दोनों बहनों की कामकथा – [Part 1]

Do bahno ki kamkatha-1

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम आईशा खत्री है और हम लोग उत्तरांचल के एक छोटे से गावं से है, लेकिन में अपने गावं में कभी रही नहीं हूँ, क्योंकि मेरे पापा पुलिस विभाग में है और उनका ट्रान्सफर होता रहता था तो हमारा गावं जाना बहुत कम ही होता था. में पहाड़ी होने की वजह से बहुत गोरी हूँ और मेरी हाईट 5 फुट 5 इंच है और मेरा फिगर 36-27-38 है.

मेरे एक छोटी बहन भी है जो मुझसे भी अधिक सुंदर है और उसका नाम आईना है और उसकी हाईट 5 फुट 3 इंच है और उसका फिगर 34-25-36 है. मैंने अब तक किसी एक सिटी में तीन क्लास से अधिक नहीं पढ़ी थी और अलग-अलग शहर में रहने की वजह से मेरे दोस्त नहीं थे. में अपनी फेमिली के साथ ही रहती और मेरी माँ और बहन के साथ अच्छी बनती थी और पापा से भी अच्छी दोस्ती है, लेकिन वो ज्यादातर काम में ही व्यस्त होते है. हम लास्ट बार मुंबई में थे, लेकिन कुछ ही दिन पहले पापा का ट्रान्सफर दिल्ली हो गया.

मैंने अब तक ज्यादातर अपनी लाईफ महाराष्ट्र और गुजरात में ही गुजारी है, जहाँ लेडीस काफ़ी सुरक्षित थी. हम काफ़ी रात तक बाहर रहते और इन्जॉय करते थे, लेकिन अब दिल्ली की लाईफ बिल्कुल अलग थी, यहाँ लेडीस इतनी सुरक्षित नहीं है जितनी गुजरात और महाराष्ट्र की सिटी में होती है. पापा ने यह बात हम लोगों को पहले ही बता दी थी कि अब हम लोगों को काफ़ी ध्यान से रहना होगा, क्योंकि दिल्ली की लाईफ लेडीस के लिए इतनी सुरक्षित नहीं है. हम लोग जब ट्रान्सफर होकर दिल्ली पहुंचे तो पापा को एक हाउस मिला, जिसमे दो फ्लोर थे और नीचे के फ्लोर पर एक बेडरूम और अटेच लेट-बाथ, किचन और डाइनिंग रूम और ड्राइंगरूम था और ऊपर के फ्लोर पर एक बेडरूम और अटेच लेट-बाथ था. पापा और माँ ने आते ही नीचे का बेडरूम ले लिया और हमसे कहा कि तुम दोनों ऊपर के रूम में शिफ्ट हो जाना. हम दोनों जब ऊपर के रूम में गये तो वो रूम हमें बहुत पसंद आया, उसमें काफ़ी जगह थी. आराम से दो बेड आ सकते थे इसलिये हम दोनों ने भी वो रूम लेने के लिए हाँ कर दी.

फिर हमें यहाँ आये हुए कुछ दिन ही हुए थे और मेरा मन भी घर में बैठे-बैठ नहीं लग रहा था तो मैंने और मेरी बहन ने सोचा की थोड़ा घूम आये तो माँ ने भी कहा कि दिन का समय है तुम घूमकर आ सकती हो, बस रात होने से पहले लौट आना तो पापा ने भी हाँ कह दी. फिर मैंने बस एक पीले कलर का टॉप डाला और नीचे कॉटन की गुलाबी कलर की केफ्री पहनी और मेरी बहन ने काले कलर की फ्रॉक पहन ली और दिल्ली घूमने निकल गये और मेट्रो का टिकट लिया और सबसे पहले कुतुब मीनार देखने निकल गये.

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फिर हमने मेट्रो में लेडीस कम्पार्टमेंट का उपयोग किया और फिर मेट्रो स्टेशन से उतरकर हमने ऑटो कर लिया और फिर हम कुतुब मीनार ऊतर गये, वहाँ पर जब हम देखने लगे तो हमें कुछ छिछोरे टाईप के लड़के घूरने लगे और मुझे और मेरी बहन को देखकर सीटी और आँख मारने लगे, लेकिन हम लोगों ने उन पर ध्यान नहीं दिया और कुतुब मीनार की फोटो खींचने लगे. फिर हम लोग वहाँ घूम लेने के बाद इंडिया गेट घूमने निकल गये, हमने फिर वापस मेट्रो से सफ़र किया.

इंडिया गेट घूमने के बाद हम दिल्ली के पुराने किले में घूमने चल दिए, लेकिन जब तक शाम हो गई थी और माँ लगातार वापस आने के लिए फोन कर रही थी. उनसे हमने झूठ बोल दिया कि हम घर के लिए निकल गये है और फिर हम पुराने किले घूमने चल दिए, वहाँ पर जब हम घूम रहे थे तभी वापस हमें वो ही लड़के मिले जो कुतुब मीनार पर हमें छेड़ रहे थे. फिर वापस उन लोगों ने हमें देखकर गंदे गंदे इशारे करने शुरू कर दिए, लेकिन हमने पहले की तरह उन पर ध्यान नहीं दिया और भीड़-भाड़ वाले इलाक़े में ही घूमते रहे, जिससे कि वो हमें परेशान ना कर सके, लेकिन वहाँ घूमते घूमते अंधेरा होने लगा तो मेरी बहन भी हल्का सा घबराने लगी.

मैंने उससे कहा चिंता मत कर, हम अच्छी तरह घर पहुँच जायेगें और फिर हम पूरा किला घूमकर मेट्रो स्टेशन के लिए निकल गए, लेकिन वहाँ हमें कोई ऑटो नहीं मिला और बस स्टॉप सुनसान पड़ा था. मेरी बहन बहुत घबरा गई और तभी वो बदमाश लड़के बस स्टॉप पर आ गये और हमारे पीछे आकर खड़े हो गये. हम दोनों अब बहुत घबरा गये थे और में तो अब वहाँ से भागने की सोचने लगी, लेकिन किसी तरह हिम्मत करके खड़ी रही और पीछे से वो लड़के कमेंट करने लगे कि “हाय क्या माल है कपड़ो में बाहर से इतने सुंदर लग रहे है तो सोचो बिना कपड़ो के कितने अच्छे लगेंगे” तभी दूसरा लड़का बोला “हाँ भाई ऊपर के तो है ही सुंदर, लेकिन नीचे तो देखो कितने मोटे मोटे है मन करता है कि अभी चूस लूँ” तभी बस आ गई और मुझे बहुत राहत मिली, लेकिन वो बस पूरी तरह से भरी हुई थी, लेकिन हम दोनों इतना डर चुके थे की हमने बस कंडक्टर से कुछ नहीं पूछा और बस में चढ़ गये.

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हमें नहीं पता था कि वो बस कहाँ जा रही है, लेकिन मैंने सोचा कि अगले स्टॉप पर हम दोनों उतर जायेंगे और घर तक के लिए वहाँ से कुछ ऑटो कर लेंगे, लेकिन तभी कंडक्टर ने हमें अंदर घुसने को कहा तो मैंने कहा कि भैया हमें अगले स्टॉप पर उतरना है तो कंडक्टर बोला मेडम अभी अगला स्टॉप आने में टाईम है जब तक अन्दर घुस जाओ. अब हम क्या करते? हम अन्दर घुस गये, वो बस आदमीयों से बुरी तरह भरी हुई थी, उसमें कोई भी लड़की या औरत तो दिख ही नहीं रही थी, लेकिन वहाँ हम दोनों अपने आपको काफ़ी सुरक्षित महसूस कर रहे थे. तभी पता नहीं क्या हुआ बस रुक गई और थोड़ी देर में पता चला कि बस का टायर पंचर हो गया है और उसे बदलने में 15 मिनट लगेंगे.

बस के अन्दर बहुत गर्मी थी और हम दोनों पूरे पसीने में नहा गये थे. मेरा टॉप पूरा गीला हो गया था, वहाँ हर आदमी पसीने में नहा रहा था. तभी मुझे मेरे बूब्स पर कुछ महसूस हुआ, मैंने नीचे देखा तो एक बूड़ा आदमी लगभग 55 साल का होगा मेरे बूब्स को अपनी कोहनी से दबा रहा था, में थोड़ा सरक गई.

फिर थोड़ी देर बाद वो आदमी मेरी बहन के बूब्स को अपनी कोहनी से दबाने लगा, वो बड़ा अजीब सा महसूस कर रही थी. मैंने थोड़ी जगह बनाई और उसे उस आदमी से दूर अपने पास खींच लिया, लेकिन थोड़ी देर ही हुई होगी तभी कोई दूसरा आदमी मेरे कूल्हों पर हाथ फेरने लगा. में परेशान हो गई, अब अगर इधर जाऊँ तो वो बड़ा आदमी मेरे बूब्स को दबाता और इधर दूसरा आदमी मेरे चूतड़ पर हाथ फेर रहा था. अब जब तक में कुछ सोचती उससे पहले अब दूसरा हाथ भी मेरे चूतड़ पर आ गया, वो कोई तीसरा आदमी था. में समझ गई कि हम ग़लत फंस गये है. वहाँ दूसरी और मेरी बहन के पास फिर वो बड़ा आदमी आकर खड़ा हो गया और उसकी चूचीयों को फिर अपनी कोहनी से छूने लगा, यहाँ में उन हाथों से दूर हटने की कोशिश कर रही थी कि तभी उसमें से एक आदमी ने हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया और दबाने लगा.

तभी एक आदमी ने मेरा टॉप ऊपर कर दिया, जिससे मेरी ब्रा सब भूखे लोगों के सामने आ गई. सबके मुँह में जैसे पानी आ गया हो. फिर तो मुझे पता नहीं चला कि किस किसने मेरे बूब्स दबाये होंगे और फिर उसमें से कब किस आदमी ने ब्रा खींचकर ऊतार दी पता ही नहीं चला और मेरे नंगे बूब्स सबके सामने आ गये और फिर क्या था? जो जो आदमी मेरे पीछे था, वो मेरे निपल्स और बूब्स को नोचने या मसलने में लग गया था. कुछ तो मेरे बूब्स को चाट रहे थे तो कुछ निपल्स को चूसने की कोशिश में थे और वहाँ मेरी बहन की तो लोगों ने पूरी स्कर्ट ही ऊतार फेंकी थी, वो बेचारी मेरे सामने ब्रा पेंटी मे खड़ी थी और बहुत सारे हाथ उसके हर अंग को छू रहे थे. इतने में बस सही हो गई और चल पड़ी.

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मुझे कुछ राहत मिली, लेकिन तब तक मेरी बहन की ब्रा पेंटी लोगों ने फाड़ दी और वो बिल्कुल नंगी हो गई. एक आदमी तो उसके निपल्स को अपनी उंगलियों के बीच में दबाकर बुरी तरह मसल रहा था और कई आदमी उसके चूतडो को मसलने में लगे थे और उसकी गांड को खोज रहे थे, तो कई लोग उसकी चूचीयाँ मसलने में लगे थे, तो कई हाथ उसकी चूत पर थे. ऐसा लग रहा था जिसको जो अंग मिल रहा था वो उसे छूकर महसूस करना चाहता था, उसकी काली स्कर्ट तो पैरो के नीचे पड़ी थी अब मेरी परेशानी यह थी कि इस हालत में हम उतरेंगे कैसे.

मैंने अपनी बहन से स्कर्ट उठाने को कहा, वो बेचारी किसी तरह झुकी और नीचे से अपनी स्कर्ट उठाने लगी, लेकिन इतने में एक आदमी ने उसके झुकने का फ़ायदा उठाकर उसके झुकने से खुली हुई उसकी चूत में अपनी उंगली डाल दी, वो वर्जिन होने की वजह से दर्द से तिलमिला उठी. तब एक आदमी ने उसे स्कर्ट उठाकर दे दी और उसे सीधा खड़ा कर दिया और उसकी चूत में उंगली देने वाले आदमी को पीछे धक्का दे दिया. यह वो ही आदमी था, जिसने मुझे कुछ ना बोलने की सलाह दी थी और किसी तरह मेरी बहन ने वापस स्कर्ट पहन ली, लेकिन अन्दर कुछ ना होने की वजह से अभी लोग उसकी चूचीयाँ और चूत को टच कर रहे थे, यहाँ लोग मेरी केफ्री के अन्दर हाथ डालकर मेरे कूल्हों को बुरी तरह मसलने लगे.

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