चूत की धार-1

Chut Ki Dhar-1

दोस्तो, एक बार फिर राज का दिल और खड़े लण्ड से नमस्कार। जो कहानी अब भेज रहा हूँ, यह मेरी एक दोस्त की है।

उसका मेल आया और बोली- प्लीज मेरी कहानी HotSexStory.xyz पर भेज दो और मेल आइडी मेरी देना।

तो उसकी कहानी उसकी जुबानी।

हाय दोस्तो, मेरा नाम पायल सक्सेना है। मैं जबलपुर की रहने वाली हूँ। यह मेरी पहली चुदाई की कहानी है और उस समय की है जब मेरी जवानी पूरे जोश पर थी और न चाहते हुए भी मैंने अपनी कुँवारी और छोटी सी चूत को फटवा कर भौसड़ा बनवा लिया।

पहले मैं अपने बारे में बता दूँ। मरी लम्बाई 5.6 है और फिगर 36-28-34, रंग साफ, लाल गाल, गुलाबी होंठ और कंटीले नैन। आप समझ ही गये होंगे कि मैं बहुत ही सुन्दर हूँ। जब मैं घर से निकलती तो सारे लड़कों की नजर मुझ पर रहती और मेरी चूचियों और मटकती गाण्ड को देखकर उनका लण्ड खड़े हुए बिन नहीं रह पाता। मैं निकल जाती और वो लण्ड दबाते रह जाते।

स्कूल में मेरा दो लड़कों से चक्कर था। उन्होंने भी मुझे चोदने की कोशिश की पर वो असफल रहे। मैंने उन्हें सिर्फ चूमाचाटी और चूचियाँ दबाने की इजाजत दे रखी थी।

हाँ, मुझे चूमाचाटी करना बहुत पसन्द है। वो ऐसे कि कोई मेरे गुलाबी होंठों को चूस चूस कर लाल कर दे।

मेरी बुआ का लड़का है जो मेरी हम उम्र है। बचपन से ही वो हर बार छुट्टियों मैं हमारे घर आता है। हम दोनों एक ही चादर में लिपट कर सोते थे पर जब हमारे दिल में कोई बुरा ख्याल नहीं था।

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धीरे-धीरे हम जवानी की तरफ बढ़ने लगे। मैं स्कूल से कालेज में आ गई। दोस्तों ने मेरी चूचियाँ और गाण्ड खूब भींची जिससे वो भी अपने असली रूप में आ गई। फिर एक बार भईया घर आये और मुझे देखा तो देखते रह गये। उनकी नजर मेरी चूचियों और गाण्ड पर थी और उनका भी हाल वही हुआ जो और लड़कों का होता था यानि उनका भी लण्ड खड़ा हो गया।

मैं बोली- क्या हुआ भईया?

“पायल, तुम तो बड़ी हो गई हो।”

“यह तो है।” मेरी नजर उनके लण्ड की तरफ थी, मैं मुस्कराते हुए बोली- आप भी तो बड़े हो गये !

और अन्दर आ गये।

रात को सब सोने की तैयारी करने लगे। मैं और भाई बचपन की तरह एक ही चारपाई पर लेट गये। पर अब हम जवान थे इसलिए महसूस होने लगा था कि एक जवान लड़का लड़की साथ लेटते हैं तो क्या होता है।

मेरा भी चुदने का मन करने लगा पर चुप लेटी रही। थोड़ी देर बाद मुझे भाई के लण्ड के पास कुछ हिलता नजर आया। शायद वो मुठ मार रहे थे। मैं भी अपनी चूचियों को दबाने लगी और चूत को रगड़ कर शान्त किया और सो गई।

मैं सुबह उठी और नहा-धो कर कालेज चली गई। दिन भर चूत में खुजली चलती रही।जब मैं दो बजे कालेज से घर आई तो वो टीवी देख रहे थे। उन्होंने बनियान और लोअर पहना था, घर वाले बाहर गये हुए थे।

मैं उनकी तरफ देख कर मुस्कुराई और हाथ-मुँह धोने चली गई।मन अब भी चुदने को कर रहा था। मैंने फिर चूत को शाँत किया और पानी से साफ किया। मैंने लाल रंग का कमीज़-सलवार पहन लिए जिनमें से मेरी चूचियाँ और गाण्ड का उभार साफ दिख रहा था। कमीज़ के गले से चूचियों का कुछ हिस्सा बाहर था।

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मैं भाई के पास आई वो अब भी टीवी देख रहे थे। उन्होंने मेरी तरफ देखा तो देखते ही रह गये और उनका लण्ड खड़ा हो गया। उन्होंने लण्ड छिपाने के लिए तकिया गोद में रख ली।

मैं सोफ़े पर उनके पास जाकर बैठ गई और बातें करने लगी। पता नहीं कब हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर बैठ गये। मेरी नजर उनके लण्ड पर थी, तकिया बातों-बातों में अलग हो गया था।

भईया समझ गये कि मैं उनके लण्ड को देख रही हूँ।

“क्या देख रही हो?”

मैंने सिर नीचे कर लिया और बोली कुछ नहीं।

भाई ने हाथ मेरे कन्धे पर रखा और बोला- कुछ तो देख रही हो?

मैं बोली- तुम क्या देखते हो मेरी तरफ?

हम दोनों की साँसें और शरीर गर्म हो गये।

भईया समझ गये कि मैं चुदना चाहती हूँ। उन्होंने मेरी चूची पर हाथ रखा और बोले- मैं तेरी इन्हें और मस्त गाण्ड को देखता हूँ।

“तो आप बता देते मैं खुद अपनी चूचियाँ और गाण्ड आपके हाथों में दे देती।” मैं हँसी और हाथ उनके गले में डाल दिये और गाल पर चुम्बन कर दिया।

मैं तो यही चाहती थी कि वो आज मेरी चूत की खुजली मिटा दें। उन्होंने मेरा सिर पकड़ा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रखकर चूसने लगे।

मुझे जैसे कोई करेन्ट लगा हो, मैं सिहर गई और उनका साथ देने लगी।

10-15 मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ और जीभ को चूसते रहे। मेरी चूत से पानी निकलने लगा। मैंने उन्हें गेट बन्द करने को बोला और वो गेट बन्द करके आ गए और मेरी चूचियों को दबाने लगे। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।

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उन्होंने मेरे कमीज़ को उतार दिया और ब्रा के ऊपर से चूचियोँ को मसलने और होंठो पर चुम्बन करने लगे। मेरा बुरा हाल था मैं भी उन्हें चूम रही थी।

फिर उन्होंने मेरी सलवार उतार दी और मैंने उनकी बनियान और लोअर उतार दिया। अब मैं ब्रा और पेन्टी में थी और वो अन्डरवीयर में।

बाकि कहानी अगले भाग में-

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