दीदी का चुदक्कड़ भोसड़ा-2

Didi ka chudakkad bhosda-2

फिर कुछ देर बाद अपने बच्चे के मुहं में अपना दूसरा स्तन देते हुए वो अपनी चूत को खुजाती हुई बोली कि शायद रात भर बस में बैठे रहने की वजह से और इतनी गरमी होने की वजह से मुझे नीचे की तरफ भी आज बहुत खुजली होने लगी है, साली बड़ी मीठी मीठी खुजली आ रही है.

दोस्तों में यह सभी बातें सुनते हुए मेरी नज़र बार बार उसकी छाती पर जा रही थी और उसकी छाती के निप्पल दूध पिलाने से बड़े लंबे हो गए थे, जिन्हें वो अब अंदर भी नहीं कर रही थी और अब वो बच्चा बड़े ज़ोर ज़ोर से दूध को चूसते हुए आवाज़ कर रहा था. तभी वो मेरी तरफ देखकर आँख मारते हुए मुझसे बोली कि यह साला भी अपने बाप पर गया या तो मेरा पूरा रस निचोड़ लेगा या फिर मुझे रस से भरी ही छोड़ देगा, दोनों तरफ से मुझे बड़ी मुश्किल होती है और वो ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी.

फिर हम लोग इधर उधर की बातें करते रहे, लेकिन उसका अब भी बार बार अपनी को चूत खुजलाना बंद नहीं हुआ और अब में तुरंत समझ गया कि आज वो मेरे लंड का पानी लेकर अपनी चूत की गरमी को ठंडा करना चाहती है, लेकिन वो जानबूझ कर मेरे सामने सीधा बन रही थी और फिर उनसे कुछ देर बाद अपने बच्चे से दूरी बनाकर एक तकिया लेकर वो कोने में पसर गई.

फिर हम इधर उधर की बातें करते हुए हम कब सो गये और हमें पता ही नहीं चला. फिर करीब रात को दो बजे जब मेरी नींद पेशाब करने के लिए खुली तो में निर्मला के दोनों स्तनो को देखता ही रह गया, क्योंकि वो दोनों बूब्स पूरी तरह से वापस दूध से भर गये थे और उसके निप्पल से दूध की कुछ बूंदे टपक भी रही थी और ज्यादा तनाव की वजह से उनमें लाल खून की नसे भी अब दिखाई देने लगी थी और दूसरी तरफ निर्मला का पेटीकोट भी उसकी गोरी मोटी जांघो तक ऊपर चड़ गया था, जिसमें से मुझे उसकी चूत की फांके साफ साफ नजर आ रही थी और मुझे पता ही नहीं चला कि कब उसने अपनी पेंटी को निकालकर अपने तकिए के पास में रख दिया था और यह सब देखकर मेरा लंड तो फूंकार मारने लगा, लेकिन पेशाब की वजह से मुझसे रहा नहीं गया और में बिना देर किए बाथरूम में घुस गया और जब में पेशाब करके वापस आया, तब तक शायद मेरी आहट से निर्मला दीदी जाग गयी थी और वो झुककर अपने बेग से कुछ ढूंढ रही थी और तब उसके लटकते हुए बड़े बड़े बूब्स बड़े ही मस्त आकर्षक सेक्सी लग रहे थे.

उसी समय मैंने अपने लंड को सहलाते हुए उससे पूछा निर्मला दीदी क्या बात है, क्या आपको कोई परेशानी है? तो वो बोली कि मेरी छातियाँ अब बहुत दुख रही है, क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा दूध भर गया है और मुन्ना भी मेरा दूध नहीं पी रहा है, इसलिए मुझे मेरी निप्पल से इस दूध को बाहर निकालना पड़ेगा, इसकी वजह से मेरे दोनों बूब्स बहुत दुख रहे है और मैंने अगर इनका दूध नहीं निकाला तो इनमें से खून आने लगेगा.

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अब में उनके मुहं से यह बात सुनकर बड़ा घबरा सा गया. तब मैंने उनसे पूछा कि अब क्या होगा आप कैसे इस काम को करोगी? फिर वो बोली कि अब एक ही तरीका है मुझे अपने हाथों से निप्पल को दबा दबाकर इनका दूध बाहर निकालना पड़ेगा और वो इतना कहकर अपने हाथों से निप्पल को दबाते हुए उनका दूध बाहर निकालने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसकी वजह से दूध थोड़ा थोड़ा ज़मीन पर भी गिरने लगा, तो वो पास में पड़े एक गिलास को उठाकर अपने एक बूब्स पर गिलास को सटाकर अपने दूसरे हाथ से उस बूब्स को दबा दबाकर निचोड़ निचोड़कर उससे अपने दूध को बाहर निकालने लगी, तब उसकी निप्पल से थोड़ी सी दूध की फुहार सी निकली, लेकिन जब भी उसको ठीक तरह से आराम नहीं मिला तो वो उदास होकर मुझसे कहने लगी कि काश अभी यहाँ पर तेरे जीजाजी होते तो मुझे इतना परेशानी ही नहीं होती.

फिर मैंने निर्मला दीदी से कहा कि यदि में आपकी कुछ भी मदद कर सकता हूँ तो आप मुझे ज़रूर बताना, जिससे कि तुम्हारा यह दर्द कुछ कम हो जाए? तो वो बोली कि अक्षय तुम चाहे तो मुझे अभी इस दर्द से आराम दिलवा सकते हो, क्या तुम थोड़ा मेरे करीब आओगे और अपने मुहं को मेरी छाती से लगाकर मेरा थोड़ा सा दूध पी लोगे? तब में मन ही मन बहुत खुश होकर उनके करीब सरकते हुए शरमाकर उनसे बोला कि निर्मला दीदी मुझे ऐसा करने में बड़ी शरम आती है.

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दोस्तों मेरे मन में यह काम करने की बहुत इच्छा थी और में भी यही सब करना चाहता था, उसके लिए सही मौका देख रहा था, लेकिन में थोड़ा सा डरता भी था और उसी के साथ में वो सबसे अच्छा मौका अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहता था, में बस उनको दिखाने ले लिए थोड़ा सा नाटक कर रहा था. तभी वो मुझसे कहने लगी कि इसके अलावा हमारे पास कोई रास्ता भी नहीं है, अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो रात भर में दर्द की वजह से बड़ी परेशान रहूंगी और में इस दर्द की वजह से ठीक तरह से रात भर सो भी नहीं सकूँगी और यह बात कहकर उसने मुझे ज़बरदस्ती अपनी तरफ खींच लिया और उसने अपने एक बूब्स को हाथों से पकड़कर मेरे मुहं में जबरदस्ती दे दिया और में तो पहले से ही बस इस मौके की तलाश में था और में उसके एक बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा.

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फिर दूसरे बूब्स को अपने हाथ से दबा रहा था और यह हरकत करीब मैंने दस मिनट तक की और मेरी इस हरकत से इधर निर्मला दीदी के मुहं से उउफ्फ आईईईईईईई की आवाज़े निकलने लगी, उधर मेरा लंड तनकर लूंगी से बाहर आने के लिए उछल कूद मचाने लगा और में बारी बारी से दोनों बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूस रहा था. अब निर्मला दीदी बड़ी सफाई से मेरे कड़क हो चुके लंड को टटोलते हुए अपने हाथों में लेकर धीरे धीरे सहलाते हुए वो मेरे लंड के टोपे की ऊपर की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी और में भी तव में आकर उसके पेटीकोट में अपने हाथ को डालकर उसके कूल्हों को सहलाने लगा और तब निर्मला दीदी ने आँखें बंद कर ली और वो गहरी गहरी साँसे लेने लगी, धीरे धीरे मैंने अपनी उंगलियों से उसकी चूत को टटोलते हुए में उसकी चूत को सहलाने लगा और उसकी चूत को छूकर मुझे बड़ा मज़ा और बहुत जोश आ गया था.

फिर मैंने देखा कि चुदाई की वो आग हम दोनों में बराबर लगी हुई है, क्योंकि निर्मला दीदी ने अपने होंठो को अपने दांतों से भींचते हुए वो मुझसे बोली कि अब तू ज्यादा देर मत कर और डाल दे अपने इस लंड को मेरी इस चूत में और इसको आज तू जमकर चोद और इसका भोसड़ा बना दे. यह बात कहते हुए वो अपने पेटीकोट को ऊँचा करके अपने दोनों पैरों को उठाकर अपनी चूत को पूरी तरह से फैलाकर मुझसे मेरे लंड को अंदर डालने के लिए कहने लगी. अब यह सब देखकर मैंने भी जोश में आकर तुरंत अपना मोटा और लंबा लंड निर्मला दीदी की चूत में एक ही जोरदार धक्के के साथ पूरा अंदर डाल दिया और मेरा लंड उसकी खुली हुई चूत में फिसलता हुआ सीधा उसकी बच्चेदानी से जा लगा और फिर में लगातार उसकी चूत में अपने लंड को डालकर अंदर बाहर कर रहा था, जिसकी वजह से मुझे बड़ा ही मस्त मज़ा आ रहा था और वो मुझसे कहने लगी ऊफफ्फ्फ्फ़ वाह मज़ा आ गया मेरे राजा, लगाओ और ज़ोर से धक्के आह्ह्ह्हह्ह वाह तुम बहुत मस्त मज़े देते हो, स्स्स्सीईईईइ तुमने तो मुझे आज मेरी उम्मीद से भी ज्यादा जोश में धक्के दिए, वाह बहुत बढ़िया हाँ बस ऐसे ही लगे रहो और में कुछ देर तक उसके ऊपर आकर उसको पूरे जोश से धक्के देकर चोदता रहा, लेकिन थोड़ी देर के बाद वो अब मेरे ऊपर आकर अपनी चूत में मेरा लंड डालकर उछल कूद मचाकर मुझसे अपनी चुदाई करवा रही थी, जिसकी वजह से बहुत ज़ोर ज़ोर से हांफ रही थी और वो पसीने से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और जब वो कुछ देर बाद नीचे ऊपर होने की वजह से थक गई तो मैंने उसको अब अपने सामने घोड़ी बनने के लिए कहा और वो तुरंत नीचे उतरकर मेरे सामने घोड़ी बन गई.

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फिर मैंने बिना देर किए पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया. दोस्तों में सच कहता हूँ कि वो बहुत बड़ी छिनाल चुदक्कड़ औरत थी. मैंने उसको जैसा भी कहा उसने ठीक वैसा ही किया और हर बार उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और मैंने उसको बहुत जमकर चोदा और इस तरह से हम दोनों ने एक लंबी अवधि तक उसको बहुत जमकर चोदा और उसकी चुदाई के मज़े लिए. वो मेरी चुदाई से बहुत खुश संतुष्ट थी, लेकिन इतने में ही नेहा भाभी और निशा बहन ने आकर दरवाजे पर दस्तक देकर आवाज़ लगाई.

फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े ठीक किए और उसके बाद मैंने कमरे से बाहर जाकर नेहा और निशा के लिए दरवाजा खोल दिया, में उनके इस तरह अचानक से बीच में आ जाने की वजह से बहुत उदास सा हो गया था, क्योंकि मुझे उसके साथ अभी और भी बहुत मज़े लेने थे और मैंने अंदर आकर देखा कि उसका चेहरा भी थोड़ा सा मुरझाया हुआ था. तभी नेहा ने अपनी ननद से पूछा क्यों क्या हुआ दीदी आप ऐसी उदास जैसी क्यों नजर आ रही हो? तो वो कहने लगी कि कुछ नहीं तुमने बीच में आकर मेरा सारा मज़ा खराब कर दिया, में तुम्हारे जीजाजी के साथ कितने मस्त मज़े मस्तियाँ कर रही थी, में उनके साथ कितनी खुश थी और तुम्हारे आ जाने से वो चले गए और में अपनी नींद से उठ गई.

फिर उसकी बातें सुनकर हम सभी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे, मुझे और निर्मला को छोड़कर वहां पर कुछ देर पहले क्या चल रहा था और निर्मला कौन से किसके साथ मज़े मस्ती की बातें कर रही थी? यह बातें कोई भी ठीक तरह से नहीं समझ सका. दोस्तों निर्मला अपने भाई के घर पर दो दिन तक रही, लेकिन हम दोनों को दोबारा से चुदाई का ऐसा कोई भी अच्छा मौका हाथ नहीं लगा, जिसका फायदा उठाकर में उसकी चुदाई के मज़े दोबारा से ले सकूं, लेकिन में हर कभी समयानुसार उसके बूब्स या कूल्हों पर अपने हाथ तो फेर ही लेता था और अब वो वापस चली गई. दोस्तों यह थी मेरी वो चुदाई उस कमसिन सेक्सी चुदक्कड़ के साथ जिसके मैंने कुछ घंटो में ही बहुत मज़े लिए.

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