लड़की ही नहीं मिल रही थी? और ना कोई जुगाड़ बन रहा था. फिर मेरे जीवन में एक अवतार आया, मेरा दोस्त और मेरे लिए संदेशा लाया और बोला कि आजा मेरे भाई चूत चोदेंगे. फिर मैंने कहा कि चूत कहाँ चोदेंगे? तो वो बोला कि मेरी गर्लफ्रेंड है, जो कि ग्रूप सेक्स करना चाहती है.

मैंने कहा कि भाई यहाँ तो कोई पार्टनर नहीं है, तो वो बोला कि अबे वो दो लड़को से एक साथ चुदना चाहती है. फिर में बहुत खुश हुआ और मेरे लंड को बहुत दिनों के बाद चूत मिलने का एहसास हुआ और मेरी चड्डी में से बाहर झाँककर चूत की तलाश करने लगा, अब में तो बहुत खुश हो गया था. अब हमारा शाम का प्रोग्राम था तो मैंने तो पूरी तैयारी कर ली थी, अब में एक पूरा पत्ता ताक़त की गोलियाँ ले आया था, ताकि में लंबी से लंबी सेक्स ड्राइव कर सकूँ.

फिर हमने एक टू इन वन रूम बुक किया और वहाँ चले गये. फिर शाम को उसकी गर्लफ्रेंड आई और साथ में इंतजार ख़त्म होने का संदेशा लाई. अब मेरी आँखें चूत के लिए तड़प रही थी, फिर जैसे ही डोर बेल बजी, तो मेरे लंड में भी घंटियाँ बजी. फिर मैंने उठकर दरवाजा खोला तो दरवाजा खोलते ही मेरी आँखें फटी रह गयी, क्या माल था यारों? भगवान ने भी आइटम बनाया था. फिर मैंने उसे अंदर आने को कहा और फिर हम दोनों ने एक दूसरे से परिचय किया, उसका नाम अर्चिता था.

मैंने अपने दोस्त को साईड में ले जाकर पूछा कि बहनचोद माल तो बहुत अच्छा पकड़ा है, कहाँ से लाया? तो वो कहने लगा कि कॉलेज में साथ में पढ़ती है. फिर मैंने कहा कि यार तेरी तो मौज है, तो वो बोला कि साले आज तो तेरी भी मौज है. फिर मैंने बातें करना बंद की और फिर हम दोनों बेड पर बैठ गये, तो राकेश ने मुझे सोफे पर बैठने को कहा और मेरी तरफ आँख मारी. फिर में समझ गया और सोफे पर जाकर बैठ गया और अर्चिता राकेश के पास जाकर बैठ गयी.

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फिर मैंने तो अपनी सिगरेट जला ली और स्मोक करने लगा. फिर उधर राकेश अर्चिता की जांघो पर अपना एक हाथ फैरने लगा. अब अर्चिता को थोड़ी शर्म आ रही थी, फिर राकेश उसके और करीब गया और उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया और ज़ोरदार किस की बौछार कर दी और उसका टॉप भी उतार दिया और फिर थोड़ी देर तक उसके बूब्स दबाए और फिर धीरे-धीरे उसे पूरा नंगा कर दिया. अब में तो अर्चिता का शरीर देखकर हैरान था, क्या गजब का माल था वो? उसके बूब्स पर पिंक निप्पल और उसकी चूत पूरी फटी हुई थी.

अब मेरे बाप का क्या जा रहा था? अब मुझे तो फ्री की चूत मिल रही थी. फिर राकेश ने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी चूत में पूरा डाल दिया और फिर मुझे अपने पास बुलाया, तो मैंने अपनी सिगरेट फेंकी और अपने सारे कपड़े उतार दिए.

अब में अच्छी तरह से समझ गया था कि अर्चिता ग्रूप सेक्स क्यों चाहती थी? वो किसी और से भी चुदना चाहती थी, क्योंकि राकेश उसे संतुष्ट नहीं कर पाता था, लेकिन वो राकेश पर विश्वास करती थी इसलिए उसने यह काम राकेश के हवाले सौंप दिया था, लेकिन मुझको क्या? अब मुझे तो चूत मिल ही रही थी.

फिर मैंने थोड़ा मज़ाक करना शुरू कर दिया और अब राकेश का लंड अर्चिता की चूत में और मेरा लंड तो पिछले 1 घंटे से ही खड़ा था. फिर में राकेश के पीछे गया और उससे कहा कि राकेश आज अर्चिता की चूत तेरी है, तो में तेरी ही गांड मार लेता हूँ और वैसे भी मैंने किसी लड़के की गांड नहीं मारी है. फिर मेरी यह बात सुनते ही अर्चिता हंसने लगी.

राकेश ने कहा कि चूतिए अर्चिता की मार मेरी गांड में क्या रखा है? तो मैंने कहा कि बहनचोद क्यों चिल्ला रहा है? में तो बस मज़ाक ही कर रहा था. फिर मैंने कहा कि यार मुझे सूखा-सूखा मज़ा नहीं आता, तो उसने कहा कि तुझे जो करना है, तू बाद में कर लेना. फिर मैंने कहा कि ठीक है में बाद में ही कर लूँगा और फिर मैंने अपने कपड़े वापस से पहन लिए. फिर राकेश ने उसे चोदना शुरू किया, अब अर्चिता आराम से लेटी हुई थी और बस बीच-बीच में हल्की-हल्की सिसकियाँ ले रही थी.

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फिर राकेश भी झड़ गया, लेकिन अर्चिता को देखकर ऐसा लग रहा था कि वो अभी और मज़े लेना चाहती थी. फिर राकेश ने ही अपना लंड बाहर निकाला और अपने कपड़े पहन लिए. फिर मैंने उससे कहा कि भाई 2 बीयर की बोतल मंगवा दे, तो उसने कहा कि अभी लेकर ही आ जाता हूँ. फिर मैंने उसे पैसे दिए और वो बोतल लेने चला गया, शराब की दुकान वहाँ से 3 किलोमीटर की दूरी पर ही थी. अब अर्चिता मुझे देख रही थी. फिर मैंने उससे कहा कि तुम राकेश से खुश नहीं हो ना? तो उसने कहा कि नहीं ऐसी बात नहीं है.

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मैंने कहा कि यह सब तुम्हारी आँखों में दिख रहा है और उससे कहा कि कोई बात नहीं, में तुम्हें किसी और दिन अपने जलवे दिखाऊंगा. तो वो बोली कि अभी क्यों नहीं? तो मैंने कहा कि राकेश की गांड में मिर्ची लगेगी और कोई बात नहीं है. फिर वो मान गयी, तो मैंने उससे कल फिर इसी रूम पर आने को कहा.

फिर राकेश 10 मिनट के बाद बीयर लेकर आया और फिर हम तीनों ने बीयर पी और अपने-अपने घर चले गये. फिर मैंने तो अपने घर जाते ही अर्चिता के नाम की मुठ मार ली और बेताबी से अगले दिन के बारे में सोचने लगा. फिर अगले दिन में उसी रूम पर पहुँच गया, तो 30 मिनट के बाद अर्चिता भी वहाँ आ गयी, तो मैंने उससे गेट बंद करने को कह दिया.

मैंने 4 ताकत की गोलियाँ निकाली और खा ली और एक गोली उसे भी खाने को कहा, तो उसने भी गोली खा ली. फिर में बेड की एक साईड पर बैठ गया और अर्चिता को अपनी गोद में बैठा लिया. अब उसके होंठ मेरे होंठो के पास और उसके बूब्स मेरी छाती से टच हो रहे थे. फिर उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया, तो मैंने उसे अच्छी तरह कस लिया और उसे स्मूच देने लगा. अब वो भी मेरा पूरा-पूरा साथ देने लगी थी और अब में लगातार अपनी जीभ उसके मुँह में घुमा रहा था और वो मेरी जीभ को अपने मुँह में पकड़ने की कोशिश कर रही थी.

फिर में धीरे-धीरे अपना एक हाथ उसके कूल्हों की तरफ ले गया और धीरे-धीरे सहलाने लगा. अब वो तो और भी गर्म हो गयी थी और झटपटाने लगी थी. फिर मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी. फिर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और उसके साथ में लेट गया. अब में उसके बूब्स को अपने एक हाथ से मसल रहा था और साथ ही साथ चूस भी रहा था. फिर उसने मेरा सिर पकड़ा और अपने बूब्स पर दबाने लगी. अब में भी अपनी पूरी जान से उसके बूब्स दबा रहा था और चूम रहा था.

मैंने उसकी जीन्स उतारी और उसकी पेंटी में अपनी उंगलियाँ डालकर उसकी चूत तक ले गया. अब मैंने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत में घुमानी शुरू कर दी थी. फिर मुझसे भी नहीं रहा गया तो मैंने उसकी पेंटी उतार फेंकी और उसकी पिंक चूत पर अपने सॉफ्ट-सॉफ्ट होंठ रख दिए, तो वो एकदम से झटपटा गयी.

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फिर में उसकी चूत में अपनी जीभ इधर उधर घुमाता रहा और फिर अचानक से मैंने उसकी चूत को चूसना स्टार्ट कर दिया. अब वो पूरी तरह से पागल हो चुकी थी और ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी, तो में इसी तरह से उसकी चूत में अपनी जीभ चलाता रहा. फिर में उसके ऊपर लेट गया और उसकी चूत में अपना लंड डालकर धीरे-धीरे धक्के देने लगा और ऊपर से उसके बूब्स दबाता रहा. अब वो तो बस इस नशे का स्वाद चख रही थी और सिर्फ़ सिसकियाँ ले रही थी. अब धीरे-धीरे वो भी अपने कूल्हों को उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगी थी.

मैंने फिर से अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और नीचे उसकी चूत पर अपने लंड से धक्के देता रहा. फिर मैंने उसे अपने ऊपर बैठा दिया और उसके मुँह को कसकर पकड़ लिया और किस देता रहा. अब वो अपनी गांड को उठा-उठाकर मेरे लंड पर पटक रही थी, जिससे मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत की गहराईयों में जा रहा था. फिर में तो इसी तरह पड़ा रहा और थोड़ी देर के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये. अब वो मेरे साथ में लेट गयी थी और हम दोनों आराम करने लगे थे.

फिर मैंने कहा कि क्यों जान कैसा लगा? तो वो बोली कि मैंने इससे अच्छी चुदाई आज तक जीवन में कभी नहीं करवाई और मेरे साथ जब मौका मिलेगा सेक्स करेगी. फिर हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े पहने और फिर हम दोनों एक दूसरे को किस करते रहे और अपने-अपने घर की और चल दिए. तो दोस्तों यह थी मेरी कहानी जो मैंने आपको सुनाई. मैंने एक चीज देखी है कि ज़्यादातर लड़को को लड़की सिर्फ़ चोदने की मशीन नज़र आती है

दोस्तों यह गलत है और लड़की कोई चोदने की मशीन नहीं है, उसके भी कई अरमान होते है. सेक्स की संतुष्टी का हक़ सिर्फ़ हमें ही नहीं, उन्हें भी है इसलिए सेक्स करते समय यह ध्यान रखे कि आपका सेक्स पार्टनर आपसे संतुष्ट है या नहीं. अगर वो संतुष्ट नहीं है तो उसे संतुष्ट करने की कोशिश करो. आप जानते हो लड़की को सबसे ज़्यादा मज़ा चूत चटवाने में आता है.

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