हिटलर दीदी को वासना चढ़ी मुझे पढ़ते समय-4

(Hitler Didi Ko Vasna Chadhi Mujhe Padhate Samay-4)

दोस्तों वो दोनों बूब्स पहले उनके हाथ ऊपर करने की वजह से उठकर तन गए और उसके बाद वो हाथों के नीचे करने पर वापस अपनी जगह पर आकर तन जाते। अब वो यह काम खत्म करके एक बार फिर से मेरे पास में लेट गयी और तब उन्होंने पहली बार मुझे प्यार से चूमा, मैंने भी उनके सर के पीछे से अपने एक हाथ को डालकर उनके बालों में अपनी उँगलियों को डालते हुए एक जवान मर्द की तरह उनके होठों को चूमा। फिर इसके बाद उनके बूब्स पकड़कर में उनको प्यार करता रहा उस काम में वो भी मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी और उन्होंने भी अब मेरा लंड अंडरवियर से पूरा बाहर निकाल दिया और उन्होंने मेरी अंडरवियर को पूरा नीचे मेरे घुटनों तक सरका दिया। अब में बहुत जोश में आ गया था और इसलिए मैंने अपने दोनों पैरों के बीच में फँसे हुए निक्कर और अपनी अंडरवियर दोनों को एक झटके से नीचे उतारकर दूर फेक दिया, जिसकी वजह से में अब ऊपर और नीचे से पूरा नंगा हो चुका था। अब मेरा हाथ उनकी सलवार पर पहुंच गया और पेट पर रेंगते हुए उनकी सलवार के नाड़े वाले हिस्से से होते हुए में उनकी चूत पर पहुँच गया। अब मैंने छुकर महसूस किया कि उनकी चूत पर बहुत सारे बाल थे, वहाँ का सारा हिस्सा पसीने और उनकी चूत के रस से गीला हो चुका था।

दोस्तों कुछ देर बाद चूत के होंठो को छुते ही दीदी को करंट सा लगा और उन्होंने मेरे कंधे पर अपने दाँत गड़ा दिए, मैंने झट से उनके मुँह पर अपना मुँह रखकर अपनी जीभ को उनके मुहं के अंदर डाल दिया, तब तक वो पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और में भी बहुत जोश में था। अब में सलवार के नाड़े को खोलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरी परेशानी को समझकर उन्होंने उसको अपने आप ही खोल दिया और फिर अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर उन्होंने मुझे अपनी सलवार को निकालने में भी पूरी पूरी मदद कि और वो पूरी नंगी होकर मेरे सामने पड़ी थी। दोस्तों कुछ समय पहले तक जिस लड़की का हम सभी बच्चों पर इतना ख़ौफ था, जिसके सामने हमारी आवाज भी नहीं निकलती थी, वो आज मेरे सामने पूरी नंगी होकर लेटी हुई थी, लेकिन तभी मेरे दिल में उसको एक साथ पूरी नंगी देखने की हसरत उठी तो में अपनी टीशर्ट को उतारने के लिए उठा और उसके दोनों तरफ पैर करके में खड़ा हो गया, जिसकी वजह से मेरा लंड 90 डिग्री पर खड़ा होकर उसकी चूत को सलामी दे रहा था। अब वो यह सब देखकर शरमा सी गयी और उसने अपनी दोनों आँखों को बंद कर लिया, लेकिन वो तो अब पूरी नंगी होकर मेरे सामने लेटी हुई थी, उसका पूरा शरीर एकदम गोरा चिट्टा बूब्स पर गुलाबी निप्पल और चूत पर हल्के छोटे काले बाल एक बड़ा ही मस्त द्रश्य अब मेरी आँखों को सुख दे रहे थे।

फिर एक दो मिनट तक उसको ऐसे ही देखने के बाद में अब अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गया मेरे दोनों घुटने उसकी कमर के दोनों तरफ थे। अब मैंने अपनी पोज़िशन को संभाल लिया, सबसे पहले मैंने उसके हाथों को उसके चेहरे से हटा दिया और वो अब किसी नयी नवेली दुल्हन की तरह शरमाकर अपने मुँह को दूसरी तरफ करने लगी थी। फिर मैंने उसके मुँह पर एक चुम्मा किया, उसने उसी समय मेरे लंड को पकड़ लिया उसके हाथ का नरम स्पर्श पाकर मेरा लंड अकड़ गया और कुछ देर बाद वो अपने एक हाथ को आगे पीछे करके मुठ मारने लगी थी। अब उसके ऐसा करने से मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा था और उसी समय मैंने भी जोश में आकर उसकी चूत में बड़ी तेज़ी से अपनी एक उंगली को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो बहुत गरम हो गयी वो आह्ह्हह्ह उफ्फ्फ्फ़ करके अपने मुहं से सिसकियों की आवाज निकालने लगी थी, लेकिन वो कुछ देर बाद अपना शरीर तोड़ने लगी और वो बार बार मेरे लंड को अपनी चूत से लगाना चाह रही थी मैंने भी उसका कोई विरोध नहीं किया। दोस्तों वो भी पहली बार यह सब कर रही थी और मेरा भी यह पहला सेक्स अनुभव था और फिर मैंने कई बार अपने लंड को अंदर डालने की कोशिश कि, लेकिन हर बार मेरा लंड उसकी चूत के अंदर ना जाकर इधर उधर फिसल जाता।

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अब उसको एक बार ज़ोर से हँसी भी आ गयी और फिर उसने मुझसे कहा कि ऐसे ही कर लो और अब में उसके चिपककर अपने लंड को उसके ऊपर से ही धक्के मारने लगा था और साथ ही में चूत में भी उंगली करता रहा। अब वो बहुत गरम हो गयी और अब आअहह उफ्फ्फ्फ़ की आवाज़ के साथ उसने मुझे अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया और उसने मेरे एक हाथ को अपनी चूत के ऊपर पकड़कर कसकर अपनी दोनों जांघो में जकड़ लिया। अब मैंने भी कसकर उसकी चूत को अपने हाथ की मुट्ठी में भर लिया और में उसकी गरमी और बैचेनी को महसूस करने लगा था, तब में लगातार उसके चेहरे को ही देखता रहा कुछ देर बाद मैंने देखा कि उसकी जोश की वजह से आंखे दोबारा बंद हो चुकी थी, लेकिन जब आंखे खुली तब वो शरमा गयी और मुझे उसने अपने ऊपर खीच लिया। दोस्तों मैंने अब एक बार फिर से उसकी चूत के ऊपर से धक्के लगाने शुरू कर दिए, उस समय मैंने उसके दोनों बूब्स को कसकर पकड़ लिया था। फिर करीब दो तीन मिनट के बाद ही में भी उसके पेट पर ही झड़ गया, मेरा बहुत सारा गरम लावा लंड से बाहर निकलकर उसके पेट, बड़े आकार की एकदम गोल नाभि में भी भर गया। फिर हम दोनों कुछ देर तक तो ऐसे ही चिपके हुए पड़े रहे और उसके बाद उसने पास ही पड़े एक टावल को उठाया उससे उसने मुझे और अपने आपको साफ किया।

फिर उसी समय बड़े प्यार से मुझे देखते हुए उसने एक चुम्मा भी किया। दोस्तों अब में दीदी से ज़रा भी ख़ौफज़दा नहीं था और वो मुझे अब अपनी आज्ञाकारी पत्नी की तरह लग रही थी, उसके चेहरे से मुझे उसके मन की ख़ुशी का अंदाजा लग रहा था। फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और आँखों ही आँखों में हम दोनों ने एक दूसरे से यह वादा किया कि इस बात को हम दोनों ही किसी को कभी भी नहीं बताएँगे, उसके बाद फिर से चुम्मा किया और उसके बाद में अपने घर आ गया।

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