हिटलर दीदी को वासना चढ़ी मुझे पढ़ते समय-1

(Hitler Didi Ko Vasna Chadhi Mujhe Padhate Samay-1)

दोस्तों यह बात उन दिनों की है, जब में 12th क्लास में पढ़ता था और मेरी उम्र करीब मेरी जवानी के साल पूरे कर चुकी थी। दोस्तों में बचपन से ही बहुत गोरा, सुंदर और तन्दुरुस्त शरीर का मालिक था और मेरे चेहरे पर हमेशा हंसी मासूमियत नजर आती थी और इसलिए मुझे अधिकतर लोग देखकर मेरी तरफ कुछ ही समय में आकर्षित हो जाते थे। दोस्तों उन्ही दिनों मेरे मोहल्ले में एक दीदी रहती थी, उनका नाम प्रियंका था जो की उस समय एक कॉलेज में अपनी पहले साल की पढ़ाई कर रही थी और उनकी उम्र तब करीब 21 साल थी। दोस्तों वो दिखने में बहुत ही मस्त पटाका माल थी, वो दिखने में बहुत सुंदर उनका रंग भी बड़ा गोरा था, लेकिन वो अपने स्वभाव की बहुत ही कड़क थी और फिर भी जवान लड़के उनके घर के आगे पीछे चक्कर लगाते रहते और शायद किसी लड़के से उनका चक्कर भी था, लेकिन इस बात का मुझे बस थोड़ा सा अंदाजा ही था। Hitler Didi Ko Vasna Chadhi Mujhe Padhate Samay.

फिर वो हमेशा बच्चों से एकदम सख्ती से पेश आती, जैसे कि अगर खेलते समय हमारी गेंद उनके यहाँ पर चली जाती तो वो हमे कभी भी वापस नहीं मिलती थी और उल्टा हमे उनकी तरफ से कई तरह के भाषण सुनने पड़ते थे। फिर इस वजह से सभी लोग प्रियंका दीदी से बहुत दूर और डरकर रहते थे, उनका रूप रंग एकदम गोरा उनके होंठ गुलाबी 5.3 इंच की उनकी लम्बाई भरा हुआ बदन बड़े आकार के एकदम सुडोल बूब्स, उठी हुई निप्पल बड़े आकार के कुल्हे और उनकी वो पतली कमर जो किसी भी लंड का पानी पहली बार में ही निकालने के लिए एकदम ठीक थी और इसलिए ही उनके पीछे बहुत सारे लड़के दीवाने हो चुके थे।

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दोस्तों उन दिनों मुझे सेक्स के बारे में तो थोड़ी बहुत ही जानकारियां थी, लेकिन मुठ मारने के बारे में मुझे कुछ खास पता नहीं था और मुझे वो सभी सेक्स के बारे में जानकारियां भी अपनी कुछ किताबों से आई थी। दोस्तों हम सभी उनसे बहुत डरते थे, क्योंकि वो गुस्से में कभी कभी थप्पड़ भी मार देती थी, लेकिन उनकी इज्जत हमारे घर में एकदम ठीक थी, क्योंकि मेरी मम्मी एक लेक्चरार थी और मेरी मम्मी ने उन्हे पढ़ाया भी था इसलिए उनका हमारे घर पर आना जाना हमेशा लगा रहता था।

दोस्तों में अपनी पढ़ाई में ठीक था, लेकिन था में बड़ा लापरवाह और इसलिए मेरे नंबर तो अच्छे आ जाते थे, लेकिन में अपनी क्लास में कभी भी टॉप नहीं कर सका था और इस बात की चिंता मेरे घरवालों को बहुत थी, क्योंकि मेरी मम्मी कॉलेज जाती और पापा ऑफिस। फिर इसलिए मम्मी दोपहर के बाद तक वापस घर आ जाती थी और पापा रात तक वापस आते थे। फिर इसलिए में स्कूल से आने के बाद खेलकूद और मस्ती में लग जाता था। फिर मेरी मम्मी ने इसलिए एक दिन प्रियंका दीदी को हमारे घर पर बुलाकर मुझे उन्हे सौंप दिया और अब मम्मी ने मुझसे कहा कि स्कूल से आने के दो घंटे बाद तक जब तक में वापस नहीं आ जाती तुम इन्ही के यहाँ रहना। दोस्तों हर दिन मेरा खाना घर पर रखा रहता, मुझे जल्दी से उसको खाकर प्रियंका दीदी के यहाँ हर दिन जाना होगा। तभी प्रियंका दीदी ने मम्मी से एकदम कड़क शब्दों में कहा कि आंटी में इसकी आवारागर्दी और मस्ती तो पूरी तरह से निकाल दूँगी में इसको पूरा इंसान बना दूंगी, यह बाहर के दूसरे लड़कों के साथ अब बहुत बिगड़ने भी लगा है। दोस्तों में उन दोनों की वो बातें सुनकर डरकर बहुत घबरा गया कि प्रियंका दीदी मुझे हमेशा हड़काकर रखेगी और अब मेरी मस्ती खेलना भी बिल्कुल बंद। अब बस मुझे अपनी पढ़ाई पर ही पूरा ध्यान देना होगा और यह सभी बातें सोचकर में मन ही मन बहुत उदास हो गया।

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फिर अगले दिन से में प्रियंका दीदी के यहाँ पर जाने लगा था, वो उनके घर में या तो हमशा बिना चुन्नी के सलवार सूट या फिर गाउन में घूमती हुई मुझे नजर आती थी और घर में बस उनकी मम्मी होती थी, लेकिन वो ज़्यादातर समय घर के कामों में लगी रहती थी। दोस्तों उनका एक भाई जो उनसे उम्र में एक साल छोटा, लेकिन वो मुझसे बड़ा था वो बिल्कुल निकम्मा था और वो अधिकतर समय घर से बाहर ही रहता था, उनके पापा सुबह ऑफिस चले जाते थे और वो शाम तक ही वापस आते थे। दोस्तों में दोपहर के करीब दो बजे से चार बजे तक के समय उनके घर पर रहने लगा था, जो मेरी एक मजबूरी थी। अब मुझे मन मारकर वो सभी काम अपनी मम्मी के कहने पर करना पड़ा, क्योंकि मेरी मम्मी भी करीब चार बजे तक वापस आ जाती थी और पहले 15-20 दिनों तक तो सब कुछ मेरे सोचने के हिसाब से ही होता रहा। अब वो मेरे पहुचंते ही मुझसे मेरी किताब कॉपी निकलवाकर मुझे मेरा होमवर्क करवाने लगती या मुझसे वो मेरा पाठ सुनने लगती और फिर वो बहुत रौब से मुझसे हमेशा बात किया करती थी। दोस्तों वो मेरे पास हमेशा एकदम फ्री होकर बैठती थी, जिसकी वजह से उनके कपड़ो का बड़े आकार का गला कभी कभी मुझे खुला हुआ दिखाई दे जाता था और मुझे उनकी ब्रा में कसे हुए उनके बूब्स बड़े आराम से साफ नजर आते थे।

दोस्तों उनके वो बूब्स एकदम गोरे और मक्खन की तरह मुलायम थे, लेकिन बूब्स की निप्पल मुझे कभी नजर नहीं आई और ना ही मैंने कभी जानबूझ कर उनकी तरफ झाकने की कोशिश कि, क्योंकि मेरी इस कोशिश को अगर वो पकड़ लेती तो वो मुझे पकड़कर बहुत मारती मेरी जमकर पिटाई करती। फिर उसके बाद वो यह सभी बातें मेरे घर पर भी मेरी मम्मी पापा को बता देती, लेकिन कुछ भी कहो उनके बूब्स थे बड़े मस्त आकर्षक। दोस्तों अपने घर आ जाने के बाद भी में हमेशा उन्ही के बारे में सोचा करता था। एक बार उन्होंने पैरों के बीच में से उधड़ी हुई एक सलवार पहनी हुई थी, जिसकी वजह से उनकी पेंटी मुझे साफ साफ दिखाई दे रही थी और उसके एक तरफ से झाट के बाल भी मुझे नजर आ रहे थे, उनकी जांघे भी बहुत गोरी एकदम चिकनी थी। दोस्तों वो गर्मियों के दिन थे और इस वजह से हम दोनों हमेशा नीचे ज़मीन पर ही बैठते थे, उस समय मैंने आलतीपालती लगा रखी थी और किताब मेरी गोद में थी और उनका एक पैर पूरा सीधा होकर फैला हुआ था और एक पैर मुड़ा हुआ खड़ा था और वो सोफे पर अपनी पीठ को टीकाकर बैठी हुई थी। अब उस वजह से उनका कुर्ता सरककर उनके गोरे पेट और जांघो के बीच में आ गया और सलवार का वो फटा वाला हिस्सा मेरी आँखों के एकदम सामने था।

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