प्यार सेक्स या धोखा-2

(Dosti Pyar Sex Ya Dhokha-2)

प्रेषक : योगेन्दर शर्मा

गीत ने मेरा हाथ पकड़ा और पार्क में ले गई। हम दोनों बैठ गए।

गीत बोली- मैं जिस दिन तुम्हें नहीं देखती, मेरा कहीं भी दिल नहीं लगता। अगर तुम जयपुर नहीं आए तो मैं कैसे रह सकती हूँ?”

“क्यों? तुम्हारा दिल क्यों नहीं लगता?” मैं उसे तड़पाने के लिए मजाक करने लगा।

“योगी, तुम तो बिल्कुल बुद्धू हो।”

“क्यों?”

“तुम कोई बात समझते ही नहीं, बस मार-पीट करना जानते हो और कुछ नहीं।”

“क्या नहीं समझा मैं?”

“मुझे नहीं पता !”

“गीत बताओ ना !”

“प्लीज !”

“जब किसी को ऐसा होता है तो समझो उसे प्यार हो गया है।”

“अच्छा तो तुम्हें प्यार हो गया है पर किससे?”

“अरे बुद्धू !” गीत सिर में हाथ मारते हुए बोली।

“गीत ऐसा तो मुझे भी होता है !”

क्या मुझे भी प्यार हो गया है?” मैं हँसते हुए बोला।

गीत समझ गई कि मैं उसे पागल बना रहा हूँ।

“अच्छा मेरा मजाक बना रहे हो, जाओ मैं तुमसे बात नहीं करती।” कहते हुए उठने लगी।

मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोला- आई लव यू जान !

गीत मेरे ऊपर झुकी और बोली- आई लव यू टू।

वो हाथ छुड़ाकर कक्षा में भाग गई।

मैं भी कक्षा मैं पहुँच गया और उसकी तरफ देखने लगा। वो थोड़ा सा मुस्कराई और दुप्पटा से अपना मुँह ढक लिया। उसके चहरे पर शर्म की लाली थी जो उसकी सुन्दरता और बढ़ा रही थी।

दूसरे दिन मैं जल्दी कॉलेज पहुँच गया। गीत कमरे में अकेली बैठी थी।

हँसते हुए बोली- आज जनाब कैसे जल्दी आ गए?

मैं उसके पास गया और बोला- जान, तुम्हारे लिए !

मैंने गीत का हाथ पकड़ लिया, वो खड़ी हो गई।

मैं उसके नजदीक होते हुए बोला- अब कहाँ भागोगी?

“जानू, थोड़ा दूर हो जाओ, कोई आ जाएगा।”

मैंने उसका सिर पकड़ा और गुलाबी होंठों को अपने होंठों में ले लिया। थोड़ी देर चूमने के बाद अलग हो गए।

गीत की नजरें शर्म से नीचे झुकी थीं, “तुम बहुत गन्दे हो मैं तुमसे बात नहीं करूँगी।”

उस दिन मैं उसे जीभ निकाल-निकाल कर चिड़ाता रहा और वो शर्म के मारे सिर ही नहीं उठा पा रही थी।

कुछ दिन बाद हम जयपुर पहुँच गए।

मैं और मेरा एक दोस्त अलग से गए थे। हमने एक कमरा किराये पर ले लिया।

शाम को हम छत पर बैठे थे तो गीत हमारे पास आई। मैंने मुड़कर देखा तो देखता ही रह गया। गीत ने गुलाबी शॉर्ट कमीज और सफेद रंग की जीन्स पहनी थी जिससे उसकी चूत और चूचियों का उभार साफ दिख रहा था।

आँखों में हल्का सा काजल और होंठों पर गुलाबी रंग मस्त लग रहा था। उसकी कमीज का ऊपर का बटन खुला था जिससे थोड़ी चूचियाँ दिखाई दे रही थी। उसकी मुस्कान ने तो मेरी जान ही निकाल ली। आज पहली बार गीत को देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया।

“हाय जान !”

“हाय !”

“आज तो बड़ी सैक्सी लग रही हो।”

“योगी तुम भी ना किसी के भी सामने शुरु हो जाते हो।”

यह सुनकर मेरा दोस्त गीत से नमस्ते करके चला गया।

“क्या जानू तुम तो !”

“क्या कुछ गलत कहा? मैंने सेक्सी लग रही हो इसलिए बोल दिया।”

“तुम रहने दो बस।”

“ऐसे कैसे रहने दूँ, आज तुम्हें नहीं छोडूँगा !” गीत को अपनी तरफ खींचते हुए बोला।

“योगी, छोड़ो मुझे, कोई देख लेगा।”

“देखने दो।” और खड़ा होकर गीत को बाँहों में कस कर पकड़ लिया। उसकी चूचियाँ मेरी छाती से लग गई और मेरा लन्ड उसकी चूत से जा लगा।

“योगी छोड़ो ना, तुम तो बिल्कुल पागल हो।”

“पागल तो जान आज तुमने कर दिया है, अब बस रोको मत।” कहते हुए चुम्बन करने लगा। थोड़ी देर बाद गीत भी मेरा साथ देने लगी, वो मेरे होंठों को चूसने लगी, फिर मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा।

गीत एकदम काँप सी गई। उसकी आँखों में अजीब सा नशा था। मैंने उसे उठाया और कमरे में ले आया। गीत में बिल्कुल भी भार नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे फूलों की टोकरी को गोद में ले रखा हो और उसकी बदन की खुशबू मुझे पागल किए जा रही थी।

कमरे में लाकर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और दरवाजा बन्द करके उसके पास लेट गया। गीत मुझ से लिपट कर किस करने लगी। मैंने उसे थोड़ा अलग किया और उसकी चूचियों पर हाथ रखकर मसलने लगा। चूचियों के दिख रहे भाग पर चूमने लगा।

गीत की साँसें गर्म हो गई थीं, वो आँखें बन्द करके लेटी थी। मैं उसकी कमीज के बटन खोलने लगा तो उसने रोक दिया।

“नहीं योगी, इससे आगे कुछ मत करो, मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाऊँगी।”

“कौन कह रहा है कण्ट्रोल के लिए? प्लीज जान, आज मत रोको।”

“नहीं जानू, मैं बर्बाद हो जाऊँगी।”

“क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करती?”

“करती हूँ जान ! पर शादी से पहले ये सब ठीक नहीं।”

“जान, मैं तुमसे ही शादी करूँगा।”

“सच।”

“मेरे साथ ये सब करने के बाद धोखा तो नहीं दोगे?”

“क्या जान मुझ पर विश्वास नहीं है?” मैं खड़े होते हुए बोला।

“विश्वास तो अपने से भी ज्यादा है ! मेरी शादी तुमसे नहीं हुई तो मैं वैसे भी मर जाऊँगी क्योंकि मैं तुम्हारे बगैर नहीं रह सकती।”

मैं उसके होंठों पर उंगली रखते हुए बोला- चुप ! क्या बकवास करने लगी।
गीत ने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- तुम नाराज तो नहीं हो?

“जान, इसमें नाराजगी की तो कोई बात ही नहीं है। अच्छा हुआ तुमने रोक दिया वरना मैं कुछ गलत कर बैठता।”

“परन्तु अब मैं कुछ गलत करूँगी।” और मुझे अपने ऊपर खींच लिया।

“नहीं गीत यह ठीक नहीं है।”

“सब ठीक है तुम सिर्फ मेरे हो और मैं तुम्हारी !” कहते हुए किस करने लगी।
मेरा लन्ड फिर खड़ा हो गया और मैं भी उसकी चूचियों को दबाते हुए किस करने लगा।

मेरा एक हाथ उसकी चूचियों को दबा रहा था और दूसरा उसकी कमर के नीचे था। मेरा एक पैर उसके पैरों के बीच में था जिससे मेरा लण्ड उसकी चूत पर लगा हुआ था। वो लगातार चूमाचाटी कर रही थी।

मैं अपना हाथ उसकी कमीज में डालकर ब्रा के ऊपर से चूचियों को मसलने लगा। उसने मुँह अलग किया और बोली- धीरे-धीरे दबाओ, दर्द होता है।

मैं बोला- कहते हैं कि दर्द में ही मजा है।
हम हँसने लगे। मैंने चूची का अगले भाग को पकड़ कर मसल दिया वो सिसिया उठी “आ अ !”

मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए और बारी-बारी से दोनों चूचियों को मसलने लगा। फिर अपना हाथ उसकी चूत पर ले गया और रगड़ने लगा।

वो पूरी गर्म हो गई। मैंने रजाई हटाकर उसे बिठा लिया और कमीज उतारने लगा।

उसने रोका, “मुझे शर्म आएगी !”

मैंने कहा- कैसी शर्म? और कमीज उतार दी।

काले रंग की ब्रा में गोरी चूचियों को देखकर मैं पागल हो गया और जल्दी से उसकी ब्रा भी अलग कर दी। एकदम खड़ी थी उसकी चूची और मेरे रगड़ने से लाल हो गई थी। उसने अपना चेहरा ढक लिया।

मैंने एक चूची को दबाया और दूसरी को मुँह में लेकर चूसने लगा तो वो पागल सी हो गई, उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं। मैंने बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूसा।

“आज बड़ा जोश आ रहा है?”
मैं बोला- तुमने इतने दिन जो तड़पाया है !

“अच्छा तो बदला ले रहे हो?”

“हाँ !” और उसकी जीन्स खोलने लगा।

वो बोली- तुम भी तो अपने कपड़े उतारो।

मैं बोला- मैंने तुम्हारे उतारे हैं, तुम भी मेरे उतार दो।

उसने मेरी कमीज उतारी और मुझे पीछे को धक्का दे दिया। मैं सीधा लेट गया। फिर छाती को चूमना शुरु कर दिया। उसकी चूचियाँ मेरी छाती को छूतीं तो करन्ट सा लगता। अब वो केवल पैन्टी में थी।

मेरा लन्ड पैंट में दब कर परेशान हो रहा था। मैंने अपनी पैंट भी उतार दी, लन्ड को कुछ आराम मिला। मैंने गीत को लिटा दिया और पैन्टी उतार दी। उसने दोनों पैर भींच लिए और अपना मुँह ढक लिया। मैंने उसकी जाँघों को सहलाया और पैरों को अलग कर दिया।

उसकी चूत बिल्कुल गुलाब की कली की तरह लग रही थी जिसकी दोनों पन्खुड़ियाँ चिपकी हुई थीं और ऊपर एक घुण्डी निकली थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैंने पहली बार चूत देखी थी फिल्मों में तो देख चुका था, पर आज मेरे सामने कुँवारी चूत थी।

मुझे तो जैसे जन्नत मिल गई। मैंने उसकी चूत को छुआ। वो गीली हो चुकी थी। गीत के मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थीं, “आ हा ह सी ई ई..”

मैंने उसकी दोनों फाँकों को अलग किया, बिल्कुल लाल थीं, मुझे नीचे एक छोटा सा छेद दिखा, मैंने उस पर उंगली रखकर अन्दर की तो गीत पागल सी हो गई और अपना सिर इधर-उधर करने लगी अपने होंठ दबाने लगी। मैं उंगली अन्दर-बाहर करने लगा। वो सिसिया रही थी, “आहा हा ई ई सी सि इ ई..”

मैंने अपनी हाथ की रफ़्तार बढ़ा दी।

उसकी चूत से पानी सा निकलने लगा।

बोली- बस !

“क्या हुआ?”

कहानी जारी रहेगी !

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