गाँव की नेहा की चूत से नेह-3

(Gaanv Ki Neha Ki Choot Se Neh-4)

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अब मेरा वीर्य निकलने वाला था, मैंने नेहा को जोर से चूसने को बोला और मैं भी उसकी चूत और जोर से चाटने लगा।

कुछ ही पलों में हम दोनों साथ ही झड़ गए।

नेहा ने मेरा एक एक बून्द वीर्य जीभ से चाट लिया और मैं भी उसका सारा रस पी गया, जो कुछ नमकीन से स्वाद का था।

अब हम दोनों ने पोजीशन बदली और फिर एक दूसरे के होंठों को चूमने लग गए।

मैंने नेहा के कण के पीछे गर्दन पर नाभि पर, सारे शरीर पर चुम्बनो की बौछार कर दी।नेहा भी अलन एक हाथ से मेरी कमर सहला रही थी और एक हाथ से मेरी मुट्ठ मार रही थी।

अब नेहा फिर से गर्म हो चुकी थी, मैंने नेहा से अपना लण्ड चूसने को बोला और वो मेरे लण्ड को एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह चूसने लग गई।

अब मेरे मुँह से भी मादक आवाज़ें निकलने लग गई थी- आह्ह्ह्ह्ह कम ऑन नेहा… उम्म्मम्म… ओह्हूऊऊऊ… मेरी जान उम्म्म तू बड़ी अच्छी है।

सुबह के 3 बज गए थे, अब मैंने समय की नज़ाकत समझते हुए मैंने नेहा को बेड पर लिटा दिया।

मेरा लण्ड नेहा ने चूसकर बिल्कुल चिकना कर दिया था।

अब मैंने नेहा की चूत पर थूक लगाया और अपने लण्ड को उसकी चूत पर सेट किया।
मैं नेहा के ऊपर झुक गया और उसके हाथ सही तरीके से दबा लिए और उसके पैरों को भी अपने पैरों से दबा लिया।

अब मैंने अपने होंठ नेहा के होंठों से मिला कर एक जोरदार धक्का मारा, धक्का मारते ही मैंने उसकी होंठ दबा लिए और उसकी एक हल्की सी चीख निकल कर रह गई।

‘उउय्यईईई म्माआआह मरर्रर्र गग्यईईई…!’
वो दर्द क मरे बिलबिला उठी।

मैंने उसके होठों को दबाये रखा और कुछ देर के लिये रुक गया।

मैंने कुछ देर बाद उसके होंठ छोड़े उसका मुँह एकदम लाल हो गया था।
वो दर्द से करहाती हुई बोली- …प्लीज़ छोड़ दो मुझे, मुझे बहुत दर्द हो रहा है… मैं मर जाऊँगी… छोड़ दो मुझे।

मुझे उस पर दया भी आ रही थी, पर मैंने सोचा कि अगर आज छोड़ दिया तो फिर कभी चूत देने को तैयार नहीं होगी।

मैं उसे चुम्बन करता रहा, उसका दर्द भी अब कम हो चला था, फिर मैंने उसको बिना बताये एक जोरदार धक्का और जड़ दिया।

नेहा चिल्ला उठी और बड़ी मुश्किल से अपने हाथों से उसका मुँह भींच पाया।

अगर मैं नेहा का मुँह न भींच पाता तो उसकी आवाज नीचे तक चली जाती।

नेहा की आँखों से आँसू निकल आये थे और वो दर्द के मारे बिलबिला रही थी।

नेहा मुझसे छूटने की हर संभव कोशिश कर रही थी पर वो नाकाम रही..

मैंने उसका मुँह दबा रखा था इसलिए उसके मुँह से बस ऊऊह्हह्हह आःह की आवाज़ आ रही थी।

फिर मैंने एक धक्का और मारा, इस बार मेरा लण्ड पूरी जड़ तक उसकी चूत में चला गया।

नेहा लगभग बेहोश से हो गई, नेहा बुरी तरह तड़प रही थी और उसकी चूत से बहुत सारा खून निकल रहा था।

फिर मैं रुका रहा, नेहा का गला सूख गया था, मैंने पास में रखे गिलास से उसके मुँह में पानी डाला।
वो दर्द के मारे कराह रही थी।

फ़िर मैंने अपना लण्ड धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरु कर दिया और मैं नेहा को लगातार चुम्बन करता रहा।

जब मैं अपना लण्ड अंदर बाहर कर रहा था तो नेहा को कैसा लग रहा था, उसी के शब्दों में जानिये…

‘मुझे हर धक्के के साथ ऐसा लग रहा था, मानो मेरे चूत बाहर निकल जएगी। जब लंड चूत के अंदर जाता था, मानो चूत अंदर की तरफ जा रही हो, और जब बाहर की तरफ आता था, तो चूत बाहर की तरफ खिंची जा रही हो।

अब नेहा का दर्द कम हो चला था, इसलिए मैंने अब अपने धक्कों की रफ़्तार कुछ तेज़ कर दी थी और अब नेहा भी कुछ मादक आवाज़ें निकाल रही थी।

अब नेहा भी कमर उचकाने लगी थी, मुझे पता चल गया था कि अब उसे भी मज़ा आने लगा है।

अब नेहा मेरे साथ अपनी कमर उचका कर देने लगी और वो इतनी असीम आनन्द ले रही थी कि उससे एक शब्द भी तक से नहीं बोला जा रहा था और अब वो कह रही थी- फ़ास्ट रोहित, और फ़ास्ट, फाड़ दो मेरी चूत को, आआह… आआ ऊह्ह्ह ऊऊओ ऊऊऊम्मम्म!

अब मैंने भी अपने झटको की रफ़्तार तेज़ कर दी थी, उसकी चूत से अब थोड़ा थोड़ा चिकना पानी निकल रहा था जिसकी वजह से अब मेरे लण्ड को उसकी चूत में जाने में ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी।

अब मैं थक गया था इसलिए मैंने नेहा को बेड से उठाया और अपने ऊपर आने को बोला।

नेहा तुरंत ही मेरे ऊपर आ गई और मेरे लण्ड पर बैठकर उचकने लगी।

अब हमारी मादक आवाज़ों के संगीत से पूरा कमर भर गया था।

मैं एक हाथ से उसके मम्मे दबा रहा था और एक हाथ की उंगली उसकी गांड में घुसा कर अंदर बाहर कर रहा था।

अब नेहा के मुँह से अज़ीब अज़ीब आवाज़े निकलने लगी थी- आःह्ह्ह ऊऊऊ ऊऊय्य्य्यईई…

मुझे पता चल गया था कि वो झड़ने वाली है।

इसलिए अब मैं उसके ऊपर आ गया और अब मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार और तेज़ कर दी और नेहा एकदम चिल्ला पड़ी- आआईईईई…
उसका शरीर एकदम अकड़ गया और उसकी चूत की पकड़ भी मेरे लौड़े पर और बढ़ गई।

अब लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद में भी झड़ने वाला था और कुछ ही पलों में एक तेज़ आवाज़ ‘आआआःह्हआआ’ के साथ मेरे लण्ड ने भी नेहा की चूत में पिचकारी चलानी शुरू कर दी और मैं निढाल होकर नेहा के ऊपर गिर पड़ा।

नेहा भी एकदम चित पड़ी थी।

कहानी अभी जारी रहेगी… आप मुझे अपने विचार मुझे मेल कर सकते हैं।

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