देवर से चुदवाकर सर्दी से भरा दिन काटा-1

Devar se chudwakar shardi se bhara din kata-1

मेरा नाम आयशा तोमर है। मैं जयपुर की रहने वाली हूँ। मेरी शादी हो चुकी है और अब अपने देवर के साथ रहती हूँ। मेरी उम्र 29 साल है, जवान और सेक्सी औरत हूँ। रात में चुदवाकर ही मुझे नींद आती है। मेरे पति संतोष काफी सेक्सी मर्द है और 9” लम्बे लंड के स्वामी है। उनमे इतना जोश है की मुझे रात में 5 से 7 बार चोदते है। मुझे तो रात में सोने ही नही देते है। दोस्तों मैं अपनी लाइफ से पूरी तरह से संतुस्ट थी। मेरे हसबैंड पिछले साल तक एक प्राइवेट कम्पनी में काम करते थे, फिर उन्होंने काम बदल दिया और अब वो नये नये शहरों में जाकर प्रदर्शिनी और नुमाइश में जड़ी बूटी वाली तरह तरह की दवा बेचने का काम करने लगे।

इस काम में वो अच्छा पैसा कमा लेते थे। और अब 30 से 40 हजार रुपया आराम से हर महीना कमा लेते थे। पर अब वो हमेशा बाहर ही रहते थे। अब उनको हर महीना बाहर के टूर पर जाना होता था। इसलिए मैं अब प्यासी रह जाती है। अब मुझे कोई भी चोदने वाला नही था। मेरे साथ में मेरा देवर रहता था जो अब पूरी तरह से जवान हो चूका था। उसका नाम महेश था। अब उसका बदन काफी खिल गया था और मस्त बोडी बन गयी थी उसकी।

दिसम्बर का महीना आया तो पति फिर से अपने टूर पर निकल गये। इस बार वो झारखंड की राजधानी में रांची में गये हुए थे। वही पर कोई आदिवासी मेला लगा हुआ था जहाँ पर वो अपनी आयुर्वेदिक दवा बेच रहे थे। इधर मेरी चूत में लंड खाने की बड़ी तेज तलब लगी हुई थी। दोस्तों बस यही मन कर रहा था की कोई मर्द जल्दी से चूत में लंड घुसाकर मुझे चोद दे। दूसरी तरफ बहनचोद सर्दी इतनी हो रही थी की मैं क्या बताऊं। पूरे 10 दिन तक धूप नही निकली। और लगने लगा कि जयपुर में नही उत्तरी ध्रुव में रह रही हूँ। ठंड के मारे मेरी चूत तक सूख गयी और मुरझा गयी। उस दिन बेहद ठंडी हवाये चल रही थी।

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मैं घर के दरवाजे पर गयी तो देखा की पास वाली कोई लेडीस नही थी। सर्दी से बचने के लिए सब की सब पडोस वाली औरते अपने अपने घरो में अपने अपने मर्दों से चुदवा रही थी और इसी तरह सर्दी का सामना कर रही थी। दोस्तों कान में इतनी हवा चल रही थी की आपको क्या बताऊं। मैं दरवाजा बंदकर घर में चली गयी। अपने बेडरूम में गयी और बेड पर जाकर लेट गयी। फिर अपनी साड़ी को मैंने उपर उठा दिया और चूत में जल्दी जल्दी ऊँगली डालकर अंदर बाहर करने लगी। 10 मिनट चूत में जल्दी जल्दी ऊँगली की तब जाकर थोड़ी गर्माहट मिली। अब मन होने लगा की अपने देवर महेश को बुलाकर चुदवा लूँ। मैंने अपनी चूत से ऊँगली निकाली और खड़ी हो गयी। फिर जाकर महेश को देखने लगी। वो अपने कमरे में बैठकर पढ़ रहा था। मैं सीधा उसके पास गयी।

“महेश! तुमसे कुछ जरूरी काम आ गया है। 2 मिनट के लिए मेरे बेडरूम में चलो” मैंने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा

सर्दी की वजह से वो भी स्वेटर और गर्म लोअर पहने था।

“ओके भाभी जी!!” वो बोला

फिर उसने अपनी कापी किताब बंद कर दी। मेरे साथ कमरे में आ गया। उसे अन्दर लाते ही मैंने उससे छेड़खानी शुरू कर दी। मैं उससे चिपकने लगी और उसे सीने से लगाने लगी।

“ये क्या कर रही हो भाभी??” महेश कहने लगा

“महेश!! तुम तो देख ही रहे हो की आज कितनी सर्दी है। आज मुझे कसके चोद दो। मेरी सर्दी को दूर कर दो तुम” मैंने कहा

“भाभी!! आप पागल तो नही हो गयी है???” महेश ऐतराज करने लगा

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“अच्छा बेटा!! उस दिन जब मैं नहा रही थी तो तुम बाथरूम की खिड़की से कैसे मुझे छुप छुपकर देख रहे थे। तब तो शर्म नही आई। अब आज मैं ही कह रही हो तो तुमको शर्म लग रही है” मैं बोली

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उसके बाद महेश भी पट गया। मैं उसकी देखने वाली बात उसके भैया से न बोलूं इस डर से पर वो राजी हो गया। फिर हम दोनों बेड पर बैठकर किस करने लगे। महेश अंदर अंदर से मुझे कसके चोदना चाहता था पर बाहर से बड़ा शरीफ बनता था। पर आज मेरी तेजी के सामने उसकी एक न चली। फिर वो ही मुझे हाथ लगाने लगा। मुझे किस करने लगा। धीरे धीरे मेरे चेहरे को पकड़कर ओंठो पर किस करने लगा। फिर उसने ही मुझे बिस्तर पर लिटा दिया।

उसने होले होले मेरी साड़ी उतार दी। अब मैं लाल रंग के पेटीकोट ब्लाउस में थी और काफी सेक्सी दिख रही थी। मेरा फिगर 34 28 36 का था। महेश भी अब गर्म होने लगा था। मेरे गालो पर चुम्मा पर चुम्मा दिये जा रहा था। फिर मेरे कान को किस करते करते चबाने लगा। मेरे दूध पर वो हाथ लगाकर मेरी चुदास को भड़का रहा था। मेरे सुराही जैसे पतले गले पर महेश किस करने लगा जिससे मुझे बहुत अच्छा लगा।

“महेश!! मेरे देवर आज मेरी सर्दी को भगा दो। देखो कितनी ठंड है की मेरी एक एक हड्डी कांपी जा रही है” मैं बोली

“भाभी जान!! आज आपनी कसी चूत में लंड घुसाकर चोदूंगा और आपकी सर्दी भगा दूंगा” महेश बोला

उसके बाद मेरी रस से भीगी चूचियों पर वो हाथ लगाने लगा। मेरा सगा देवर आज मेरी नाजुक चूत में लंड घुसाकर चोदने वाला था। वो मेरे बदन से मनचाहे तरीके से खेल रहा था। मैं भी ऐसा ही चाहती थी। महेश एक एक करके अपने कपड़े उतारने लगा और मेरे उपर नग्न अवस्था में आकर लेट गया। उसके हाथ अब फिर से मेरे स्तनों से खेलने लगे। मेरी 34” की बड़ी बड़ी चूचियां जवान और यौवन के मीठे रस से भीगी थी। मैं महेश के सामने सिर्फ ब्लाउस और पेटीकोट में थी। उसके सीने पर मेरे दिल की घड़कन हथौड़े की तरह बजने लगी। कलेजा इतनी जोर से धड़क रहा था कि उछलकर बाहर आ जाएगा। मेरे चिकने गालों पर उसकी गर्म साँसें जल रही थीं।

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फिर महेश एक एक करके मेरे ब्लाउस की बटन खोलने लगा। उसने पूरा ब्लाउस मेरे कन्धो से खींचकर उतार दिया। अब मेरे दूधिया बदन उसके सामने थे। महेश फिर से मुझे सब जगह प्यार करने लगा। मेरी 34” की बड़ी बड़ी चूचियां सफ़ेद ब्रा में बड़े हिफाजत से कैद थी। महेश के हाथ ब्रा के उपर से मेरी चूचियों को सहलाये जा रहा था। मैं मजा लेकर “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….”” करने लगी। फिर वो मुझे प्यार करता चला गया। मुझे करवट दिलाकर मेरी ब्रा का हुक खोलने लगा। मैं पूरे शबाब में आ गयी थी। आखिर मेरे देवर ने मेरी ब्रा खोल दी। मेरी मखमली पीठ पर उसके हाथ का स्पर्श बड़ा रुखा लेकिन ताकतवर था। हर बार तो मेरे हसबैंड ही मुझे चोदते थे पर आज पहली बार अपने देवर से चुदाने जा रही थी।।

“भाभी!! you are very beautiful!!” महेश कहने लगा

मैं कुछ नही बोली। मेरी पीठ पर हथेली लगा लगाकर सहला रहा था और ओंठो से कितनी बार उसने प्यार भरा चुम्बन दिया। फिर मुझे सीधा लिटा दिया। फिर से महेश ने चुम्मा चाटी शुरू कर दी और खूब प्यार किया। मेरे हाथ उसने पकड़कर उपर कर दिए। मैंने अपने बगलों (कांख) को अच्छे से साफ किया हुआ था। एक भी बाल मेरी बगल पर नही था। फिर एकाएक महेश चुदासा हो गया और जीभ लगा लगाकर मेरी बगलों को चाटने लगा। मुझे गुदगुदी हो रही थी और नशा भी हो रहा था। मुझे नहीं मालूम था कि बगलों का चूमना इतना मादक हो सकता है।

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