Clinic Mein Garam Hokar Pani Nikalne Laga Chut Se

(Clinic Mein Garam Hokar Pani Nikalne Laga Chut Se)

मैं डॉक्टर हूं मैंने अपनी डॉक्टर की पढ़ाई पूरी कर ली थी और उसके बाद मैंने अपने घर से कुछ दूरी पर ही क्लीनिक खोल लिया। पहले मैं एक हॉस्पिटल में जॉब करती रही लेकिन मैंने वहां से रिजाइन दे दिया और अपना ही क्लीनिक में काम शुरू कर दिया मेरे पास आसपास के पेशेंट आने लगे, एक दिन मेरे पास एक व्यक्ति आये वह मुझे कहने लगे मेरी तबीयत बहुत ज्यादा खराब है और मुझे 3 दिन से बुखार आ रहा है, मैंने उनसे पूछा क्या आपको इससे पहले भी बुखार आया था? Clinic Mein Garam Hokar Pani Nikalne Laga Chut Se.

वह कहने लगे नहीं इससे पहले तो मुझे दो वर्ष पहले बुखार आया था। मैंने उनके हाथ को पकड़ा तो उनका हाथ काफी गर्म हो चुका था मैंने उन्हें कहा आपको तो बहुत तेज बुखार है, मैंने जब उनका बुखार चेक किया तो उनको बुखार काफी ज्यादा था मैंने उन्हें कहा मैं आपको दवाई लिख कर दे देती हूं आप दो दिन बाद दोबारा से आ जाइएगा।

मैंने उन्हें दो दिन की दवाई दे दी और वह चले गए, दो दिनों बाद जब दोबारा से वह क्लीनिक में आए तो कहने लगे मैडम मेरी तबीयत अभी ठीक नहीं हुई, मैंने उन्हें कहा कि आप खाने में परहेज कर रहे हैं, वह कहने लगे हां लेकिन अब भी मुझे आराम नहीं मिल रहा, मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं आपको दवाई चेंज कर के दे देती हूं। मैंने उन्हें दवाई चेंज कर के दे दी उन्हें थोड़ा बहुत आराम तो मिल गया लेकिन वह जब दोबारा मेरे पास आए तो कहने लगे मुझे अभी पूरी तरीके से ठीक महसूस नहीं हो रहा.

वह मेरे पास तीन चार बार आए जब वह पूरी तरीके से स्वस्थ हो गए तो एक दिन वह क्लीनिक में आये और कहने लगे मैडम अब मेरी तबीयत ठीक हो चुकी है उनका नाम रितेश है और उसके बाद वह आते जाते मुझसे मिल लिया करते या फिर उनके परिवार में किसी को भी कोई बीमारी होती तो वह मेरे पास ले आते हैं क्योंकि उन्हें मेरा व्यवहार काफी पसंद आया था, उनके साथ मेरी दोस्ती हो चुकी थी उनकी उम्र और मेरी उम्र लगभग बराबर ही थी वह किसी कंपनी में मैनेजर हैं।

एक दिन रितेश जी ने मुझे मेरे व्हाट्सएप पर मैसेज किया उस वक्त मैं अपने क्लीनिक में थी इसलिए मैं उनसे बात नहीं कर पाई परंतु जब मैं शाम को घर गई तो मैंने सोचा रितेश जी को रिप्लाई कर देती हूं, मैंने उन्हें हाय लिख कर भेजा कुछ ही देर बाद उनका भी रिप्लाई मुझे आया और वह मुझे कहने लगे शालिनी मैडम कैसी हो और हम दोनों की व्हाट्सएप पर चैटिंग शुरू हो गई, मैं चैटिंग में इतना व्यस्त हो गई कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरी मम्मी मुझे खाने के लिए आवाज लगाने लगी, मम्मी मेरे रूम में आई और कहने लगी शालिनी तुम तो मेरी आवाज़ भी नहीं सुन रही हो मैं कब से तुम्हें खाने पर बुला रही हूं, मैंने मम्मी से कहा बस मम्मी कुछ देर में आती हूं।
“Clinic Mein Garam Hokar”

मैंने रितेश जी को व्हाट्सएप पर रिप्लाई किया और कहा कि मैं डिनर करने जा रही हूं उसके बाद आकर आपसे बात करती हूं, वह कहने लगे ठीक है तब तक मैं भी डिनर कर लेता हूं। मैं मम्मी और मेरे भैया टेबल पर बैठ कर डिनर कर रहे थे तब मेरे भैया ने कहा कि तुम्हारा काम कैसा चल रहा है, मैंने भैया से कहा भैया काम तो ठीक चल रहा है मेरे और मेरे भैया की बात चीत ज्यादा नहीं हो पाती क्योंकि मैं भी अपने क्लिनिक पर बिजी रहती हूं और भैया डॉक्टर हैं इस वजह से हम दोनों को ज्यादा समय नहीं मिल पाता, मेरे पिताजी भी डॉक्टर हैं जो कि लखनऊ में सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं। “Clinic Mein Garam Hokar”

जब हम लोगों ने डिनर कर लिया तो मैं अपने रूम में चली गई मैंने चादर ओढ़ ली और मैंने रितेश को मैसेज रिप्लाई किया उनका कुछ देर तक तो मैसेज का रिप्लाई नहीं आया मुझे नींद आने लगी थी लेकिन तब तक रितेश का मैसेज मुझे आ गया मैंने रिप्लाई किया तो वह कहने लगे सॉरी मैं अपने ऑफिस का कुछ काम करने लग गया था मैं आपका मैसेज नहीं देख पाया, उन्होंने मुझसे मेरी पर्सनल लाइफ के बारे में पूछा और मैंने भी उनसे उनके बारे में पूछा, मुझे उस दिन पता चला कि उनके परिवार में उनके तीन भाई हैं और वह तीनों ही अब अलग रहते हैं रितेश अपने माता-पिता के साथ रहते हैं।

मैंने रितेश जी से पूछा आपने शादी के बारे में नहीं सोचा तो रितेश कहने लगे मुझे आपकी जैसी लड़की कभी मिली कि नहीं यदि आपके जैसी लड़की मुझे मिल जाती तो मैं जरूर शादी के बारे में सोचता, जब रितेश ने मुझसे यह बात कही तो मैंने भी मैसेज में रिप्लाई किया और कहा कि यदि मैं आपको हां कर दूं तो क्या आप मुझसे वाकई में शादी कर लेंगे, वह कहने लगे हां मैं आप से जरूर शादी करूंगा क्योंकि आपके बात करने का तरीका और आपका व्यवहार मुझे बहुत अच्छा लगा आपका व्यवहार बिल्कुल ही सामान्य है और आप बहुत ही शांत स्वभाव के भी हैं।
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उस दिन हम दोनों काफी रात तक चैटिंग पर बात करते रहे, अगले दिन मैं अपने क्लिनिक चली गई और मैं जब भी फ्री होती तो मैं रितेश को मैसेज कर दिया करती वह भी मुझे मैसेज का रिप्लाई कर दिया करते अब हम दोनों एक दूसरे से हर एक बात पूछने लगे थे कभी कबार हम दोनों फोन पर भी बात कर लिया करते हम दोनों एक दूसरे के बिना जैसे अधूरे से थे और मैं हमेशा ही रितेश से बात करने के लिए उत्सुक रहती, रितेश का फोन जब भी मुझे आता तो मैं झट से रितेश का फोन उठा लिया करती मुझे भी लगने लगा था कि शायद मैं रितेश से प्यार करने लगी हूं और रितेश भी मुझसे प्यार करने लगे हैं। “Clinic Mein Garam Hokar”

एक दिन मैंने रितेश से अपने दिल की बात कह दी क्योंकि मैं काफी समय तक सोचती रही कि क्या पता रितेश मुझे कहेंगे लेकिन उन्होंने कभी भी मुझसे अपने दिल की बात नहीं की और जिस दिन रितेश को मैंने प्रपोज किया तो उन्होंने ने भी मुझे झट से हां कह दी वह कहने लगे कि मैं तो कब से अपने दिल की बात तुम्हें बताना चाहता था लेकिन मेरी हिम्मत ही नहीं हुई और शायद इसी वजह से मैं तुमसे कुछ कह नहीं पाया लेकिन मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूं और इसका पता मुझे उस वक्त लगा जब तुम मुझे मैसेज नहीं करती या फिर मेरा फोन रिसीव नहीं करती, मुझे तुम्हारी बहुत चिंता भी रहती है।

रितेश मुझसे कभी कबार मिल भी लिया करते थे लेकिन जब हम दोनों मिल जाए तो एक दूसरे से खुलकर बात नहीं हो पाती थी जब हम दोनों की मैसेज के द्वारा या फिर फोन पर बात होती तो हम दोनों एक दूसरे से घंटों बात किया करते हैं परंतु जैसे ही हम दोनों एक दूसरे के सामने आते तो मेरी भी हिम्मत नहीं होती और ना ही रितेश की मुझसे बात करने की हिम्मत हो पाती लेकिन धीरे-धीरे हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे हम दोनों के रिलेशन को एक वर्ष के आस पास हो चुका था।  रितेश और मेरे बीच में इतनी ज्यादा बातें होने लगी थी कि हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाते थे लेकिन मुझे इस चीज का डर था कि मेरे पिताजी शायद रितेश को कभी भी हां नहीं कहेंगे. “Clinic Mein Garam Hokar”

क्योंकि मेरे पापा हमेशा से चाहते हैं कि वह मेरी शादी एक डॉक्टर से ही करवाएं और रितेश डॉक्टर नहीं है इस बात की चिंता मुझे हमेशा रहती थी यह बात जब मैंने रितेश से कहीं तो वह कहने लगा कोई बात नहीं अभी हम लोग एक दूसरे को थोड़ा और समय देते हैं, रितेश दिल के बहुत ही अच्छे हैं। हम दोनों ने एक दूसरे को थोड़ा समय दिया, हम दोनों के बीच में एक दिन सेक्स हो गया उससे पहले हम दोनों के बीच कभी भी सेक्स नहीं हुआ था। एक दिन रितेश मेरे क्लीनिक में आया और कहने लगे मुझे तुमसे बात करनी है मैंने रितेश से कहा हां रितेश कहो। “Clinic Mein Garam Hokar”

रितेश और मैं साथ में बैठे हुए थे, रितेश ने जब मेरे हाथों को अपने हाथ में लिया तो मुझे भी अच्छा लगने लगा। जैसे ही रितेश ने अपने हाथ को मेरी जांघ पर रखा तो मैं मचलने लगी मेरी चूत फड़फड़ाने लगी। मैंने जैसे ही रितेश के होठों को चूमा तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा, रितेश भी मेरे होठों को चूमने लगा। हम दोनों ने एक साथ काफी देर तक किस किया मैंने रितेश से कहा यह सब यहां ठीक नहीं है। हम दोनों वहां से मेरे घर पर चले आए उस दिन मेरी चूत में कुछ ज्यादा ही खुजली हो गई थी इसलिए मैं और रितेश मेरे घर पर आ गए, मेरी मम्मी कहीं काम से बाहर गई हुई थी और भैय्या भी घर पर नहीं थे इसलिए मैं रितेश को अपने साथ ले आई। जब मैं रितेश को अपने साथ लाई तो रितेश और मैंने अपने कपड़े उतार दिए जब मैंने और रितेश ने अपने कपड़े उतारे तो मैंने रितेश के लंड को मुंह में ले लिया और उसके लंड को सकिंग करने लगी।

मुझे उसके लड को चूसने में एक अलग ही मजा आ रहा था, काफी देर तक मे रितेश के लंड को चुसती रही जैसे ही रितेश ने अपने लंड को मेरी चूत में डाला तो मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मेरी चूत मे रितेश के लंड के जाते ही मुझे बहुत दर्द महसूस होने लगा। रितेश मुझे तेजी से धक्के मारने लगा मैं अपने मुंह से सिसकिया लेने लगी, रितेश तेजी से मुझे धक्के दिए जाती। रितेश के झटको से मेरे मुंह से चीख निकल जाती जब रितेश ने मुझे घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया तो मेरे मुंह से चीख निकलने लगी। “Clinic Mein Garam Hokar”

वह कहने लगा मुझे बहुत मजा आ रहा है मै और रितेश 10 मिनट तक एक दूसरे के साथ संभोग करते रहे मुझे बहुत मजा आया। जब रितेश और मैंने एक दूसरे के साथ सेक्स कर लिया तो मैंने रितेश से कहा तुम चले जाओ नहीं तो मम्मी आ जाएगी। रितेश और मैं एक दूसरे के साथ सेक्स कर के बहुत खुश थे। जब रितेश अपने घर चले गया तो रितेश ने मुझे फोन किया और कहा कि मैं घर पहुंच गया लेकिन आज का दिन मुझे याद रहेगा। मैंने रितेश से कहा मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही है और इस प्रकार से हम दोनों के बीच पहली बार सेक्स हुआ। “Clinic Mein Garam Hokar”

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