दीदी का चुदक्कड़ भोसड़ा-1

Didi ka chudakkad bhosda-1

हैल्लो दोस्तों, आप सभी का  बहुत बहुत स्वागत है और में आज आप लोगों के सामने अपनी एक सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ और में आशा करता हूँ कि यह कहानी आप लोगों को जरुर पसंद आएगी, खैर में क्यों आप सभी को अब बोर कर रहा हूँ, चलिए आज में आप सभी को अपने जीवन में बीते कुछ हसीन पलों को एक धागे में पिरोकर बताता हूँ, जिसमें मैंने किसकी चुदाई के सपने देखे और मुझे किसकी चुदाई का मौका मिला और मैंने वो सब कुछ कैसे किया? वो में आप सभी को विस्तार से बताता हूँ.

दोस्तों यह घटना तब मेरे साथ घटित हुई जब में पढाई के लिये लखनऊ के एक छोटे से शहर में गया था. तब मैंने अपने रहने के लिए एक मकान को किराए पर ले लिया था और वो मेरा मकान मालिक छोटा सा अपना व्यपार किया करते थे, लेकिन बहुत समय तक वो काम करने के बाद भी उसकी ज़्यादा कमाई नहीं होने की वजह से वो हताश होने के बाद भी वो बहुत मेहनत किया करता था और कई कई बार तो वो दूसरे आसपास के शहर में जाकर भी वहां से माल लाना और ले जाना होता था, जिस कारण उनको चार पांच दिनों के लिए अपने घर से बाहर रहना होता था.

दोस्तों मेरे मकान मालिक का थोड़ा छोटा सा परिवार था, जिसमें एक उनकी पत्नी जिसका नाम नेहा था और उन्हें में भाभी कहकर बुलाया करता था और वो एक ग्रहणी थी, जो ज़्यादा मॉडर्न तो नहीं थी, लेकिन वो अपने घर में ही रहना ज़्यादा पसंद करती थी और दोस्तों नेहा भाभी का फिगर दिखने में बहुत ही अच्छा आकर्षक लगता और जिसको देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि यह औरत इतने बड़े बच्चे की माँ है, उनकी उम्र करीब 38 साल की होगी, लेकिन वो अपने गदराए सेक्सी बदन की वजह से मुश्किल से 34-35 साल की लगती थी और उनका चेहरा बहुत मस्त, उनकी नाक, नयन भी बहुत ही सुंदर और दिखने में वो बड़ी ही आकर्षित लगती थी.

उनकी एक बेटी थी, जिसकी उम्र करीब 20 साल की थी और में उससे निशा बहन कहकर बुलाता था और वो भी मुझे अक्षय भाई कहकर बुलाती थी. दोस्तों उन दोनों माँ बेटी का वो गोरा बदन बड़ा ही गठीला और सुंदर था, जिसको देखकर में हर कभी उनकी तरफ अपनी ललचाई हुई नजर से देखा करता था, वैसे में शुरू से ही थोड़ा अलग विचार का था.

फिर उस वजह से में कॉलेज से आने के बाद घर में ही रहना ज़्यादा पसंद करता था, मुझे बिना मतलब के इधर उधर घूमना फिरना बिल्कुल भी ठीक नहीं लगता था और इन कुछ दिनों बाद में भी उनके घर का एक बहुत अच्छा सदस्य बन गया था, जिसकी वजह से में उनके कोई भी छोटे बड़े घर के कामों में उनकी मदद कर दिया करता.

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दोस्तों नेहा भाभी को थोड़ा सा ब्लड प्रेशर की समस्या थी, जिस वजह से वो ज़्यादा भारी काम नहीं करती थी, नेहा भाभी अक्सर घर में मेक्सी या साड़ी ब्लाउज में ही रहती थी और वो हमेशा ज्यादातर गहरे गले वाला ब्लाउज ही पहनती थी, जिसमें से उनके मोटे मोटे बूब्स बाहर झलकते थे, जिनको देखकर तो कोई भी बूढा भी पागल हो जाने पर मजबूर हो जाता, निशा बहन भी हमेशा बहुत टाईट कपड़े ही पहनती थी और में भी कभी कभी उसकी टाईट टी-शर्ट में से उसके उभारों को ताकता रहता था.

दोस्तों वैसे निशा हमेशा ही स्कर्ट और टी-शर्ट में ही घर में रहती थी और वो हमेशा बड़ी ही लापरवाही से उठती, बैठती थी, जिस वजह से वो भी मुझे अपनी चढती जवानी का प्रदर्शन हर कभी करवाती रहती थी, जिसको देखकर में मन ही मन बहुत खुश रहने लगा था और में हमेशा इस जुगाड़ में लगा रहता था कि कब मुझे कोई अच्छा मौका मिले और कब में इन दोनों को चोद दूँ और अपने लंड के मज़े इनकी चूत को भी चखाकर इनकी चूत के मज़े लूँ?

में उस अच्छे मौके की तलाश में हमेशा लगा रहा और एक दिन उनके एक करीबी रिश्तेदार की शादी उसी शहर में थी और मेरा वो मकान मालिक उस दिन अपने काम की वजह से दूसरे शहर में गया हुआ था, इसलिए नेहा भाभी और निशा बहन के साथ में भी उनके कहने पर उस शादी में चला गया, क्योंकि उन दोनों को अकेले जाने और वहां से आने में थोड़ा सा डर था और उस शादी में नेहा भाभी की बड़ी ननद निर्मला जी भी आई हुई थी, जो कि दूसरे शहर में रहती थी और वो कभी कभी अपने भाई मतलब कि मेरे मकान मालिक से मिलने आ जाया करती थी, जिस वजह से हम दोनों अब तक एक दूसरे से थोड़ा थोड़ा सा अंजान ही थे.

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वैसे मैंने उसके बारे में बहुत कुछ सुन रखा था कि उसकी शादी से पहले और बाद में भी उसके हमारे पड़ोस के कई लड़को से शारीरिक संबंध बने रहे थे और वैसे वो भी दिखने में थी ही इतनी ज्यादा सेक्सी कि कोई भी उसको देखकर चोदने के लिए एकदम उतावला पागल हो जाता था, वैसे वो थी भी बहुत रंगीन मिज़ाज और खुले विचारों की औरत, लेकिन उसके साथ पहली बार यह काम करने के बाद मुझे पता चला कि वो तो बहुत बड़ी चुदक्कड़ किसी रंडी से कम नहीं थी, जिसको चुदाई का पूरा और बहुत अच्छा अनुभव था.

वो शादी में अपने एक साल के लड़के को भी अपने साथ में लेकर आई हुई थी और वहाँ पर उस दिन बहुत गर्मी और भीड़ को देखकर उनका लड़का बार बार बहुत ज़ोर ज़ोर से रो रहा था, इसलिए नेहा भाभी ने मुझसे कहा कि अक्षय तुम जाकर निर्मला दीदी के बच्चे को संभाल लो, क्योंकि वो गर्मी की वजह से परेशान होकर बहुत रो रहा है और अगर वो फिर भी चुप नहीं हो तो तुम निर्मला को अपने साथ घर पर ले जाओ, हो सकता है कि वहाँ पर शायद मुन्ना चुप हो जाए.

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फिर में उनके कहने पर निर्मला दीदी के करीब जाकर बैठ गया, वो बहुत ही बिंदास औरत थी और उनको किसी भी बात की ज़रा सी भी लाज संकोच कोई भी शरम नहीं थी और वो अब थोड़ा गरमी लगने की वजह से अपने पेटीकोट को अपने घुटने तक उँचा उठाकर पंखे के बिल्कुल सामने बैठी हुई थी और उस पंखे की वजह से उसकी साड़ी के साथ साथ उसका पेटिकोट भी हवा में इधर उधर हो रहा था, जिस वजह से मुझे उनकी पेंटी और साईड की झांटे दिखाई दे रही थी और वो मस्त मनमोहक नज़ारा देखकर तो मेरा लंड पेंट के अंदर ही ख़ुशी से झूमने नाचने लगा और में बहुत खुश था.

दोस्तों मुन्ना अब भी लगातार रोए जा रहा था और फिर में कुछ देर बाद निर्मला दीदी को अपने साथ में लेकर घर आ गया और रास्ते में वो मुझसे बातें करते हुए कहती जा रही थी कि अक्षय तुम्हारे जीजाजी एक महीने के लिए अपनी कंपनी की तरफ से दिल्ली अपनी किसी ट्रेनिंग पर गये हुए है और यहाँ पर तो इतनी जबर्दस्त गरमी की वजह से मेरा सारा शरीर बहुत गरम हो उठा है और फिर वो मुझसे जल्दी से गाड़ी को चलाने के लिए कहती रही, क्योंकि उसको ज़ोर का पेशाब लगा था, इसलिए में भी तेज़ी से गाड़ी चलाने लगा और हम कुछ देर बाद घर पहुंच गए.

फिर घर पर आते ही निर्मला दीदी ने सबसे पहले तो पंखा चलाकर अपने बच्चे को बेड पर सुला दिया और फिर जब तक में ठंडा पानी लेकर आया, तब तक उसने अपनी साड़ी को खोलकर एक तरफ फेंक दिया था और अब वो जल्दी से बाथरूम में घुस गयी, शायद उसको ज्यादा ज़ोर से पेशाब लगा होगा, इसलिए वो यह भी भूल गई और वैसे उसने सोचा होगा कि में अब अपने घर में हूँ, इस वजह से वो खुले दरवाजे में ही बैठकर पेशाब करने लगी और वहां पर में खड़ा पीछे से चुपचाप उसके मोटे मोटे, गोरे कूल्हों के दर्शन करता रहा और जब वो मूत रही थी, तब तेज़ सिटी की आवाज़ के साथ उसकी मूत से धार बाहर निकल रही थी, वो आवाज़ इतनी तेज़ और ज़्यादा थी कि मानो वो पूरे एक सप्ताह भर का आज ही एक साथ मूत रही हो और जब निर्मला पेशाब करके उठी तो पीछे से मुझे उसकी बड़े आकार की चूत का नज़ारा भी दिखने को मिल गया, उूफ्फ़ क्या मस्त काली काली झांटो के बीच चूत की लाल लाल सुर्खिया और उसकी चूत की वो जामुनी कलर की फांके (चूत का मुहं या होंठ) नज़र आ रही थी.

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फिर वो अपनी पेंटी को अपने कूल्हों पर चढ़ाती हुई बाहर आई तो मुझे देखकर वो बड़ी बेशर्मी से बोली कि यदि में एक पल और रुक जाती तो मूत के मारे मेरी मूतने की नली ही फट जाती. अब उसके मुहं से यह शब्द सुनकर में एकदम चकित हो गया, लेकिन निर्मला दीदी मेरे चेहरे की तरफ देखकर अपनी चूत को अपने पेटिकोट के ऊपर से सहलाते हुए मेरी तरफ हंस रही थी और फिर वो मुझसे कहने लगी कि रात भर सफ़र की वजह से मुझे बिल्कुल भी नींद ही नहीं आई, चल में यहीं कमरे में पंखे के नीचे सो जाती हूँ और फिर वो ज़मीन पर केवल एक तकिया लेकर पसर गयी और वो मुझसे बातें करने लगी.

लेकिन मेरा सारा ध्यान निर्मला के ब्लाउज पर ही था, जिसके ऊपर के दो बटन खुले हुए थे और उसके बूब्स से भरे हुए दोनों बूब्स उस ब्लाउज से बाहर निकलने के लिए बड़े ही बेताब लग रहे थे और उसकी भरी हुई निप्पल से दूध अपने आप बाहर आ रहा था, जिस वजह से उसकी ब्रा भी अब तक गीली हो चुकी थी, मुझे उसके बूब्स को घूरते हुए वो ताड़ गयी और वो अपने ब्लाउज में अपने एक हाथ को अंदर डालकर अपने दोनों दूध से भरे बूब्स को वो खुजाते हुए मुस्कुराते हुए कहने लगी कि मुझे दूध कुछ ज़्यादा आता है और मुन्ना इसको इतना पी नहीं पाता, इस वजह से मेरे बूब्स में से दूध हमेशा ऐसे ही बाहर बहता रहता है और मेरी छातियाँ दर्द करने लगती है, ऐसा कहते हुए उसने अपने बच्चे को अपने पास खींच लिया और मेरे सामने ही उसने अपने ब्लाउज को एक तरफ से उँचा उठाकर अपने दूध से भरे एक बूब्स को बच्चे के मुहं में दे दिया और उस समय पहली बार बिना कपड़ो के में उसके स्तनो का आकर देखकर बिल्कुल चकित रह गया और उस समय निर्मला दीदी उस पंखे के नीचे पसरी हुई थी और उस पंखे की तेज हवा की वजह से उसका पेटीकोट अब घुटनों के ऊपर तक चड़ा हुआ था और वो बार बार अपनी चूत को खुज़ाए जा रही थी.

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