जयपुर की कुँवारी चूत का भोसड़ा बना डाला-3

Jaipur ki kuwari choot ka bhosda bana dala-3

अब उसने मेरे कहने पर ठीक वैसा ही किया, लेकिन मेरे मोटे लंड का टोपा बड़ी ही मुश्किल से उसने मुहं में गया और अब वो उसको बड़े मज़े लेकर लोलीपोप की तरह चूसने लगी थी. वो लंड को अपने मुहं में पूरा अंदर करती और फिर बाहर निकाल देती और उसके बाद उस पर अपनी जीभ को घुमाकर पूरा चूसने लगती.

मैंने उसका वो जोश देखकर अब उसका पजामा उतारकर देखा तो उसके बाद मैंने उसकी पेंटी को अपने हाथ से छूकर देखा तो वो पूरी गीली हो चुकी थी और चूत से के पानी की खुश्बू भी आ रही थी.

मैंने उसकी पेंटी को खोल दिया तब मुझे उसकी उभरी हुई घने बालों वाली उस गीली कामुक चूत के दर्शन हुए जिसको देखकर में एकदम पागल हो चुका था और इसलिए मैंने तुरंत ही नीचे झुककर अपनी जीभ से चाटकर उसकी गीली चूत को साफ किया और अब में अपनी जीभ को पूरा उसके अंदर डालकर घूमाने लगा था, जिसकी वजह से वो जोश में आकर कभी अपने पैर फैलाने और कभी सिकोड़ने लगी थी और तब में उसके यह सब करने से तुरंत समझ गया था कि उसको जोश के साथ साथ अब मज़ा भी आ रहा है और अब वो भी बड़ी मस्त होकर मेरा लंड चूसने लगी थी.

करीब दस मिनट के बाद वो मेरे मुहं में झड़ गई और में उसकी चूत का एक एक बूँद रस पी गया, लेकिन मैंने फिर भी उसकी चूत को चूसना चाटना नहीं छोड़ा.

मैंने देखा कि वो अब मेरे लंड को अपने एक हाथ में लेकर आगे पीछे कर रही थी, थोड़ी देर में उसकी चूत एक बार फिर से गरम होकर गीली हो गयी थी.

अब मैंने उसको उसकी पीठ के बल लेटा दिया और अपना लंड उसकी चूत पर रखकर एक हल्का सा धक्का दे दिया, जिसकी वजह से मेरा आधा लंड उसकी चूत में फिसलकर चला गया और वो उस धक्के की वजह से हुए उसके दर्द की वजह से अपने मुहं से सिसकियों की आवाज के साथ मुझसे कहने लगी आअहह उफ्फ्फ भैया आईईई में मर जाउंगी ऊऊईईईईई प्लीज अब आप इसको बाहर निकालो, दोस्तों वो उस दर्द से छटपटाने लगी थी और उसकी चीखे दर्द को देखकर में उसी समय वैसे ही रुक गया और मैंने उसके नरम होठों को अपने मुहं में ले लिया. में उसको चूमने लगा और अपने एक हाथ से उसके बूब्स को सहलाने के साथ साथ निप्पल को हल्के से दबाने भी लगा था.

में कुछ देर यह सब ऐसे ही करता रहा और अब उसका दर्द कम होने के बाद उसकी चूत में हलचल होना शुरू हो गई थी. में उसका मतलब ठीक तरह से समझ चुका था, इसलिए मैंने अब ज्यादा देर करना बिल्कुल भी ठीक नहीं समझा.

मैंने सही मौका देखकर अपनी तरफ से उसको दूसरा मस्त करारा झटका दे दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर जाकर सीधा उसकी बच्चेदानी से जा टकराया और उसको तब दर्द तो बहुत हुआ इसलिए वो चीखना चिल्लाना चाहती थी, लेकिन उस समय उसका मुहं मेरे मुहं में था इसलिए वो बस गुउुउऊँ गुउुउऊँ करके रह गई, लेकिन उसने मुझे अपने ऊपर से हटाने और मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकालने की बहुत कोशिश कि, लेकिन मेरी मजबूत पकड़ और जोश के सामने वो ज्यादा देर टिक ना सकी.

वो धीरे धीरे शांत होती चली गई और में अब उसके बूब्स पर अपना हाथ दोबारा घुमाने लगा था, जिसकी वजह से कुछ देर बाद वो बिल्कुल ठंडी होकर गरम हो गई और मैंने अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करके अपना काम दोबारा से शुरू कर दिया था.

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मैंने महसूस किया कि थोड़ी देर के बाद वो भी अब नीचे से अपने कूल्हों को उछालने लगी थी. तब मैंने अपना मुहं उसके होंठो से हटा लिया.

फिर वो मुझसे बोली कि भैया प्लीज मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा है आईईईई उफ्फ्फ आज पहली बार किसी ने ऊऊईईईईई मेरी इस प्यासी चूत में अपना लंड डाला है ऊह्ह्ह्ह प्लीज अब आप इसको बाहर मत निकालना उफफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से और ज़ोर से धक्के देकर आज आप मुझे ऐसे ही चोदते रहो, में आपसे कुछ नहीं कहने वाली वाह अपने मुझे आज खुश कर दिया है और आप बहुत अच्छे है, आपने मेरी हर काम में बड़ी मस्त मदद की है, में आपका यह साथ पाकर बड़ी खुश हूँ और आप मुझे ऐसे ही अब हर दिन रात चोदते रहना.

दोस्तों में उसकी वो जोश भरी बातें सुनकर बड़ी तेज़ी से धक्के देता रहा जिससे उसका पूरा जिस्म हिल जाता और फिर करीब दस मिनट के बाद हम दोनों एक के बाद एक झड़कर शांत होकर एक दूसरे से तब तक चिपके रहे.

जब मेरा लंड उसकी चूत से बाहर निकला तब उसने अपनी ही पेंटी से मेरे लंड और उसके बाद अपनी चूत को भी साफ किया और कुछ देर बाद वो कमरे से बाहर निकलकर हॉल में अपनी मम्मी के पास जाकर सो गई और में कुछ देर पहले हुई उसकी उस मस्त मजेदार चुदाई के बारे में सोचने लगा और मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई और मुझे दूसरे दिन सुबह सवेरे उसी ने आकर उठाया और फिर उसके बाद हम दोनों तैयार होकर साथ में बैठकर नाश्ता करके अपने कॉलेज चले गए, लेकिन वो उस दिन मुझे बहुत खुश नजर आ रही थी.

उसके चेहरे की चमक को देखकर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि आज उसको पूरी दुनिया की ख़ुशी मिल गई थी और वो उस दिन बहुत चहक रही थी. दोस्तों उसकी उस पहली चुदाई के बाद अब वो मुझसे पूरी तरह से खुल चुकी थी और उसका समय अब मेरे साथ गुजरने लगा था और अब में भी बिना किसी संकोच के उसको कोई भी अच्छा मौका देखकर कभी चूम लिया करता तो कभी उसके बूब्स को दबा देता था.

मैंने उसकी पहली बार चुदाई करके उसकी सील को तोड़ दिया और अब उसके बूब्स के साथ साथ उसके पूरे बदन का विकास होने लगा था और शरीर का हर एक अंग अपने पहले के आकार से बड़ा और ज्यादा उभरा हुआ नजर आने लगा था और अब वो पूरी तरह से जवान होकर पहले से ज्यादा हॉट सेक्सी नजर आने लगी थी. यह सब मेरा उसके साथ चुदाई करने की वजह से था और उसका साथ पाकर में भी बहुत खुश था.