दोस्त की रंडी बहन का जिस्म-2

Dost ki randi bahan ka jism-2

दीदी : तू दफ्तर में अपने काम पर ध्यान देता है या लड़कियों पर?

में : क्या दीदी आप भी बस?

दीदी : क्यों क्या तेरे दफ्तर में कोई सुंदर लड़की नहीं है?

में : हाँ है दीदी, बहुत सी है, लेकिन में सिर्फ़ अपने काम पर ध्यान देता हूँ.

दीदी : चल हट तू मुझे ही बना रहा है, में बहुत जानती हूँ लड़कियों की किसी लड़के को देखकर उनकी क्या हालत होती है? और वो भी अगर लड़का तुम्हारे जैसे सुंदर हो तो.

में : हाँ, लेकिन में ऐसा नहीं हूँ.

दीदी : अच्छा चल कोई तो तुझे अच्छी लगती होगी?

में : नहीं दीदी.

दीदी : नहीं चल में नहीं मानती एक जवान लड़का जिसे कोई लड़की अच्छी नहीं लगती हो, यह हो ही नहीं सकता?

में : हाँ दीदी मुझे आप भी क्या कोई भी अच्छी नहीं लगती.

दीदी : ऐसा क्यों, क्या तू जावन नहीं है?

में : हाँ हूँ ना.

दीदी : क्या तुझमें कोई कमी है?

में : क्या दीदी आप भी बात कहाँ ले गई?

दीदी : में जवान भी हूँ और मुझमें कोई कमी भी नहीं है, लेकिन मुझे जवान लड़कियाँ अच्छी नहीं लगती.

दीदी : क्यों जवान लड़कियाँ क्यों नहीं?

अब जाने भी दो ना आप मेरी बड़ी बहन जैसी हो और बहन भाई में ऐसी बात हो जाती, अरे यार तुम शहर में रहते हो, 21 वीं सदी में जी रहे हो और तुम बातें कर रहे हो पुराने जमाने की, अरे पागल आज कल तो भाई बहन भी एक दोस्त की तरह होते है, जो आपस में अपने मन की सारी बातें एक दूसरे को बता देते है, बिना किसी शरम या झिझक के, अच्छा चल अब यह बता तू बियर वगेराह पीता है? तब मैंने बोला कि हाँ दीदी कभी कभी दोस्तों के साथ उनके कहने पर में भी पी लेता हूँ. फिर उन्होंने पूछा क्या अभी है तेरे पास?

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मैंने कहा कि हाँ दीदी फ़्रीज़ में चार बोतल है, क्या आप भी पीती हो? हाँ रे जब गरमी ज़्यादा होती है तो तेरे जीजा जी मुझे पिला देते है और कभी कभी तो वो मुझे व्हिस्की भी पीला देते है. फिर मैंने कहा कि तुम बहुत बदल गई हो.

दीदी हंसते हुए बोली अरे बेटा यह सब शहर की हवा का असर है, में तुम्हारे जीजा के साथ पार्टियों में जाती हूँ तो मुझे पीनी पड़ती है और जितनी बड़ी पार्टियों में हम जाते है, वहां पर यह सब तो आम बात है कभी तू भी चलना हमारे साथ. फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है दीदी अब आप नहा लो. फिर हम बियर पीते हुए बातें करते रहेंगे, ठीक है कहकर वो अपनी गांड को हिलाती हुई नहाने चली गयी और में अपने लंड को पकड़कर मसल रहा था और सोच रहा था कि आज दीदी बड़ी फ्रेंक होकर बातें कर रही है, हो सकता है आज मुझे उनको चोदने का मौका मिल जाए? और में सोचने लगा कि रीना दीदी जब नहाकर मेरे लूँगी और कुर्ता बिना पेंटी के पहनेगी तो शायद आज रात को उसकी लूँगी हट जाए या खुल जाए तो उनकी चूत के दर्शन मुझे हो ज़ाए?

तभी दीदी नहाकर आ गई और मैंने तुरंत अपने लंड को अंडरवियर में अपनी जगह सेट किया और में बोला क्यों नहा ली दीदी? वो बोली कि हाँ अब तू भी नहा ले. फिर में बोला कि जी हाँ ठीक है और में बाथरूम में आकर अपने कपड़े उतारकर जैसे ही कपड़े टाँगने के लिए खूँटी की तरफ बड़ा तो में हैरान रह गया कि दीदी की ब्रा और पेंटी वहाँ टंगी हुई थी, मुझे कुछ अजीब सा लगा.

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फिर मैंने सोचा कि शायद उन्होंने अपनी पेंटी को तब उतारी होगी, जब वो पहली बार पेशाब के लिए आई थी. फिर मैंने वो पेंटी नीचे उतारकर अपने एक हाथ में ले लिया और में उसको सूंघने लगा, हाईईईई दोस्तों सच कहता हूँ उसकी चूत की महक से में बिल्कुल पागल हो गया और में मुठ मारने लगा, जब मेरा लंड झड़ गया, तो में जल्दी से नहाकर बाहर आ गया.

फिर दीदी ने मुझसे पूछा क्यों बड़ी देर लगा दी तुमने नहाने में? में घबरा गया और बोला वो दीदी गरमी बहुत है ना और वो कहने लगी अच्छा चल अब बियर खोल.

फिर मैंने दो बोतल बियर खोली और एक उनको दे दी और एक खुद ने ले ली और दीदी बेड पर अपने दोनों पैरों को लंबा करके सिरहाने से अपनी पीठ को लगाकर बैठी हुई थी, में उनको गौर से देखने लगा.

फिर वो मुझसे बोली क्या बात है महेश तू मुझे ऐसे क्या देख रहा है? में यह बात सुनकर सकपका गया और बोला कि कुछ नहीं दीदी में देख रहा था कि आप मेरे कपड़ों में बहुत अच्छी लग रही हो.

दीदी : अच्छ बेटा तुझे तो लड़कियाँ अच्छी ही नहीं लगती, तो फिर में कैसे तुझे अच्छी लगने लगी?

में : अओहूओ दीदी आप कोई लड़की थोड़े ही हो कहकर में चुप हो गया.

दीदी : अरे में लड़की नहीं तो क्या कोई मर्द हूँ?

में : अरे नहीं दीदी, मेरा वो मतलब नहीं था.

दीदी : तो फिर क्या था?

में : अओहूऊओ अब में आपको कैसे बताऊं आप मेरी बड़ी बहन जैसी हो?

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दीदी : अरे यार फिर वही ढकियानूसी बातें, अरे अब हम दोस्त है, देख तू मेरे साथ बियर पी रहा है और अब मुझसे कैसी शरम तू खुलकर बोल में बुरा नहीं मानूगी, वो अपनी बियर की बोतल खाली करके बोली, दीदी फिर मुझसे बोली कि, लेकिन पहले दूसरी बोतल खोलकर तू मुझे दे दे.

फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, दीदी पूछने लगी क्यों तू और नहीं लेगा? मैंने कहा हाँ लूँगा दीदी, लेकिन पहले अगर आप नाराज़ ना हो तो में एक सिगरेट पी लूँ? मेरी बात को सुनकर वो पालती मारकर बैठ गई और बोली कि धत इसमें नाराज़ होने वाली कौन सी बात है? ला एक मुझे भी दे. अब में उनकी यह बात सुनकर बड़ा हैरान रह गया.

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