गेंदामल हलवाई का चुदक्कड़ कुनबा 7

Gendamal halwai ka chudakkad kunba-7

चमेली के मुलायम हाथों ने अपना जादू दिखाया, दीपा की आँखें इतनी मस्त मालिश से बंद होने लगीं।

दीपा के कंधों को थोड़ी देर दबाने के बाद चमेली ने अपने हाथों को उसके कंधों से सरका कर और नीचे कर दिया।

अब उसके हाथ दीपा के आगे की तरफ के खुले हिस्से की मालिश कर रहे थे।

चमेली अपने घुटनों के बल बैठी थी, दीपा ने अपना सर चमेली के छाती पर टिका दिया, जिससे चमेली के 38 नाप की चूचियां भी दब गईं और उसके मुँह से ‘आहह’ निकल गई।

दीपा चमेली की ‘आहह’ सुन कर बोली- क्या हुआ काकी?

चमेली- कुछ नहीं।

जैसे-जैसे चमेली के हाथ दीपा के गले की मालिश करते हुए, उसकी चूचियों की तरफ बढ़ रहे थी, दीपा की साँसें तेज होती जा रही थीं।

उसका बदन चमेली के हाथों के नीचे गरम होने लगा था।

चमेली दीपा उसके पीछे से खिसक कर उसकी बगल में आकर बैठ गई और दीपा को उसके कंधों से पकड़ कर धीरे-धीरे नीचे चटाई पर लेटा दिया और खुद उसकी बगल में घुटनों के बल बैठ गई।

दीपा बहुत आराम महसूस कर रही थी, जिसके चलते हुए उसने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं।

चमेली ने धीरे से अपने दोनों हाथों से दीपा की कमीज़ को पकड़ कर थोड़ा सा ऊपर उठा दिया।

दीपा ने इस पर कोई आपत्ति जाहिर नहीं की।

कमीज़ को उठाने के बाद उसने अपने दोनों हाथों से दीपा के कमर को दबाना चालू क्या।

फिर थोड़ा सा तेल दीपा के पेट पर डाल कर अपने हाथ को गोल-गोल घुमाते हुए दीपा के पेट की मालिश करने लगी।

दीपा को अजीब सा मजा आ रहा था, उसके पेट में गुदगुदी सी होने लगी, जिसके कारण दीपा थोड़ा हिलने लगी।

चमेली- क्या हुआ राजकुमारी जी..ठीक से लेटिए ना.. हिल क्यों रही है?

दीपा अपनी आँखें बंद किए हुए बोली- काकी, वो गुदगुदी हो रही है।

चमेली- क्या गुदगुदी.. आप तो ऐसे मचल रही हो, जैसे कि कोई लड़का आपके पतली कमर पर हाथ फेर रहा हो।

जैसे ही चमेली ने यह बात कही, दीपा के मन में एक बार फिर से कल वाली बात ताज़ा हो गई।

उसका दिल जोरों से धड़कनें लगा, कल जब राजू उसके कमर और चूतड़ों को मसल रहा था.. तो उसकी चूत पनिया गई थी।

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लेकिन चमेली और राजू के छूने में ज़मीन-आसमान का फर्क था।

‘काकी मर्द के छूने से क्या होता है?’ दीपा ने जिज्ञासापूर्वक पूछा।

वो अभी भी अपनी आँखें बंद किए हुए थी।

चमेली- अरे बेटी, अब क्या बताऊँ कि जब एक मर्द किसी औरत के बदन को छूता है तो क्या होता है। बस ये समझ लो कि दुनिया का हर सुख उस सुख के सामने फीका लगता है। जब कोई मर्द प्यार से छूता है।

दीपा- ऐसा क्यों होता है काकी?

दीपा की जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी।

चमेली दीपा के पेट की मालिश करते हुए उसकी चूचियों की तरफ बढ़ती जा रही थी।

चमेली- वो तो पता नहीं जब तुम्हें कोई मर्द छुएगा, तो पता चल जाएगा कि कितना मजा आता है, जब एक मर्द औरत के बदन को छूता है।

चमेली दीपा की कमीज़ उसकी चूचियों के नीचे तक ऊपर कर चुकी थी, अब उसकी ऊँगलियाँ बीच-बीच में दीपा की चूचियों से टकरा जातीं तो दीपा के बदन में मस्ती की लहर दौड़ जाती और अब तो उसके मुँह से मस्ती भरी ‘आहह..’ निकल गई, जिसे सुन कर चमेली के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई।

चमेली ने दीपा की चूचियों के पास मालिश करते हुए कहा- तुम जानती हो एक मर्द को औरत के किस अंग को सहलाने में सबसे अच्छा लगता है?
अगर औरत को वो अंग जितना सुंदर और बड़ा होगा, वो मर्द को उतना ही आकर्षित करता है।

दीपा ने तेज चलती साँसों के साथ पूछा- क्या काकी बताओ ना?

चमेली ने अपने दोनों हथेलियों से दीपा की चूचियों को मसलते हुए कहा- ये… एक औरत की चूचियाँ देख कर कोई भी उसका गुलाम हो सकता है।

दीपा ने मस्ती में सिसकते हुए कहा- ओह्ह.. काकी… यह आप क्या कर रही हैं?

चमेली- मैं तुम्हें बता रही हूँ कि जब एक आदमी किसी औरत की चूचियों को मसलता है, तो औरत को बहुत मजा आता है। तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा क्या?

दीपा ने अपनी आँखें बंद किए हुए मदहोशी के सागर में गोते खाते हुए कहा- अच्छा लग रहा है… काकी.. पर पर्ररर उन्हह.. अहह.. काकी।

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चमेली ने अपनी उँगलियों से दीपा की चूचियों के चूचकों को मसल दिया।

दीपा के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई।

उसने अपने दोनों हाथों से चमेली के हाथों को कस कर पकड़ लिया, पर उसने चमेली के हाथों को अपनी चूचियों पर से हटाने की कोशिश नहीं की, चमेली के होंठों की मुस्कान बढ़ती जा रही थी।

अब चमेली ने एक और दांव खेला, जिसे झेलने के लिए दीपा बिल्कुल तैयार नहीं थी।

दीपा के 32 साइज़ की तनी हुई चूचियां उसके कमीज़ से बाहर थीं और उन पर हल्के गुलाबी रंग के चूचुकों को देख कर तो किसी का भी ईमान डोल जाता।

चमेली ने दीपा की चूचियों पर से अपने हाथ हटा कर दीपा के हाथों को पकड़ा और उसके सर के पास नीचे चटाई के साथ सटा दिया, जिससे दीपा
गोरी-गोरी चूचियाँ और बाहर की तरफ निकल गईं।

हल्के गुलाबी रंग के चूचक जो एकदम तने हुए थे, किसी तीर की नोक की तरह तीखे हो चुके थे।

दीपा अब भी अपनी आँखें बंद किए हुए थी.. उसके होंठ थोड़ा सा खुले हुए थे, मानो जैसे उससे साँस लेने में तकलीफ हो रही हो।

चमेली ने मौका देखते हुए, उन पर झुक गई और उसके बाएं चूचुक को मुँह में भर लिया।

‘ओह काकी.. अहह सीईई..उंह ईईए आअ क्य ओह्ह..’

दीपा तो पहले से हथियार डाल चुकी थी, उसके दिमाग़ में एक बार फिर राजू की छवि बन चुकी थी।

मानो जैसे चमेली नहीं राजू ही उसकी चूचियों को चूस रहा हो।

दीपा अपने हाथों से तकिए को कस कर पकड़े हुए थी।

उसका पूरा बदन मस्ती में ‘थरथर’ काँप रहा था, चमेली ने उसके चूचुक को चूसते हुए दूसरी चूची को हाथ में लेकर धीरे-धीरे मसलते हुए सहलाना शुरू कर दिया।

दीपा आँखें बंद किए हुए मस्ती से भरी सिसकारियाँ भर रही थी।

फिर चमेली ने एकाएक दीपा की चूची को जितना हो सकता था मुँह में भर लिया, दीपा एकदम सिसक उठी।

उसने तकिए को छोड़ कर चमेली को कंधों के ऊपर से उसकी पीठ को कस लिया।

दीपा- ओह काकी… मुझे ये क्या हो रहा है… ओह काकी.. बहुत अच्छा लग रहा है.. उंह सीई काकीईई…

चमेली ने देखा कि दीपा अब पूरी तरह गरम हो चुकी है तो उसने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर दीपा के सलवार के नाड़े को पकड़ा और धीरे-धीरे खींचते हुए खोल दिया।

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जैसे ही दीपा की सलवार उसकी कमर पर ढीली हुई, दीपा के दिल के धड़कनें बढ़ गईं।

उसने अपनी मदहोशी के नशे से भरी आँखों को खोल कर चमेली की तरफ देखा, जो उसकी चूची चूसते हुए, अपना हाथ उसकी सलवार के अन्दर डाल रही थी।

दीपा अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी, वो अब कुछ भी करने की हालत में नहीं थी। जैसे ही चमेली के हाथ की उँगलियों ने दीपा की कुँवारी चूत की फांकों को छुआ, दीपा के मुँह से मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई।

उसने अपने होंठों को अपने दाँतों में दबा लिया और चमेली की पीठ पर तेज़ी से हाथ फेरने लगी।

मानो जैसे उसने राजू को ही अपने आगोश में ले रखा हो।

चमेली ने अपनी उँगलियों से दीपा की चूत की फांकों को धीरे से सहलाया।

दीपा का पूरा बदन झनझना उठा, उसका पूरा बदन अकड़ कर झटके खाने लगा और दीपा बिन पानी की मछली के तरह तड़पते हुए अपनी कमर को हिलाते हुए अपने चूतड़ों को ऊपर उछालने लगी।

दीपा को तो जैसे होश नहीं था।

दीपा की चूत ने अगले ही पल पानी छोड़ना शुरू कर दिया, अनुभवी चमेली अपनी उँगलियों पर दीपा की चूत से निकाल रहे पानी को महसूस करते ही समझ गई कि लौंडिया झड़ गई है।

उसने अपना हाथ उसकी सलवार से बाहर निकाला और अपनी साड़ी के पल्लू से पोंछ लिया।

दीपा अपनी साँसों के दुरस्त होने का इंतजार कर रही थी, जवान दीपा की चूत ने आज पहली बार अपना कामरस बहाया था।

उसके होंठों पर संतुष्टि से भरी मुस्कान फ़ैल गई।

जब दीपा थोड़ी देर बाद सामान्य हुई, तो उसने अपनी सलवार के नाड़े को बंद किया और खड़ी होकर नहाने के लिए चली गई।

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एक लम्बी कथा जारी है।

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