फिर आऊँगी राजा तेरे पास !-1

Fir Aaungi Raja Tere Pas-1

एक बार मैं अपने चाचाजी के यहाँ गाँव गया।

दोपहर में मैं घर पहुँचा तो सब खेत पर गए हुए थे। मेरे चाचा की लड़की पूनम वो बारहवीं में पढ़ रही थी, अकेली जामुन के पेड़ पर झूला झूल रही थी।

वो बोली- आओ, झूलोगे क्या मेरे साथ?

हमने एक तख्ता लगा लिया झूले में और दोनों एक दूसरे की टांगों में टांगें डाल कर झूलने लगे।

जब झूला ऊपर नीचे जाये तो दबाव के वजह से मेरे पैर उसकी चूत पर दबाव बनाते और उसके पैर मेरे लण्ड पर।

मेरा लण्ड खड़ा हो गया और वो जानबूझ कर मेरे लण्ड पर अपने पैर का दबाव बनाती। मैंने लुंगी पहनी हुई थी उसने सलवार पहनी हुई थी।

मेरा लण्ड खड़ा होकर लुंगी से बाहर अन्डरवीयर में उठा सा दिखने लगा। मैंने अपने पैर का अंगूठा उसकी चूत पर दबा दिया तो वो हंसने लगी।

मैंने सोचा- जानम तैयार है।

मुझे महसूस हुआ कि उसकी सलवार गीली हो गई थी।

मैंने कहा- पूनम एक तरफ ही से झूलते हैं !

तो वो मेरे टांगों के ऊपर बैठ गई। मेरा खड़ा लण्ड अब उसकी गाण्ड से टकरा रहा था। उसके बाल मेरे मुँह पर उड़ रहे थ। वो बार बार मेरे लण्ड पर अपने आपको आगे पीछे करती मानो उसे लण्ड की चुभन अच्छी लग रही हो।

मैंने धीरे से उसके स्तनों को दबाया तो उसने कुछ नहीं कहा। मैंने उसकी गर्दन पर चुम्मी ले डाली।

वो गर्म होने लगी थी।

मैंने उसके कुरते में अन्दर हाथ डाला और उसकी चूचियो तक ले गया तो वो झूले से उतर गई, वो बोली- भैया, बाथरूम जाकर आती हूँ अभी।

वो अन्दर घर में चली गई।

मैं धीरे धीरे उसके पीछे चला गया, उसे पता ही नहीं चला। उसने बाथरूम के दरवाजे को पूरा बन्द नहीं किया और पेशाब करने लगी।

मैं एक तरफ से झांक रहा था, सु सु सर की आवाज आ रही थी उसके मूतने से।

पेशाब करने के बाद उसने अपनी चूत में उंगली डाली और अन्दर-बाहर करने लगी। मैंने झट से दरवाजा खोल दिया।

वो घबरा गई और खड़ी हो गई सलवार पकड़ कर !

मैंने पूछा- पूनम यह क्या कर रही है?

बोली- थोड़ी खुजली हो रही थी।

मुझे भी पेशाब लग रहा था तो मैंने अपना खड़ा लण्ड पकड़ा और पेशाब करने लगा।

लण्ड खड़ा होने से पेशाब की धार बड़ी दूर पड़ी। पूनम एक तक देखती रही मेरे लण्ड को, फ़िर बोली- भैया, तुम क्यों आये यहाँ पर? मैं तुम्हारी छोटी बहन हूँ। मुझे शर्म आती है।

मैंने कहा- देख, तूने मेरा लण्ड देख लिया और मैंने तेरी चूत देख ली, फिर शर्म क्यों करती है?

मैंने उसे समझाया- देख अपनों के बीच बात का किसी को पता भी नहीं चलता और मजे भी हो जाते हैं। अब तू बच्ची तो है नहीं ! थोड़ा-बहुत तो जानती होगी? पूनम, मेरे भी खुजली हो रही है।

उसने कहा- तो भैया, मैं क्या करूँ?

मैंने कहा- तू मेरी खुजा दे, मैं तेरी खुजा देता हूँ।

बोली- अन्दर वाले कमरे में चलते हैं।

हम दोनों अन्दर वाले कमरे में चले आये।

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गाँव की लड़कियाँ सेक्स के बारे में ज्यादा नहीं जानती। मैंने उसकी सलवार उतार दी और अपना अन्डरवीयर उतार दिया।

उसने न तो ब्रा पहनी थी न ही कच्छी ! काली झांट चूत पर थी पर थी बहुत ही छोटी।

मैं उसकी चूत को उंगली से सहलाने लगा, उसको अच्छा लगा, उसने मेरे लण्ड को पकड़ा और मेरे टट्टों को खुजाने लगी।

मैंने उसे समझाया- मेरे लण्ड की इस खाल को ऊपर-नीचे कर !

तो वो करने लगी लण्ड और मोटा होने लगा। मैं था शहर से और वो गाँव की छोरी जिसे कुछ पता ही नहीं था कि क्या हो रहा है और क्या होने वाला है, बस उसे मजा आ रहा था चूत में उंगली से। थोड़ी देर में मेरे लण्ड ने धार मार दी जो सीधी उसके मुँह पर गिरी।

वो चौंक गई, बोली- यह क्या है?

मैंने बताया- इसी से बच्चा बनता है।

लण्ड मुरझाने लगा तो बोली- यह तो ढीला होने लगा है?

मैंने बताया- तू हिलाती रह इसको और मुँह से चूस थोड़ा !

बोली- नहीं।

वो मना करने लगी तो मैंने जबरदस्ती से अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया फिर उसे ठीक लगा और उसने मेरा वीर्य जो लण्ड पर लगा था चाटकर साफ कर दिया। फिर पूरा लण्ड मुँह में ले लिया बोली- जब यह ढीला था तो अच्छा नहीं लग रहा था, अब तो गर्म-गर्म लग रहा है।

मैंने कहा- पूनम, चल लेटकर करते हैं।

वो तैयार हो गई और बिस्तर पर लेट गई।

मैंने उसका कुरता उतरना चाहा तो वो बोली- नहीं, इसे मत उतारो।

मैंने सोचा, अब इसे कौन समझाए कि जो बचानी थी वो तो मेरे हाथ में दे दी।

फिर मैंने उसे मनाया और नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया और उसके ऊपर लेट गया और उसे चूमने लगा। उसकी चूची मुँह में लेकर बच्चो की तरह चूसने लगा तो उसने अपने हाथ मेरे सर पर रख लिए और बालों में उंगली फ़िराने लगी।

मेरा लण्ड कभी कभी चूत से टकरा जाता तो उसकी चूत से निकला पानी मुझे महसूस हो जाता।

फिर एक हाथ से मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरु कर दिया, उसे मजा आ रहा था।

कहानी जारी है….