दीदी कंडोम पहना रही थी अपने यार के लंड को-2

Didi Condom Pahna Rahi Thi Apne Yar Ke Lund Ko-2

फिर करीब 15 मिनट के बाद उसका लंड दोबारा से तनकर खड़ा हो गया और इस बार उसने खुद ही कंडोम पहनकर दीदी को डॉगी स्टाईल में बैठाकर अपने लंड को उनकी चूत में सरकाकर उसको चोदना शुरू किया और दीदी बहुत मजे से चुद रही थी. फिर वो धक्के देते समय कभी मेरी दीदी के बूब्स को दबाता तो कभी उनके बाल खींचता. दीदी भी बहुत आराम से खुद भी आगे पीछे हो रही थी. फिर कुछ देर बाद दीदी उसके ऊपर आ गई तो उन्होंने कंडोम को उतार दिया और कहा कि मुझे बिना कंडोम के चुदना एकदम सही लगता है.

अरविन्द अब उनके नीचे लेटा रहा और दीदी उसके ऊपर बैठकर अपनी चूत में उसका पूरा लंड डालकर उछलने लगी. करीब दस मिनट ऊपर नीचे होने में ही दीदी थक गई और फिर अरविन्द ने उन्हें अपने ऊपर से हटाकर बेड के एकदम किनारे किया और अपने लंड को चूत के अंदर डालकर वो बहुत तेज़ी से उनको चोदने लगा और करीब पांच मिनट के बाद दीदी ने उसको बहुत कसकर पकड़ लिया और वो एकदम शांत हो गई, लेकिन अरविन्द अभी भी लगातार धक्के लगा रहा था. फिर करीब तीन मिनट के बाद उसने अपना माल मेरी दीदी की चूत के अंदर ही छोड़ दिया और वो अब उनके ऊपर लेट गया और उसने दीदी से कहा कि में आज तो पूरे दिन तुझे चोदता रहूँगा.

फिर दीदी ने उससे कहा कि हाँ में इसलिए ही तो सुबह इतनी जल्दी आई हूँ और फिर में कुछ देर बाद वहां से चला गया. शाम को जब में घर पर पहुंचा तो मैंने देखा कि दीदी मुझसे पहले ही घर पर थी और वो अपने चेहरे से बहुत खुश लग रही थी. में उनके पास जाकर खड़ा हो गया और अब मैंने उनसे पूछा कि क्यों आप कब आई? तो उन्होंने मुझसे कहा कि में अभी तेरे आने से कुछ देर पहले ही आई हूँ.

फिर कुछ देर साथ में बैठकर इधर उधर की बातें और हंसी मजाक करने के बाद बाहर आईसक्रीम खाने चले गये और तब मेरे थोड़ा ज़ोर देकर पूछने पर उन्होंने मुझे अरविन्द के बारे में सभी बातें सच सच बताई और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि में यह बात में घर पर किसी से ना कहूँ और उन्होंने मुझसे कहा कि वो अब उस लड़के से ही शादी करना चाहती है, क्योंकि वो उनको बहुत अच्छा लगता है और वो उनका बहुत ख्याल रखता है, वो बहुत अच्छा पैसा कमा लेता है और वो उनके साथ रहकर पूरी जिन्दगी बहुत खुश रहने वाली है. दोस्तों अब में उनकी बात को सुनकर बिल्कुल चुप रहा और दोपहर को में उनकी उस चुदाई को याद कर रहा था.

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फिर रात को दीदी जब सो गई तो में उनके बूब्स को छेड़ रहा था, क्योंकि वो हमेशा सिर्फ़ शॉर्ट और टी-शर्ट पहनती थी, इसलिए उनके बूब्स बहुत अच्छे उभरे हुए नजर आ रहे थे, जिनको देखकर में ललचा रहा था और अब में थोड़ी सी हिम्मत करके उनके बूब्स पर हाथ रखकर मुठ मारने लगा, जिसकी वजह से मुझे मजा आ गया और कुछ देर बाद मैंने अपना वीर्य उनके शॉर्ट पर ही निकाल दिया और उसके बाद में सो गया. “Didi Condom Pahna Rahi”

फिर मैंने सुबह उठकर जब देखा तो वो उठी सब कुछ शांत था और वो मुझसे बोली कि नाश्ता कर ले. फिर मैंने नाश्ता किया और उसके बाद में अपने कॉलेज चला गया और शाम को दीदी ने मुझे अरविन्द से मिलवाया और हम बाहर एक होटल में खाने पर चले गये. उसके साथ कुछ घंटे बिताने के बाद दीदी ने मुझसे कहा कि चलो अब हम घर चले.

फिर हम घर पर पहुंचे और रात को दीदी नहाने बाथरूम में चली गई तो मैंने बहुत हिम्मत करके बाथरूम के एक छोटे से रोशनदान से अंदर देखा तो वो नहाते हुए अरविन्द से वीडियो चेटिंग कर रही थी और उधर अरविन्द अपना लंड हिला रहा था और दीदी उसको देखकर अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी. फिर वो अरविन्द से कहने लगी कि कल सभी लोग दो दिन के लिए बाहर जा रहे है, अरविन्द तुम मेरे घर पर आ जाना और अब हम कल हमारे घर पर मिलते है और अपनी बात खत्म करके दीदी कुछ देर बाद नहाकर बाथरूम से बाहर आ गई.

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फिर अगली सुबह में जल्दी उठ गया और नहाकर तैयार हो गया और उसके बाद में नाश्ता करके अपने कॉलेज के लिए निकलने लगा. तभी मुझसे मेरी दीदी कहने लगी कि तू आज इतनी जल्दी क्यों जा रहा है? तब मैंने उनसे कहा कि कुछ नहीं आज मुझे कुछ जरूरी काम है और मेरा कॉलेज के बाद फिल्म देखने जाने का भी मन है, इसलिए में शाम को भी थोड़ा देरी से आऊंगा.

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फिर वो मेरी बात को सुनकर बहुत खुश हो गई, इसलिए वो मुझसे बोली कि वाह तुम्हारा बहुत अच्छा विचार है और उन्होंने मुझसे कहा कि तू रुक, दो मिनट के बाद वो अपने कमरे से बाहर आई और उन्होंने मेरे हाथ में 500 रूपये दे दिए. उसके बाद वो मुझसे बोली कि जा और भी ज्यादा मज़े कर.

अब मैंने उनको धन्यवाद कहा और में घर से बाहर निकल गया, लेकिन मुझे उस दिन अपने कॉलेज तो जाना ही नहीं था, वो सब कुछ मेरा एक नाटक उनको चुदते हुए देखने की एक सोची समझी साजिश थी, जिसको उन्होंने सच मान लिया था और इसलिए में अब हमारी गली के कॉर्नर पर मेरे एक दोस्त के यहाँ पर गया और में वहीं पर उसके पास रुक गया, क्योंकि वो पिछले चार दिनों से बीमार था, में उससे उसका हालचाल तबियत की जानकारी लेने लगा.

फिर करीब 9 बजे मैंने देखा कि हमारी गली में एक कार आई और में करीब पांच मिनट बाद अपने दोस्त के घर से बाहर आ गया. तब मैंने देखा कि वो गाड़ी मेरे घर के बाहर खड़ी हुई है, उसको देखकर में तुरंत समझ गया कि यह मेरी दीदी का बॉयफ्रेंड अरविन्द ही होगा, इसलिए वो बात सोचकर मैंने अपने बेग को मेरे दोस्त के घर पर ही छोड़ दिया और अब में अपने मकान के पीछे से एक खिड़की को खोलकर मेरे रूम में आ गया और तब मैंने देखा कि पास वाले रूम में मेरी दीदी और उनका बॉयफ्रेंड अरविन्द है, मुझे उसकी बातें करने की आवाजे सुनाई दे रही थी और वो दोनों बेड पर एक दूसरे की बाहों में एकदम चिपककर लेटे लेटे बातें कर रहे थे.

अरविन्द का गेंहुआ कलर का और वो दिखने में ठीक-ठाक लड़का था, लेकिन दीदी उससे कहीं अच्छी लगती है, क्योंकि वो हर दिन जिम जाकर अपने आपकी बहुत देखभाल करती है और वो बहुत सुंदर उनका कलर दूध जैसा सफेद है. फिर कुछ देर बाद दीदी उठकर बैठ गई और उससे वो कहने लगी कि तुम लेटो में तुम्हारे लिए केक लाती हूँ. तभी अरविन्द उनसे बोला कि तुम यहीं पर रुको में तुम्हारा मन पसंद केक लाया हूँ. दीदी अपने कमरे से बाहर आई और में फट से अपने रूम में घुस गया और उसके बाद वो केक लेकर अंदर कमरे में चली गई.

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उसके बाद में बाहर आया और मैंने देखा तो वो दोनों अब एक साथ बैठकर केक खा रहे थे. उसके बाद वो दोनों अब एक दूसरे को किस करने लगे. अब अरविन्द ने सही मौका देखकर तुरंत दीदी का वो सफेद रंग का टॉप उतार दिया और तब मैंने देखा कि उन्होंने नीचे भी सफेद कलर की ब्रा पहनी हुई थी और अब उसने उनकी ब्रा को भी उतार दिया. “Didi Condom Pahna Rahi”

फिर वो बूब्स के बाहर आते ही मेरी दीदी के लटकते हुए बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और दूसरे बूब्स को दबाने सहलाने लगा, जिसकी वजह से दीदी जोश में आकर उसके सर पर अपना एक हाथ रखकर उसके बालों को सहला रही थी. दोस्तों अब तक में भी उन दोनों को देखकर पूरी तरह से जोश में आ चुका था और मेरे लंड ने अपना आकार बदल दिया था. वो अब पूरी तरह से तनकर खड़ा हो चुका था. तभी अरविन्द ने सही मौका देखकर दीदी के शॉर्ट्स को भी उतार दिया. तब मैंने देखा कि दीदी ने उसके नीचे कुछ भी नहीं पहना हुआ था. फिर अरविन्द ने खुद के भी सारे कपड़े उतार दिए और अब वो दोनों खड़े खड़े एक दूसरे को किस करने लगे.

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