एक साथ चार माल की चुदाई का मजा पाया-6

Ek Sath Char Maal Ki Chudai Ka Maja Paya-6

मगर मैं एक भार फ़िर उसको अपनी जकड़ में ले चुका था। पहली बार चूद रही थी, सो मैंने भी सोंचा कि उसको मर्द के पानी को भी महसूस करा दूँ। मैं रीना की चूत को अपने पानी से भर दिया।
वो घबड़ा रही थी, बोली – “बाप रे, अब कुछ हो गया तो कितनी बदनामी होगी। मैं अब निश्चिन्त हो कर अपना लन्ड बाहर खींचा, एक फ़क की आवाज आई। रीना की चूत एकदम टाईट थी, अभी भी मेरे लन्ड को जकड़े हुए थी।
मैंने रीना को कहा की अब वो पेशाब कर ले, ताकि जो माल भीतर मैंने गिराया है उसका ज्यादा भाग बाहर निकल जाए, और पेशाब से उसकी चूत भी थोड़ा भीतर तक धुल जाए। चुदाई के खेल के बाद पेशाब करना बेहतर हैं समझ लो इस बात को”, मैंने उसको समझाया।
वो अब कपड़े समेटने लगी तो मैंने कहा, “अब इस बार ऐसे बाहर जाने में क्या प्रौब्लम हैं चुदने के पहले तो नंगा बाहर जा कर मूती थी तुम?”
मैं देख रहा था कि अब वो थोड़ा शान्त हो गई थी और उसका मूड भी बेहतर हो गया था। मेरे दुबारा पूछने पर बोली, “अब ऐसे जाने में मुझे शर्म आएगी?”मैं पूछा, “क्यूँ भला…”।
वो सर नीचे कर के कही, “तब की बात और थी, अब मैं नई हूँ… पहले मैं लड़की थी और अब मैं औरत हूँ तो लाज आएगी न शुरु में सब के सामने जाने में…।”

मुझे शरारत सुझी, सो मैंने सब को नाम ले ले कर आवाज लगाई, “रागिनी…बिन्दा….रूबी….मीता…सब आओ और देखो, रीना को अब तुम लोग के सामने आने में लाज लग रहा है…मेरा सब माल अपने चूत में ले कर बैठी है बेवकूफ़…, बाहर जाकर धोएगी भी नहीं” कहते हुए मैं हँसने लगा।
मेरी आवाज पर रागिनी सबसे पहले आई और रीना की चूत में से उसकी जाँघो पर बह रहे पानी देख कर मुस्कुराई, “आप अंकल इस बेचारी की कुप्पी पहली हीं बार में भर दिए, ऐसे तो कोई सुहागरात को अपनी दुल्हन को भी नहीं भरता है” और वो कपड़े से उसकी चूत साफ़ करने लगी।

रीना शर्मा तो रही थी पर चुप थी। मैं भी बोला, “अरे सुहागरात को तो लड़कों को डर रहता है कि अगर दुल्हन पेट से रह गई तो फ़िर कैसे चुदाई होगी…. मैं तो हर बार नई सुहागरात मनाता हूँ। वैसे भी इतनी बार मैं निकालता हूँ कि मेरे वीर्य से स्पर्म तो खत्म ही हो गये होंगे, फ़िक्र मत करों, यह पेट से नहीं रहेगी।
अब तक मैंने कपड़े बदल लिए और बाहर निकल गया, कुछ समय बाद रागिनी अपने साथ रीना को ले कर बाहर आई। बिन्दा ने एक नजर रीना को देखा, और फ़िर झट से कहा, “जाओ, अब नहा-धो कर साफ़-सुथरी हो जाओ, मंदिर चलना है।”
रीना भी चुपचाप चल दी। मैंने देखा रूबी चुल्हे के पास है सो मैंने कहा एक कप और चाय पिला दो रूबी डार्लिंग , तुम्हार अहसान होगा, बहुत थक गया हूँ।” रूबी ने मुँह बिचकाते हुए कहा, “हूँह, साँढ़ भी कहीं थकता है….।”
मैंने भी तड़ से जड़ दिया, “बछिया को चोदने में थकता है डार्लिंग …और तुम्हारी दीदी तो लाजवाब थी… अंत-अंत तक मेरे धक्के पर कराह रही थी, ऐसी कसी हुई चूत की मालकिन है।”
इस बात को सुन कर बिन्दा फ़िक्रमंद हो गई। मेरे से पूछी, “तब अब आगे कैसे होगा, शहर में तो बेचारी अकेली रह जाएगी, घुट-घुट कर रोएगी…”।

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मैंने समझाया, “अरे नहीं बिन्दा, ऐसी बात नहीं है, अभी दो-चार बार और कर दुँगा तो सही हो जाएगी, जब पुरा मुँह खुल जाएगा। असल में न उसको आप सब के प्रोत्साहन की जरुरत है। आप उसको सब करने बोल रहे हैं पर खुल कर नहीं, जब सब आपस में बेशर्मी से बात-चीत करेंगे तो उसका दिमाग भी इस सब के लिए तैयार होने लगेगा और फ़िर बदन भी तैयार हो जाएगा। ऐसे मैं तो उसको 2-3 बार में ढ़ीला कर हीं दुँगा। आप तो जान चुकी हैं कि मेरा लंड आम लोग से मोटा भी है….सो जब मेरे से बिना दर्द के चुदा लेगी तो बाजार में कुछ खास परेशानी नहीं होगी। अभी तो जितनी टाईट है, अगर मैं हीं पैसा वसूल चुदाई कर दूँ जैसा कि कस्टमर आमतौर पर रंडियों की करते हैं तो बेचारी इतना डर जाएगी कि चुदाने के नाम पर उसकी नानी मरेगी।”
रूबी चाय ले आई थी और वहीं खड़े हो कर सब सुन रही थी। मैं कह रहा था, “उसको बहुत प्यार से आराम-आराम से अपने मोटे लन्ड के चोदा हूँ आज”। रूबी अब बोली, “आपको अपनी मुटाई पर बहुत नाज है न, खुद से अपनी बड़ाई करते रहते हैं।”
उसको शायद मैं कुछ खास पसन्द नहीं था।”मैंने उसको जवाब दिया, “ऐसी कोई बात नहीं है, मेरे से ज्यादा सौलिड लन्ड वाले हैं दुनिया में…पर मेरा कोई खराब नहीं है बल्कि ज्यादातर मर्दों से बहुत-बहुत बेहतर है…

.जब तुम बाजार में उतरोगी और कुछ अनुभव मिलेगा तब समझोगी।”
अब मैं दिल में सोंच रहा था कि जब इस कुतिया की सील तोड़ने की नौबत आएगी उस दिन वियाग्रा खा कर साली को फ़ाड़ दुँगा, वैसे भी मैं इसको खास पसन्द हूँ नहीं तो बेहतर होगा कि साली का बलात्कार हीं कर दूँ। इस घर में तो अब मेरे सात खून माफ़ होंगे।
बिन्दा सब सुन कर सर हिलाई, “ठीक है, अब तो यह आपके और रागिनी के हीं भरोसे है।”रीना अब तैयार हो कर आ गयी तो बिन्दा, रीना और रूबी मंदिर चली गई। घर पर मेरे साथ रागिनी और मीता थीं। मैं भी अब नहाने धोने के सोच रहा था। जब मैं टट्टी के लिए गया तो मीता आंगन में नल पर नहाने लगी। मैं भी वहीं ब्रश करने लगा। सब दिन की तरह मीता आज भी सिर्फ़ एक पैन्ट में नहा रही थी। उसकी छॊती-छोटी चुचियाँ अभी तरीके से चुची बनी भी नहीं थी…एक उभार था जिसका आधा हिस्सा गुलाबी था, बड़े से एक रुपया के सिक्के जितना और उस पर एक बड़े किशमिश की साईज की निप्पल थी। आज आराम से गौर से उसकी छाती का मुआयना कर रहा था तो लगा कि कल मैंने जिसे चुचक कहा था…वह सही में अब चूची लग रहा है। यह बात अलग है कि अभी उसमें और ऊभार आना बाकी था। मैंने एक तौवेल लपेट रखा था अपनी कमर में।

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रीना को चोदने के बाद से मैं ऐसे हीं टौवेल में घुम रहा था। नहाते हुए मीता बोली, “अंकल, क्या दीदी को बहुत तकलीफ़ हुई थी?”मैंने उससे ऐसे सवाल की अभी उम्मीद नहीं की थी सो चौंक कर कहा, “किस बात से?”
अब मीता फ़िर से पूछी, “वही जब आप दीदी को कमरे में ले जाकर उसकी चुदाई कर उसको औरत बनाए तब?”मै बोला, “अब थोड़ा बहुत तो हर लड़की को पहली बार में परेशानी होती है कुछ खास नहीं। पर इसमें मजा इतना मिलता है लड़की को कि वो इसक काम को बार-बार करते है मर्दों के साथ। अगर सेक्स में मजा नहीं आता तो क्या इतना परिवार बनता, फ़िर बच्चे कैसे होते और दुनिया कैसे चलती…सोचों।”

मीता कुछ सोंची, सब समझी फ़िर बोली, “तब दीदी इस तरह से कराह-कराह कर रो क्यों रही थी?”मैं अब उसको समझाया, “वो रो नहीं रही थी बेटा…ऐसी आवाज जब लड़की को मजा मिलता है तब भी मुँह से निकलता है…आह आह आह। असल में तुम कभी ब्लू-फ़िल्म तो देखी नहीं होगी सो तुमको कुछ पता नहीं है। वैसे मैंने कमरा बन्द नहीं किया हुआ था, तुम चाहती तो आ जाती देखने।”

मगर मैं एक भार फ़िर उसको अपनी जकड़ में ले चुका था। पहली बार चूद रही थी, सो मैंने भी सोंचा कि उसको मर्द के पानी को भी महसूस करा दूँ। मैं रीना की चूत को अपने पानी से भर दिया।
वो घबड़ा रही थी, बोली – “बाप रे, अब कुछ हो गया तो कितनी बदनामी होगी। मैं अब निश्चिन्त हो कर अपना लन्ड बाहर खींचा, एक फ़क की आवाज आई। रीना की चूत एकदम टाईट थी, अभी भी मेरे लन्ड को जकड़े हुए थी।
मैंने रीना को कहा की अब वो पेशाब कर ले, ताकि जो माल भीतर मैंने गिराया है उसका ज्यादा भाग बाहर निकल जाए, और पेशाब से उसकी चूत भी थोड़ा भीतर तक धुल जाए। चुदाई के खेल के बाद पेशाब करना बेहतर हैं समझ लो इस बात को”, मैंने उसको समझाया।
वो अब कपड़े समेटने लगी तो मैंने कहा, “अब इस बार ऐसे बाहर जाने में क्या प्रौब्लम हैं चुदने के पहले तो नंगा बाहर जा कर मूती थी तुम?”

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मैं देख रहा था कि अब वो थोड़ा शान्त हो गई थी और उसका मूड भी बेहतर हो गया था। मेरे दुबारा पूछने पर बोली, “अब ऐसे जाने में मुझे शर्म आएगी?”मैं पूछा, “क्यूँ भला…”।
वो सर नीचे कर के कही, “तब की बात और थी, अब मैं नई हूँ… पहले मैं लड़की थी और अब मैं औरत हूँ तो लाज आएगी न शुरु में सब के सामने जाने में…।”

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