दोनों बहनों की कामकथा – [Part 6]

Do bahno ki kamkatha-6

फिर वो अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगी तो मुझे भी मज़ा आने लगा और वो अपने मुँह को मेरी गांड के छेद के ऊपर ले गई और अपने दोनों होठों को मेरी गांड के छेद पर रख दिया और चूसने लगी. इस तरह कुछ देर में ही में झड़ गई और आईना के ऊपर ही गिर गई और उसके होठों को चूमने लगी और वो भी मेरे होठों को चूमने लगी और कुछ देर में आईना के ऊपर ही पड़ी रही.

फिर हम दोनों उठे और आईना ने मुझसे पूछा कि बाहर सेक्स करने में कैसा मज़ा आया तो मैंने कहा यार तू सही थी, बहुत मज़ा आया और फिर हम दोनों नंगे ही रोड़ पर चल दिए और वॉक करते हुये मेरी गांड में ताज़ी ताज़ी हवा लग रही थीज बड़ा मज़ा आ रहा था और चलते चलते कभी में आईना के चूतड़ को मसल देती तो कभी वो मेरी चूत मसल देती.

फिर हम एक दूसरे को नंगे देखकर हंस रहे थे. तभी पता नहीं कब हम लाईट के उजाले में आ गये और हमने ध्यान नहीं दिया कि हम अब सबको नज़र आ सकते है और जब हम अपने पड़ोसी के घर के सामने थे और जब हमने उनके गेट खोलने की आवाज़ सुनी तो हमें होश आया और हम सीधे अपने घर की और भागे, लेकिन इतने में उनका गेट खुला और श्रीमती चटवाला जो कि हमारे पड़ोसी है, वो बाहर आई, लेकिन वो हमारा चेहरा देख पाती उससे पहले हम भाग गये और उनको लगा शायद कोई जानवर होगा.

फिर हम भागते भागते अपने घर में घुस गये और फिर आईना ने मेन गेट बंद किया, लेकिन दरवाजा लगाने में हल्की सी आवाज़ हो गई तो मैंने उससे कहा कि धीरे धीरे नहीं तो मम्मी पापा जाग जायेंगे और अगर उन्होंने हमें ऐसे देख लिया तो पता नहीं क्या होगा? फिर हम गेट को लॉक करके ऊपर अपने रूम में भाग गये और अपना रूम लॉक कर हम एक दूसरे को देखकर इतना हँसे कि पेट में दर्द ही होने लग गया. फिर आईना ने अपने कपड़े एक तरफ फेंके और बेड पर कूद गई.

फिर मैंने कहा कपड़े नहीं पहनेगी तो वो बोली जब बाहर नहीं पहने तो अंदर रूम में क्यों पहने? आज ऐसे ही नंगे सोते है. मैंने कहा और जब सुबह माँ आयेंगी तो चूतड़ों पर डंडे देंगी तो वो बोली अरे माँ नॉक करके आयेंगी ना और रूम तो लॉक है जब तू खोलने जाये तो मुझे जगा देना तभी कपड़े पहन लेंगे और माँ भी जानती है दिल्ली की गर्मी को, तो कुछ नहीं बोलेगी. मैंने भी सोचा कि आईना सही कह रही है और मैंने भी अपने कपड़े एक तरफ फेंके और अपने बेड पर लेट गई.

फिर आईना बोली मेरे बेड पर ही आ जाना, रात भर मज़े करेंगे, में बोली नहीं में अब थक गई हूँ अब में सोने जा रही हूँ और कितने मज़े करेगी तू, तो वो बोली तू पूरे दिन तो सोई है तुझे अब रात में नींद कहाँ से आयेगी. फिर में अपने बेड से उठी और आईना के बगल में जाकर लेट गई, उसने अपना एक हाथ फिर से मेरी चूत पर रख दिया और मेरी चूत की दरार में अपनी हल्की सी उंगली अन्दर कर दी और चूत को अपनी उंगली से सहलाने लगी. मैंने भी उसे जो कर रही थी करने दिया. फिर उसने मेरी और देखा और पूछा फिर कल कब चलेगी तू? मैंने कहा यार तू भी? वो बोली क्या तू भी?

फिर मैंने कहा हम मज़े ले तो रहे है इतना रिस्क लेने की क्या जरूरत है तो वो बोली यार वो मज़ा अलग ही होगा, उसके आगे यह सब तो कुछ नहीं है, वो तो अपने लिए मस्त माहोल होगा. मैंने कहा ठीक है चल कल शाम को देखते है, वो बोली ठीक है फिर उसने लाईट ऑफ कर दी और थोड़ी देर बाद ऐसे ही चिपके चिपके हम कब सो गये पता ही नहीं चला.

सुबह माँ आई और उन्होंने गेट नॉक किया और हमें नहा धो कर ब्रेकफास्ट के लिए नीचे बुला लिया. फिर हम दोनों एक साथ उठे और हम दोनों ने एक साथ बाथ लिया और ब्रेकफास्ट के लिए नीचे चले गये और ब्रेकफास्ट करते करते मैंने माँ से धीरे से पूछा कि माँ हम आज शाम को बाहर जा सकते है. माँ ने मेरी और देखा और फिर पूछा कि क्या काम है? मैंने कहा माँ हमें कुछ शॉपिंग करनी है. माँ बोली तो अपने सामान पापा को लिखवा दो, वो ले आयेंगे. तभी आईना बोल पड़ी नहीं माँ, हम ले आयेंगे, पापा नहीं ला पायेंगे, तभी माँ समझ गई कि हमारे सामान पापा नहीं ला सकते है.

फिर उन्होंने थोड़ी देर सोचा और बोली अच्छा चलो मुझे लिख कर दे दो, में ले आउंगी. हम दोनों के मुँह से एक साथ निकल गया नहीं, माँ चौक गई और पूछा क्यों नहीं? मैंने आईना के हाथ पर हाथ रख उसे शांत रहने को कहा और फिर में बोली नहीं माँ हम ले आयेंगे आप चिंता मत करो. तो वो बोली तुम दोनों पिछली बात को भूल गई हो, जो अब फिर अकेले बाहर जाने की जिद कर रही हो.

फिर में बोली माँ अब पिछली बार जो हुआ वो सोचकर हम दोनों पूरी लाईफ तो डरकर घर नहीं बैठ सकते और फिर अब हम दोनों अपने उसी डर को मिटाने के लिए तो बाहर जाना चाहते है. माँ ने सोचा और फिर बोली आईशा बात तो सही है, लेकिन में अब रिस्क नहीं ले सकती हूँ, अब में भी तुम्हारे साथ चलूंगी. मैंने कहा माँ आप बेकार की टेंशन ले रही हो.

फिर मैंने झूठ बोला कि हमारे साथ हमारी दिल्ली की दो चार फ्रेंड्स भी आ रही है. माँ हल्का सा चौंक गई और बोली तुम दोनों की दिल्ली में कौनसी फ्रेंड्स है. मैंने कहा अरे है मुंबई में मेरी फ्रेंड विभा थी ना, उसकी कज़िन दिल्ली में है, में जानती थी कि माँ विभा को अच्छे से जानती थी और उसकी कज़िन भी थी दिल्ली में है, यह भी वो जानती थी.

उन्होंने पूछा कि वो तुम्हें कहा मिलेगी. मैंने कहा वो हमें अगली रेड लाईट से पिक कर लेगी. फिर माँ ने कहा चलो ठीक है, लेकिन पिछली बार की तरह ज्यादा रात मत करना और उनसे कहना कि वो तुम्हें यही ड्रॉप कर दे और मोबाइल चालू रखना, ठीक है. मैंने कहा ठीक है. फिर यह सुनकर आईना बहुत खुश हो गई और फिर वो रूम में चली गई और जैसे ही में रूम में आई तो आईना ने मेरे होंठ चूम लिए और बोली अरे तू तो कमाल के बहाने लगाती है. हमें रोकने के लिए माँ के पास कोई जवाब ही नहीं बचा.

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मैंने कहा चल ठीक है, लेकिन इतना खुश मत हो, बस यह सोच कि रात को कुछ गड़बड़ ना हो तो वो बोली कुछ गड़बड़ नहीं होगी. तू देखना बहुत मज़ा आने वाला है. फिर शाम होते ही मैंने ऊपर एक ग्रे कलर की टी-शर्ट डाल ली जो मेरे पेट को आधा ढक रही थी और मैंने नीचे नीले कलर की लेगी पहन ली, लेगी इतनी टाईट थी की उसमें से मेरे चूतड़ साफ़ दिखाई दे रहे थे और आईना ने गुलाबी कलर का टॉप और नीले कलर की स्कर्ट पहन ली.

फिर मैंने माँ से पूछा हम जायें तो माँ हमें बाहर तक छोड़ने आई और हमें समझाती रही कि कोई भी प्रोब्लम हो तो हम तुरंत उन्हें या पापा को फोन करें. फिर मैंने उनसे कहा हमें कुछ नहीं होगा और हम निकल गये. आईना बहुत खुश थी और वो उसके चेहरे पर साफ दिख रहा था. में भी खुश तो थी कि हमारा प्लान काम कर गया, लेकिन मुझे थोड़ा डर भी था कि अब आगे बस में क्या होगा? हमने फिर मेट्रो पकड़ी और वहां से होते हुए हम पुराने किले पहुंचे और काफ़ी देर खड़े रहे और फिर बस का इंतज़ार करते रहे.

आज वहां पर बहुत लोग थे हमने सोचा कि शाम होते ही सब चले जायेंगे फिर एक बस आई पूरी भरी हुई उसमें हम चढ़ गये, लेकिन अगले दो स्टॉप तक हमें किसी ने हाथ तक नहीं लगाया. आईना ने निराश होकर बोला यहाँ कुछ नहीं होगा, ऊतर जाते है और अगली बस देखते है.

फिर हम ऊतर गये और फिर हम दूसरी बस का इंतज़ार करने लगे और फिर कई बसे आई, लेकिन किसी में कुछ नहीं हुआ और ऐसा करते करते अंधेरा होने लगा और उधर माँ के फोन आने लगे कि कब तक वापस आओगी और फिर हम दोनों निराश हो गये. फिर मैंने आईना से कहा कि चल घर चलते है फिर कभी देखेंगे, वो भी झट से मान गई और फिर हम दोनों ने एक बस पकड़ी और घर जाने के लिए और उसमें चढ़ गये, उसमें सारी सीट भरी थी और उसमें बस खड़े होने की जगह थी. ऊपर से उसमें सब बड़े लोग थे और ज्यादातर औरते थी. आईना और निराश हो गई और हम दोनों एक 40-45 साल की आंटी की सीट के पास आकर खड़े हो गये, वो और उनकी एक लड़की थी जो हमसे कुछ छोटी होगी, वो वहां बैठी थी. उनके पति हमारे पास में खड़े थे.

आईना का मुँह लटका हुआ था, में भी थोड़ी निराश थी उधर में माँ से फोन पर बात करके बता रही थी कि हम कुछ देर में वापस आ जायेंगे. तभी मुझे अपने चूतड़ पर कुछ महसूस हुआ, मैंने नीचे देखा तो वो आंटी के पति अंकल का हाथ मेरे चूतड़ पर चल रहा था, पता नहीं वो गलती से था या जानबुझ कर, लेकिन उनका हाथ मेरे चूतड़ पर चल रहा था.

मैंने भी सोचा कि देखते है यह क्या है? और यह सोचकर में वैसे ही चुपचाप खड़ी रही. फिर धीरे-धीरे जब अंकल ने देखा कि में कुछ नहीं कह रही हूँ और ना ही में दूर हटकर खड़ी हुई तो उनकी हिम्मत बड़ गई और उन्होंने अपनी पूरी हथेली मेरे चूतड़ पर रखकर मेरे चूतड़ को सहलाना शुरू कर दिया में चुपचाप खड़ी रही. तभी मैंने देखा कि वो आंटी भी आईना की जांघों को अपनी कोहनी से रगड़ रही है, लेकिन आईना इतनी दुखी थी कि उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. मैंने आईना को इशारा किया और हल्का सा अपनी जगह से आईना के पास जाने के लिए गई तो अंकल ने तुरंत मेरी इस हरकत पर अपना हाथ हटा लिया. में आईना के पास गई और उसके कान में बोला कि मुझे लगता है कि यह अंकल और आंटी ठरकी है और यह तेरी ख्वाइश पूरी कर सकते है.

तब उसका ध्यान आंटी के हाथ पर गया, वो मेरी बात सुन कर मुस्कुराई और बोली कि उसे अंकल के पास आने दे. मैंने भी कुछ नहीं कहा और हम दोनों ने एक दूसरे की जगह बदल ली, लेकिन अब एक प्रोब्लम थी कि अंकल इतना घबरा गये थे कि अब वो आईना से थोड़े दूर हटकर ही खड़े हो गये, लेकिन उनकी पत्नी ने हिम्मत दिखाते हुए आईना की जगह मेरी जांघों को कोहनी से टच करना शुरू कर दिया.