कजिन बहन गांड मरवाने को तैयार हो गई-1

(Cousin Bahan Gand Marwane Ko Taiyar Ho Gai-1)

Hindi Sex Story ये आज से 2 साल पहले की बात है, में सूरत में जॉब करता हूँ और मेरी कज़िन भी सूरत में ही जॉब करती है, हमारे ऑफीस आस-पास ही थे और हम एक ही सोसाइटी में रहते थे, इसलिए सुबह जब में ऑफिस जाता हूँ तो वो भी मेरे साथ ही जाती है, क्योंकि में अपनी कार से जाता था. फिर इसी तरह साथ जाते और आते पता नहीं कब में उसे प्यार करने लगा, लेकिन में शादीशुदा हूँ और वो मेरी बहन थी, इसलिए कभी उससे कह नहीं सका. Cousin Bahan Gand Marwane Ko Taiyar Ho Gai.

लेकिन एक दिन मेरी पत्नी अपने घर गयी हुई थी, तो मेरी कज़िन मेरे लिए डिनर लेकर आई, क्योंकि हमारा घर आस-पास ही था. में उस समय में अपने लेपटॉप पर ब्लू फिल्म देख रहा था और जैसे ही मैंने उसकी आवाज़ सुनी, मैंने झटसे अपना लेपटॉप बंद कर दिया और वॉशरूम में चला गया और जब में हाथ धो कर बाहर आया तो मेरा लेपटॉप सौम्या के पास था और उसमे वही ब्लू फिल्म चल रही थी और सौम्या उसे देख रही थी. में उसके पीछे खड़ा था, लेकिन सौम्या को ये नहीं पता था.

मैंने सोचा कि आज ही सही मौका है अपने दिल की बात उसे बताने का, लेकिन कैसे कहूँ? ये समझ नहीं आ रहा था. फिर अचानक मेरे दिमाग में एक आइडिया आया, जब तक मूवी चलती रही में चुपचाप खड़ा रहा और जब मूवी ख़त्म हुई तो मैंने सौम्या से पूछ लिया कि मूवी कैसी लगी? वो एकदम डर सी गयी और कुछ भी नहीं बोली. मैंने आराम से उसका हाथ पकड़ा और फिर से पूछा कि बताओ ना मूवी कैसी लगी? तो उसने बस इतना ही कहा कि आप ख़ाना खा लेना में बर्तन बाद में ले जाउंगी. मैंने उससे कहा कि बाद में क्यों? मेरे पास थोड़ी देर बैठो ना और बर्तन साथ में ही ले कर जाना, तो वो मान गयी. मैंने खाना शुरू किया और साथ ही मैंने दोबारा सौम्या से पूछा कि बताओ ना मूवी कैसी लगी? तो उसने कोई जवाब नहीं दिया और जाने लगी. मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे रोका और एकदम से कह दिया कि सौम्या में नहीं जानता जो में कह रहा हूँ वो ठीक है या ग़लत, लेकिन में तुमसे प्यार करने लगा हूँ. वो अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी.

तो मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया और ज़बरदस्ती उसे किस करने की कोशिश करने लगा, लेकिन वो नहीं मान रही थी और कह रही थी कि भैया ये ग़लत है, आप मेरे भाई है और हमारे बीच में ऐसा रिश्ता ग़लत है, प्लीज़ मुझे छोड़ दो. लेकिन मैंने उसे नहीं छोड़ा और उससे पूछा कि एक बात बताओ क्या में तुम्हें अच्छा नहीं लगता, तो वो बोली कि भैया ऐसी कोई बात नहीं है, लेकिन भाई बहन के बीच में ये सब ग़लत होता है. मैंने उसे अपनी बाहों में भर रखा था और फिर मैंने उसकी चूची दबानी शुरू कर दी और वो कहने लगी कि भैया प्लीज़ मत करो, दर्द होता है.

में : देख तू मान जायेगी, तो इतना दर्द नहीं होगा, प्लीज़ मान जाओ ना.

सौम्या : प्लीज़ भैया, प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मुझे जाने दो. इतने में मैंने उसकी टी-शर्ट में हाथ डाल दिया था और उसकी चूचीयों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.

में : सौम्या तेरे बूब्स तो बहुत अच्छे है. प्लीज एक बार मान जा, में तुझे आज सितारों की सैर करवाऊंगा और फिर में उसकी टी-शर्ट ऊपर करने लगा, वो मना कर रही थी, लेकिन अब उसका विरोध कुछ कम हो गया था. शायद उसके भी अरमान जागने लगे थे और फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को और ब्रा को ऊपर कर दिया और उसकी चूची चूसने लगा, थोड़ी देर में सौम्या के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी.

सौम्या : आआआह्ह्ह्ह भैया बहुत दर्द हो रहा आराम से करो.

में : जानू आराम से ही करूँगा, बस अब तू मान गयी है तो अब दर्द कम होगा और मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया और बेड पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर आकर उसकी चूचीयाँ चूसने लगा. अब वो भी मेरा साथ देने लगी थी और मेरे बालों में अपना हाथ फेर रही थी और कह रही थी.

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सौम्या : भैया में भी आपको बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन कभी कह नहीं पाई, क्योंकि हमेशा बस इतना ही सोचती रही कि उसके बाद में भाभी से कैसे नज़र मिला पाऊँगी. लेकिन आज आपने ऐसा करके मेरे सोये हुए अरमान जगा दिए, आआआह्ह्ह्ह्हह भैया प्लीज़ थोड़ा आराम से चूसो, ये मेरा फर्स्ट टाइम है और में भी तो आपकी ही हूँ, आराम से करो ना, प्लीज.

में : जानू में, तो कब से जानता था कि तू मुझे चाहती है और में भी तुझे बहुत चाहता हूँ, लेकिन बस कभी कह नहीं पाया, आज मौका मिला है. में एक हाथ धीरे-धीरे नीचे लेकर जाने लगा और उसकी नाभि में घुमाने लगा.

फिर धीरे-धीरे वो मस्त होती गयी, लेकिन इतने में डोर बेल बज गयी और हमें अलग होना पड़ा. मैंने बाहर आ कर देखा तो आकाश सौम्या का भाई खड़ा था और वो पूछने आया था, क्योंकि सौम्या को बहुत देर हो गयी थी, तो मैंने उससे कहा कि बस में खाना खा रहा हूँ और सौम्या अभी बर्तन लेकर आ जायेगी और मैंने उसे वापस भेज दिया. लेकिन अब सौम्या को भी जाना था, क्योंकि अब इतनी देर रुकना ठीक नहीं था, नहीं तो और किसी के आने का डर था, लेकिन फिर मैंने रूम में आकर देखा तो सौम्या अपने कपड़े पहन चुकी थी और वो अब जाने लगी थी, लेकिन उसके चेहरे पर भी एक उदासी साफ नज़र आ रही थी. मैंने सौम्या को गले लगाया और उससे कहा कि प्लीज़ जैसे भी हो सके आज रात को आ जाना, में अब तुमसे अलग नहीं रह पाऊँगा.

सौम्या : भैया, में भी कहाँ आपसे अलग रह पाऊँगी, लेकिन अगर मम्मी आने देगी तभी आ पाऊँगी और फिर वो चली गयी.

मुझे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि सौम्या रात को वापस आ पायेगी. रात के 11 बजे थे और डोर बेल बजी और जब मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि सामने सौम्या खड़ी थी. मैंने उससे पूछा कि कैसे आई हो तो उसने बताया ककी उसने मम्मी को यानी मेरी मौसी से बोला कि भैया और में मूवी देखने वाले है और में मूवी देखकर वापस आ जाऊँगी. लेकिन पहले तो मम्मी ने बोला कि रहने दो रात को अच्छा नहीं लगता, लेकिन फिर मैंने कहा कि मेरे पास दिन में टाईम ही कहाँ होता है? तो मम्मी मान गयी. मैंने जल्दी से सौम्या को घर के अंदर लिया और दरवाजा बंद कर दिया.

में : जानू मुझे नहीं पता था कि तुम मुझसे इतना प्यार करती हो.

सौम्या : आपको क्या पता? में आपसे कितना प्यार करती हूँ, में तो खुद अब आपसे मिलने के लिए मरी जा रही थी.

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