गेंदामल हलवाई का चुदक्कड़ कुनबा-18

Gendamal halwai ka chudakkad kunba-18

अब दोनों के बदन एक-दूसरे को छू रहे थे.. कुसुम के बदन की गरमी महसूस करते ही राजू के बदन में जैसे आग लग गई हो, उसके बदन से उठ रही मादक खुशबू से राजू बेताब होता जा रहा था।
वह अपने चेहरे को ब्लाउज से बाहर झाँक रही कुसुम की चूचियों के पास ले गया।
कुसुम जो आँखें बंद किए हुए राजू के हाथों की हथेलियों को रगड़ कर गरम करने की कोशिश कर रही थी..
राजू की गरम साँसों को अपनी चूचियों पर महसूस करते ही सिहर उठी।

कुसुम ने अपनी आँखें खोल कर राजू की तरफ देखा, राजू अपनी अधखुली आँखों से कुसुम की गुंदाज चूचियों की तरफ देख रहा था और उसके नकुओं से गरम हवा निकल कर उसकी चूचियों से टकरा रही थी, जिससे एक बार फिर वासना अपना असर कुसुम के दिमाग़ पर दिखाने लगी।

वो एकटक राजू के भोले-भाले चेहरे की तरफ देख रही थी। उसके मासूम चेहरे को देख कर कुसुम के दिल के अन्दर जो प्यार उमड़ रहा था, उसको बयान करना तो सिर्फ़ कुसुम के बस की ही बात है।

कुसुम ने राजू के हाथों को छोड़ कर अपनी एक बाजू को उसकी कमर में डालते हुए राजू को अपनी तरफ खींचा, जिससे राजू जो कि अपनी अधखुली आँखों से कुसुम की चूचियों को देख रहा था… वो होश में आया और अपनी आँखों को ऊपर करके कुसुम की तरफ देखने लगा।
बदले में कुसुम ने एक प्यार भरी मुस्कान के साथ उसके सर पर हाथ ले जाकर उसके बालों को सहलाते हुए उसके चेहरे को अपनी चूचियों से सटा लिया.. राजू के लिए ये सीधा-सीधा संकेत था।

राजू के दहकते हुए होंठ कुसुम के फड़फ़ड़ाती हुई चूचियों के ऊपर वाले हिस्से पर जा लगे और अपनी चूचियों पर राजू के होंठों को पा कर कुसुम के बदन में करेंट सा दौड़ गया।

‘आह राजू…’ कहते हुए उसने राजू को और अपने से सटा लिया।

राजू भी अब पूरे जोश में था। कुसुम अपनी चूचियों को ऊपर-नीचे करने लगी, जिससे राजू के होंठ कुसुम के चूचियों पर रगड़ खाने लगे।
कुसुम की साँसें अब बहुत तेज चल रही थीं।

अचानक से राजू ने अपना हाथ कुसुम की जांघ पर रख दिया, राजू को उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, कुसुम का पेटीकोट उसकी जाँघों से काफ़ी ऊपर चढ़ा हुआ था।

राजू का हाथ जांघ पर पड़ते ही कुसुम के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई ‘हय.. सीईईई राजू..’
कुसुम की मादक सिसकी सुनकर राजू को जैसे होश आया।

उसने अपना हाथ उसकी जांघ से हटा लिया, इससे पहले के राजू अपना हाथ पीछे करता…
कुसुम ने राजू का हाथ पकड़ अपनी दोनों जाँघों के बीच में दबा लिया।

राजू को ऐसे लगा मानो उसका हाथ किसी दहक रही भट्टी के अन्दर चला गया हो, इतनी गरम जगह तो और कहीं हो नहीं सकती।

राजू भी अब कुसुम के रंग में रंगने लगा था, उसका लण्ड अब लुँगी में पूरी तरह से तन चुका था और उसको पता भी नहीं चला कि कब उसका लण्ड लुँगी के कपड़े को हटा करके बाहर आ चुका था और कुसुम की चूत पर पेटीकोट के ऊपर से रगड़ खाने लगा।

कुसुम की चूत में मानो आग लग गई हो, अब उससे बर्दाश्त करना मुश्किल होता जा रहा था।

कुसुम ने राजू के हाथ को जो कि उसने अपनी जाँघों में दबा रखा था, उससे बाहर निकाल दिया और अपनी ऊपर वाली टाँग को उठा कर राजू की कमर पर रख कर अपना पेटीकोट कमर तक उठा दिया।

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राजू के 8 इंच के लण्ड का मोटा सुपारा सीधा कुसुम की चूत की फांकों पर जा लगा… उसकी आँखें मदहोशी के आलम में बंद होने लगीं।
राजू के हाथ-पैर कामुकता के कारण कांप रहे थे।
कुसुम की चूत की फांकों ने राजू के लण्ड के सुपारे को चूम कर स्वागत किया और सुपारे के चारों तरफ फ़ैल गईं।

‘ऊंह ओह राजू..’ मादक सिसकी भरते हुए कुसुम ने उसे और ज़ोर से अपने से चिपका लिया और अपनी कमर को धीरे आगे की तरफ करते हुए राजू के लण्ड पर अपनी चूत दबाने लगी, राजू के लण्ड का सुपारा अब सीधा कुसुम की चूत पर टिका हुआ था।

राजू अपने लण्ड के सुपारे पर कुसुम की चूत से बह रहे गरम लिसलिसे पानी को महसूस करके और उत्तेजित हो गया और उसने भी अपनी कमर को आगे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया।

राजू के लण्ड का सुपारा कुसुम की कसी चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर घुसने लगा।

कुसुम को राजू के मोटे लण्ड का सुपारा अपनी चूत की दीवारों पर रगड़ ख़ाता हुआ महसूस हुआ, तो वो पागलों की तरह राजू के चेहरे पर चुम्बनों की बारिश करने लगी।

कुसुम- ओह्ह.. राजू मेरे राजा… ओह उम्ह्ह ओह.. मेरी जान.. हाँ चोद डाल मुझे.. कब से तरस रही है.. ये तेरी मालकिन.. ओह.. राजू।

यह कहते हुए कुसुम ने राजू को बाँहों में भरते हुए अपने ऊपर खींच लिया..
इस खींचा-तानी में राजू की लुँगी उसके बदन से अलग हो गई।

अब राजू का सारा वजन कुसुम के ऊपर आ चुका था।
कुसुम ने राजू की कमर को दोनों तरफ से पकड़ कर अपनी गाण्ड को ऊपर की तरफ उछाला।
राजू का मोटा लण्ड कुसुम की कसी चूत में रगड़ ख़ाता हुआ आधे से ज्यादा अन्दर चला गया.. कुसुम की आँखें मस्ती में बंद हो गईं। अपने होंठों को दाँतों में चबाते हुए उसने अपनी टाँगों को फैला लिया, ताकि राजू आराम से उसकी चूत में अपना लण्ड अन्दर-बाहर कर सके।

कुसुम का बदन पूरा ऐंठ चुका था। अभी तक कोई बच्चा ना होने के कारण और सेठ से बहुत कम चुदी हुई कुसुम की चूत किसी जवान लड़की की चूत की तरह कसी हुई थी।

राजू को उसकी चूत अपनी लण्ड पर कसी हुई महसूस हो रही थी..
जो कि चमेली की चूत से कहीं ज्यादा कसी थी।
इसलिए राजू वासना के सागर में गोते खा रहा था, पर कुसुम की चूत जिस हिसाब से पानी छोड़ रही थी..
उससे राजू का लण्ड बिना किसी दिक्कत के अन्दर की ओर बढ़ता जा रहा था।

कुसुम- ओह राजू हाँ.. डाल दे धीरे-धीरे पूरा अन्दर कर दे… ओह सी ओह।

राजू का लण्ड पूरा का पूरा कुसुम की चूत में समा गया..
कुसुम की चूत के छेद का छल्ला पूरी तरह फैला हुआ था और कुसुम अपनी आँखें बंद किए हुए सिसया रही थी।
राजू के लण्ड की सख्ती को महसूस करके, उसकी चूत लगातार पानी बहा रही थी।

राजू ने कुसुम के कामुक चेहरे की ओर देखा, राजू का लण्ड जड़ तक कुसुम की चूत में समाया हुआ था।

कुसुम ने भी अपनी अधखुली आँखों से राजू की आँखों में देखा, जैसे कह रही हो ‘अब रुक क्यों गए?’

राजू ने धीरे-धीरे अपनी गाण्ड को ऊपर की ओर उठाना चालू किया।

उसका लण्ड कुसुम की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ बाहर आने लगा। जिससे कुसुम के रोम-रोम में मस्ती की लहर दौड़ गई और उसकी आँखें एक बार फिर से बंद हो गईं।

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कुसुम अपनी चूत पर होने वाले पहले प्रहार के लिए अपने आप को जैसे तैयार कर रही थी।

तेज चलती साँसों के साथ हिलती हुई बड़ी-बड़ी चूचियाँ, जिसे देख कर राजू पागल हुआ जा रहा था।

अपने लण्ड को सुपारे तक बाहर निकाल कर राजू एक पल के लिए रुका।

जैसे वो भी पहले झटके के तैयारी कर रहा हो।

कुसुम जिसने कि राजू की कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ा हुआ था।

उसने अपनी पकड़ ढीली कर दी, उसके हाथ उसकी कमर पर काँप रहे थे और अपनी टाँगों को घुटनों से मोड़ कर जितना हो सकता था, ऊपर उठा लिया।

राजू एक पल के लिए और रुका और फिर अपनी गाण्ड को पूरी रफ़्तार के साथ आगे की तरफ धकेला।
पूरे कमरे में ‘ठाप’ की ज़ोर से आवाज़ गूँज उठी।

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‘ऊंहह ओह राजू..’ कुसुम ने अपने होंठों को चबाते हुए कहा।

राजू का लण्ड पूरी रफ़्तार से एक बार उसकी चूत की गहराईयों में खो चुका था।

राजू के मुँह से भी ‘आहह’ निकल गई।
कुसुम ने उसे अपने ऊपर खींच कर अपने से चिपका लिया, राजू भी पूरी मस्ती में आ चुका था।
उसने एक बार फिर अपने लण्ड को सुपारे तक बाहर निकाला और फिर अपनी गाण्ड को पूरी रफ़्तार से धक्का देते हुए, अपने लण्ड को कुसुम की चूत की गहराईयों में उतार दिया, ‘ओह जुग-जुग जियो मेरे लाल..।’

कुसुम की ऐसी बातें राजू को और जोश दिला रही थीं।

कुसुम भी राजू के लण्ड की नसों को अपनी चूत में फूलता हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी।

राजू के इन दो जबरदस्त धक्कों ने उसकी चूत में और सरसराहट बढ़ा दी।

उससे डर था कि कहीं राजू जोश में आकर जल्दी ना झड़ बैठे और उससे यूँ ही सुलगता हुआ न छोड़ दे।

राजू की रफ़्तार को कम करने के लिए.. उसने अपनी टाँगों को उसकी कमर पर कस लिया और अपने दोनों हाथों से अपने ब्लाउज के बटन खोल कर अपनी 38 साइज़ के चूचियों को आज़ाद कर दिया।

आज तो राजू की किस्मत उस पर मेहरबान हो गई थी।

कुसुम की गुंदाज और कसी हुई चूचियों को देख राजू से रहा नहीं गया और पलक झपकते ही कुसुम की बाईं चूची को जितना हो सकता था, मुँह में भर लिया।

अपने चूचुक पर राजू की गरम जीभ और लार को महसूस करते ही… उसके बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई। उसने अपनी बाँहों को राजू के पीठ पर कस लिया।

राजू उसका चूचुक चूसते हुए पूरी रफ़्तार से अपने लण्ड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा और कुसुम अपनी गाण्ड को बिस्तर से ऊपर उठाए हुए उसके धक्कों की रफ़्तार को कम करने की कोशिश करने लगी।

कुसुम- ओह्ह रुक ज़ाआअ.. राजू धीरे-धीरे उफफफफफ्फ़ तू सुन ना… मेरी बात.. ओह्ह कितना मोटा है रे.. तेरा मूसल ओह.. धीरे-धीरे हाँ.. बेटा ऐसे हीई धीरे-धीरे चोद दे अपनी मालकिन को.. ओह्ह बेटा आराम से.. पहले मेरी इन चूचियों को जी भर के चूस.. ओह्ह बेटा.. मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ.. रोज तुझे चुदवाऊँगी.. बेटा ओह्ह धीरे..

राजू (कुसुम के चूचुक को मुँह से निकालते हुए )- सच मालकिन आप रोज मुझ से…

कुसुम (अपनी मदहोशी से भरी आँखें खोल कर राजू की तरफ देखते हुए)- हाँ मेरी जान.. तेरे इस मोटे लौड़े को तो अब रोज अपनी चूत में लूँगी.. अब आराम से चोद.. बोल जल्दबाजी नहीं करेगा ना..

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राजू- नहीं मालकिन आप जैसे कहो.. मैं वैसे ही करूँगा।

कुसुम ने दोनों के ऊपर रज़ाई खींच ली, ‘आह्ह… बेटा ले चूस ले बेटा..।’ और ये कहते हुए उसने राजू के सर को अपनी चूचियों पर दबा दिया।

राजू भी जैसे इसी पल का इंतजार कर रहा था.. उसने भी फिर से उसकी चूची के चूचुक को मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूची को चूसते हुए, धीरे-धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।

राजू का दूसरा हाथ अब कुसुम की दूसरी चूची पर आकर उसे मसलने लगा था। राजू की इस हरकत से कुसुम के होंठों पर कामुक मुस्कान फ़ैल गई।

कुसुम- हाँ मेरे सोना.. मसल दे मेरे चूचियों को ओह राजा…आा.. मैं तो कब.. से ओह्ह… धीरे.. बेटा ओह तेरे लण्ड को अपनी फुद्दी में लेने के लिए तड़फ रही थी…ओह्ह आह्ह.. आह्ह.. धीरेए राजू ओह..

कुसुम की चूत से निकल रहे कामरस से राजू का लण्ड पूरी तरह भीग कर चिकना हो गया था और बिना किसी रोक-टोक के उसकी चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था।

राजू ने अपने होंठों को उसके चूचुक से हटाया और उसकी गर्दन को चाटते हुए उसके गालों पर चुम्बन करने लगा।

कुसुम ने भी दोनों हाथों से राजू के सर को पकड़ लिया और उसके बालों को सहलाने लगी।

‘सीईईईईई ओह.. राजू चोद मुझे ओह हान्ंणणन् तेरी ये मालकिन बरसों से तरस रही है.. ओह हाँ चोद बेटा ज़ोर से चोद ओह्ह डाल दे अपना पूरा लण्ड ओह..’

कुसुम अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी और झड़ने के करीब पहुँच रही थी.. उसने अपने पैरों को.. जो राजू की कमर के चारों ओर कस रखे थे.. उन्हें हटा कर अपनी जाँघों को पूरा खोल लिया और अपनी गाण्ड को ऊपर की ओर उछालने लगी।

राजू का लण्ड ‘फच-फच’ की आवाज़ के साथ कुसुम की चूत में अन्दर-बाहर होने लगा।

रज़ाई में गरमी इस कदर बढ़ गई थी कि दोनों पसीने से तर हो गए।

कुसुम ने रज़ाई को एक तरफ पटक दिया और राजू के सर को पकड़ कर अपने होंठों को उसके होंठों पर लगा दिया।

राजू भी अब कहाँ रुकने वाला था।

जैसे ही कुसुम ने अपने होंठों को उसके होंठों पर रखा, उसने कुसुम के दोनों होंठों को चूसना शुरू कर दिया… नीचे अपनी कमर को पूरी रफ़्तार से हिलाते हुए, राजू अपना लण्ड कुसुम की चूत में अन्दर-बाहर करता जा रहा था और कुसुम भी अपनी गाण्ड को बिस्तर से ऊपर उठा कर राजू का लण्ड अपनी चूत में ले रही थी।

फिर तो जैसे कुसुम की चूत से सैलाब उमड़ पड़ा।

उसका पूरा बदन अकड़ गया और उसने अपने नाख़ून राजू की पीठ में गढ़ा दिए।

चमेली की खिली हुई के चूत के मुक़ाबले में कुसुम की कसी हुई चूत में राजू का लण्ड भी और टिक नहीं पाया और एक के बाद एक वीर्य की बौछार कर उसकी चूत की दीवारों को भिगोने लगा।

वासना का तूफ़ान ठंडा पड़ चुका था… पर अब भी दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूस रहे थे।

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