गरिमा की गीली चूत

Garima ki gili choot

सारे पाठकों को नमस्ते, मेरा नाम दीपक है और मैं बीस साल का हूँ।

ग्वालियर में रहता हूँ, मेरा कद एक सौ सत्तर सेंटीमीटर है और मैं सामान्य शरीर का हूँ।

ये मेरे जीवन की सबसे पहली कहानी है जो मेरे साथ पिछले साल गर्मियों में घटित हुई।

बात मई की है, मैं उस वक़्त घर पर अकेला रहा करता था।

काफी परेशान था क्योंकि जितने रुपये घरवाले देते थे उतने में खर्च ही चल पता था, बस। मैं कमाना चाहता था ताकि दूसरे लड़कों की तरह मैं भी लड़कियां घुमाऊं।

आप तो जानते ही हैं लड़की मतलब खर्च और मज़ा, पर कोई तरीका नहीं था जिससे मैं अच्छा कमा सकूँ।

यूँही एक दिन नेट पर एक विज्ञापन (एड) देखा, जिगोलो का कार्य था।

सोचा ये बढ़िया है, पैसा और मज़ा दोनों साथ में मिलेगा।

मैंने बात करके पंजीयन (रजिस्टर) होने की शुल्क (फीस) भर दिया।

दोस्तो, वह एक छल (फ्रॉड) था और जब मुझे पता चला तब बिलकुल हालत ख़राब हो चुकी थी।

खुद को कोस रहा था पर कर भी क्या सकता था?

फिर एक दिन मैंने सोचा क्यों न खुद एक ऐसा विज्ञापन बनूँ ताकि सीधे मुझे ही सेवाएँ मिले। उस दिन विज्ञापन बना कर घर आ गया।

करीब एक महीना बीत गया पर कोई मैसेज या कॉल नहीं आया। मैं समझ गया ऐसे कुछ नहीं होगा।

एक दिन एक अनजान नंबर से मैसेज आया और मेरी सेवाओं के बारे में पूछने लगा। कहने लगा उसे ज्वाइन करना है, मैंने कहा ये ज्वाइन करने के लिए नहीं है।

दोस्तो, उसने एक हफ्ते ऐसे ही परेशान किया फिर मैंने उसे कॉल किया पर उसने कॉल का जवाब नहीं दिया, पहले मैंने सोचा की व्यस्त (बिजी) होगा पर बार-बार जवाब नहीं मिलने पर मुझे थोड़ा शक हुआ।

दो दिन बाद मैंने उसे दूसरे नंबर से कॉल किया और मैं हैरान हो गया जब एक लड़की ने कॉल उठाया।

मैंने पूछा तो उसने कहा- आपने कहाँ कॉल लगाया है? मैंने कहा कि ग्वालियर। उसने रॉन्ग नंबर कह कर कॉल काट दिया।

तब मुझे समझ आया की वह क्या थी।

फिर जब दोबारा मैसेज आया मेरे नंबर पर मैंने कहा – मुझे मैसेज मत करना तो उसने पूछा कि क्यों?

तो मैंने कहा कि तुम झूठ बोलते हो।

उसने कहा- क्यों?

मैंने कहा- मुझे पता है तुम कौन हो? मैंने तुम्हे कॉल किया था।

कुछ देर बाद उसने कॉल किया और बताया उसने विज्ञापन देखा था और उसे मुझसे मिलना है, लेकिन शर्म के मारे बोल नहीं पाई।

उसने अपना नाम गरिमा बताया, उम्र बाइस साल और ग्वालियर में ही रहती है।

मैंने कहा – मैं शुल्क लेता हूँ।

उसने कहा – एक बार मिल तो लो पहले। मैं मान गया और हमने अगले दिन इंडियन कॉफ़ी हाउस में मिलने का तय किया।

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मैं सुबह ग्यारह बजे वहाँ पहुँच गया। उसे कॉल किया और बताया वह हरी रंग की साडी पहने हुए है और पास ही स्टेशन में प्लेटफार्म नंबर दो पर है।

मैं वहाँ जाने लगा।
लग रहा था घुमा रही है पर सोचा देखने में क्या है?

मैं प्लेटफार्म टिकट ले कर वहाँ पहुँचा और उसे कॉल किया।

उसने कहा- ओवर ब्रिज के पास खड़ी हूँ मैं उसके पास पहुँचा।

वह एक सामान्य शरीर की करीब पांच फीट की थी, सांवला रंग, पतली कमर पर पिछवाड़े ग़ज़ब थे।
उसके चूंचे करीब अट्ठाहीस होंगे, खैर थी मस्त। उसके कपड़े देख कर लग रहा था कि काफी अमीर परिवार से है।

उसने मुझे बैठने को कहा और बताने लगी की वह यहाँ अपनी सास के साथ रहती है और पति दिल्ली में कार्य करता है और महीनों में आता है।

मैंने कहा कि मैं क्या कर सकता हूँ?

उसने कहा – जब मैं बोलूँ तब मेरे पते पर आ जाना, शुल्क वहीं मिल जाएगी और ये कह कर एक पर्चा दे गयी।

उस पर एक पता लिखा था। मैं भी वापस आ गया।

उस वक़्त दिमाग में बस वह ही छाई हुई थी।

लौड़ा खड़ा हो चुका था।

मन कर रहा था उसे अभी चोद दूँ पर खेर, वापस घर आ गया और इंतज़ार करने लगा उसके बुलाने का।

तीन दिन बाद उसका कॉल आया और उसने अगले दिन आने के लिए कहा, नौ बजे।

मैं सुबह ठीक समय पर पहुँच गया। वह घर के बगीचे में एक और लड़की के साथ बैठी थी।

उसने मुझे बैठने को कहा और बताया ये उसकी कॉलेज की दोस्त है और ये उसका घर है।

उसकी सहेली मुस्कुरा कर बाज़ार जाने का कह कर चली गयी।

गरिमा ने मुझे अन्दर आने के लिए कहा।

मैंने उसके पीछे अन्दर गया और दरवाज़ा बंद किया और उसके पास गया।

एकदम से उसने मुझे पकड़ कर चूम लिया।

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मैं अचानक इस के लिए तैयार नहीं था।

पर अब मैं भी उसका साथ देने लगा और हम दोनों एक-दूसरे के होंठों का रसपान कर रहे थे।

करीब पांच मिनट बाद मैंने उसके कूल्हे सहलाना शुरू किया और वह रोमांचित हो उठी।

वह काफी प्यासी थी शायद इसलिए बहुत जल्दी गरम हो गयी। मैं उसकी गरम साँसे मेरे चेहरे पर महसूस कर रहा था।

मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और ब्लाउज हटा दिया, उसने सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी।

उसके सांवले बदन पर एकदम मस्त लग रही थी। मैंने उसके मम्मे ऊपर से ही दबाते हुए उसके गले पर चूमने लगा, वह एकदम मस्त हो चुकी थी।

उसने मेरी शर्ट उतर फेकी और चूमने लगी। मैंने उस की ब्रा हटा के उस के मम्मे आज़ाद किये, छोटे थे पर बहुत प्यारे और मुलायम थे।

मैं उन्हें चूसने लगा और दबाने लगा, वह आवाज़े निकालने लगी आह.. ऊह.. आह.. उसकी आवाज़ में एक नशा था, प्यास थी।

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मैंने उस के बदन से सारे कपड़े अलग कर दिए, अब वह सिर्फ पैंटी में थी, उसकी जांघें गज़ब की थी, मुलायम और गरमा गरम, मैं बस खुद को रोक नहीं पा रहा था।

तभी उसने मेरा पैंट अलग किया और मेरी चड्डी में हाथ डाल के लंड हाथ में ले लिया और देख के बोली, यार मस्त है। आज इतने दिनों बाद ऐसा देख रही हूँ!

और इतना कह के बस मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

मैं कांप रहा था, एक अलग ही दुनिया में था मैं उस वक़्त।

मैं उसे अलग कर के 69 की अवस्था में लाया और उसे अपना लौड़ा चूसने को कहा, वह अपने कोमल होंठों से बहुत मज़े दे रही थी।

मैंने उसकी पैंटी अलग कि और उसकी चूत की सुगंध लेने लगा, हल्के बालों से सजी चूत सच में मस्त थी, हल्के से मैंने गीली चूत को जीभ से चाटा और उसके मुँह से आह.. निकल गया।

मैं उंगली उसकी चूत में डालने लगा, काफी कसी हुई थी चूत। काफी गीली हो रही थी, उसका बदन गरम हो चुका था और मेरे उसकी चूत का रसपान करने से वह झडने वाली थी।

मैंने उसे अलग किया और लिटा के उस के ऊपर आ के उसके वक्षों को दबा कर पीने लगा, वह बहुत खुश थी। अपने हाथों से मेरा सिर अपने स्तनों में दबा रही थी।

उसने कहा – अब प्लीज, मुझे चोद दो, अब नहीं रहा जाता। काफी समय से पति ने इतना मज़ा नहीं दिया है।

मैं भी उठ के उस के पैरों के बीच आया और हल्के से उसकी जांघों पर चूम किया, वह सिहर उठी, उसकी चूत पानी-पानी हो रही थी।

मैंने अपना आठ इंच का लौड़ा उसकी योनि पर रगड़ा और उसके मुँह से आह्ह.. आह.. की आवाज़ें निकलने लगी और वह कांपने लगी।

फिर धीरे से मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में ड़ाला और उसकी हल्की सी चीख निकल गयी पर उसने विरोध नहीं किया और तीन धक्को में मैंने अपना लौड़ा उसके अन्दर फिट कर दिया।

मैं रुक के उसे चूम रहा था उसकी एक आँख में आंसू था पर कातिलाना मुस्कराहट भी। अब मैंने अपना लौड़ा अंदर-बाहर करना शुरू किया, चूत गीली होने की वजह से आराम से अंदर-बाहर हो रहा था।

उसके मुँह से ऊउह्ह्ह.. आह्ह्ह्ह्ह.. लव यू सो मच निकल रहा था, मैं भी मज़े से उसे चोद रहा था, हम एक-दूसरे को जकडे हुए थे।

इस बीच वह दो बार झड चुकी थी और पानी उसकी गांड तक पहुँच चुका था।

वह कमर उछाल-उछाल के साथ दे रही थी। तभी मैंने कहा मैं झड़ने वाला हूँ, उसने कहा अन्दर ही डालो और मैंने इतना सुनते ही अपनी रफ़्तार बड़ा दी और पांच मिनट बाद मैं अन्दर ही झड गया।

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मेरा वीर्य उसकी चूत से बाहर आ रहा था। वह एक कातिलाना नज़र से मुझे देख रही थी।

एकदम से उसने मेरे पास आ कर मुझे चूम लिया और मेरा लंड पकड़ के हिलाने लगी और फिर चूसने लगी।

उसके ऐसा करने से मेरा लंड में एक नयी जान आ गयी और फिर खड़ा हो गया।

अब वह मुझे चूमते हुए मेरे ऊपर आ गयी और मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत में डाल लिया और अब कमान उस के हाथ में थी।

वह अपने कुल्हे ऊपर-नीचे कर के चुद रही थी। मैं उसके वक्ष दबा रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे नीचे किया और घोड़ी बनने को कहा और मैंने उसके चूत में पीछे से अपना लंड डाल के उसे चोदा।

वह सिस्कारियाँ ले रही थी। उसने कहा, वह झड़ने वाली है मैं उसकी कमर कस के पकड़ा था और वह जवाब में वापस झटका दे रही थी।

उसके मुँह से संतुष्टि के स्वर निकल रहे थे तभी वह झड गयी और वहीं गिर गयी पर मैं अभी टिका हुआ था।

उसके वक्ष पीछे से दबाते हुए मैंने अपनी रफ़्तार तेज़ की और फिर मैं भी उसके अन्दर ही झड गया और हम वहीं एक-दूसरे के बाँहों में खो गए।

उसने बताया कि उसका पति कभी इतना वक़्त नहीं देता, जब उसका हो जाता है तो वह सो जाता था और मैं संतुष्ट नहीं हो पाई आज तक।

हम बातें कर रहे थे तभी उसकी सहेली वापस आ गयी।

वह मुझे अलग तरीके से देख रही थी तभी गरिमा ने उठते हुए उसे अन्दर आने को कहा।

मैं भी अपने कपड़े पहन के बैठ गया गरिमा उस के साथ गयी और थोड़ी देर बाद कॉफ़ी के साथ आई और फिर मुझे मेरी फीस दी।

मैंने कॉफ़ी पीकर वापस जाने के लिए कहा, तभी उसने मुझे रोक के कहा कि अगर कभी फ्री हो तो बताना, कुछ बात है।

मैंने उससे पूछा तो उसने कहा, बाद में बताएगी और मैं वहाँ से वापस आ गया।

इतनी मस्त चुदाई के बाद घर आ के कब आँख लग गयी पता नहीं चला।

शाम को गरिमा के कॉल ने मेरी आँख खोली उसने बताया कि आज वह बेहद खुश है और अगली बार फिर मिलना चाहती है और मेरे लिए एक सरप्राइज भी है।

मैं खुश था अब आगे क्या हुआ और क्या था सरप्राइज ये अगली कहानी में।

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दोस्तो, कैसी लगी मेरे साथ हुई ये घटना अपने जवाब मुझे मेल करे।

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