होली के रंग चाची की सहेलियों के संग–5

Holi Ke rang chachi ki saheliyon ke sang-5

अब शिखा भाभी गेट लगाने की कोशिश करने लगी और मैं गेट को खोलने की कोशिश करने लगा। अब हम दोनों के बीच में गेट दीवार बनकर खड़ा था।शिखा भाभी गेट बंद करने के लिए पूरा एडी चोटी का जोर लगा रही थी।इधर मै भी गेट खोलने की पूरी पूरी कोशिश कर रहा था।

भाभी– नहीं,मै गेट नहीं खोलूंगी।
मैं– भाभी गेट खोल दो।
भाभी– बिल्कुल नहीं।
अब मैं समझ चुका था कि यहां आराम से दाल नहीं गलने वाली।

अब मैंने बाल्टी में से रंग लिया और उनकी टांगो ,जांघो और चूत को अच्छी तरह से रंग में रंग दिया। अब मैंने तुरंत ही भाभी की टांगों को पकड़कर फैला दिया। अब भाभी की चूत मेरे सामने फैल चुकी थी। अब मैंने फटाफट भाभी की चूत में उंगलियां घुसा दी। उंगलियां चूत में घुसते ही भाभी की जान हलक में आ गई।भाभी दर्द से झटपटाने लगी। अब मैं दे दना दन शिखा भाभी की चूत में उंगलियों से हमला करने लगा।भाभी दर्द से बुरी तरह से तड़पने लगी।
भाभी– आईईईई आईईईई आईईईई ओह आह आह आह आईईईई।

मैं– आह बहुत मज़ा आ रहा है भाभी।आह आह आह आह।
मेरी उंगलियां चूत के अंदर तक भाभी की चूत की गहराई नाप रही रही थी।भाभी की चूत अंदर से बहुत ज्यादा गरम हो रही थी।
भाभी– आईईईई आईईईई आईईईई प्लीज ऐसा मत करो ना। मै मर जाऊंगी।
मैं– आह कुछ नहीं होगा भाभी, बस थोड़ी देर मज़े लेने दो। आपकी ये होली हमेशा यादगार रहेगी।
भाभी– नहीं, प्लीज मत करो ना। आईईईईई बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है।
मैं– कोई बात नही भाभी, थोड़ी देर दर्द सहन कर लो।
भाभी दर्द से तड़प रही थी और मैं भाभी की चूत के परखच्चे उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। अब तक भाभी के चेहरे की हवाइयां उड़ चुकी थी।इन्हे कुछ समझ में नहीं आ रहा था।फिर मैंने थोड़ी देर तक उंगलियों से भाभी की चूत चोदने के बाद भाभी की टांगों को पकड़ लिया।

अब मैंने तुरंत मेरा मुंह भाभी की गरमा गर्म चूत पर रखा और आराम आराम से भाभी की चूत चाटने लगा। भाभी की चूत तो पहले से ही बहुत ज्यादा गीली थी। अब चूत और भी ज्यादा गीली होने लगी। मैं भाभी की गुलाबी चूत को बड़ी मस्ती से चाट और चूस रहा था। अब भाभी भी धीरे धीरे भावनाओ में बहने लगी और मेरे सिर को चूत पर दबाने लगी। अब तो भाभी भी समझ चुकी थी कि अब ज्यादा नखरे दिखाने में कोई फायदा नहीं। अब भाभी मादक सिसकारियां भरते हुए चूत चटवा रही थी।
भाभी– आह आह ऊंह आह ओह आह ऊंह ओह रोहित,आह आह ऊंह।
थोड़ी देर बाद भाभी ने टांगो के घेरे में मुझे फंसा लिया।
भाभी– ओह रोहित, ऊंह आह ओह ओह ऊंह आह।

मैं लपालप भाभी की चूत चाट रहा था।फिर कुछ ही देर में मैंने भाभी की चूत को अच्छी तरह से चाट डाला। अब मेरे लन्ड की बारी आ चुकी थी।
अब मैंने जल्दी से भाभी की टांगों को फिर से फैलाया और तुरंत ही मेरे लन्ड का सुपाड़ा भाभी की चूत के छेद पर रख दिया। अब मैंने ज़ोरदार धक्का लगाते हुए लंड भाभी की चूत में पेल दिया।भाभी एकदम से चीख पड़ी लेकिन मेरा लन्ड पूरा का पूरा भाभी की चूत में समा गया।
भाभी– आईईईई आईईईई मर गई।आईईईई।
तभी मैंने लंड बाहर निकाल कर फिर से दूसरा शॉट लगा दिया।भाभी फिर से दर्द से तड़प उठी। अब मैं धीरे धीरे स्पीड बढ़ाते हुए भाभी को अच्छी तरह से चोदने लगा। अब मेरी बड़ी पिचकारी भाभी के हॉल में अच्छी तरह से रंग लगा रही थी।मुझे भाभी की चूत में रंग भरने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

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भाभी लगातार दर्द से तड़प रही थी।वो मेरे लन्ड के कहर के आगे बेबस नजर आ रही थी। मेरा लन्ड शिखा भाभी की चूत को बुरी तरह से लपेट चुका था। मैं उछल उछल कर भाभी को चोद रहा था।
भाभी– आएईईईई आईईईई आईईईई आईईईई आह आह आह आह आह आह बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है यार ।आह आह आह आह ।
मैं– आह आह बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा है भाभी,बस थोड़ी देर ही दर्द होगा।
भाभी– नहीं , प्लीज तेरी पिचकारी को बाहर निकाल ले।
मैं– भाभी अब पिचकारी तो बाहर नहीं निकलेगी।
भाभी– मै मर जाऊंगी।
मैं– कुछ नहीं होगा भाभी।

थोड़ी सी देर में ही मेरा लन्ड भाभी की हालत खराब कर चुका था।भाभी मेरे लन्ड के कहर के आगे बुरी तरह से पस्त हो चुकी थी।मेरे लन्ड के हर एक शॉट के साथ भाभी के बड़े बड़े बूब्स बुरी तरह से हिल रहे थे।
थोड़ी देर की भयंकर चुदाई के बाद भाभी ज्यादा देर तक मेरे लन्ड को झेल नहीं पाई और भाभी ने गरमा गर्म पानी में मेरे लन्ड को भिगो दिया। अब जाकर भाभी का दर्द काम हुआ।
अब मेरे लन्ड के हर एक शॉट के साथ पूरे कमरे में पछ पच्छ पच पछ पच्च पछ की आवाजे गूंजने लगी। अब भाभी चुप होकर आराम से चूत में मेरा लन्ड लेने लगी। अब उनकी चूत में मेरे लन्ड के लिए पूरी जगह बन चुकी थी।
मैं गांड़ हिला हिलाकर शिखा भाभी को बुरी तरह से पेल रहा था।शिखा भाभी मुझसे चुद्वाकर बुरी तरह से थक चुकी थी।उनका जिस्म पसीने में बुरी तरह से लथपथ हो चुका था।झमाझम चुदाई के कारण बेड भी चू चू चू कर रहा था। अब मेरा लन्ड चुदाई के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका था।तभी मैंने भाभी को मेरी बाहों में ज़ोर से कस लिया और मेरे लन्ड का गरमा गरम पानी भाभी की चूत में भर दिया।

अब मैं कुछ देर तक भाभी के जिस्म पर ऐसे ही पड़ा रहा।आज मै शिखा भाभी को चोदकर बहुत ज्यादा खुश हो रहा था।कुछ देर बाद मै उठा और फिर से शिखा भाभी की चूत को चाटने लगा।भाभी की चूत में से अभी भी रस बह रहा था। मैं धीरे धीरे भाभी की रसीली चूत को चाट रहा था।थोड़ी देर में भाभी भी फिर से गरम होने लगी। अब कुछ देर तक चूत चाटने के बाद मैंने भाभी की चूचियों को फिर से दबाया और अच्छी तरह से चूस डाला।इससे मेरा लन्ड फिर से बैटिंग करने के लिए तैयार होने लगा।

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अब मैंने फिर से भाभी की चूत में लंड रखा और उन्हें फिर से अच्छी तरह से बजाने लगा। अबकी बार शिखा भाभी मेरे लन्ड के हर एक शॉट का अच्छी तरह से जवाब दे रही थी। अब वो शर्म को ताक पर रखकर चुदाई करवा रही थी।मेरे लन्ड का थोड़ी देर में ही फिर से भाभी की चीखे निकाल दी। अब भाभी की गांड मारने की बारी थी।
अब मैंने शिखा भाभी को बेड पर कुत्तिया बना दिया।भाभी की गांड बहुत ज्यादा सुढ़ोल थी।उनके गौरे चिकने चूतड़ बहुत ज्यादा उठे हुए थे।पहले तो मैंने भाभी के चूतड़ों को अच्छी तरह से मसला।फिर मैंने उनके चूतड़ों को भी रंग में रंग डाला। अब मैंने भाभी की गांड में सुराख में उंगली डाली तो मेरी उंगली आसानी से भाभी की गांड में घुस गई। अब मैं समझ चुका था कि भाभी की गांड में ही लंड ने माल उड़ेल रखा है।

बस फिर क्या था।मैंने एक बार और मेरे लन्ड को रंग में रंगा और फिर फटाफट शिखा भाभी की गांड के छेद में लंड टिका दिया। अब मैंने भाभी की गांड को अच्छी तरह से पकड़ा और ज़ोरदार धक्का देकर भाभी की गांड में लंड पेल दिया।मेरा लन्ड भाभी की गांड के परखच्चे उड़ाता हुआ काफी अंदर तक गांड़ में घुस गया।भाभी दर्द से बुरी तरह बिलखने लगी।मेरा लन्ड से की गांड़ में फंस चुका था।तभी बाहर से चाची और सलोनी भाभी की आवाज़ आई– क्या के रोहित? इतना शोर क्यो हो रहा है?
मैं– कुछ नहीं बस छेद थोड़ा सा छोटा पड़ गया है।
चाची – हम आए क्या हेल्प करने के लिए?
मैं– नहीं चाची मै एडजस्ट कर दूंगा।आप चिंता मत करो।

तभी मैंने भाभी की गांड में से लंड बाहर निकाला और फिर अगला शॉट मारकर पूरा का पूरा लंड भाभी की गांड में जा घुसाया।भाभी फिर से बुरी तरह से दर्द से कारहा उठी।
भाभी– आईईईई आईईईई मर गई आईईईई आईईईई आईईईई रोहित।
मैं– बस थोड़ी देर दर्द होगा भाभी।
भाभी– बहुत दर्द हो रहा है रोहित।
अब मैं धीरे धीरे भाभी की गांड मारते हुए लंड को भाभी की गांड में पेलने लगा।जिससे भाभी को दर्द कम से कम होने लगा। अब तक मेरा लन्ड भाभी की गांड में अन्दर तक जगह बना चुका था।फिर मैं धीरे धीरे स्पीड बढ़ाते हुए भाभी की अच्छी तरह से गांड़ मारने लगा।मुझे भाभी की गांड मारने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।शिखा भाभी फिर से दर्द के मारे चिल्लाने लगी।अबकी बार मैंने उनकी चिखो की ओर कोई ध्यान नहीं दिया और मस्त होकर भाभी की गांड मारता रहा।

कुछ देर बाद भाभी का दर्द कम हो गया और उन्हें अब गांड़ मरवाने में मज़ा आने लगा। अब शिखा भाभी आराम से गांड़ मरवा रही थी। मैं सटासट भाभी की गांड ठुकाई कर रहा था।शिखा भाभी की गांड मारना मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात थी।
कुछ देर बाद शिखा भाभी कांपने लगी और उनकी चूत ने माल गिरा दिया।मेरे लन्ड का कहर अभी भी जारी था। मैं दे दना दन शिखा भाभी की गांड मार रहा था। अब तक मै शिखा भाभी की अच्छी तरह से गांड़ मार चुका था।शिखा भाभी गांड़ मरवाकर बुरी तरह से थक चुकी थी। अब मैं भी लास्ट गियर पर पहुंच चुका था।फिर मैंने फुल स्पीड में ठुकाई करते हुए सारा माल भाभी की गांड में गिरा दिया।

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अब हम दोनों पसीने से लथपथ होकर बेड पर ही पड़े रहे।फिर कुछ देर बाद होश में आए।शिखा भाभी आज बुरी तरह से चुद चुकी थी।ऊपर से मैंने उन्हें अच्छी तरह से काले रंग में रंग दिया था जिससे उन्हें पहचानना भी मुश्किल हो रहा था।
अब मैं उठा और बाथरूम में जाकर शिखा भाभी के कपड़े उठाकर लाया। अब मैंने शिखा भाभी को पैंटी ,पेटीकोट,ब्रा और ब्लाउज पहनाया।फिर साड़ी खुद भाभी ने ही पहन ली। अब मैंने मेरे कपड़े पहन लिए।
शिखा भाभी– बहुत अच्छी तरह से रंग लगाता है तू।
मैं– हां भाभी,मुझे तो इसी तरह से रंग लगाना पसंद है।
भाभी– सब कुछ मजेदार था लेकिन तेरी पिचकारी ने मेरी हालत खराब कर दी।

मैं– कोई बात नहीं भाभी हालत तो ठीक हो जाएगी।पिचकारी जब बड़ी होती है तभी तो रंग लगाने में ज्यादा मज़ा आता है।
भाभी– हां ये बात भी सही है।
अब हम दोनों बेडरूम से बाहर आ गए।आज बेडरूम पूरा रंग बिरंगा हो चुका था।बाहर आते ही चाची ने पूछा– और बता रोहित, मेरी सहेली को अच्छी तरह से रंग तो लगाया है ना?
मैं– आप आपकी सहेली से खुद ही पूछ लो।
चाची– बताओ शिखा रोहित ने तुझे होली का पूरा मज़ा तो दिया है ना?
शिखा भाभी– बहुत मज़ा दिया है इसने,ये पक्का खिलाड़ी निकला यार।
सलोनी भाभी– वाकई में इसकी पिचकारी कमाल की है।मुझे भी मज़ा आ गया आज तो।

चाची– चलो फिर तो बहुत अच्छा हुआ।
मैं– अगली बार सर्विस का मौका फिर देना।
शिखा और सलोनी– ज़रूर देंगे मौका।टाइम मिलने दो।
मैं– अगली बार बहुत अच्छे से सर्विस करूंगा।
शिखा और सलोनी– हमें भी मौका मिलने का इंतजार रहेगा।
अब हम चारों ने चाय नाश्ता किया। अब शिखा और सलोनी भाभी अगली बार का वादा करके चली गई।
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